01-04-2026, 04:53 PM
![[Image: xxx.png]](https://i.ibb.co/8ndS1NQS/xxx.png)
Part 5
आरव घुटनों पर टॉयलेट सीट के पास बैठ गया, उसकी आंखें सुनीता के पेशाब पर टिकी हुईं, जैसे कोई भक्त अमृत को निहार रहा हो। उसे सुनीता की पेशाब की गर्मी अभी भी महसूस हो रही थी, हल्का पीला रंग चमक रहा था, और सतह पर बुलबुले तैर रहे थे जो धीरे-धीरे फट रहे थे , जैसे सुनीता की चूत ने अभी-अभी अपनी हवस की निशानी छोड़ी हो - उसने सोंचा की शायद पेशाब करते समय चाची की चूत में थोड़ी सी उत्तेजना हुई होगी, और उसने चूत को सहलाया होगा। आरव ने अपनी नाक को और करीब किया, लगभग टॉयलेट सीट के अंदर, और गहरी सांस ली, जैसे हवा को सोख रहा हो। सुनीता की पेशाब की महक इतनी मादक और तीखी थी कि उसके मुंह में पानी आ गया, जीभ पर लार जमा हो गई, और वह कल्पना करने लगा कि यह महक उसकी मां सामान चाची की चूत की है - वही चूत, जो घनी काली झांटों से ढकी हुई है, जो उसने कभी नहीं देखी, लेकिन अब उसकी कल्पना में पूरी नंगी नाच रही थी, चूत के होंठ फैले हुए, गुलाबी मांस चमकता हुआ, और झांटें गीली होकर चिपकी हुईं। उसकी मां जैसी चाची की चूत की नमकीन, हल्की खट्टी खुशबू उसके दिमाग को पागल कर रही थी, जैसे वह चूत को चूसने के लिए तैयार हो। वो सोचने लगा कि सुनीता की चूत कैसी होगी - गुलाबी और फूली हुई, गीली और रसदार, झांटों के घने जंगल में छुपी हुई, जो किसी मोटे, काले लंड को अंदर खींचने के लिए हमेशा तैयार रहती, जहां पीरियड्स के समय खून बहता होगा और सैनिटरी पैड चूत को भिगोता होगा, लेकिन अब वह हवस से भरी थी।
उसकी आंखें टॉयलेट सीट के किनारे पर पड़ीं, और उसका दिल और जोर से धड़कने लगा, जैसे कोई खजाना मिल गया हो। वहां, टॉयलेट सीट के सामने और अंदर की तरफ, 3-4 मोटी, काली, घुंघराली झांटें पड़ी हुई थीं | ये सुनीता की चूत की झांटें थीं, जो शायद पेशाब करते वक्त गिर गई थीं, जब चूत की धार ने झांटों को हिलाया होगा। वो झांटें, अभी भी गीली और चमकती हुई, टॉयलेट सीट पर बिखरी पड़ी थीं, जैसे सुनीता की चूत ने अपनी हवस की सबसे अंतरंग निशानी छोड़ दी हो - झांटें जो चूत के होंठों से चिपकी रहती होंगी, पसीने और चूत के पानी से सनी हुई। आरव का लंड अब इतना सख्त था कि उसका लोअर फटने को था, लंड की टोपी गीली हो गई थी प्री-कम से, और वह महसूस कर रहा था कि अगर थोड़ा सा और छुआ तो रस निकल जाएगा। उसने एक झांट को अपनी उंगली से सावधानी से उठाया, जैसे कोई कीमती हीरा हो, और उसे अपनी नाक के पास लाया, गहरी सांस ली। सुनीता की चूत की गंध, उस झांट में बसी हुई, इतनी तीखी और नशीली थी कि आरव का सारा बदन सिहर उठा, उसके लंड में कंपन हो गया, जैसे चूत की महक सीधे लंड तक पहुंच गई हो। उसने झांट को अपनी उंगलियों के बीच रगड़ा, उसकी बनावट को महसूस किया - मोटी, घुंघराली, हल्की-सी नम और चिपचिपी, जैसे सुनीता की चूत का स्पर्श हो, जहां झांटें चूत के गुलाबी होंठों को ढकती होंगी और चुदाई के समय लंड को गुदगुदाती होंगी। उसने कल्पना की कि ये झांटें उसकी चूत के ऊपरी हिस्से से टूटी होंगी, जहां चूत का क्लिटोरिस छुपा होता, या नीचे से जहां चूत का छेद गर्म रहता, और पेशाब की धार ने उन्हें गिरा दिया होगा। उसने झांट को अपनी जीभ पर रखा, धीरे से चाटा, और उसकी गंध और हल्का नमकीन स्वाद ने उसके लंड को और तड़पाया, जैसे वह सुनीता की चूत को चूस रहा हो। सुनीता की चूत की गंध, झांटों में बसी हुई, इतनी मादक थी कि वो उसकी चूत से निकलने वाले ममतामयी लेकिन हवस भरे अमृत को पीने के लिए पागल हो गया, जैसे वह सुनीता की चूत पर मुंह लगाकर सारा मूत और चूत का पानी चूस ले। उसने दूसरी झांट को उठाया, और उसे अपने लंड पर रगड़ा - उसने लोअर नीचे सरकाया, लंड बाहर निकाला, जो अब मोटा, काला और फूला हुआ था, सुपारे पर गीला रस चमक रहा था - और झांट को लंड की लंबाई पर फेरा, जैसे सुनीता की चूत की झांटें उसके लंड को सहला रही हों। उसकी चूत की झांटें, गीली और मादक, उसके लंड पर फिसल रही थीं, और उसका लंड रस छोड़ने को तैयार था, हर रगड़ पर फड़क रहा था, जैसे चुदाई की शुरुआत हो।
आरव की आंखें बंद हो गईं, और उसका दिमाग सुनीता की चूत की दुनिया में पूरी तरह खो गया, जैसे वह चूत के अंदर घुस गया हो। उसने कल्पना की कि सुनीता अभी-अभी यहां थी, अपनी साड़ी ऊपर उठाए, पेटीकोट कमर तक चढ़ाया, अपनी मोटी जांघें खोले, और चूत को टॉयलेट सीट के ऊपर रखे - चूत का मुंह फैला हुआ, गुलाबी होंठ चमकते, और झांटें पसीने से सनी हुईं। उसकी चूत, घनी काली झांटों से ढकी, गीली और गर्म, पेशाब की धार छोड़ रही थी - जोरदार धार जो चूत के छेद से निकलकर सीट पर गिर रही होगी, और सुनीता की गांड हल्की-हल्की हिल रही होगी मजा में। उसने सोचा कि सुनीता की चूत का गुलाबी मुंह, झांटों के जंगल में छुपा हुआ, चमक रहा होगा, और उसकी पेशाब की गर्म धार चूत के होंठों से निकल रही होगी, शायद थोड़ा सा चूत का पानी भी मिला हुआ, क्योंकि सुनीता की चूत हमेशा हवस से गीली रहती। उसकी चूत की गंध, जो अब बाथरूम में फैली हुई थी, उसकी नाक में घुस रही थी, और उसका लंड हर सांस के साथ और सख्त हो रहा था, जैसे चूत की महक लंड को चोदने का आदेश दे रही हो। उसने कल्पना की कि वो सुनीता की चूत को अपने सामने देख रहा है - गुलाबी, नम, और झांटों से भरी हुई, जहां वह अपनी जीभ डालेगा, झांटों को चूस लेगा, और चूत के रस को पीएगा। उसकी चूत का मुंह, गीला और चमकता हुआ, किसी मोटे लंड को निगलने को तैयार, और वह कल्पना कर रहा था कि वह अपनी जीभ चूत के क्लिटोरिस पर रगड़ेगा, चूत के होंठ चूसेगा, और सुनीता की सिसकारियां सुनेगा। उसकी चूत की गंध, जो अब उसके मुंह में थी, उसे और पागल कर रही थी, जैसे वह चूत को चाट-चाटकर साफ कर रहा हो। वो सोचने लगा कि सुनीता की चूत को चोदते वक्त वो उसकी झांटों को सहलाएगा, झांटों को मुट्ठी में पकड़ेगा, और चूत के होंठों को अपनी उंगलियों से फैलाएगा, ताकि उसका मोटा लंड चूत की गहराई में घुस जाए, चूत की दीवारों को रगड़े, और सुनीता की चूत फटने की कगार पर आ जाए।
आरव का दिमाग अब सुनीता की गांड पर चला गया, जैसे चूत की कल्पना से गांड की हवस जागी हो। उसने सोचा कि सुनीता की गांड, मोटी और गदराई, टॉयलेट सीट पर फैली हुई होगी, जब वो पेशाब कर रही थी—गांड के गाल दबे हुए, गांड का छेद हल्का खुला, और पेशाब की धार के साथ गांड की गर्मी बढ़ रही होगी। उसकी गांड का उभार, साड़ी के नीचे लहराता हुआ, उसने कई बार देखा था, लेकिन अब कल्पना कर रहा था कि गांड नंगी कैसी होगी—नरम, भारी, और चुदाई के लिए बनी हुई, जहां गांड के गालों के बीच गहरा खांचा होगा, और गांड का छेद गुलाबी और टाइट। उसने कल्पना की कि वो सुनीता की साड़ी उठाएगा, पेटीकोट नीचे करेगा, और उसकी गांड को अपने हाथों में लेगा, मोटे गालों को मसलेगा, उंगलियां गांड के खांचे में डालेगा, और गांड के छेद को अपनी उंगली से सहलाएगा, धीरे-धीरे अंदर डालेगा। उसकी गांड की गर्मी, जो शायद पेशाब करते वक्त और बढ़ गई होगी, उसके लंड को और तड़पाएगी, जैसे गांड का छेद लंड को बुला रहा हो। उसने सोचा कि वो सुनीता की गांड को थपथपाएगा, जोरदार थप्पड़ मारेगा, और उसकी चीखें सुनकर उसका लंड और सख्त होगा, जैसे गांड लाल हो जाएगी। उसकी गांड का छेद, जो शायद उसकी चूत की तरह ही गर्म और नम होगा, उसके लंड को ललकारेगा, और वह कल्पना करने लगा कि वो सुनीता की गांड में अपना मोटा लंड डालेगा, धीरे-धीरे घुसाएगा, गांड के छेद को फैलाएगा, और साथ में चूत को अपनी उंगलियों से चोदेगा - दो उंगलियां चूत में, जहां झांटें उंगलियों को गुदगुदाएंगी, और गांड हर धक्के के साथ हिल रही होगी, सुनीता की चूत और गांड दोनों एक साथ चुदाई में डूबी हुई। सुनीता की गांड की मादकता, उसकी चूत की गंध के साथ मिलकर, उसके दिमाग को हवस की आग में जला रही थी, जैसे वह अब चूत और गांड दोनों को चोदने के लिए तैयार हो, और उसका लंड फटने को था।


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)