02-04-2026, 01:53 PM
"ऊ...ऊओह...प्लीज़....या....श..क...रो ना....!"
"क्या मेरी जान?",राजासाहब वैसे ही लंड रगड़ रहे थे। उन्होने लंड चूत पे रख हल्का सा धक्का दिया और फिर झट से निकाल लिया तो मेनका जोश मे पागल हो गयी। मैत्री की रचना.
"प्लीज़ जा...आन....और मत ताड़....पाओ...अब करो ना!"
"क्या करू? बताओ तो।"
"ऊ....ऊफ़....इसे घुसाओ....",अपनी बात से मेनका खुद शरमा गयी और अपने हाथो से अपना चेहरा ढक लिया।
"इसे क्या कहते हैं,जान?",उन्होने उसके हाथ चेहरे से हटा अपने हाथों मे ले लिए।
"हमे नही पता।",मेनका के गाल लाज के मारे लाल हो गये थे।
"तो ये अंदर भी नही जाएगा।"
"उन्न...उउन्न्ह...प्लीज़।"
"पहले इसका नाम बताओ।"
"हमने कहा ना हमे नही मालूम....एयाया...आअहह...!",राजासाहब ने लंड उसके दाने पे रगड़ दिया था।
"हम बताते हैं, इसे लंड कहते हैं और इसे चूत, अब बोलो कि हम क्या कहा घुसाएँ।"
मेनका का तो शर्म से बुरा हाल था। उसने अपनी आँखे बंद कर रखी थी पर वही उसका जिस्म अब ये तड़पन और बर्दाश्त नही कर सकता था। राजासाहब ने उसकी चूत पे लंड रगड़ना तेज़ कर दिया तो वो और बेचैन हो गयी और अपनी कमर उठा लंड को चूत मे घुसाने की नाकाम कोशिश करने लगी। राजासाहब ने उसके पेट पे हाथ रख उसकी कमर को वापस बिस्तर पे लिटा दिया,जल्दी बोलो।"
मेनका ने आँखे खोली और हाथ बढ़ा लंड को पकड़ लिया,"प्लीज़ यश...पना...अपना...लंड हमारी च..चूत मे घुसाओ।"
कहने की देर थी कि राजासाहब ने अपना लंड एक ही झटके मे उसकी कसी,गीली चूत मे उतार दिया।,"ऊऊ...ऊऊव्व्वव....!",मेनका चीख कर अपने ससुर से चिपक गयी और अपनी कमर हिलाते हुए उनके तेज़ धक्कों का जवाब देने लगी।"...हा...अन्णन्न्...य...श ऐसे....ही....करो....हमे आप....एयाया...आआआआअहह...अपने से....अलग म...त ...कर...ना...ऊऊ...ओओओएएएएएएएएए...!"
राजासाहब ने पहली बार अपनी बहू को चुदाई के दौरान ऐसे बोलते सुना था और उनका जोश तो दुगुना हो गया था। वो जम कर धक्के मार उसे चोद रहे थे,"..नही...मेरी जान,तुम सिर्फ़ हमारी हो। तुम्हे कभी नही छोड़ेंगे...जीवन भर ऐसे ही चोदेंगे....!" प्रस्तुतकरता मैत्री.
कमरे मे अब दोनो की आँहे और मस्त बाते गूँज रही थी। दोनो एक दूसरे के बदन मे डूबे जा रहे थे कि वो घड़ी आ गयी जब अपने उपर कोई ज़ोर नही रहता। मेनका की कमर ज़ोर से हिलने लगी और वो अपने ससुर से चिपक इनकी पीठ मे नाख़ून और कंधों मे दाँत गाड़ते हुए झाड़ गयी। वही राजासाहब के लंड ने जैसे ही उसकी चूत का पानी चखा,उसने भी 2-3 ज़ोरदार झटके मारे और अपने पानी से चूत को भर दिया।
राजासाहब ने करवट ले अपनी बहू को बाहो मे भर लिया और उसके मखमली बदन को प्यार से सहलाने लगे। थोड़ी देर की खामोशी के बाद मेनका ने उनके सीने मे प्यार से मुक्के मारे,"कितनी गंदी बातें बुलवाई हमसे!"
"तुमने भी तो तडपा कर गंदी हरकत की थी। पर सच कहना मज़ा आया की नही।"
जवाब मे मेनका ने शर्मा कर उनके सीने मे मुँह छुपा लिया। राजासाहब नेभी हंसते हुए उसे अपने आगोश मे भर लिया।
क्रमशः।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
बने रहिये दोस्तों...............
"क्या मेरी जान?",राजासाहब वैसे ही लंड रगड़ रहे थे। उन्होने लंड चूत पे रख हल्का सा धक्का दिया और फिर झट से निकाल लिया तो मेनका जोश मे पागल हो गयी। मैत्री की रचना.
"प्लीज़ जा...आन....और मत ताड़....पाओ...अब करो ना!"
"क्या करू? बताओ तो।"
"ऊ....ऊफ़....इसे घुसाओ....",अपनी बात से मेनका खुद शरमा गयी और अपने हाथो से अपना चेहरा ढक लिया।
"इसे क्या कहते हैं,जान?",उन्होने उसके हाथ चेहरे से हटा अपने हाथों मे ले लिए।
"हमे नही पता।",मेनका के गाल लाज के मारे लाल हो गये थे।
"तो ये अंदर भी नही जाएगा।"
"उन्न...उउन्न्ह...प्लीज़।"
"पहले इसका नाम बताओ।"
"हमने कहा ना हमे नही मालूम....एयाया...आअहह...!",राजासाहब ने लंड उसके दाने पे रगड़ दिया था।
"हम बताते हैं, इसे लंड कहते हैं और इसे चूत, अब बोलो कि हम क्या कहा घुसाएँ।"
मेनका का तो शर्म से बुरा हाल था। उसने अपनी आँखे बंद कर रखी थी पर वही उसका जिस्म अब ये तड़पन और बर्दाश्त नही कर सकता था। राजासाहब ने उसकी चूत पे लंड रगड़ना तेज़ कर दिया तो वो और बेचैन हो गयी और अपनी कमर उठा लंड को चूत मे घुसाने की नाकाम कोशिश करने लगी। राजासाहब ने उसके पेट पे हाथ रख उसकी कमर को वापस बिस्तर पे लिटा दिया,जल्दी बोलो।"
मेनका ने आँखे खोली और हाथ बढ़ा लंड को पकड़ लिया,"प्लीज़ यश...पना...अपना...लंड हमारी च..चूत मे घुसाओ।"
कहने की देर थी कि राजासाहब ने अपना लंड एक ही झटके मे उसकी कसी,गीली चूत मे उतार दिया।,"ऊऊ...ऊऊव्व्वव....!",मेनका चीख कर अपने ससुर से चिपक गयी और अपनी कमर हिलाते हुए उनके तेज़ धक्कों का जवाब देने लगी।"...हा...अन्णन्न्...य...श ऐसे....ही....करो....हमे आप....एयाया...आआआआअहह...अपने से....अलग म...त ...कर...ना...ऊऊ...ओओओएएएएएएएएए...!"
राजासाहब ने पहली बार अपनी बहू को चुदाई के दौरान ऐसे बोलते सुना था और उनका जोश तो दुगुना हो गया था। वो जम कर धक्के मार उसे चोद रहे थे,"..नही...मेरी जान,तुम सिर्फ़ हमारी हो। तुम्हे कभी नही छोड़ेंगे...जीवन भर ऐसे ही चोदेंगे....!" प्रस्तुतकरता मैत्री.
कमरे मे अब दोनो की आँहे और मस्त बाते गूँज रही थी। दोनो एक दूसरे के बदन मे डूबे जा रहे थे कि वो घड़ी आ गयी जब अपने उपर कोई ज़ोर नही रहता। मेनका की कमर ज़ोर से हिलने लगी और वो अपने ससुर से चिपक इनकी पीठ मे नाख़ून और कंधों मे दाँत गाड़ते हुए झाड़ गयी। वही राजासाहब के लंड ने जैसे ही उसकी चूत का पानी चखा,उसने भी 2-3 ज़ोरदार झटके मारे और अपने पानी से चूत को भर दिया।
राजासाहब ने करवट ले अपनी बहू को बाहो मे भर लिया और उसके मखमली बदन को प्यार से सहलाने लगे। थोड़ी देर की खामोशी के बाद मेनका ने उनके सीने मे प्यार से मुक्के मारे,"कितनी गंदी बातें बुलवाई हमसे!"
"तुमने भी तो तडपा कर गंदी हरकत की थी। पर सच कहना मज़ा आया की नही।"
जवाब मे मेनका ने शर्मा कर उनके सीने मे मुँह छुपा लिया। राजासाहब नेभी हंसते हुए उसे अपने आगोश मे भर लिया।
क्रमशः।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
बने रहिये दोस्तों...............


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)