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Adultery Adventure of sam and neha
#48
वो मेरे लुंड को और तेज़ सहलाने लगी।

ऊपर-नीचे... टाइट ग्रिप।

मैं कराह रहा था।

मैं... कगार पर था।

झड़ने वाला था।

वो मेरे कान में फुसफुसाई—

"और सुनना है... या...

मैंने उसके बाल पकड़े।

सुनना है... "

वो हँसी।

उसने अपना हाथ और तेज़ किया।

एक हाथ से... मेरे लुंड को ऊपर-नीचे... बहुत तेज़।

दूसरा हाथ... मेरे लुंड के हेड के सामने रख दिया।

खुला... तैयार... सब कलेक्ट करने के लिए।

मैं झड़ गया।

बहुत सारा... बहुत जोर से।

नेहा की हथेली में... गाढ़ा, गरम, सफेद रस भर गया।

वो मेरे लुंड को अभी भी हल्के से पकड़े हुई थी—सब बाहर निकालने के लिए।

फिर... उसने हाथ ऊपर उठाया।

मेरे सामने... हथेली खोलकर दिखाई।

रस... चमक रहा था... बहुत सारा... उँगलियों पर बह रहा था।

वो मुस्कुराई—एक गहरी, नॉटी मुस्कान।

"देखो... कितना सारा है... तुम बहुत एक्साइटेड लग रहे थे।"

मैं... बस "हम्म..." कर पाया।

आवाज़ निकली नहीं।

दिमाग... अभी भी घूम रहा था।वो मेरी तरफ देखती रही।

फिर... दूसरे हाथ की दो उँगलियाँ... मेरे रस में डुबोईं।

धीरे से... उँगलियाँ उठाईं।

मेरी आँखों के सामने... उँगलियाँ जीभ पर रखीं।

चाट ली।

धीरे-धीरे... पूरी तरह साफ़ की।

उसकी जीभ... मेरे रस पर... चमक रही थी।

वो मुझे देख रही थी—पूरी तरह।

मैं... बस देखता रहा।

ये... अलग था।

उसने पहले भी मेरा रस टेस्ट किया था—कई बार।

मेरे मुंह में... ब्लोजॉब के बाद

मैंने धीरे से पूछा—आवाज़ में थोड़ी काँप, थोड़ी जिज्ञासा, थोड़ी हिम्मत—

"नेहा... तुम... उस मर्द के लिए... इतनी गंदी क्यों हो गई थीं?

मतलब... तुम बहुत यंग थीं... फिर भी..."

वो मेरी तरफ देखती रही।

एक पल... चुप।

फिर... हल्के से मुस्कुराई—एक थकी हुई, लेकिन ईमानदार मुस्कान।

उसने मेरे लुंड को फिर से हल्के से सहलाया।

धीरे से बोली—

"क्योंकि... मैं बहुत पोर्न देखती थी।

हर रात।

कॉलेज के बाद... जब कार पूल शुरू हुआ... मैंने हर दिन के लिए प्लान बना लिया था।

कुछ नया... कुछ और गहरा... कुछ और गंदा।

मैं... हर सुबह... सोचती थी... आज क्या ट्राई करूँ।

उसके लुंड को कैसे छुऊँ... कैसे हिलाऊँ... कैसे उसे तड़पाऊँ।

लेकिन... वो हमेशा रुक जाता था।

कहता था—'तुम्हारा फ्यूचर... मैं खराब नहीं कर सकता।'

फिर... सब खत्म हो गया।


और... मैं... उस 5-6 घंटे के सफर में... हर चीज़ एक्सपीरियंस करना चाहती थी।

क्योंकि... मैं जानती थी... ये आखिरी चांस है।

शायद... कभी नहीं मिलेगा।

फिर... वो एक उँगली को मेरे रस में डुबोई... और धीरे से... अपने गाल पर रगड़ दी।

एक पतली लाइन... मेरे रस की... उसके गाल पर फैल गई।

फिर... दूसरी उँगली... अपने होंठों पर... फिर माथे पर।

वो... मेरे रस को... अपने चेहरे पर फैला रही थी।

जैसे कोई मेकअप लगा रही हो।

उसकी आँखें... मेरी आँखों में टिकी हुईं थीं—बहुत गहरी... बहुत नॉटी... बहुत प्यारी।

आज... वो सब कुछ... अलग था।

मेरी क्लीन, घरेलू नेहा... आज इतनी गंदी... इतनी बेबाक... इतनी सेक्सी।

मैं... बस देखता रहा।

मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।

फिर... मैंने धीरे से पूछा—

"फिर... क्या हुआ?"

वो रुकी।

उसकी जीभ अभी भी हथेली पर थी—मेरा रस साफ़ कर रही थी।

वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई।

"अब बहुत देर हो गई है बेबी... सो जाना चाहिए।"

मैंने उसके बाल पकड़े।

उसे अपनी तरफ खींचा।

"नहीं... मैं जानना चाहता हूँ।

फिर क्या हुआ?

कंटिन्यू करो... प्लीज़।"

वो मेरी आँखों में देखती रही।

फिर... धीरे से बोली—आवाज़ में थोड़ी हिचकिचाहट... थोड़ा डर... लेकिन बहुत प्यार।

"तुम... सच में सुनना चाहते हो?

कुछ पार्ट्स... तुम्हें पसंद नहीं आएँगे... मैं जानती हूँ।"

मैंने उसके गाल पर हाथ फेरा—उसके चेहरे पर मेरे रस की वो हल्की लाइन अभी भी थी।

"मैं तैयार हूँ।

मैं तुमसे प्यार करता हूँ... और तुम्हारा हर पार्ट... मेरे लिए मायने रखता है।

कोई फर्क नहीं पड़ेगा... मेरे फीलिंग्स में।

बताओ... सब।"

वो मेरी आँखों में देखती रही।

फिर... धीरे से सिर हिलाया।

नेहा बिस्तर के हेडबोर्ड पर पीठ टिकाकर बैठी थी।

आधा लेटी हुई... आधा बैठी हुई।

पैर फैलाए।

ब्लैक पैंटी अभी भी पहनी हुई थी—पूरी गीली... चिपचिपी... मेरे रस से।

मेरे तरफ देखा।

उसकी आँखें मेरी आँखों में टिकी हुई थीं।

मैं जानता था... वो क्या चाहती है।

मैं धीरे से जांघों के बीच आया।

मेरा सिर... मेरी जांघों के बीच।

मेरी नाक... उसकी पुसी पर... पैंटी के ऊपर... हल्का-सा टच।

मैं सूंघ रहा था।

उसक रस... मेरी नाक पर... मेरी साँसों में।

वो कराहा—बहुत धीमी... बहुत गहरी।

"येस्स्स्स..."

पैंटी पर नाक रगड़ रहा था।

धीरे-धीरे... सर्कल बनाता हुआ।

बाल पकड़े।

करीब खींचा।

फिर... कहानी जारी रखी—आवाज़ में अब वो पुरानी वाली चाहत... और थोड़ी सी शरारत।

"उसने कार स्टार्ट की।

हमारे पास कोई प्लान नहीं था।

बस... डेस्टिनेशन तक ड्राइविंग।

वो कुछ सोच रहा था।

उसके चेहरे से साफ़ दिख रहा था।

कैलकुलेट कर रहा था... रिस्क... फायदे... सब कुछ।

मेरा हाथ... उसकी तरफ बढ़ा।

ज़िप नीचे की।

उसका लुंड बाहर निकाला।

रॉक हार्ड।

बड़ा।

मोटा... गरम... जैसे कोई हॉट रॉड।

मैंने उसे पकड़ा।

ऊपर-नीचे... धीरे से... फिर तेज़।"


दिखाने के लिए हाथ का इशारा किया—दोनों हाथों से... लंबाई और मोटाई दिखाई।

जानबूझकर।

शायद... बताने के लिए।

शायद... जलाने के लिए।

या... शायद... ह्यूमिलिएट करने के लिए।

पैंटी पर नाक और गहराई से रगड़ रहा था।

उसकी साँसें मेरी चूत पर लग रही थीं।

कार चल रही थी।

हाईवे अब पूरी तरह सुनसान हो चुका था।

अंकल का लुंड मेरे हाथ में था—सख्त... गरम... फड़कता हुआ।


मैंने उसे हल्के-हल्के जर्क किया।

बहुत धीरे... बहुत कंट्रोल्ड।

इतना कि वो ड्राइव कर सके... सोच सके... लेकिन इतना कि वो भूल न जाए कि मेरे हाथ में क्या है।

उसकी साँसें तेज़ थीं।फिर... धीरे से पूछा—आवाज़ में वो पुरानी वाली हिचकिचाहट... और थोड़ी सी चाहत—

"कॉलेज में... तुम कहाँ रहती हो?"

मैंने मुस्कुराकर कहा—

"गर्ल्स हॉस्टल में।"

वो एक पल के लिए चुप रहा।

उसकी आँखें... मेरी आँखों से मिलीं।

वो जानता था... मैं क्या सोच रही हूँ।

हमारा कॉलेज... दो शहरों के बीच में था।

चारों तरफ सिर्फ़ होटल... और वो भी सिर्फ़ कॉलेज की वजह से।

हर होटल में सख्त नियम थे—कॉलेज के स्टूडेंट्स को आईडी दिखानी पड़ती थी... पूछताछ होती थी... लोकल्स सब जानते थे।

वो जगह... बहुत स्ट्रिक्ट थी।

वो फिर बोला—आवाज़ में अब थोड़ी हिम्मत—

"मेरे पास... एक जगह है... रास्ते में... लेकिन..."

मैंने उसके लुंड को थोड़ा और टाइट पकड़ा।

धीरे से जर्क किया।

फिर... पूछा—

"लेकिन क्या...?"

अंकल की कार अब धीमी हो गई थी।

वो स्टीयरिंग पर हाथ कसकर पकड़े हुए था।

उसका लुंड अभी भी मेरे हाथ में था—सख्त, गरम, मेरे रस और उसके प्रीकम से गीला।

मैंने धीरे से उसके हेड पर उँगली फेरी।

कुछ प्रीकम... मेरी उँगली पर आ गया।

मैंने उसे उसके लुंड पर ही फैलाया।

धीरे-धीरे... मसाज करते हुए... गीला-गीला... चिकना।

वो सिहर गया।

एक लंबी, गहरी कराह निकली—

"आह्ह..."

वो मेरी तरफ देखा।

उसकी आँखें... बहुत गहरी... बहुत भूखी।

फिर... धीरे से बोला—

"लेकिन... ये... होटल जैसी जगह नहीं है... ये... हमारे ड्राइवरों का चाय-स्नैक्स वाला अड्डा है।"

मैंने उसके लुंड को और टाइट पकड़ा।

धीरे से ऊपर-नीचे किया।

उसकी साँसें रुक गईं।

फिर... पूछा—

"और...?"

वो एक गहरी साँस ली।

स्टीयरिंग पर हाथ और कस गया।

"और... वहाँ... बहुत लोग आते हैं।

ड्राइवर... ट्रक वाले... लोकल वाले... सब।

"यहाँ... झोपड़ियाँ हैं... जहाँ ड्राइवर लोग दारू पीते हैं... और कभी-कभी..."

मैंने उसकी बात पूरी करवाई—

"कभी-कभी...?"

वो एक गहरी साँस ली।

फिर... बोला—

"ट्रक ड्राइवर... हाईवे की रंडियों को... फक करते हैं।"

मैंने एक पल के लिए रुककर उसे देखा।

ये... मेरे लिए नया था।

मैंने कभी नहीं सुना था... ऐसे।

मैंने पूछा—क्यूरियोसिटी से... थोड़ी सी हैरानी से—

"हाईवे की रंडियों... क्या होती हैं?"

वो मेरी तरफ मुड़ा।

उसकी आँखें... मेरी मासूमियत पर थोड़ा रुक गईं।

फिर... धीरे से बोला—

"रास्ते में... कुछ औरतें मिलती हैं... जो सेक्स के बदले पैसे लेती हैं।

कभी-कभी... सिर्फ़ लिफ्ट के बदले... कभी... थोड़े पैसे के।

ट्रक वाले...उन्हें ले जाते हैं... झोपड़ियों में... ।

ये... आम है... हाईवे पर।"



मैंने उसके लुंड को हल्का-सा दबाया—बस इतना कि वो महसूस करे, लेकिन दर्द न हो।

फिर... नॉटी स्माइल के साथ पूछा—

"तुमने कभी किया?"

वो तुरंत बोला—आवाज़ में सख्ती, लेकिन बहुत ईमानदारी—

"नहीं... कभी नहीं।"

मैंने फिर दबाया—थोड़ा और... शरारत से।

उसकी साँस रुक गई।

"क्यों?

तुम बता सकते हो... अगर किया होता तो।"

वो मेरी तरफ देखा।

उसकी आँखें... मेरी आँखों में टिकीं।

फिर... धीरे से बोला—

"मैं तुम्हें कुछ भी बता सकता हूँ... लेकिन सच में... कभी नहीं किया।

नहीं सोचा भी।

ये... हाईवे वाली रंडियाँ... वो... कैसे समझाऊँ तुम्हें...

मेरी बीवी... उससे कहीं बेहतर है।

और वो... पुरानी... गंदी... ढीली...

और सच कहूँ... तुमसे मिलने से पहले... मैं ऐसे में नहीं था।

न कभी किया... न सोचा।"

वो रुका।

एक लंबा सन्नाटा।

फिर... धीरे से बोला—आवाज़ में अब थोड़ी चिंता... थोड़ी फिक्र—

"मुझे लगता है... तुम्हें वहाँ नहीं जाना चाहिए।

ये... तुम्हारे लिए जगह नहीं है।"

मैंने उसे हल्के-हल्के जर्क किया—बहुत धीरे, लेकिन जानबूझकर।

उसकी साँसें तेज़ थीं।

वो सोच रहा था... कैलकुलेट कर रहा था... रिस्क... फायदे... सब कुछ।

मैंने धीरे से पूछा—आवाज़ में बहुत उत्सुकता... बहुत चाहत—

"तो... कहाँ?"

वो एक पल के लिए चुप रहा।

फिर... धीरे से बोला—

"हम... अगली बार देख लेंगे... इस बार... मुझे नहीं पता था कि तुम्हारे पापा ने मुझे ही बुक किया है।"

उसकी आवाज़ में... थोड़ा दुख था... थोड़ा अफसोस।

वो जानता था... ये मौका... शायद आखिरी था।

मैंने उसके लुंड को और टाइट पकड़ा।

तेज़ी से जर्क किया।

उसकी साँस रुक गई।

"नहीं... अगली बार नहीं।

इस बार... अभी।

झोपड़ियों में... चलो वहाँ।

मैं... मैनेज कर लूँगी।

कम से कम... जगह देख लें।

अगर अच्छी नहीं लगी... तो... हम छोड़ देंगे।

या... क्या... वहाँ खतरनाक है?"

वो मेरी तरफ मुड़ा।

उसकी आँखें... मेरी आँखों में टिकीं।

फिर... धीरे से बोला—आवाज़ में अब थोड़ी हिम्मत—

"नहीं... खतरनाक नहीं है।

मैं इस रूट पर सालों से ड्राइव कर रहा हूँ।

सेफ्टी की चिंता मत करो।

वहाँ... लोग जानते हैं मुझे।

कोई... कुछ नहीं करेगा।"

मैंने उसके लुंड को और तेज़ जर्क किया।

उसकी साँसें बहुत तेज़ हो गईं।

वो कराहा—धीमी, गहरी।

"तो... चलो... वहाँ।

मैं... इसे छोड़ना नहीं चाहती... अगली बार के लिए।

फिर... वो बोला—आवाज़ में अब थोड़ी हिम्मत, थोड़ी प्लानिंग—

"ओके... एक काम करो।

तुम्हारे लगेज में... कोई स्कर्ट और स्कार्फ है?"

मैंने हल्के से मुस्कुराकर सिर हिलाया।

"हाँ... है।"

वो कार का डिकी खोलने के लिए बाहर निकला।

मैंने बैग से स्कर्ट और स्कार्फ निकाला।

एक , टाइट स्कर्ट... और एक लंबा स्कार्फ।

वो वापस आया।

डिकी बंद की।

फिर... बोला—

"यहाँ बदल लो।

अभी।"

मैंने कार के अंदर ही बदलना शुरू किया।

नई स्कर्ट पहनी।

स्कार्फ को कंधे पर रखा।

वो... मुझे देखता रहा।

उसकी आँखें... मेरी जांघों पर... मेरी चेस्ट पर... सब पर टिक रही थीं।

वो धीरे से बोलता रहा—जैसे प्लानिंग कर रहा हो—

"ये झोपड़ियाँ... पतली दीवारों वाली हैं।

दरवाज़े नहीं... सिर्फ़ पर्दे हैं।

कोई भी... आसानी से झाँक सकता है।

तो... हमें ऐसी पोज़िशन में रहना है... जहाँ हमारी स्किन कम दिखे।

और... तुम्हारा चेहरा... किसी को नहीं दिखना चाहिए।

स्कार्फ... चेहरा ढकने के लिए यूज़ कर लो।


मैंने लंबी स्कर्ट पहनी थी—घुटनों से नीचे तक, लेकिन टाइट, मेरी कमर और हिप्स का शेप साफ़ दिख रहा था।

ऊपर सफेद शर्ट—बटन बंद, लेकिन कॉलर थोड़ा खुला।

स्कार्फ... मेरे चेहरे पर लपेटा हुआ—सिर्फ़ आँखें दिख रही थीं।

चेहरे का बाकी हिस्सा छुपा हुआ था।

सुरक्षा... और थोड़ी सी मिस्ट्री।

कार पार्क हुई।

दिन का समय था।

झोपड़ियों के बाहर... कुछ लोग चाय पी रहे थे।

गपशप कर रहे थे।

कुछ ट्रक वाले... कुछ लोकल ड्राइवर... सिगरेट-बीड़ी के धुएँ में बातें।


मैंने चारों तरफ देखा।

कोई मुझे नहीं पहचान रहा था।

स्कार्फ... चेहरा छुपा रहा था।

लेकिन... उनकी नज़रें... मेरी स्कर्ट पर... मेरी कमर पर... मेरी हिप्स पर... टिक रही थीं।

मैंने अंकल के पीछे-पीछे चलना शुरू किया।

वो काउंटर पर गया।

एक आदमी खड़ा था—बिल्लू।

काला... मोटा... गटके से दाँत गुलाबी... मुस्कुराता हुआ।

उसने अंकल को देखा।

"साहब... बहुत दिनों बाद?"

अंकल ने हल्के से मुस्कुराकर कहा—

"हाँ बिल्लू... एक झोपड़ी... एक बीयर... और कुछ खाने को।"

बिल्लू ने मेरी तरफ देखा।

उसकी आँखें मेरे स्कार्फ पर रुकीं... फिर नीचे स्कर्ट पर।

वो मुस्कुराया—पूरे दाँत दिखाकर।

"ओह्ह... ये आपके साथ हैं?"

मैंने उसे देखा।

स्कार्फ से सिर्फ़ आँखें दिख रही थीं।

मैंने कुछ नहीं कहा।

बस... नज़रें मिलाईं।

उसकी मुस्कान... गंदी थी।

बहुत गंदी।

पीछे से... कुछ और लोगों की फुसफुसाहट आई।

"क्या गांड है..."

"कौन है?"

"नई है..."

मैंने सुना।

मेरा दिल ज़ोर से धड़का।

थोड़ा डर... थोड़ा थ्रिल।


बिल्लू हमें झोपड़ी की तरफ ले गया।

झोपड़ियाँ एक-दूसरे से सटी हुई थीं—पतली दीवारें, टिन की छतें, और सिर्फ़ पर्दे दरवाज़े की जगह।

हमारी झोपड़ी सबसे आखिरी थी।

पास की कुछ झोपड़ियों में से सिर्फ़ एक में रोशनी थी... और वहाँ से... हल्की-हल्की कराहें आ रही थीं।

एक मर्द... एक औरत... बहुत स्पष्ट आवाज़ें।

मैंने जल्दी से उस झोपड़ी को पार किया।

दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।

शर्म... थ्रिल... डर... सब एक साथ।

बिल्लू अंकल के साथ चल रहा था।

वो बात कर रहा था—उसकी आवाज़ में वो गंदी हँसी थी जो मुझे पहले भी सुनाई दी थी।

"साहब... कब से शुरू किया ये सब?"

अंकल कुछ नहीं बोला।

बस... चलता रहा।

बिल्लू ने फिर कहा—

"ये शहर से हैं या हाईवे वाली?"

मैंने सुना।

मेरा चेहरा गर्म हो गया।

स्कार्फ अभी भी चेहरे पर था—सिर्फ़ आँखें दिख रही थीं।

लेकिन... वो सब समझ रहा था।

फिर... बिल्लू ने सबसे आखिरी सवाल पूछा—बहुत बेशर्मी से—

"कितना लिया?"

अंकल ने उसे देखा।

उसकी आँखें सख्त हो गईं।

जैसे कोई बहुत गंदी बात कह दी गई हो।

लेकिन... उसे झोपड़ी चाहिए थी।

उसने बस इतना कहा—आवाज़ में गुस्सा, लेकिन कंट्रोल—

"नहीं बिल्लू... बस दोस्त है।"

बिल्लू हँसा—पूरे दाँत दिखाकर।

गटके से गुलाबी दाँत... गंदी हँसी।

"आह्ह... क्या मज़ाक है साहब... दोस्त?

इतनी जवान... इतनी हॉट...

अच्छा है साहब... अगर नई है तो... ये आखिरी बार नहीं होगा।

अगली बार... रेट पूछ लूँगा।"

मैं... शर्म से लाल हो गई।

पहली बार... किसी ने मुझे... रंडी समझा।

मेरा चेहरा जल रहा था।
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Messages In This Thread
Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 15-02-2026, 04:03 PM
RE: Adventure of sam and neha - by rangeeladesi - 17-02-2026, 10:06 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 19-02-2026, 04:47 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 19-02-2026, 06:31 PM
RE: Adventure of sam and neha - by rangeeladesi - 19-02-2026, 10:42 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 20-02-2026, 10:51 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 20-02-2026, 02:14 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 20-02-2026, 03:44 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 20-02-2026, 06:03 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 20-02-2026, 11:00 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 21-02-2026, 05:29 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 21-02-2026, 05:35 PM
RE: Adventure of sam and neha - by rangeeladesi - 21-02-2026, 07:04 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 22-02-2026, 11:55 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 22-02-2026, 12:15 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 24-02-2026, 12:04 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 25-02-2026, 01:03 PM
RE: Adventure of sam and neha - by BHOG LO - 25-02-2026, 01:21 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 28-02-2026, 02:02 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 28-02-2026, 04:06 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 03-03-2026, 12:20 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 03-03-2026, 12:24 PM
RE: Adventure of sam and neha - by vishalisji - 07-03-2026, 12:08 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 09-03-2026, 12:27 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 12-03-2026, 10:56 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 12-03-2026, 11:02 AM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 12-03-2026, 01:09 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 14-03-2026, 07:22 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 15-03-2026, 01:35 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Vkpawar - 15-03-2026, 12:53 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 16-03-2026, 02:35 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 16-03-2026, 05:28 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 17-03-2026, 09:39 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 17-03-2026, 09:49 AM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 17-03-2026, 05:53 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 19-03-2026, 02:06 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 19-03-2026, 02:13 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 19-03-2026, 03:35 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 19-03-2026, 05:57 PM
RE: Adventure of sam and neha - by vishalisji - 25-03-2026, 08:11 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 31-03-2026, 05:15 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 31-03-2026, 05:25 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 31-03-2026, 05:27 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 02-04-2026, 12:57 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 02-04-2026, 03:30 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 02-04-2026, 03:34 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 02-04-2026, 03:58 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 09-04-2026, 03:45 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Glenlivet - 09-04-2026, 07:33 PM
RE: Adventure of sam and neha - by vishalisji - 09-04-2026, 07:59 PM
RE: Adventure of sam and neha - by vishalisji - 12-04-2026, 01:04 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 15-04-2026, 12:02 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 15-04-2026, 12:22 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 15-04-2026, 12:25 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - Yesterday, 12:00 AM



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