02-04-2026, 01:47 PM
मेनका थोड़ी देर तक उन्हे ऐसे ही तडपाती रही और जब उन्हे लगा की वो ऐसे ही उन्हे झड़वा देगी तो उन्हे चौंकाते हुए उसने उनका पूरा लंड अपने मुँह मे भर लिया और चूसने लगी। राजासाहब ने नीचे से ज़ोर-जोर से कमर हिलाकर उसके मुँह को चोदना शुरू कर दिया। मेनका आज जी भर कर उनके लंड को चूसना चाहती थी। उसने हाथ रख कर राजासाहब को कमर हिलाना बंद करने का इशारा किया। उसने अपना मुँह लंड से अलग कर दिया और अपने ससुर की आँखों मे देखते हुए उनके अंडो को नाख़ून से छेड़ने लगी और लंड के आस-पास के बालो को चूमते हुए उन्हे जन्नत की सैर करने लगी।
उसके होठ घूमते हुए उनके अंडो पे कस गये। राजासाहब ने अपने हाथ उसके बालों मे घुसा दिया। मेनका ने लंड को हाथ मे भर ज़ोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया। वो अपने होठ अंडो से हटा उनके लंड पे लाई,राजासाहब को लगा की वो उनका लंड मुँह मे लेने वाली है तो उन्होने ने अपनी कमर उचकाई पर मेनका ने उनको तड़पाते हुए मुँह हटा लिया। अब वो मुँह नीचे लाती और लंड के सिरे के पास लाइ जैसे ही राजासाहब घुसाने को होते तो मुँह वापस खींच लेती। राजासाहब तो तड़प से पागल हो गये। उन्होने उसका सिर पकड़ अपने लंड पे लगा दिया और इस बार अपना लंड एक बार फिर उसके मुँह मे पूरा घुसा दिया।
मेनका ने उनका लंड अपनी मुट्ठी मे भर लिया और हिलाते हुए लगी चूसने। राजासाहब के लिए बात अब बर्दाश्त से बाहर हो गयी थी। उन्होने उसके सर को पकड़ नीचे से ज़ोर-जोर से कमर हिलाते हुए उसके मुँह मे अपना वीर्या गिरा दिया। मेनका उनका वीर्य पीने लगी जिसकी एक बूँद उसके होंठो के कोने से निकल कर उसकी ठुड्डी पे आ गयी। पूरा लंड चाट कर साफ़ करने के बाद वो उठी और अपनी ठुड्डी पे गिर आई उस बूँद को एक उंगली से पोछा और उस उंगली को मुँह मे ले चूसने लगी।
उसकी ये कातिल हरकत देख राजासाहब ने हाथ बढ़ा कर उसे खीच कर अपने उपर ले लिया और उसे चूमने लगे और अपने वीर्य का स्वाद चखने लगे। आज मेनका उन्हे तडपाने के मूड मे थी। जैसे ही राजासाहब ने उसके बदन पे अपनी बहो की गिरफ़्त मज़बूत की वो हँसती हुई अलग हो गयी। उन्होने हाथ बढ़ाया तो वो छितक कर अलग हो बेड से उतर गयी। मैत्री की पेशकश.
राजासाहब उठे और उसकी साडी का पल्लू पकड़ कर उसे अपने पास खींच लिया।,"छोडो ना...मुझे नींद आ रही है।",मेनका उन्हे तड़पाने के इरादे से बोली।
"झूठ मत बोलो,चलो आ जाओ।",वो उसे फिर से बिस्तर पे ले जाने लगे।
"उउन्न्न...नही....नो",मेनका फिर मचली तो राजासाहब ने एक हाथ से उसकी कमर को जकड़ा और दूसरे से उसकी साडी खींच दी।
"ऊन्न्न्ह्ह...बदमाश कहीं के!",मेनका ने उनके सीने पे बनावटी गुस्से मे मुक्के मारे। अगले ही पल उसका पेटिकोट भी ज़मीन पे था और थोड़ी दे बाद वो केवल एक पेंटी मे अपने नंगे ससुर की बाहों मे उनके बिस्तर मे पड़ी उन्हे चूम रही थी। चूमते हुए राजासाहब ने उसकी पीठ पे हाथ फेरते हुए उसकी पेंटी मे हाथ डाल उसकी गांड को दबाने लगे। और उसकी गांड के छेद से खेलने लगे।
बने रहिये दोस्तों............
उसके होठ घूमते हुए उनके अंडो पे कस गये। राजासाहब ने अपने हाथ उसके बालों मे घुसा दिया। मेनका ने लंड को हाथ मे भर ज़ोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया। वो अपने होठ अंडो से हटा उनके लंड पे लाई,राजासाहब को लगा की वो उनका लंड मुँह मे लेने वाली है तो उन्होने ने अपनी कमर उचकाई पर मेनका ने उनको तड़पाते हुए मुँह हटा लिया। अब वो मुँह नीचे लाती और लंड के सिरे के पास लाइ जैसे ही राजासाहब घुसाने को होते तो मुँह वापस खींच लेती। राजासाहब तो तड़प से पागल हो गये। उन्होने उसका सिर पकड़ अपने लंड पे लगा दिया और इस बार अपना लंड एक बार फिर उसके मुँह मे पूरा घुसा दिया।
मेनका ने उनका लंड अपनी मुट्ठी मे भर लिया और हिलाते हुए लगी चूसने। राजासाहब के लिए बात अब बर्दाश्त से बाहर हो गयी थी। उन्होने उसके सर को पकड़ नीचे से ज़ोर-जोर से कमर हिलाते हुए उसके मुँह मे अपना वीर्या गिरा दिया। मेनका उनका वीर्य पीने लगी जिसकी एक बूँद उसके होंठो के कोने से निकल कर उसकी ठुड्डी पे आ गयी। पूरा लंड चाट कर साफ़ करने के बाद वो उठी और अपनी ठुड्डी पे गिर आई उस बूँद को एक उंगली से पोछा और उस उंगली को मुँह मे ले चूसने लगी।
उसकी ये कातिल हरकत देख राजासाहब ने हाथ बढ़ा कर उसे खीच कर अपने उपर ले लिया और उसे चूमने लगे और अपने वीर्य का स्वाद चखने लगे। आज मेनका उन्हे तडपाने के मूड मे थी। जैसे ही राजासाहब ने उसके बदन पे अपनी बहो की गिरफ़्त मज़बूत की वो हँसती हुई अलग हो गयी। उन्होने हाथ बढ़ाया तो वो छितक कर अलग हो बेड से उतर गयी। मैत्री की पेशकश.
राजासाहब उठे और उसकी साडी का पल्लू पकड़ कर उसे अपने पास खींच लिया।,"छोडो ना...मुझे नींद आ रही है।",मेनका उन्हे तड़पाने के इरादे से बोली।
"झूठ मत बोलो,चलो आ जाओ।",वो उसे फिर से बिस्तर पे ले जाने लगे।
"उउन्न्न...नही....नो",मेनका फिर मचली तो राजासाहब ने एक हाथ से उसकी कमर को जकड़ा और दूसरे से उसकी साडी खींच दी।
"ऊन्न्न्ह्ह...बदमाश कहीं के!",मेनका ने उनके सीने पे बनावटी गुस्से मे मुक्के मारे। अगले ही पल उसका पेटिकोट भी ज़मीन पे था और थोड़ी दे बाद वो केवल एक पेंटी मे अपने नंगे ससुर की बाहों मे उनके बिस्तर मे पड़ी उन्हे चूम रही थी। चूमते हुए राजासाहब ने उसकी पीठ पे हाथ फेरते हुए उसकी पेंटी मे हाथ डाल उसकी गांड को दबाने लगे। और उसकी गांड के छेद से खेलने लगे।
बने रहिये दोस्तों............


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