02-04-2026, 01:56 PM
पार्ट—11
गतान्क से आगे।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
मेनका ने राजासाहब को लिटा दिया और उनके सीने पे अपनी बड़ी-बड़ी चूचिया रख के लेट गयी,"बॅंगलुर कब जाओगे?"
"सोचते हैं कल ही निकल जाएँ।",राजासाहब उसकी चिकनी कमर सहला रहे थे।
"हमे भी ले जाओगे ना?" मैत्री की कहानी.
"नही,मेनका,तुम्हे तुम्हारे मायके छोड़ देंगे।"
"क्यू?",मेनका अपनी कोहनी पे अपना भार रख थोड़ा उठ गयी। राजासाहब को अपने सीने पे उसकी चूचियो का दबाव बड़ा भला लग रहा था,उसके उठते ही छातिया हटी तो उन्होने हाथ कमर से उपर सरका उसकी पीठ दबा के उसके उरोजो को वापस अपने सीने पे दबा दिया।
"अभी तुम्हारा बॅंगलुर जाना ठीक नही होगा। ये कोई बिज़नेस डील नही है। तुम अपने माता-पिता के पास रहोगी तो हम निश्चिंत रहेंगे कि तुम सही-सलामत हो।"
"और हम कैसे निश्चिंत रहेंगे तुम्हारे बारे मे?",मेनका ने अपनी एक जाँघ उनके उपर चढ़ा दी।
"हमारी फ़िक्र मत करो। हम काम ख़त्म कर जल्दी वापस लौट आएँगे।",उन्होने उसकी जाँघ को खींच अब उसे अपने उपर पूरी तरह से ले लिया। अब मेनका की चूत उनके लंड पे लगी हुई थी। मैत्री की प्रस्तुति.
"तो ठीक है,कल हमे हमारे मायके छोड़ तुम बॅंगलुर चले जाना पर वादा करो कि जैसे ही वहा से वापस आओगे सीधा हमे लेने आओगे।"
"वादा तो कर दे पर तुम्हारे माता-पिता को अजीब नही लगेगा! और फिर वो ये भी तो चाहेंगे कि तुम उनके साथ कुछ और दिन रह लो।",राजासाहब ने उसकी गांड की फांको को फैलाते हुए नीचे से एक धक्का मारा तो लंड 3 इंच तक उसकी चूत मे घुस गया।
"...एयेए..यईईए....!...तुम उस...की चिंता मत क...रो...ऊऊ...ऊओह....मैं वो संभाल लूँगी। तुम एयेए...आहह..बस वा...अदा करो।",मेनका ने उठ कर अपनी कमर हिलाई और पूरा लंड अपने अंदर ले लिया।
"वादा करते हैं,मेरी रानी!",राजासाहब उठ बैठे और उसे अपनी बाहों मे कस उसकी चुचियाँ अपने मुँह मे भर ली। मेनका भी मस्त हो उनसे लिपट कर कमर हिला-हिला कर उन्हे चोदने लगी।
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दोस्तों आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ तब तक के लिए मैत्री की ओर से जय भारत.
गतान्क से आगे।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
मेनका ने राजासाहब को लिटा दिया और उनके सीने पे अपनी बड़ी-बड़ी चूचिया रख के लेट गयी,"बॅंगलुर कब जाओगे?"
"सोचते हैं कल ही निकल जाएँ।",राजासाहब उसकी चिकनी कमर सहला रहे थे।
"हमे भी ले जाओगे ना?" मैत्री की कहानी.
"नही,मेनका,तुम्हे तुम्हारे मायके छोड़ देंगे।"
"क्यू?",मेनका अपनी कोहनी पे अपना भार रख थोड़ा उठ गयी। राजासाहब को अपने सीने पे उसकी चूचियो का दबाव बड़ा भला लग रहा था,उसके उठते ही छातिया हटी तो उन्होने हाथ कमर से उपर सरका उसकी पीठ दबा के उसके उरोजो को वापस अपने सीने पे दबा दिया।
"अभी तुम्हारा बॅंगलुर जाना ठीक नही होगा। ये कोई बिज़नेस डील नही है। तुम अपने माता-पिता के पास रहोगी तो हम निश्चिंत रहेंगे कि तुम सही-सलामत हो।"
"और हम कैसे निश्चिंत रहेंगे तुम्हारे बारे मे?",मेनका ने अपनी एक जाँघ उनके उपर चढ़ा दी।
"हमारी फ़िक्र मत करो। हम काम ख़त्म कर जल्दी वापस लौट आएँगे।",उन्होने उसकी जाँघ को खींच अब उसे अपने उपर पूरी तरह से ले लिया। अब मेनका की चूत उनके लंड पे लगी हुई थी। मैत्री की प्रस्तुति.
"तो ठीक है,कल हमे हमारे मायके छोड़ तुम बॅंगलुर चले जाना पर वादा करो कि जैसे ही वहा से वापस आओगे सीधा हमे लेने आओगे।"
"वादा तो कर दे पर तुम्हारे माता-पिता को अजीब नही लगेगा! और फिर वो ये भी तो चाहेंगे कि तुम उनके साथ कुछ और दिन रह लो।",राजासाहब ने उसकी गांड की फांको को फैलाते हुए नीचे से एक धक्का मारा तो लंड 3 इंच तक उसकी चूत मे घुस गया।
"...एयेए..यईईए....!...तुम उस...की चिंता मत क...रो...ऊऊ...ऊओह....मैं वो संभाल लूँगी। तुम एयेए...आहह..बस वा...अदा करो।",मेनका ने उठ कर अपनी कमर हिलाई और पूरा लंड अपने अंदर ले लिया।
"वादा करते हैं,मेरी रानी!",राजासाहब उठ बैठे और उसे अपनी बाहों मे कस उसकी चुचियाँ अपने मुँह मे भर ली। मेनका भी मस्त हो उनसे लिपट कर कमर हिला-हिला कर उन्हे चोदने लगी।
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दोस्तों आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ तब तक के लिए मैत्री की ओर से जय भारत.


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