02-04-2026, 01:50 PM
थोड़ी देर गांड दबाने के बाद उन्होने ने उसकी पेंटी को घुटनो तक सरका दिया और फिर अपनी टांग उठा कर उसकी पेंटी मे फँसा उसे पूरी तरह से अपनी बहू के जिस्म से अलग कर दिया। अब वो उसकी चूचियाँ चूस रहे थे और हाथ पीछे से उसकी गांड दबाने के बाद उसकी चूत मे घुस उसके दाने को रगड़ रहा था। मेनका जोश मे कमर हिलाने लगी। विश्वा की मौत के पहले उसकी गोरी चूचियाँ उसके ससुर की लव बाइट्स से भरी हुई थी,पर इधर एक महीने मे वो वापस बेदाग हो गयी थी। राजासाहब आज इस ग़लती को सुधारने मे लगे हुए थे और उसके सीने पे अपने होठों के निशान पे निशान छोड़े जा रहे थे। उनकी उंगली की रागड़ाई ने मेनका को फिर से झड़वा दिया।
बने रहिये दोस्तों...........
राजासाहब ने उसे लिटाया और उसकी चूचिया चूमते हुए नीचे उसके पेट पे आ गये,थोड़ी देर तक उनका मुँह उसके पेट और नाभि पे घूमता रहा और फिर वो उसकी जाँघो के बीच आ गये और उसकी टाँगे अपने कंधों पे चढ़ा ली। वो झुक कर उसकी चूत के आस-पास चूमने लगे। मेनका ने अपनी उंगलियो मे उनके बाल पकड़ लिए और बेचैनी से मचलने लगी। चूमते हुए जैसे ही राजासाहब के होंठो ने उसकी चूत को छुआ उसकी कमर हिलने लगी। राजासाहब की जीभ ने उसकी चूत को चाटना चालू कर दिया और उनके हाथ उसकी चूचियो और उनके निपल्स से खेलने लगे। मेनका अपने ससुर के सिर को अपनी भारी जाँघो मे दबा कर उनका मुँह अपनी चूत पे भींचने लगी। "ऊओ...ऊऊहह...या...ष्ह...!"
राजासाहब ने चाट-चाट कर उसकी चूत का सारा रस पी लिया। बीच-बिच मे वो अपने होठ उसकी चूत से हटा उसकी आंद्रूणई जाँघो को चूमने-चूसने लगते और कही भी अपने होंठो के निशान छोड़ देते। उनके हाथ उसकी बाहरी जाँघो को मज़बूती से थामे दबाते,सहलाते और फिर वापस उसकी मस्त चूचियो पे लग जाते। मेनका अपने ससुर की जीभ की चुदाई से 3 बार झड़ी। अब राजासाहब का लंड फिर से तैयार था। मैत्री की पेशकश.
वो उठे और घुटनो के बल अपनी बहू की जाँघो के बीच बैठ गये। उन्होने अपना लंड उसकी चूत की दरार पे एक बार फिराया तो मेनका ने धीरे से अपनी कमर उचका उसे अपने अंदर लेने की कोशिश की। राजासाहब ने अपना लंड उसकी चूत पे ररड़ना शुरू किया। मेनका बेचैन हो गयी,वो चाहती थी की राजासाहब अब उसे अपने नीचे दबा कर उसे जम कर चोदे पर वो तो बस लंड उसकी चूत पे रगड़ कर उसे तडपा रहे थे।
बने रहिये दोस्तों...........
राजासाहब ने उसे लिटाया और उसकी चूचिया चूमते हुए नीचे उसके पेट पे आ गये,थोड़ी देर तक उनका मुँह उसके पेट और नाभि पे घूमता रहा और फिर वो उसकी जाँघो के बीच आ गये और उसकी टाँगे अपने कंधों पे चढ़ा ली। वो झुक कर उसकी चूत के आस-पास चूमने लगे। मेनका ने अपनी उंगलियो मे उनके बाल पकड़ लिए और बेचैनी से मचलने लगी। चूमते हुए जैसे ही राजासाहब के होंठो ने उसकी चूत को छुआ उसकी कमर हिलने लगी। राजासाहब की जीभ ने उसकी चूत को चाटना चालू कर दिया और उनके हाथ उसकी चूचियो और उनके निपल्स से खेलने लगे। मेनका अपने ससुर के सिर को अपनी भारी जाँघो मे दबा कर उनका मुँह अपनी चूत पे भींचने लगी। "ऊओ...ऊऊहह...या...ष्ह...!"
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