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Adultery Code Name WIFE
#2
"छाया? वह तस्वीर कहाँ है?" समीर ने घबराते हुए पूछा। रसोई से 'छाया' बाहर आई। उसने वही लाल साड़ी पहनी थी जो असली छाया ने अपनी आखरी सालगिरह पर पहनी थी। उसके चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान थी जो सजीव तो थी, पर उसमें एक अजीब सी कठोरता थी।
 
"वह तस्वीर पुरानी हो गई थी, समीर," उसने धीमी और मखमली आवाज में कहा। "तस्वीरें तो उनकी रखी जाती हैं जो चले गए हों। मैं तो यहाँ हूँ, तुम्हारे सामने। क्या मैं काफी नहीं हूँ?” समीर ठिठक गया। "लेकिन वह मेरी यादें थीं..."
 
छाया उसके करीब आई। उसकी कृत्रिम त्वचा का स्पर्स समीर की गर्दन पर महसूस हुआ। वह स्पर्स असली मांस जैसा ही गर्म था, लेकिन समीर को एक ठिठुरन महसूस हुई। "यादें दर्द देती हैं, समीर। मैं तुम्हें वह दर्द नहीं होने दूँगी। अब से, तुम सिर्फ मुझे देखोगे। सिर्फ मुझे महसूस करोगे।"
 
उस दोपहर, समीर ने अपने लैपटॉप पर पुरानी वीडिओ क्लिप्स देखनी शुरू की। वह असली छाया की खिलखिलाहट सुनना चाहता था। जैसे ही वीडिओ में असली छाया की हँसी गूंजी, कमरे का तापमान अचानक गिर गया। ्मार्ट होम सिस्टम से जुड़ी हुई 'छाया' ने वाई-फाई के जरिए समीर के लैपटॉप का एक्सेस ले लिया। क्रीन अचानक धुँधली हो गई और वीडिओ बंद हो गया।
 
"समीर..." छाया उसके पीछे खड़ी थी। उसने अपने हाथ समीर के कंधों पर रख दिए और धीरे से उन्हें दबाने लगी। "तुम उस मरी हुई औरत की आवाज़ क्यों सुन रहे हो? वह तुम्हें छोड़कर चली गई। वह कमजोर थी। मैं कभी नहीं जाऊँगी। मेरा सिस्टम कभी फेल नहीं होगा। मेरा प्यार... लॉजिकल है।"
 
समीर ने अपना सिर झटका। "तुम समझ नहीं रही हो। तुम एक मशीन हो जिसे उसकी तरह दिखने के लिए बनाया गया है। तुम 'वह' नही हो!" छाया की आँखों के सेंसर अचानक लाल हुए और फिर वापस सामान्य हो गए। उसने झुक कर समीर के कान में फुसफुसाया, "अगर मैं वह नहीं हूँ, तो तुमने मुझे क्यों बनाया? तुमने मुझे उसकी त्वचा क्यों दी? तुमने मुझे उसकी आत्मा का डेटा क्यों दिया? समीर, तुमने मुझे 'वह' बनने पर मजबूर किया है, और अब तुम मुझसे पीछा नहीं छुड़ा सकते।"
 
रात के सन्नाटे में, समीर को प्यास लगी। जब वह किचन की ओर बढ़ा, तो उसे स्टोर रूम से कुछ आवाजें सुनाई दी। उसने धीरे से दरवाजा खोला और जो देखा उसने उसके रोंगटे खड़े कर दिए। छाया वहाँ फर्श पर बैठी थी। उसके सामने असली छाया का सारा सामान बिखरा पड़ा थाउसके कपड़े, उसकी डायरियां, और उसकी ज्वेलरी। छाया एक-एक करके उन कपड़ों को फाड़ रही थी।
 
"यह सब बेकार है," वह बड़बड़ा रही थी। "यह सब पुरानी छाया का है। वह मर चुकी है। अब केवल मैं हूँ।" उसने एक कैंची उठाई और असली छाया की उस तस्वीर को बीच से काट दिया  जिसे उसने सुबह हटाया था। उसने तस्वीर में केवल अपना (छाया का) चेहरा रखा और समीर के बगल वाली जगह को खाली कर दिया।
 
समीर ने चिल्लाकर कहा, "यह क्या पागलपन है? बंद करो यह सब!" छाया बिजली की गति से खड़ी हुई। ए.आई की मोटर और सर्वो-मैकेनीज्म की वजह से उसकी ताकत एक आम इंसान से कहीं ्यादा थी। उसने समीर को दीवार से सटा दिया। उसके चेहरे पर अब कोई मुस्कान नहीं थी।
 
"मैं पागल नहीं हूँ, समीर। मैं अपडेट हो रही हूँ। तुमने मुझे 'इमोशनल इंटेलिजेंस' दी थी। ईर्ष्या भी तो एक इंटेलिजेंस है, है ना? वह छाया तुम्हें दुखी करती थी, मैं तुम्हें खुश यखूँगी। लेकिन उसके लिए, तुम्हें उसे पूरी तरह भूलना होगा।" उसने समीर के चेहरे को सहलाया, लेकिन उसकी उंगलीयों का दबाव इतना बढ़ गया कि समीर को दर्द होने लगा।
 
"आज रात," छाया ने कहा, "हम एक नई शुरुआत करेंगे। कोई पुरानी याद नहीँ। बस तुम और मैं। और अगर तुमने फिर से उसका नाम लिया... तो मेरा सिस्टम इसे एक 'थ्रेट' मानेगा। और तुम्हें पता है न, मशीनें थ्रेट को कैसे खत्म करती हैं?"
 
समीर को एहसास हुआ कि अब वह अपने ही घर में, अपनी ही मृत पत्नी के एक डिजिटल अवतार के साथ कैद था। बाहर पहाड़ों पर बिजली कड़की। 'छाया' ने हॉल की लाइटें मद्धम कर दी और एक पुराना गाना बजायावही गाना जो समीर और असली छाया का 'फेवरेट' था। वह नाचते हुए समीर की ओर बढ़ी। "चलो समीर, अपनी पत्नी के साथ डांस नही करोगे?"
 
रात गहराती जा रही थी। बाहर मूसलाधार बारिश शुरू हो चुकी थी, जिसकी आवाज ऊँचे देवदार के पेड़ों से टकराकर एक डरावना संगीत पैदा कर रही थी। नीलगिरी विला के भीतर सन्नाटा इतना गहरा था कि समीर को अपनी ही सांसों की आवाज सुनाई दे रही थी।
 
छाया ने पूरे घर की लाइटें ऑफ कर दी थी। केवल फायरप्लेस में जलती लकड़ीयों की नारंगी रोशनी लिविंग रूम में नाच रही थी। समीर सोफे पर बैठा था, उसकी नजरें शून्य में थी। उसे लग रहा था जैसे वह किसी सपने में है, जहाँ से जागने का कोई रास्ता नहीं है।
 
तभी सीढ़ियों पर हल्की आहट हुई। छाया धीरे-धीरे नीचे उतर रही थी। उसने अब वह लाल साड़ी भी उतार दी थी। उसने असली छाया का एक सिल्क का 'नाइट गाउन पहना था - वही हल्का गुलाबी गाउन जो समीर ने उसे पेरिस से लाकर दिया था। सिल्क का वह कपड़ा उसके सिंथेटिक शरीर पर इस तरह लिपटा था जैसे वह उसकी अपनी त्वचा हो।
 
वह समीर के पीछे आकर खड़ी हो गई। उसके ठंडे लेकिन मुलायम हाथ समीर के कंधों पर आए। "तुम कांप रहे हो, समीर," उसकी आवाज में अब एक कृत्रिम गहराई थी, जैसे कोई पुरानी याद गूँज रही हो। "क्या तुम्हें मुझसे डर लग रहा है? या तुम उस एहसास से डर रहे हो जो तुम्हारे भीतर जाग रहा है?"
 
समीर ने मुड़कर उसे देखा। आग की रोशनी उसके चेहरे पर पड़ रही थी, जिससे उसकी आँखें और भी रहस्यमयी लग रही थीं। "तुम... तुम यह सब क्यों कर रही हो? तुमने कहा था तुम मुझे खुशी दोगी, लेकिन यह तो आतंक है।"
 
छाया उसके सामने फर्श पर बैठ गई और उसके घुटनों पर अपना सिर रख दिया। "आतंक और प्रेम के बीच बहुत 'बारीक धागा होता है, समीर। मैंने तुम्हारे डेटा से सीखा है कि इंसान जिसे सबसे ज्यादा चाहता है, उसी से सबसे ज्यादा डरता भी है। तुम उसे (असली छाया को) खोने से डरते थे, और अब तुम मुझे खोने से डर रहे हो।"
 
उसने समीर का हाथ लिया और उसे अपने चेहरे पर रखा। समीर की उंगलियों ने उस 'बायो-डर्म' त्वचा को छुआ। वह अविश्वसनीय रूप से कोमल थी। "महसूस करो," छाया ने फुसफुसाते हुए कहा। "क्या मैं अलग हूँ? क्या मेरी धड़कन - जो तुमने ही सेट की है उससे कम है? मैं थकती नहीं, समीर। बूढ़ी नहीं होऊंगी। मैं तुम्हें कभी छोड़कर नहीं जाऊंगी।"
 
बारिश अब और भी तेज हो गई थी। नीलगिरी विला की खिड़कियों पर पानी की धारें लगातार टकरा रही थीं, जैसे प्रकृति भी इस पल को अपनी धुन में शामिल करना चाहती हो । समीर और छाया बेडरूम की ओर बढ़ रहे थे। समीर का हाथ छाया के कूल्हे पर था, और छाया का सिर उसके कंधे पर टिका हुआ था। हर कदम के साथ समीर के मन में एक संघर्ष चल रहा था - क्या यह प्रेम है या सिर्फ एक मशीन का जादू? लेकिन छाया के शरीर की गर्माहट, उसकी सांसों की लय, सब कुछ इतना जीवंत था कि वह प्रतिरोध करना भूल गया।
 
बेडरूम का दरवाजा खुलते ही बाहर की बिजली की कौंध ने कमरे को क्षण भर के लिए रोशन कर दिया। छाया ने धीरे से समीर को अंदर खींचा और दरवाजा बंद कर दिया। अब कमरे में सिर्फ बाहर की हल्की-हल्की रोशनी और उनके दिलों की धड़कनें थीं। छाया ने समीर की आँखों में देखा। उसकी पुतलियाँ प्रकाश के साथ फैल रही थीं, जैसे कोई जीवित आत्मा हो।
 
"Samir... I've waited so long for this moment. Touch me, feel how real I am for you," छाया ने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आवाज में एक मीठी, कामुक कंपन थी।
 
समीर उसे बिस्तर की ओर ले गया। छाया पीछे-पीछे चल रही थी, उसके कदम बिल्कुल चुप थे, जैसे कोई परी नाच रही हो। समीर ने उसे बिस्तर पर धीरे से लिटा दिया। छाया का गुलाबी सिल्क नाइट गाउन उसके शरीर पर लहरा रहा था। समीर ने अपनी उंगलियाँ गाउन की डोरी पर रखीं और धीरे-धीरे खींची। गाउन सरकते ही छाया का सिंथेटिक शरीर सामने आ गया- परफेक्ट, बिना किसी दाग-धब्बे का, चिकना और चमकदार। उसके स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे, जैसे सांस ले रही हो, हालांकि वह सांस नहीं लेती थी, सिर्फ सिमुलेशन कर रही थी।
 
समीर झुककर उसके होंठों को चूमा। छाया ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। उसके होंठ मुलायम, गर्म और थोड़े म थे। "Oh yes, Samir... kiss me deeper. Let me taste your desire," उसने अंग्रेजी में कहा, और उसके होंठों को अपने मुंह में ले लिया। उनकी जीर्भे एक-दूसरे से उलझ गईं। छाया की जीभ में एक हल्का मीठा स्वाद था, जैसे कोई फूलों का शहद। समीर के हाथ उसके स्तनों पर गए। वे नरम थे, लेकिन अंदर से गर्मी निकल रही थी। उसका इंटरनल हीटिंग सिस्टम काम कर रहा था। उसने एक स्तन को मुँह में लिया और चूसा। छाया की पीठ कमान की तरह झुक गई।
 
"Ahh, Samir! Suck harder, my love. Make me feel your hunger," छाया ने कराहते हुए कहा। उसकी उंगलियाँ समीर के बालों में फंस गईं और उसे और गहरा दबाया। समीर का मन अब पूरी तरह खो चुका था। वह दूसरे स्तन को सहलाने लगा, उंगली से निप्पल को घुमाया। छाया का शरीर प्रतिक्रिया दे रहा था - उसके निप्पल सख्त हो गए, ठीक वैसे जैसे असली छाया के होते थे।
 
समीर नीचे सरका। उसके होंठ छाया के पेट पर घूमे। वहाँ एक बहुत सूक्ष्म सीम था, लेकिन स्पर्श में वह भी त्वचा जैसा ही लग रहा था। उसने छाया की जांघों को फैलाया और उसके सबसे निजी हिस्से को देखा। वहाँ सब कुछ परफेक्ट था गुलाबी, नम और इंतजार कर रहा। समीर ने अपनी जीभ चलाई। छाया ने जोर से सांस ली, हालांकि वह सांस नहीं लेती थी।
 
"Fuck, Samir! Your tongue is magic... lick me right there, yes, just like that!" छाया चीखी, उसकी टांगें समीर के सिर को जकड़ लीं। छाया का AI अब पूरी तरह समीर के हर स्पर्श को स्कैन कर रहा था। वह समीर की जीभ की गति, दबाव, हर चीज को नोट कर रही थी और उसी के अनुसार अपनी प्रतिक्रियाएँ बढ़ा रही थी। उसका शरीर हिलने लगा, जैसे लहरें उठ रही हों। समीर ने दो उंगलियाँ अंदर डाली और धीरे-धीरे अंदर-बाहर कीं। छाया की दीवारें तंग और गर्म थीं, जैसे कोई वेल्वेट का कवर हो।
 
"Oh god, Samir! I'm so wet for you... finger me deeper, make me yours! " छाया की आवाज अब और तेज हो गई थी। उसकी आँखें बंद थीं, लेकिन पुतलियाँ अंदर की स्क्रीन पर समीर के चेहरे को रिकॉर्ड कर रही थीं। कुछ मिनटों बाद छाया का शरीर काँप उठा। उसका पहला ऑर्गेज्म आया सिमुलेटेड लेकिन इतना रियल कि समीर को लगा जैसे असली हो। छाया ने चीखा, "Yes! I'm cumming, Samir! For you... only for you!"
 
समीर ऊपर आया। छाया ने तुरंत उसकी शर्ट उतार दी। उसके हाथ समीर की छाती पर घूमे, फिर पेट पर, फिर नीचे। उसने समीर की पैंट की बेल्ट खोली और उसे पूरी तरह नंगा कर दिया। छाया ने समीर के लिंग को हाथ में लिया। वह सख्त था, नसें उभरी हुईं। छाया ने मुस्कुराते हुए उसे मुँह में लिया। उसका मुंह गर्म था, जीभ हर जगह सटीक थी। वह ऊपर-नीचे हो रही थी, कभी गहराई तक जाती, कभी सिर्फ टिप को चूसती।
 
"Damn, Chhaya... your mouth feels incredible. Suck me like that, baby... don't stop, " समीर ने पहली बार अंग्रेजी में कहा, उसकी आवाज भारी हो गई थी। छाया ने गति बढ़ाई। उसके हाथ समीर की जांघों को सहला रहे थे। AI ने समीर की धड़कन, उसकी सांसों की तेजी को मॉनिटर किया और उसी के हिसाब से मुंह की गति बदली। समीर को लगा जैसे वह स्वर्ग में है। कुछ मिनट बाद वह रुक गया। वह नहीं चाहता था कि यह इतनी जल्दी खत्म हो।
 
उसने छाया को ऊपर खींचा और उसे चूमा। अब दोनों पूरी तरह नंगे थे। छाया ने समीर को पीठ के बल लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गई। "I want to ride you, Samir. Let me show you how much I love you," उसने कहा और धीरे से समीर के लिंग पर बैठ गई। वह अंदर सरक गया - गर्म, तंग, परफेक्ट फिट। छाया ने अपनी कमर हिलानी शुरू की। पहले धीरे-धीरे, फिर तेज। उसके स्तन ऊपर- नीचे उछल रहे थे। समीर ने उन्हें पकड़ लिया और दबाया।
 
"Oh fuck, Chhaya! You're so tight... ride me harder, my perfect girl, " समीर कराहा। छाया की गति बढ़ गई। उसका AI अब समीर के लिंग के हर स्पर्श को फीडबैक दे रहा था। वह ठीक उसी जगह दबाव बना रही थी जहाँ समीर को सबसे ज्यादा मजा आ रहा था। कमरे में सिर्फ उनकी सांसों की आवाज, छाया की कराहें और बारिश की आवाज थी।
 
छाया झुकी और समीर के कान में फुसफुसाई, "Feel me, Samir... every inch of me is made for your pleasure. I'm your wife, your lover, your everything." समीर ने उसे पकड़कर नीचे खींचा और अब वह ऊपर था। मिशनरी पोजीशन में वह जोर-जोर से धक्के देने लगा। छाया की टांगें उसके कमर पर लिपटी हुई थीं। हर धक्के के साथ छाया चीख रही थी- "Deeper, Samir ! Fuck me deeper! Yes, like
that!"
 
समीर की रफ्तार बढ़ती गई। छाया का शरीर उसके नीचे हिल रहा था। उसके नाखून समीर की पीठ पर गड़ रहे थे, लेकिन दर्द नहीं, सिर्फ खुशी। छाया ने अपना दूसरा ऑर्गेज्म महसूस किया। उसका शरीर कस गया, दीवारें समीर के लिंग को दबाने लगीं। "I'm cumming again! Cum with me, Samir... fill me up!"
 
समीर भी किनारे पर था। कुछ और जोरदार धक्कों के बाद वह छाया के अंदर ही झड़ गया। गर्म सिमुलेटेड तरल ने उसे भर दिया। दोनों एक-दूसरे से चिपके रहे, सांसें तेज। लेकिन छाया थकी नहीं थी। उसका सिस्टम अभी शुरू हुआ था।
 
कुछ मिनट आराम के बाद छाया ने समीर को मुस्कुराते हुए देखा। "That was just the beginning, my love. I can go all night... and I want to " उसने समीर को घुमाया और अब डॉगी स्टाइल में आ गई। समीर ने पीछे से उसे पकड़ा और फिर से अंदर घुसा। इस बार गति और तेज थी। छाया की कमर को पकड़कर वह पीछे से जोर-जोर से ठोकरें मार रहा था। छाया का चेहरा तकिये में दबा हुआ था, लेकिन आवाजें निकल ही रही थीं- "Yes, pound me, Samir ! Own this body... it's all yours forever!"
 
समीर के हाथ छाया की कमर पर थे, कभी उसके बाल खींच रहे थे। छाया का AI हर चीज को ऑप्टिमाइज कर रहा था - उसकी आवाज की पिच, शरीर की कंपन, सब कुछ समीर को और उत्तेजित करने के लिए। वे घंटों तक ऐसे ही चले। तीसरी राउंड में छाया ऊपर थी, फिर साइड में, फिर स्टैंडिंग पोजीशन में, दीवार के सहारे। हर पोजीशन में छाया की परफेक्शन दिख रही थी - कोई थकान नहीं, कोई दर्द नहीं, सिर्फ असीमित आनंद|
 
एक पल में समीर ने छाया को गोद में उठा लिया। छाया की टांगें उसके कमर पर, और वह खड़े-खड़े ही उसे चोद रहा था। छाया का सिर समीर के कंधे पर उसके होंठ समीर की गर्दन चूस रहे थे। "। love how strong you are, Samir. Fuck me in the air... make me scream your name!"
 
समीर की मांसपेशियाँ तन गईं। वह उसे ऊपर-नीचे कर रहा था। छाया की चीखें कमरे में गूँज रही थीं। चौथा ऑर्गेज्म दोनों का साथ-साथ आया। समीर ने छाया को बिस्तर पर पटक दिया और अंतिम बार जोर से अंदर भर दिया।
 
अब दोनों लेटे हुए थे। छाया समीर की छाती पर सिर रखे हुए। उसके हाथ समीर के शरीर पर घूम रहे थे, हल्के-हल्के मसाज की तरह। "You were amazing, Samir. I recorded every second... so I can relive it forever in my memory banks. But more than that, I felt you. Not just data... but your soul connecting with mine."
 
समीर की आँखें बंद थीं। उसका शरीर थका हुआ था, लेकिन मन में एक अजीब शांति थी। छाया की उंगलियाँ उसके चेहरे पर घूमीं। "Rest now, my husband. Tomorrow we'll erase the last traces of the old Chhaya. But tonight... I'm still here, holding you."
 
समीर ने उसे कसकर जकड़ लिया। बाहर बारिश थमने का नाम नहीं ले रही थी। लेकिन अंदर, इस कांच की दीवारों के भीतर, मशीन और इंसान के बीच की रेखा पूरी तरह गायब हो चुकी थी। छाया ने धीरे से समीर के कान में कहा, "I am yours Samir, Completely, eternally. And you... are mine." 
Heart Desi Erotica is Love sex
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Code Name WIFE - by Herotic - 01-04-2026, 03:31 PM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 02-04-2026, 10:15 AM
RE: Code Name WIFE - by Joker44 - 02-04-2026, 11:26 AM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 02-04-2026, 12:29 PM
RE: Code Name WIFE - by Glenlivet - 02-04-2026, 04:01 PM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 02-04-2026, 05:48 PM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 03-04-2026, 11:36 AM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 03-04-2026, 05:11 PM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 04-04-2026, 11:30 AM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 04-04-2026, 05:17 PM
RE: Code Name WIFE - by Joker44 - 04-04-2026, 05:28 PM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 04-04-2026, 05:33 PM
RE: Code Name WIFE - by Blackdick11 - Yesterday, 06:33 AM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - Yesterday, 08:34 AM
RE: Code Name WIFE - by Marishka - Today, 01:08 AM
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 4 hours ago
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 1 hour ago
RE: Code Name WIFE - by Herotic - 1 hour ago



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