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Adultery Adventure of sam and neha
#46
अगला दिन, कार में

मैंने फिर वही टाइट स्कर्ट और शर्ट पहनी—स्कर्ट थोड़ी और छोटी, शर्ट के ऊपरी बटन खुले।

मैं जानती थी... अंकल को आज और सरप्राइज मिलेगा।

अंकल... वही ड्राइवर लुक में—पजामा और शर्ट।

वो कार के पास खड़ा था—मुझे देखकर मुस्कुराया।

मैं उसके पास गई।

उसे एक नॉटी विंक दी।

"गुड मॉर्निंग... अंकल जी।"

वो हँसा।

"गुड मॉर्निंग... बेटा ।

हम कार में बैठे।

वो स्टार्ट किया।

सड़क सुनसान थी।

खिड़कियाँ थोड़ी ऊपर।

सन्नाटा... सिर्फ़ हम दोनों।

कुछ देर बाद... मैंने उसका हाथ पकड़ा।

धीरे से अपनी जांघ पर रख दिया।

उसने मुस्कुराकर रगड़ना शुरू किया।

स्कर्ट के ऊपर से... फिर धीरे से नीचे सरकाया।

उसकी उँगलियाँ मेरी नंगी इनर थाइज़ पर।

वो गहराई में जा रही थीं... मेरी चूत के बहुत करीब।

फिर... उसने महसूस किया।

उसकी उँगलियाँ मेरी नंगी स्किन पर... कोई पैंटी नहीं।

उसकी आँखें चौड़ी हो गईं।

वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराया—एक गहरी, भूखी मुस्कान।

"ओह्ह... नेहा... आज... ?"

मैंने शरमाते हुए हँसी।

पैर थोड़े और फैलाए।

"हाँ... अंकल जी... आज... तुम्हारे लिए स्पेशल।


अब... और ऊपर... छूओ ना..."

उसने हाथ और ऊपर सरकाया।


उसकी उँगलियाँ मेरी चूत पर—सीधे नंगी स्किन पर।

वो सर्कल बनाने लगा... रगड़ने लगा... हल्का-सा दबाव डालने लगा।

मैं सिहर गई।

"आह्ह... येस... ऐसे ही..."

वो ड्राइव कर रहा था... एक हाथ स्टीयरिंग पर... दूसरा मेरी चूत पर।

उसकी उँगलियाँ... मेरी क्लिट पर... मेरी लेबिया पर... खेल रही थीं।

मैं कराह रही थी—धीमी, लेकिन गहरी।

"आह्ह... अंकल जी... "

उसका हाथ... अब और तेज़ हो गया।

उसकी उँगली... मेरी चूत के छेद पर... हल्का-सा अंदर।

मैं... उसकी उँगलियों की वजह से... धीरे-धीरे... ऑर्गेज़्म की तरफ बढ़ रही थी।

ये... बहुत अच्छा लग रहा था।


स्कर्ट पहले से ही काफी ऊपर थी।

उसकी उँगलियाँ मेरी नंगी स्किन पर रगड़ रही थीं—गरम, नरम, तड़पाने वाला स्पर्श।

मैंने पैर और थोड़े फैलाए।

उसे और एक्सेस दिया।

मेरा हाथ उसकी तरफ बढ़ा।

पजामा के ऊपर से... उसके लुंड को पकड़ने की कोशिश की।

पहली बार... कार में... उसके लुंड को छुआ।

वो सख्त था—बहुत सख्त।

मैंने उसे टाइट पकड़ा... हाथ में भर लिया... ऊपर-नीचे हल्का-सा सहलाया।

उसकी साँसें तेज़ हो गईं।

वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराया—एक गहरी, भूखी मुस्कान।

"तुम... बहुत नॉटी हो ।"


मैंने उसके कान में फुसफुसाया—

"हाँ... अंकल जी... मुझे आपका ये... बहुत पसंद है। कितना गरम है... कितना सख्त है..."

अंकल का लुंड मेरे हाथ में था—पजामा के ऊपर से, सख्त, गरम, फड़कता हुआ।

मैंने उसे टाइट पकड़ा... ऊपर-नीचे... तेज़ी से जर्क करने लगी।

उसकी साँसें तेज़ हो गईं... कराहें निकलने लगीं।

उसकी उँगलियाँ मेरी चूत में थीं—एक उँगली... गहराई में... टाइट, गीली, मेरी दीवारों पर कस रही थी।

मैं भी कराह रही थी—धीमी, गहरी।


"आह्ह... नेहा... तुम... बहुत अच्छा... कर रही हो..."

उसका लुंड मेरे हाथ में और सख्त हो गया।

वो काँपने लगा।

उसने मेरे कान में फुसफुसाया—आवाज़ काँप रही थी—

"स्टॉप... स्टॉप... प्लीज़... तुम मेरे पजामा को गंदा कर दोगी..."

मैंने मुस्कुराकर उसकी आँखों में देखा।

नहीं रुकी।

और तेज़... और टाइट... जर्क करती रही।

उसकी उँगलियाँ मेरी चूत में और गहरा जा रही थीं।

मैं... उसकी उँगलियों की वजह से... ऑर्गेज़्म की कगार पर थी।

फिर... वो झड़ गया।

जोर से... पजामा के अंदर।

गाढ़ा, गरम रस... पजामा पर बड़ा सा पैच... साफ़ नज़र आ रहा था।

वो काँप रहा था... सिहर रहा था।

और उसी पल... मैं भी झड़ गई।

उसकी उँगली की वजह से... जोर से... एक लाउड मोअन के साथ।

"आआह्ह्ह... ... येस...!"

मैंने उसकी तरफ देखा।

उसका पजामा पर वो बड़ा पैच... गीला, चिपचिपा।

मैंने हँसकर कहा—

"देखो... कितना गंदा कर दिया... अंकल जी।

वो पूरे दिन कार से बाहर नहीं निकला।

जैकेट से छुपाता रहा—कभी घुटनों पर रखकर... कभी सीट पर लपेटकर।

मैं हँस-हँसकर मर रही थी।

"देखो... कितना बड़ा पैच... ड्राइवर जी... आज तो तुम्हें कार से उतरना ही नहीं है!"

वो शर्म से लाल हो गया।

लेकिन उसकी आँखें... खुशी से चमक रही थीं।

अगली सुबह।

मैंने फिर वही टाइट स्कर्ट और शर्ट पहनी।

आज भी पैंटी नहीं।

जानबूझकर।

वो... शर्ट में—लेकिन इस बार... पैंट पहनी थी।

ज़िप वाली।

वो तैयार था।

मैं कार में बैठी।

उसे विंक दी।

"गुड मॉर्निंग... "

कार चली।

सन्नाटा।

कुछ देर बाद... मैंने उसका हाथ पकड़ा।

धीरे से अपनी जांघ पर रख दिया।

उसने मुस्कुराकर रगड़ना शुरू किया।

स्कर्ट के ऊपर से... फिर नीचे सरकाया।

उसकी उँगलियाँ मेरी नंगी इनर थाइज़ पर।

वो गहराई में जा रही थीं... मेरी चूत के बहुत करीब।

फिर... उसने महसूस किया।

कोई पैंटी नहीं।

वो मुस्कुराया—भूखी मुस्कान।

उसने हाथ और ऊपर सरकाया।

उसकी उँगलियाँ मेरी चूत पर—नंगी स्किन पर।

सर्कल... रगड़... हल्का-सा दबाव।

मैं सिहर गई।

"आह्ह... येस... ऐसे ही..."

मेरा हाथ उसकी तरफ बढ़ा।

इस बार... पैंट की ज़िप पर।

मैंने ज़िप नीचे की।

उसका लुंड बाहर आया—सख्त, गरम, फड़कता हुआ।

मैंने उसे टाइट पकड़ा।

ऊपर-नीचे... सहलाने लगा।

वो कराहा—

उसकी उँगलियाँ मेरी चूत में थीं—अब दो उँगलियाँ... गहराई में... टाइट, गीली।

वो धीरे से अंदर-बाहर कर रहा था।

मैं... उसकी उँगलियों की वजह से... कराह रही थी।

अंकल का लुंड मेरे हाथ में था—पहली बार.... नंगा।

पजामा की ज़िप नीचे की थी... और वो सख्त, गरम, फड़कता हुआ मेरी उँगलियों में था।

मेरी उँगलियाँ... नरम, ठंडी... उसकी गर्माहट महसूस कर रही थीं।

उसकी स्किन... बहुत गरम... बहुत स्मूद।

सारे वेंस... साफ़ नज़र आ रहे थे—उभरे हुए, नीले-नीले।

हेड... पर्पल, चमकता हुआ... प्रीकम से गीला।

मैंने उसे देखा।

अमेज़मेंट से... थोड़ी सी शर्म से... बहुत सारी चाहत से।

पहली बार... इतने करीब... इतने नंगे... दिन की रोशनी में।

मैंने धीरे से... ऊपर-नीचे... सहलाना शुरू किया।

उसकी साँसें तेज़ हो गईं।

वो कराहा—धीमी, गहरी।

मैंने मुस्कुराकर उसकी आँखों में देखा।

मेरी उँगलियाँ... अब और टाइट... और तेज़।

उसके लुंड को... ऊपर-नीचे... हल्का-सा दबाव... फिर और तेज़।

उसकी वेंस... मेरी उँगलियों पर महसूस हो रही थीं।

उसका हेड... मेरी हथेली में... गीला, गरम।

उसकी उँगलियाँ मेरी चूत में थीं—दो उँगलियाँ... गहराई में... टाइट, गीली।

वो धीरे से अंदर-बाहर कर रहा था।

मैं... उसकी उँगलियों की वजह से... कराह रही थी।

"आह्ह.... तुम्हारी उँगलियाँ... बहुत अच्छी लग रही हैं..."

मैं कराह रही थी—धीमी, लेकिन गहरी।

वो काँप रहा था।

उसकी साँसें बहुत तेज़ हो गईं।

फिर... अचानक उसने कहा—आवाज़ में पहली बार वो कमांड वाली टोन।

एक ऑर्डर।

"नेहा... फास्ट करो... और...अपना हाथ ऊपर-नीचे... तेज़... बहुत तेज़..."

मैंने उसकी आँखों में देखा।

उसकी आँखें भूख से जल रही थीं।

मैंने मुस्कुराकर सिर हिलाया।

उसके लुंड को और टाइट पकड़ा।

ऊपर-नीचे... बहुत तेज़... बहुत फास्ट।

उसकी वेंस मेरी उँगलियों पर महसूस हो रही थीं।

उसका हेड... मेरी हथेली में... गीला, गरम।

वो फिर बोला—आवाज़ में और सख्ती—

"और... इस बार... गंदा मत करना... जैसे कल हुआ था... अपना हाथ में ले लो... सब... मेरे हाथ में..."

मैंने हँसकर कहा—

"जी... अंकल जी... जैसा आप कहें।"

मैंने अपना हाथ और तेज़ किया।

ऊपर-नीचे... टाइट ग्रिप... बहुत फास्ट।

उसकी उँगलियाँ मेरी चूत में और तेज़ हो गईं।

हम... दोनों... एक-दूसरे को तेज़ी से... महसूस कर रहे थे।

फिर... वो झड़ गया।

जोर से... मेरे हाथ में।

गाढ़ा, गरम रस... मेरी हथेली में... उँगलियों पर... भर गया।

मैंने उसे टाइट पकड़ा... सब बाहर निकाला।

कोई गंदगी नहीं... सब मेरे हाथ में।

और उसी पल... मैं भी झड़ गई।

उसकी उँगलियों की वजह से... जोर से... एक लाउड मोअन के साथ।

"आआह्ह्ह.. येस...!"

अंकल का रस मेरे हाथ में था—गाढ़ा, गरम, सफेद।

मेरी उँगलियाँ... उसकी हथेली... सब भर गया था।

मैंने हाथ ऊपर उठाया।

उसे देखा—करिब से।

वो चमक रहा था... ताज़ा... उसकी खुशबू... नमकीन, मस्की, बहुत इंटेंस।

मैंने धीरे से... हाथ नाक के पास ले जाकर सूंघा।

ताज़ा... गर्म... उसकी खुशबू मेरे नाक में घुस गई।

मैंने मुस्कुराकर सैम की तरफ देखा।

उसकी आँखें चौड़ी थीं—शर्म, एक्साइटमेंट, और थोड़ी सी हैरानी।

"देखो... कितना गरम है... "

मैंने हल्के से कहा।

फिर... कार के डैशबोर्ड में रखी बोतल उठाई।

वो पानी की बोतल थी।

ढक्कन खोला।

उसके सामने... अपना हाथ धोया।

पानी से... धीरे-धीरे... सब साफ़ कर दिया।

उसका रस... मेरी उँगलियों से... धुल गया।

फिर... मैंने हाथ झटका।

उसे देखकर मुस्कुराई—एक गहरी, सेक्सी मुस्कान।

"अब... क्लीन हो गया... अंकल जी।

अंकल शर्म से लाल हो गया।

कार घर की तरफ चल रही थी।

सड़कें अब भी सुनसान थीं।

वो जैकेट से छुपा रहा था—शर्म से, लेकिन उसकी आँखें... अभी भी चमक रही थीं।

वो अचानक बोला—आवाज़ थोड़ी काँप रही थी, भावुक।

"नेहा... तुमने मुझे इतने दिनों बाद... इतनी खुशी दी है।

बहुत दिनों बाद... ऐसा लगा... जैसे सब कुछ... फिर से जिंदा हो गया।"

मैंने उसकी तरफ देखा।

उसकी आँखें नम थीं।

वो इमोशनल था—बहुत।

उसने मेरे हाथ को पकड़ा।

धीरे से बोला—

"लेकिन... बेटा... हमें ये रिस्क नहीं लेना चाहिए।

कार में... ओपन में... अगर किसी ने देख लिया... हमारी रेपुटेशन... सब बर्बाद हो जाएगा।

हम... दोनों के लिए... ये बहुत बड़ा रिस्क है।"

मैंने मुस्कुराकर उसकी आँखों में देखा।

उसके हाथ को दबाया।

"इट्स ओके... ।"

वो चुप रहा।

उसकी आँखें अभी भी नम थीं।

फिर... कार पार्क की।

घर पहुँचने से पहले...

"कल... हम थोड़ा पहले निकलेंगे।

15 मिनट पहले।


मैंने उसे विंक दी।

उसका दिल एक बीट के लिए रुक गया—मैंने महसूस किया।

वो मेरी तरफ देख रहा था—शर्म, एक्साइटमेंट, और थोड़ा डर।

"कल... क्या होने वाला है...?"

घर लौटकर शावर लिया।

इयरफोन लगाए।

पोर्न खोला।

बहुत एक्साइटेड थी।

मैं... कुछ नया सीखना चाहती थी।

कुछ ऐसा... जो कल उसे और पागल कर दे।

कुछ ऐसा... जो कल और गहरा... और इंटेंस हो।

XXXXX

सुबह ठीक 6:45।

मैंने आज भी वही टाइट स्कर्ट और शर्ट पहनी—स्कर्ट थोड़ी और छोटी, शर्ट के ऊपरी बटन खुले।

पैंटी नहीं।

जानबूझकर।

मैं जानती थी... आज 15 मिनट एक्स्ट्रा हैं।

कल रात... पोर्न देखते हुए... मैंने कुछ प्लान किया था।

मैं कार के पास पहुँची।

पहले से ही वहाँ था—१५ मिनट पहले।

पजामा और शर्ट में, लेकिन आज... अंदर पैंट थी—ज़िप वाली।

वो मुझे देखकर मुस्कुराया—उत्सुक, थोड़ा नर्वस, लेकिन बहुत एक्साइटेड।

"गुड मॉर्निंग... आज जल्दी आ गए?"

वो हँसा।

मैं कार में बैठी।

उसे एक गहरी, नॉटी स्माइल दी।

कार चली।

कार अब वही सुनसान रोड पर थी।

अंकल ने स्टीयरिंग पर हाथ रखे रखे कहा—आवाज़ में थोड़ी हिचकिचाहट, थोड़ी उत्सुकता।

"नेहा... वहाँ एक कंस्ट्रक्शन साइट है... बहुत सुनसान... कोई नहीं होगा।

हम... वहाँ रुक सकते हैं।"


मैंने उसकी तरफ देखा।

उसकी आँखें आगे सड़क पर थीं, लेकिन उसका चेहरा... थोड़ा लाल था।

वो नहीं जानता था... मैं क्या प्लान कर रही हूँ।

मैंने मुस्कुराकर सिर हिलाया।

"ओके... चलो वहाँ रुकते हैं।"

उसने कार मोड़ी।

कंस्ट्रक्शन साइट की तरफ।

कार को गेट के अंदर ले लिया।

चारों तरफ दीवारें... अधबनी इमारत... धूल... और सन्नाटा।

कोई नहीं।

वो कार रोककर स्टीयरिंग पर हाथ रखे बैठा रहा।

उसकी साँसें तेज़ थीं।

मैं भी थोड़ी घबरा गई थी—दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।

ये जगह... सच में सुनसान थी।

कोई नहीं दिख रहा था।

मैंने गेट की तरफ देखा।

फिर... कार से उतरी।

धीरे से गेट बंद किया।

चारों तरफ देखा—कोई नहीं।

सिर्फ़ हवा... और दूर से कोई कुत्ते की भौंकने की आवाज़।

मैंने अंकल की तरफ देखा।

उसे एक छोटी-सी स्माइल दी।

वो कार से उतरा।

उसकी पैंट में टेंट साफ़ नज़र आ रहा था—सख्त, उभरा हुआ।

वो मेरी तरफ देख रहा था—आँखें भूख से जल रही थीं, लेकिन थोड़ा डर भी था।

मैंने दीवार की तरफ पीठ करके खड़ी हो गई।

स्कर्ट थोड़ी ऊपर सरकाई।

पैर थोड़े फैलाए।

उसे एक गहरी, नॉटी विंक दी।

वो जैसे जादू में चला आया।

उसकी आँखें मेरी आँखों में टिकी हुईं थीं।

वो मेरे बहुत करीब आया।

उसकी साँसें मेरे चेहरे पर लग रही थीं।

मैंने उसके हाथ पकड़े।

मेरे बहुत करीब था।

उसकी साँसें मेरे चेहरे पर लग रही थीं—गरम, तेज़, थोड़ी काँपती हुईं।

उसकी आँखें मेरी आँखों में टिकी हुई थीं—उत्सुक, थोड़ा डरा हुआ, लेकिन बहुत चाहत भरी।


मैंने धीरे से उसके सिर को हाथों में लिया।

उसके बालों में उँगलियाँ फेरीं।

उसके चेहरे को और करीब खींचा।

हमारे होंठ... बस कुछ इंच दूर।

"अंकल..."

मैंने फुसफुसाया।

उसकी आँखें बंद होने लगीं।

मैंने अपना सिर थोड़ा झुकाया।

हमारे होंठ मिले।

पहला किस... बहुत धीमा... बहुत नरम।

उसने पहले रिस्पॉन्स नहीं किया।

वो... अभी भी हैरान था।

इतने सालों बाद... ऐसा।

मैंने धीरे से अपने होंठ उसके होंठों पर दबाए।

उसकी साँसें और तेज़ हो गईं।

फिर... उसने भी जवाब दिया।

धीरे से... लेकिन गहरा।


मैंने अपने होंठों से उसके होंठों को अलग किया।

फिर... धीरे से... जीभ से उसके होंठों को पार किया।

मेरी जीभ... उसके मुँह में... बहुत धीरे।

उसने भी अपनी जीभ मिलाई।

स्वीट... स्वीट टेस्ट।

उसकी जीभ... मेरी जीभ से खेल रही थी।

हम... दीवार के पास... एक-दूसरे को किस करते रहे।

बहुत लंबा... बहुत गहरा।

ये... मेरा भी पहला... किसी के साथ।

मैं... उसके बालों में उँगलियाँ फेर रही थी।


उसके होंठ... मेरे होंठों से चिपके हुए।

उसकी जीभ... मेरी जीभ में... स्वीट, गरम।

मैंने उसके होंठों को चूसा... हल्का-सा काटा... फिर चूसा।

मेरे मुँह में... सुबह की मिंट की ताज़गी थी—टूथपेस्ट का वो स्वीट, कूल टेस्ट।

उसके मुँह में... थोड़ा सा तंबाकू था... कल रात की बीड़ी का... और सुबह का वो हल्का सा स्वाद।

मुझे पता था... वो थोड़ा शर्मिंदा था—शायद सोच रहा था कि मैं महसूस कर रही हूँ।

लेकिन... मैंने एक सेकंड के लिए भी नहीं रुकने दिया।

नहीं हिचकिचाई।

नहीं पीछे हटी।

मैं... उसे चाहती थी।

बहुत ज़्यादा।

सोसाइटी के सारे नियम... सारे डर... सब पीछे छूट गए थे।

बस... वो थ्रिल... वो चाहत... वो प्यार।

उसके स्वाद में... वो तंबाकू... वो बीड़ी का हल्का सा कड़वाहट... लेकिन वो सब... मुझे और एक्साइट कर रहा था।

उसका स्वाद... उसकी साँसें... सब कुछ... बहुत रियल था।

बहुत इंटेंस।

मेरा हाथ... धीरे से नीचे गया।

उसकी पैंट पर।

उसका टेंट... साफ़ महसूस हो रहा था—सख्त, उभरा हुआ।

मैंने हल्का-सा दबाया।

उसकी साँसें रुक गईं।

फिर... मैंने ज़िप पकड़ी।

धीरे से नीचे की।

उसका लुंड बाहर आया—गरम, सख्त, फड़कता हुआ।

मैंने उसे हाथ में लिया।

नरम... लेकिन सख्त।

उसकी स्किन... मेरी उँगलियों में।

मैंने धीरे से... ऊपर-नीचे... सहलाना शुरू किया।

उसके हाथ... मेरी शर्ट के बटन पर थे।

एक-एक करके... खोलने लगा।

मेरी शर्ट खुल गई।

अंकल ने किस तोड़ा।

उसकी साँसें मेरे चेहरे पर लग रही थीं—गरम, तेज़।

उसने मेरी आँखों में देखा।

उसकी आँखें... बहुत गहरी थीं—चाहत, थोड़ा डर, थोड़ा सपना सा।

वो धीरे से नीचे झुका।

उसके होंठ मेरे स्तनों के पास आए।

वो मेरी शर्ट पूरी तरह खोल चुका था।

मेरे स्तन बाहर—नरम, छोटे, पिंक निप्पल्स... अभी भी सख्त।

वो रुका।

उसने मेरी आँखों में देखा।

फिर... मेरे कान में फुसफुसाया—आवाज़ बहुत धीमी, बहुत प्यार भरी।

"क्या मैं... इन्हें टेस्ट कर सकता हूँ?"

मैंने मुस्कुराकर कहा—

"ये सब... तुम्हारे हैं।"

वो मेरे सामने आ गया।

उसने दोनों स्तनों को नीचे से कप किया।

हथेलियाँ गरम... नरम।

उसने धीरे से... एक निप्पल को मुँह में लिया।

उसकी जीभ... मेरे निप्पल पर... हल्का-सा चक्र बनाया।

फिर... चूसा।

धीरे से... फिर और गहरा।

मैं... सिहर गई।

"आआह्ह..."

ये... मेरा भी पहला था।

किसी ने... मेरे स्तनों को चूसा नहीं था।


किसी के साथ।

मैंने उसके सिर को पकड़ा।

उसके बालों में उँगलियाँ फेरीं।

उसे और करीब खींचा।

"आह्ह...... येस... ऐसे ही..."

वो दूसरे स्तन पर गया।

उसी तरह... जीभ से खेला... चूसा... हल्का-सा काटा।

मैं... कराह रही थी—धीमी, लेकिन गहरी।

मेरी चूत... और गीली हो गई।

मेरा शरीर... काँप रहा था।

वो ऊपर आया।

मेरी आँखों में देखा।

उसके होंठ... मेरे स्तनों की खुशबू से भरे हुए।

"नेहा... तुम... बहुत स्वीट हो।

तुम्हारे स्तन... इतने नरम... इतने परफेक्ट..."

फिर... अचानक... वो रुक गया।

उसने खुद को पीछे खींचा।

उसकी साँसें तेज़ थीं।

उसकी आँखें... डर से भरी हुईं।

वो मेरी तरफ देखकर बोला—आवाज़ काँप रही थी—

"हम... ये नहीं करना चाहिए... ये गलत है... बहुत रिस्की है।"

मैं... दीवार पर पीठ टिकाए खड़ी थी।

मेरे निप्पल्स... अभी भी उसके लार से गीले थे।

मैंने आँखें आधी बंद कर लीं।

उसके शब्द सुनकर... एक पल के लिए... सब रुक गया।

हाँ... वो सही कह रहा था।

ये जगह... ओपन थी।

अगर कोई देख ले... हमारी रेपुटेशन... सब खत्म हो सकता था।

मैंने भी... एक पल के लिए... सोचा।

शायद... ये बहुत बड़ा रिस्क था।

मैंने धीरे से कहा—आवाज़ में थोड़ी समझदारी... थोड़ा दुख।

"इट्स ओके... ।

मैं समझती हूँ।

हम... रिस्क नहीं लेंगे।"

शर्ट के बटन बंद किए।

धीरे-धीरे... सब ठीक किया।

वो भी... पैंट की ज़िप ऊपर की।

हम दोनों... एक-दूसरे की तरफ देखते रहे।

एक पल का सन्नाटा।

फिर... सैम दीवार की तरफ गया।

उसने पैंट की ज़िप नीचे की।

लुंड बाहर निकाला।

और... पेशाब करने लगा।

मैंने देखा।

एक शरारती हँसी आई।

मैं धीरे से उसके पास गई।

उसके पीछे खड़ी हो गई।

फिर... धीरे से... अपना हाथ आगे बढ़ाया।

उसके लुंड को पकड़ लिया।

वो पेशाब कर रहा था... और मेरा हाथ... उस पर।

वो चौंक गया।

"नेहा...?"

मैंने हँसकर कहा—

"तो... ऐसे करते हो तुम लोग?"

मैंने उसे टाइट पकड़ा।

उसके लुंड को... हल्का-सा हिलाया।

उसका पेशाब... दीवार पर... "N" बना रहा था।

जैसे कोई पिचकारी।

वो हँस पड़ा—शर्म से... और मज़े से।

"तुम... पागल हो।"



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Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 15-02-2026, 04:03 PM
RE: Adventure of sam and neha - by rangeeladesi - 17-02-2026, 10:06 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 19-02-2026, 04:47 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 19-02-2026, 06:31 PM
RE: Adventure of sam and neha - by rangeeladesi - 19-02-2026, 10:42 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 20-02-2026, 10:51 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 20-02-2026, 02:14 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 20-02-2026, 03:44 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 20-02-2026, 06:03 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 20-02-2026, 11:00 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 21-02-2026, 05:29 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 21-02-2026, 05:35 PM
RE: Adventure of sam and neha - by rangeeladesi - 21-02-2026, 07:04 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 22-02-2026, 11:55 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 22-02-2026, 12:15 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 24-02-2026, 12:04 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 25-02-2026, 01:03 PM
RE: Adventure of sam and neha - by BHOG LO - 25-02-2026, 01:21 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 28-02-2026, 02:02 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 28-02-2026, 04:06 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 03-03-2026, 12:20 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 03-03-2026, 12:24 PM
RE: Adventure of sam and neha - by vishalisji - 07-03-2026, 12:08 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 09-03-2026, 12:27 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 12-03-2026, 10:56 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 12-03-2026, 11:02 AM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 12-03-2026, 01:09 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 14-03-2026, 07:22 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 15-03-2026, 01:35 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Vkpawar - 15-03-2026, 12:53 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 16-03-2026, 02:35 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 16-03-2026, 05:28 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 17-03-2026, 09:39 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 17-03-2026, 09:49 AM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 17-03-2026, 05:53 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 19-03-2026, 02:06 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 19-03-2026, 02:13 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 19-03-2026, 03:35 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 19-03-2026, 05:57 PM
RE: Adventure of sam and neha - by vishalisji - 25-03-2026, 08:11 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 31-03-2026, 05:15 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 31-03-2026, 05:25 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 31-03-2026, 05:27 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 02-04-2026, 12:57 AM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 02-04-2026, 03:30 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 02-04-2026, 03:34 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 02-04-2026, 03:58 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - 09-04-2026, 03:45 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Glenlivet - 09-04-2026, 07:33 PM
RE: Adventure of sam and neha - by vishalisji - 09-04-2026, 07:59 PM
RE: Adventure of sam and neha - by vishalisji - 12-04-2026, 01:04 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 15-04-2026, 12:02 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 15-04-2026, 12:22 PM
RE: Adventure of sam and neha - by Life_is_short - 15-04-2026, 12:25 PM
RE: Adventure of sam and neha - by sahebraopawar - Yesterday, 12:00 AM



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