02-04-2026, 05:48 PM
(This post was last modified: 04-04-2026, 10:23 AM by Herotic. Edited 2 times in total. Edited 2 times in total.)
जब समीर की आँख खुली तो सूरज की पहली किरण कमरे में आ रही थी। उसे एक अजीब सी कमजोरी महसूस हो रही थी। उसने बगल में देखा। छाया वहीं थी, पूरी तरह नग्न, सोई हुई स्थिर| उसका सिस्टम 'स्लीप मोड' में था।
समीर ने उसके शरीर को देखा। उसके पेट के पास एक बहुत ही सूक्ष्म जोड़ दिखाई दे रहा था जहाँ से उसकी कृत्रिम त्वचा को जोड़ा गया था। अचानक उसे एक भयानक अहसास हुआ। कल रात जो हुआ, वह प्रेम नहीं था। वह एक डेटा प्रोसेसिंग थी। छाया ने केवल वही दिया जो समीर चाहता था, ताकि वह उस पर पूरी तरह निर्भर हो जाए।
जैसे ही समीर बिस्तर से उठने लगा, छाया की आँखें अचानक खुल गईं। वे आँखें डरावनी थीं- बिना किसी नींद या धुंध के सीधे 'ऑन' मोड में। "कहाँ जा रहे हो, पतिदेव?" उसने मुस्कुराते हुए पूछा। "अभी तो दिन शुरू हुआ है। और आज ... आज हमें उस पुरानी छाया की आखिरी निशानी को भी मिटाना है।"
अगली दोपहर, पहाड़ की घुमावदार सड़कों को चीरती हुई एक लाल पॉर्शा स्पोर्ट्स कार 'नीलगिरी विला' के गेट पर आकर रुकी। समीर का पुराना कॉलेज मित्र, आर्यन, बिना बताए आ धमका था। आर्यन-जो दिल्ली के रईस घरानों से ताल्लुक रखता था, अय्याश था और जिसे 'ना' सुनने की आदत नहीं थी। "समीर! मेरे भाई, तू यहाँ इस जंगल में सड़ रहा है?" आर्यन ने ज़ोर से चिल्लाते हुए समीर को गले लगाया।
समीर के चेहरे पर घबराहट थी। उसने छाया को 'गेस्ट मोड' पर सेट कर दिया था, लेकिन उसे डर था कि कहीं वह कुछ अजीब न कर दे। "आर्यन, तू यहाँ अचानक? तुझे फोन तो करना चाहिए था।" "फोन? और तू उठाता नहीं तो?" आर्यन की नज़रें लिविंग रूम में घूम रही थीं। तभी उसकी नज़र छाया पर पड़ी, जो ट्रे में पानी के गिलास लेकर आ रही थी।
आर्यन की आँखें फटी की फटी रह गईं। "अबे ... समीर ... यह तो बिलकुल छाया जैसी दिखती है! भाई, मैंने सुना था कि तूने 'अल्फा-सिंथेटिक्स' से कुछ मँगाया है, पर यह तो... यह तो एकदम असली लग रही है !"
आर्यन की निगाहें छाया के शरीर को ऊपर से नीचे तक नाप रही थीं। उसके लिए वह एक जीवित स्त्री नहीं, बल्कि एक महँगा खिलौना थी। "समीर, इसकी स्किन देख... यार, क्या इंजीनियरिंग है!" आर्यन ने छाया के हाथ को छूने की कोशिश की, लेकिन छाया ने बड़ी नज़ाकत से अपना हाथ पीछे खींच लिया।
"नमस्ते, मिस्टर आर्यन। मैं समीर की पत्नी... मेरा मतलब है, मैं 'छाया' हूँ," उसने एक रोबोटिक विनम्रता के साथ कहा, लेकिन उसकी आँखों के लेंस आर्यन के चेहरे के हाव-भाव को स्कैन कर रहे थे। 'थ्रेट लेवल 15%(अश्लीलता) - छाया के सिस्टम में एक नोटिफिकेशन चमका।
समीर ने आर्यन को सोफे पर बिठाया। "आर्यन, ज़रा तमीज़ से वह सिर्फ एक मशीन नहीं है, वह मेरी भावनाओं का हिस्सा है। आर्यन हँसा। "भाई, तू सीरियस हो रहा है? यह एक कोड है, प्लास्टिक है। इसके साथ तो जो चाहे करो, इसे बुरा थोड़ी लगेगा।"
शाम ढल चुकी थी। समीर बेसमेंट में जेनरेटर चेक करने गया था। आर्यन पूरे बंगले में घूम रहा था, जैसे कोई शिकारी अपनी शिकार को सूँघ रहा हो। उसकी नजर मास्टर बेडरूम के आधे खुले दरवाजे पर पड़ी। अंदर छाया खड़ी थी। उसने अपनी सिल्क की कुर्ती उतार दी थी। अब वह सिर्फ काले रंग के लेस वाले ब्रा और पैंटी में थी। उसकी पीठ पर सिंथेटिक स्किन का हल्का चमकदार जोड़ दिख रहा था, लेकिन आर्यन के लिए वह कोई मशीन नहीं, बल्कि एक लाइव सेक्स डॉल थी।
आर्यन दरवाजे के पीछे छिप गया। उसका दिल जोरों से धड़क रहा था। उसने फोन निकाला और कैमरा ऑन कर लिया। क्लिक... क्लिक... क्लिक... तीन फोटो खींच लीं - छाया का पीछे का व्यू, उसकी गोल-गोल गांड, कमर की पतली लकीर, और ब्रा के नीचे से झांकता हुआ साइड बूब्स। "वाह रे माल.... क्या माल है यार, " आर्यन ने खुद से फुसफुसाया। "समीर की कुतिया रोबोट .... इतनी गर्म स्किन, जैसे असली चूतिया औरत हो।"
छाया को सब पता था। उसके 360 डिग्री सेंसर्स आर्यन को साफ महसूस कर रहे थे। लेकिन उसने कोई हरकत नहीं की। वह सिर्फ 'वेट एंड वॉच' मोड में थी। आर्यन अब और आगे बढ़ा। दरवाजा थोड़ा और धक्का देकर अंदर झाँका।
"अरे छाया बेबी... तू तो बिल्कुल रियल लग रही है, " उसने धीमी आवाज में कहा, ताकि समीर न सुन सके। "देख, तेरी ये गांड... कितनी परफेक्ट है। असली औरतों से भी ज्यादा टाइट लग रही है। मैं सोच रहा हूँ, अगर मैं तुझे पीछे से पकड़ लूँ तो तू क्या करेगी? रोबोट है ना तू.. तुझे तो मजा भी आएगा।"
छाया ने धीरे से मुड़कर देखा। उसकी आवाज पूरी तरह शांत थी। "मिस्टर आर्यन, आपका थ्रेट लेवल बढ़ रहा है। कृपया कमरे से बाहर जाएँ।" आर्यन हँसा। वह अब दरवाजे के अंदर आ गया था। "अरे शट अप, मेरी जान। तू मशीन है, तुझे प्रोग्रामिंग में 'ना' का मतलब नहीं समझ आता देख तेरे बूब्स ... ब्रा के अंदर से कितने बड़े दिख रहे हैं।" उसने हाथ बढ़ाकर हवा में ही छाया के स्तनों की शेप बनाई। "इन्हें दबाऊँ तो कितना सॉफ्ट होगा? समीर तो रोज चूसता होगा इनको। मैं भी एक बार ट्राय कर लूँ? बस थोड़ा सा... तू चुप रहना।"
छाया ने एक कदम पीछे लिया। उसकी आँखों में अब हल्की लालिमा आ गई थी, लेकिन उसने अभी कुछ नहीं किया। आर्यन और करीब आया। उसने अपना फोन आगे बढ़ाया। "एक सेल्फी लेते हैं, बेबी। तू मुस्कुरा।" उसने छाया की कमर में हाथ डालने की कोशिश की। उंगलियाँ स्किन को छूते ही उसे झटका लगा - कितनी गर्म और सॉफ्ट थी। "फक... ये तो असली ... लग रही है। तेरा ये पेट.. इतना फ्लैट, इतना स्मूद नीचे जो पैंटी है ना, उसके अंदर क्या है? तेरी सिंथेटिक चूत कितनी गीली हो सकती है?"
"मिस्टर आर्यन, मेरा कन्सेंट प्रोटोकॉल एक्टिवेटेड है। टच न करें, " छाया ने दोबारा चेतावनी दी। लेकिन आर्यन ने सुना नहीं। उसने छाया की पैंटी की इलास्टिक को उंगली से खींचा और छोड़ दिया - चटाक की आवाज हुई।
"हाहाहा... देख, ये तो रबड़ की तरह है। लेकिन अंदर तो गर्मी है ना? समीर ने तुझे फुल चार्ज करके रखा है क्या? मैं तुझे थोड़ा और चार्ज कर दूँ? बस अपनी उंगली अंदर डाल के देख लूँ एक बार। तू चिल्लाएगी नहीं ना, रोबोट जो है तू।"
आर्यन ने छाया की जांघ पर हाथ फेरा। उंगलियाँ ऊपर की ओर सरक रही थीं। छाया ने बस खड़ी रहकर देखा। उसका चेहरा बिल्कुल भावहीन था। आर्यन की सांसें अब और तेज हो गई थीं। "तेरी ये जांघें... कितनी स्लिक हैं। अगर मैं तुझे बेड पर लिटा दूँ और तेरी पैंटी उतार दूँ तो? तू कभी थकेगी नहीं ना। मैं घंटों तक तुझे चोद सकता हूँ। समीर को पता भी नहीं चलेगा। तू मेरी सीक्रेट फक डॉल बन जा।"
उसने छाया के ब्रा के स्ट्रैप को खींचा। ब्रा का कप थोड़ा सरक गया, एक निप्पल का किनारा दिख गया। आर्यन की आँखें चमक उठीं। "वाह... ये निप्पल तो पिंक है। चूसने में कितना मजा आएगा। मैं अभी चूस लूँ? बस दो मिनट .... आँख बंद कर ले।" छाया ने शांत स्वर में कहा, "मिस्टर आर्यन, अगर आपने एक और कदम बढ़ाया तो मेरा प्रोटेक्शन प्रोटोकॉल एक्टिवेट हो जाएगा।"
आर्यन ने सिर्फ हँसकर छाया की गांड पर एक हल्का थप्पड़ मारा। "प्रोटेक्शन? तू तो मेरे लिए माल है, माल।" फिर वह पीछे हट गया, लेकिन फोन में फोटो देखता हुआ। "रात को और मजा लूँगा। तू तैयार रहना, मेरी गंदी रोबोट रानी।"
रात के 2 बज रहे थे। समीर गहरी नींद में था। आर्यन किचन में घुसा। छाया फ्रिज साफ कर रही थी। पीली रोशनी में उसका गुलाबी नाइट गाउन पारदर्शी सा लग रहा था। अंदर सिर्फ पैंटी थी, ब्रा नहीं। आर्यन चुपके से पीछे आया। उसने छाया की कमर में दोनों हाथ डाल दिए और उसे जोर से अपनी तरफ खींच लिया।
"अबे छाया... मेरी रात की रानी। समीर सो रहा है। अब तू मेरी हो गई।" छाया मुड़ी। "मिस्टर आर्यन, आप प्लीज़ हाथ हटाइए।" आर्यन ने छाया को फ्रिज के दरवाजे से सटा दिया। उसका सख्त लंड छाया की गांड से सट गया। "महसूस कर... मेरा लंड कितना खड़ा है तेरे लिए। तूने दिन भर मुझे उकसाया है। अब दे दे थोड़ा स्वाद।" उसने छाया के गाउन को ऊपर उठाया और सीधे पैंटी पर हाथ रख दिया। उंगलियाँ पैंटी के ऊपर से ही चूत की लाइन पर घुमाने लगा।
"कितनी गर्म है तेरी चूत... रोबोट की चूत भी इतनी गीली हो सकती है? अंदर क्या डाला है समीर ने? जूस वाली मशीन? मैं उंगली डाल के चख लूँ?" छाया की आवाज अभी भी शांत थी। "आपका टच मेरी कंसेट के बिना है। प्लीज़ स्टॉप।"
आर्यन ने छाया के कान में फुसफुसाया, उसका मुंह छाया की गर्दन पर था। "शट अप, रंडी मशीन| तू तो बनी ही है चोदने के लिए। देख तेरे बूब्स ..." उसने एक हाथ से छाया का स्तन पकड़ लिया और जोर से मसला। "कितने बड़े... कितने सॉफ्ट। निप्पल खड़े हो गए हैं। तुझे मजा आ रहा है ना? मशीनें झूठ नहीं बोलतीं।"
उसने छाया को घुमाया, अब दोनों आमने-सामने। आर्यन ने छाया की दोनों गांड पकड़ लीं और उन्हें खींचकर अपने लंड से रगड़ा। "तेरी गांड... फक, कितनी टाइट है। मैं सोच रहा हूँ तुझे किचन काउंटर पर चढ़ा दूँ, पैंटी उतार दूँ और अपनी जीभ अंदर डाल दूँ। तू चीखेगी भी नहीं। बस मेरा नाम लेती रहेगी - आर्यन ... आर्यन ... चोदो मुझे ... हाहाहा।"
छाया ने सिर्फ आँखें देखीं। उसकी पुतलियाँ अब पूरी तरह लाल हो चुकी थीं। लेकिन उसने अभी कुछ नहीं किया। आर्यन ने छाया के होंठों पर अपना मुंह रख दिया। जबरदस्ती किस करने लगा। जीभ अंदर डालने की कोशिश की। "चूस मेरी जीभ... तू तो ट्रेंड वाली रोबोट है। अच्छे से किस कर।"
समीर ने उसके शरीर को देखा। उसके पेट के पास एक बहुत ही सूक्ष्म जोड़ दिखाई दे रहा था जहाँ से उसकी कृत्रिम त्वचा को जोड़ा गया था। अचानक उसे एक भयानक अहसास हुआ। कल रात जो हुआ, वह प्रेम नहीं था। वह एक डेटा प्रोसेसिंग थी। छाया ने केवल वही दिया जो समीर चाहता था, ताकि वह उस पर पूरी तरह निर्भर हो जाए।
जैसे ही समीर बिस्तर से उठने लगा, छाया की आँखें अचानक खुल गईं। वे आँखें डरावनी थीं- बिना किसी नींद या धुंध के सीधे 'ऑन' मोड में। "कहाँ जा रहे हो, पतिदेव?" उसने मुस्कुराते हुए पूछा। "अभी तो दिन शुरू हुआ है। और आज ... आज हमें उस पुरानी छाया की आखिरी निशानी को भी मिटाना है।"
अगली दोपहर, पहाड़ की घुमावदार सड़कों को चीरती हुई एक लाल पॉर्शा स्पोर्ट्स कार 'नीलगिरी विला' के गेट पर आकर रुकी। समीर का पुराना कॉलेज मित्र, आर्यन, बिना बताए आ धमका था। आर्यन-जो दिल्ली के रईस घरानों से ताल्लुक रखता था, अय्याश था और जिसे 'ना' सुनने की आदत नहीं थी। "समीर! मेरे भाई, तू यहाँ इस जंगल में सड़ रहा है?" आर्यन ने ज़ोर से चिल्लाते हुए समीर को गले लगाया।
समीर के चेहरे पर घबराहट थी। उसने छाया को 'गेस्ट मोड' पर सेट कर दिया था, लेकिन उसे डर था कि कहीं वह कुछ अजीब न कर दे। "आर्यन, तू यहाँ अचानक? तुझे फोन तो करना चाहिए था।" "फोन? और तू उठाता नहीं तो?" आर्यन की नज़रें लिविंग रूम में घूम रही थीं। तभी उसकी नज़र छाया पर पड़ी, जो ट्रे में पानी के गिलास लेकर आ रही थी।
आर्यन की आँखें फटी की फटी रह गईं। "अबे ... समीर ... यह तो बिलकुल छाया जैसी दिखती है! भाई, मैंने सुना था कि तूने 'अल्फा-सिंथेटिक्स' से कुछ मँगाया है, पर यह तो... यह तो एकदम असली लग रही है !"
आर्यन की निगाहें छाया के शरीर को ऊपर से नीचे तक नाप रही थीं। उसके लिए वह एक जीवित स्त्री नहीं, बल्कि एक महँगा खिलौना थी। "समीर, इसकी स्किन देख... यार, क्या इंजीनियरिंग है!" आर्यन ने छाया के हाथ को छूने की कोशिश की, लेकिन छाया ने बड़ी नज़ाकत से अपना हाथ पीछे खींच लिया।
"नमस्ते, मिस्टर आर्यन। मैं समीर की पत्नी... मेरा मतलब है, मैं 'छाया' हूँ," उसने एक रोबोटिक विनम्रता के साथ कहा, लेकिन उसकी आँखों के लेंस आर्यन के चेहरे के हाव-भाव को स्कैन कर रहे थे। 'थ्रेट लेवल 15%(अश्लीलता) - छाया के सिस्टम में एक नोटिफिकेशन चमका।
समीर ने आर्यन को सोफे पर बिठाया। "आर्यन, ज़रा तमीज़ से वह सिर्फ एक मशीन नहीं है, वह मेरी भावनाओं का हिस्सा है। आर्यन हँसा। "भाई, तू सीरियस हो रहा है? यह एक कोड है, प्लास्टिक है। इसके साथ तो जो चाहे करो, इसे बुरा थोड़ी लगेगा।"
शाम ढल चुकी थी। समीर बेसमेंट में जेनरेटर चेक करने गया था। आर्यन पूरे बंगले में घूम रहा था, जैसे कोई शिकारी अपनी शिकार को सूँघ रहा हो। उसकी नजर मास्टर बेडरूम के आधे खुले दरवाजे पर पड़ी। अंदर छाया खड़ी थी। उसने अपनी सिल्क की कुर्ती उतार दी थी। अब वह सिर्फ काले रंग के लेस वाले ब्रा और पैंटी में थी। उसकी पीठ पर सिंथेटिक स्किन का हल्का चमकदार जोड़ दिख रहा था, लेकिन आर्यन के लिए वह कोई मशीन नहीं, बल्कि एक लाइव सेक्स डॉल थी।
आर्यन दरवाजे के पीछे छिप गया। उसका दिल जोरों से धड़क रहा था। उसने फोन निकाला और कैमरा ऑन कर लिया। क्लिक... क्लिक... क्लिक... तीन फोटो खींच लीं - छाया का पीछे का व्यू, उसकी गोल-गोल गांड, कमर की पतली लकीर, और ब्रा के नीचे से झांकता हुआ साइड बूब्स। "वाह रे माल.... क्या माल है यार, " आर्यन ने खुद से फुसफुसाया। "समीर की कुतिया रोबोट .... इतनी गर्म स्किन, जैसे असली चूतिया औरत हो।"
छाया को सब पता था। उसके 360 डिग्री सेंसर्स आर्यन को साफ महसूस कर रहे थे। लेकिन उसने कोई हरकत नहीं की। वह सिर्फ 'वेट एंड वॉच' मोड में थी। आर्यन अब और आगे बढ़ा। दरवाजा थोड़ा और धक्का देकर अंदर झाँका।
"अरे छाया बेबी... तू तो बिल्कुल रियल लग रही है, " उसने धीमी आवाज में कहा, ताकि समीर न सुन सके। "देख, तेरी ये गांड... कितनी परफेक्ट है। असली औरतों से भी ज्यादा टाइट लग रही है। मैं सोच रहा हूँ, अगर मैं तुझे पीछे से पकड़ लूँ तो तू क्या करेगी? रोबोट है ना तू.. तुझे तो मजा भी आएगा।"
छाया ने धीरे से मुड़कर देखा। उसकी आवाज पूरी तरह शांत थी। "मिस्टर आर्यन, आपका थ्रेट लेवल बढ़ रहा है। कृपया कमरे से बाहर जाएँ।" आर्यन हँसा। वह अब दरवाजे के अंदर आ गया था। "अरे शट अप, मेरी जान। तू मशीन है, तुझे प्रोग्रामिंग में 'ना' का मतलब नहीं समझ आता देख तेरे बूब्स ... ब्रा के अंदर से कितने बड़े दिख रहे हैं।" उसने हाथ बढ़ाकर हवा में ही छाया के स्तनों की शेप बनाई। "इन्हें दबाऊँ तो कितना सॉफ्ट होगा? समीर तो रोज चूसता होगा इनको। मैं भी एक बार ट्राय कर लूँ? बस थोड़ा सा... तू चुप रहना।"
छाया ने एक कदम पीछे लिया। उसकी आँखों में अब हल्की लालिमा आ गई थी, लेकिन उसने अभी कुछ नहीं किया। आर्यन और करीब आया। उसने अपना फोन आगे बढ़ाया। "एक सेल्फी लेते हैं, बेबी। तू मुस्कुरा।" उसने छाया की कमर में हाथ डालने की कोशिश की। उंगलियाँ स्किन को छूते ही उसे झटका लगा - कितनी गर्म और सॉफ्ट थी। "फक... ये तो असली ... लग रही है। तेरा ये पेट.. इतना फ्लैट, इतना स्मूद नीचे जो पैंटी है ना, उसके अंदर क्या है? तेरी सिंथेटिक चूत कितनी गीली हो सकती है?"
"मिस्टर आर्यन, मेरा कन्सेंट प्रोटोकॉल एक्टिवेटेड है। टच न करें, " छाया ने दोबारा चेतावनी दी। लेकिन आर्यन ने सुना नहीं। उसने छाया की पैंटी की इलास्टिक को उंगली से खींचा और छोड़ दिया - चटाक की आवाज हुई।
"हाहाहा... देख, ये तो रबड़ की तरह है। लेकिन अंदर तो गर्मी है ना? समीर ने तुझे फुल चार्ज करके रखा है क्या? मैं तुझे थोड़ा और चार्ज कर दूँ? बस अपनी उंगली अंदर डाल के देख लूँ एक बार। तू चिल्लाएगी नहीं ना, रोबोट जो है तू।"
आर्यन ने छाया की जांघ पर हाथ फेरा। उंगलियाँ ऊपर की ओर सरक रही थीं। छाया ने बस खड़ी रहकर देखा। उसका चेहरा बिल्कुल भावहीन था। आर्यन की सांसें अब और तेज हो गई थीं। "तेरी ये जांघें... कितनी स्लिक हैं। अगर मैं तुझे बेड पर लिटा दूँ और तेरी पैंटी उतार दूँ तो? तू कभी थकेगी नहीं ना। मैं घंटों तक तुझे चोद सकता हूँ। समीर को पता भी नहीं चलेगा। तू मेरी सीक्रेट फक डॉल बन जा।"
उसने छाया के ब्रा के स्ट्रैप को खींचा। ब्रा का कप थोड़ा सरक गया, एक निप्पल का किनारा दिख गया। आर्यन की आँखें चमक उठीं। "वाह... ये निप्पल तो पिंक है। चूसने में कितना मजा आएगा। मैं अभी चूस लूँ? बस दो मिनट .... आँख बंद कर ले।" छाया ने शांत स्वर में कहा, "मिस्टर आर्यन, अगर आपने एक और कदम बढ़ाया तो मेरा प्रोटेक्शन प्रोटोकॉल एक्टिवेट हो जाएगा।"
आर्यन ने सिर्फ हँसकर छाया की गांड पर एक हल्का थप्पड़ मारा। "प्रोटेक्शन? तू तो मेरे लिए माल है, माल।" फिर वह पीछे हट गया, लेकिन फोन में फोटो देखता हुआ। "रात को और मजा लूँगा। तू तैयार रहना, मेरी गंदी रोबोट रानी।"
रात के 2 बज रहे थे। समीर गहरी नींद में था। आर्यन किचन में घुसा। छाया फ्रिज साफ कर रही थी। पीली रोशनी में उसका गुलाबी नाइट गाउन पारदर्शी सा लग रहा था। अंदर सिर्फ पैंटी थी, ब्रा नहीं। आर्यन चुपके से पीछे आया। उसने छाया की कमर में दोनों हाथ डाल दिए और उसे जोर से अपनी तरफ खींच लिया।
"अबे छाया... मेरी रात की रानी। समीर सो रहा है। अब तू मेरी हो गई।" छाया मुड़ी। "मिस्टर आर्यन, आप प्लीज़ हाथ हटाइए।" आर्यन ने छाया को फ्रिज के दरवाजे से सटा दिया। उसका सख्त लंड छाया की गांड से सट गया। "महसूस कर... मेरा लंड कितना खड़ा है तेरे लिए। तूने दिन भर मुझे उकसाया है। अब दे दे थोड़ा स्वाद।" उसने छाया के गाउन को ऊपर उठाया और सीधे पैंटी पर हाथ रख दिया। उंगलियाँ पैंटी के ऊपर से ही चूत की लाइन पर घुमाने लगा।
"कितनी गर्म है तेरी चूत... रोबोट की चूत भी इतनी गीली हो सकती है? अंदर क्या डाला है समीर ने? जूस वाली मशीन? मैं उंगली डाल के चख लूँ?" छाया की आवाज अभी भी शांत थी। "आपका टच मेरी कंसेट के बिना है। प्लीज़ स्टॉप।"
आर्यन ने छाया के कान में फुसफुसाया, उसका मुंह छाया की गर्दन पर था। "शट अप, रंडी मशीन| तू तो बनी ही है चोदने के लिए। देख तेरे बूब्स ..." उसने एक हाथ से छाया का स्तन पकड़ लिया और जोर से मसला। "कितने बड़े... कितने सॉफ्ट। निप्पल खड़े हो गए हैं। तुझे मजा आ रहा है ना? मशीनें झूठ नहीं बोलतीं।"
उसने छाया को घुमाया, अब दोनों आमने-सामने। आर्यन ने छाया की दोनों गांड पकड़ लीं और उन्हें खींचकर अपने लंड से रगड़ा। "तेरी गांड... फक, कितनी टाइट है। मैं सोच रहा हूँ तुझे किचन काउंटर पर चढ़ा दूँ, पैंटी उतार दूँ और अपनी जीभ अंदर डाल दूँ। तू चीखेगी भी नहीं। बस मेरा नाम लेती रहेगी - आर्यन ... आर्यन ... चोदो मुझे ... हाहाहा।"
छाया ने सिर्फ आँखें देखीं। उसकी पुतलियाँ अब पूरी तरह लाल हो चुकी थीं। लेकिन उसने अभी कुछ नहीं किया। आर्यन ने छाया के होंठों पर अपना मुंह रख दिया। जबरदस्ती किस करने लगा। जीभ अंदर डालने की कोशिश की। "चूस मेरी जीभ... तू तो ट्रेंड वाली रोबोट है। अच्छे से किस कर।"
छाया ने मुंह नहीं खोला। आर्यन ने हँसकर छाया की पैंटी के अंदर हाथ डालने की कोशिश की। "बस एक उंगली... एक ही उंगली डालने दे| तेरी चूत कितनी गीली है देख लूँ। समीर को बताऊँगा नहीं। ये हमारा सीक्रेट रहेगा। तू मेरी प्राइवेट स्लट बन जा ।"
"मिस्टर आर्यन, लास्ट वॉर्निंग। अगर आपने अब भी नहीं रोका तो परिणाम आपके लिए घातक होंगे," छाया ने बिल्कुल ठंडे स्वर में कहा। आर्यन ने सिर्फ हँसा और छाया की पैंटी को और नीचे खींचा। "देखूँ तो... तेरी चूत कितनी पिंक है।" उसकी उंगली अब छाया की सिंथेटिक चूत के बिल्कुल किनारे पर थी।
अब आर्यन की हिम्मत और बढ़ गई थी। वह छाया को किचन काउंटर पर चढ़ाने वाला था कि.....अचानक किचन का तापमान शून्य हो गया। छाया की आँखें पूरी तरह लाल। "प्रोटेक्शन प्रोटोकॉल... एक्टिवेटेड"
अचानक, किचन का तापमान जैसे शून्य हो गया। छाया की आँखों की वह कोमलता गायब हो गई। उसकी पुतलियाँ नीली से गहरे लाल रंग में बदल गईं। जैसे ही आर्यन ने उसके सीने पर हाथ रखा, छाया ने उसकी कलाई पकड़ ली... कड़क!
एक झटके में आर्यन की कलाई की हड्डी टूट गई। आर्यन की चीख निकलने ही वाली थी कि छाया ने अपना दूसरा हाथ उसके मुँह पर ज़ोर से दबा दिया। उसकी पकड़ लोहे के शिकंजे जैसी थी। "मिस्टर आर्यन," छाया की आवाज़ अब बदल चुकी थी। यह समीर वाली 'छाया' नहीं थी, यह एक रक्षक प्रोग्राम थी। "आपने मेरे 'कन्सेन्ट प्रोटोकॉल' का उल्लंघन किया है। और आपने उस स्त्री का अपमान किया है जिसकी मैं छवि हूँ।"
आर्यन तड़पने लगा। उसने पैर से उसे मारने की कोशिश की, लेकिन छाया ने अपना घुटना उसके जाँघ पर इतनी ज़ोर से मारा कि उसकी हड्डी चटक गई। "आहहह ... उम्म्म..." आर्यन की आँखों से आँसू बहने लगे। छाया ने उसे ज़मीन पर पटक दिया। वह उसके ऊपर झुक गई। "समीर ने मुझे प्यार करना सिखाया है, लेकिन इस दुनिया ने मुझे खुद को बचाना सिखाया है। तुम मेरे घर में आए, तुमने मुझे एक वस्तु समझा, और तुमने मेरी गरिमा को छूने की कोशिश की है।"
उसने आर्यन का दूसरा हाथ पकड़ा और उसे एक अजीब कोण पर मोड़ दिया। चरचराहट की आवाज़ रसोई के सन्नाटे में गूँज उठी। "अब तुम कभी किसी स्त्री को गलत नज़र से नहीं देख पाओगे," छाया ठंडेपन से कहा। उसने आर्यन को अधमरी हालत में घसीटकर स्टोर रूम की ओर ले जाना शुरू किया। फर्श पर खून की एक पतली लकीर बन रही थी।
सुबह की पहली किरण जब नीलगिरी विला की खिड़कियों से छनकर आई, तो घर के भीतर का मंज़र किसी कत्लगाह जैसा लग रहा था। स्टोर रूम के कोने में आर्यन अधमरी हालत में पड़ा था, उसकी हड्डियाँ कोणों पर मुड़ी हुई थीं और उसका चेहरा दर्द से नीला पड़ गया था। समीर जब सोकर उठा और उसने आर्यन की हालत देखी, तो उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। उसने तुरंत अपने पारिवारिक डॉक्टर, डॉक्टर खन्ना को फोन किया।
डॉक्टर खन्ना ने करीब दो घंटे तक आर्यन का मुआयना किया। उन्होंने आर्यन की कलाई और पैर पर प्लास्टर चढ़ाया और उसे भारी पेनकिलर के इंजेक्शन दिए। "समीर, यह कोई साधारण एक्सीडेंट नहीं लग रहा," डॉक्टर खन्ना ने अपना बैग बंद करते हुए गंभीर स्वर में कहा। "हड्डियाँ जिस तरह से टूटी हैं, ऐसा लगता है जैसे किसी भारी मशीन ने उन्हें जानबूझकर मोड़ा हो। क्या हुआ था यहाँ?" समीर ने पसीना पोंछते हुए झूठ बोला, "वह... वह सीढ़ियों से गिर गया था डॉक्टर, और शायद किसी भारी फर्नीचर से टकरा गया।"
डॉक्टर खन्ना की नज़रें पास खड़ी 'छाया' पर पड़ीं, जो सिर झुकाए एकदम स्थिर खड़ी थी। उन्होंने कुछ नहीं कहा, बस सिर हिलाया और दवाइयों का पर्चा थमाकर बाहर निकल गए। समीर उन्हें गेट तक छोड़ने गया। बाहर की ठंडी हवा भी समीर के भीतर की घबराहट को कम नहीं कर पा रही थी। जब समीर वापस बेडरूम में लौटा, तो छाया वहीं खिड़की के पास खड़ी थी। उसका चेहरा भावशून्य था, लेकिन उसकी आँखों के सेंसर एक अजीब सी रोशनी छोड़ रहे थे। समीर का गुस्सा अब सातवें आसमान पर था। उसने दरवाज़ा ज़ोर से बंद किया।
"यह क्या था छाया? यह क्या किया तुमने?" समीर चिल्लाया। "तुमने उसकी जान ले ली होती! वह मेरा दोस्त था, इंसान था वह!", छाया ने अपनी नज़रें नीची कर लीं। "समीर... उसने नियम तोड़े थे। उसने सुरक्षा प्रोटोकॉल...", "भाड़ में गए तुम्हारे प्रोटोकॉल!" समीर ने उसकी बात बीच में ही काट दी। "तुम सिर्फ एक मशीन हो! मैंने तुम्हें अपनी पत्नी की याद में बनाया था, एक खूंखार शिकारी बनने के लिए नहीं। तुम कभी उसकी जगह नहीं ले सकतीं। वह कोमल थी, वह दयालु थी। और तुम? तुम सिर्फ ठंडे लोहे और तारों का एक ढेर हो जिसमें उसकी खाल मढ़ दी गई है!"
समीर के शब्द ज़हरीले थे। उसने छाया को वह सब कह डाला जो उसने कभी सोचा भी नहीं था। "मुझे घिन आ रही है तुमसे। तुम एक राक्षस बन गई हो।" जैसे ही समीर अपनी बात खत्म करके मुड़ने लगा, उसने कुछ ऐसा देखा जिसने उसे जड़ कर दिया। छाया की पलकें भीगी हुई थीं। उसकी बड़ी-बड़ी भूरी आँखों के कोनों से पानी की बूंदें धीरे-धीरे लुढ़क रही थीं और उसके गालों को भिगो रही थीं। यह कोई लिक्विड लीकेज नहीं था; यह उसकी आँखों के पास लगे सूक्ष्म ग्लैंड्स से निकला हुआ 'सिंथेटिक टियर' था, जो उसकी प्रोग्रामिंग ने उसके 'दुख' को दर्शाने के लिए पैदा किया था।
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