01-04-2026, 04:15 PM
"यश,दुनिया की नज़रो मे मैं एक विधवा हू और विश्वा को गुज़रे बस महीना भर ही हुआ है।लोग क्या कहेंगे?"
"गांड मराने गए लोग,ज़माना कहा से कहा पहुँच गया है और हमलोग अभी तक लिबास के रंग मे अटके हैं। हम देखेंगे कौन क्या कहता है।किस भोसड़ीके में इतना दम है की तुम्हे कुछ कह जाए।" मैत्री की पेशकश.
"समझने की कोशिश करो,यश। लोगो की हमारे परिवार से कुछ उम्मीदें होती हैं,उनके लिए हमे कुछ दिन तक ऐसे कपड़े पहन ने ही चाहिए।"
"ठीक है तो विश्वा की मौत के 3 महीने पूरे होने के बाद तुम ये सफेद साडी नही पहनॉगी।",राजासाहब उसे साथ लेकर अपने बिस्तर पे बैठ गये। उन्होने उसके कंधे पे अपना हाथ रखा हुआ था।
"अच्छा बाबा! जैसा तुम कहो।",मेनका ने उन से सॅट के बैठते हुए उनका हाथ अपने हाथों मे दबा लिया। मेनका पिछले एक महीने से नही चुदी थी। महल का माहौल विश्वा की मौत के कारण ऐसा हो गया था कि चुदाई का ख़याल उसके दिमाग़ से मीलो दूर था। पर इधर 2 दीनो से रात मे उसे राजासाहब के लंड की ज़रूरत महसूस होने लगी थी। मेनका,जोकि हर रात कम से कम 3-4 बार चुदती थी,उसे पिछली दो रातों को अपने जिस्म को ठंडा करने के लिए अपनी उंगली का सहारा लेना पड़ा था।
आज कई दीनो बाद उसका प्रेमी उसे अपने पुराने रंग मे आता दिख रहा था और उसकी चूत राजासाहब के लंड के लिए बेकरार होने लगी थी। उसे शांत करने के लिए वो अपनी टांग पे टांग चढ़ा के बैठ गयी और चूत को अपनी जांघों मे भींच लिया। उसे पता नही चल रहा था कि राजासाहब चुदाई के मूड मे है या नही। उसने बात आगे बढ़ने की गरज से पूछा,"तुम्हे तो याद भी नही होगा कि डॉक्टर पुरनदरे और बॅंगलुर पोलीस के अफ़सर तुमसे मिलके गये थे?"
"याद है पर बस इतना ही की डॉक्टर साहब माफी माँग रहे थे और पोलिस वाले फॉरमॅलिटीस पूरी करने के लिए कह रहे थे।",उनका हाथ मेनका के कंधे से फिसल कर नीचे उसकी नंगी कमर पे आ गया था। मैत्री की रचना.
"डॉक्टर साहब को यकीन है कि विश्वा खुद भागा नही था बल्कि कुछ और बात है। पोलिसवालो का भी कहना है की पोस्टमोर्टाम रिपोर्ट तो ड्रग ओवरडोस का कारण बताती है पर ये कौन बताएगा कि ड्रग्स उसने खुद लिए थे या किसी ने ज़बरदस्ती इंजेक्ट किए थे!" बात तो गंभीर हो रही थी पर मेनका इतने दीनो बाद अपने ससुर के करीब आने पर गरम हुए जा रही थी।
"ह्म्म। मुझे बॅंगलुर जाना पड़ेगा। अब पानी सर से उपर गुज़र गया है। इसके पीछे जो भी है उसे बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।"
"तुम पोलीस की मदद क्यू नही लेते? मैं नही चाहती तुम ख़तरे मे पडो।" उसने प्यार से राजासाहब के चेहरे पे हाथ फेरा।
"नही,मेनका,पोलीस के पास गया तो दुश्मन सतर्क हो जाएगा। इसबार मैं उसे बच के नही जाने दूँगा। हो ना हो इसमे जब्बार का ही हाथ है।"
"जो भी करना बहुत सावधानी से करना और ये ध्यान मे रखना कि तुम्हारे साथ मेरी जान भी जुड़ी है।", मेनका के जिस्म की आग की दाहक उसकी आँखों मे अब साफ़ नज़र आ रही थी। राजासाहब ने उसकी नशे से बोझिल आँखें देखी तो उनके दिल मे भी वोही आग भड़क उठी। उन्होने उसकी कमर पकड़ कर अपनी ओर खींची और अपने होठ उसके तपते होठों पे रख दिए। मेनका तो इसी बात का इंतेज़ार कर रही थी। वो उनसे चिपक गयी और दोनो एक दूसरे को पागलो की तरह चूमने लगे।राजासाहब उसके चेहरे को और गर्दन को अपनी किसो से सराबोर किए जा रहे थे।
आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ तब तक के लिए मैत्री की तरफ से जय भारत.
"गांड मराने गए लोग,ज़माना कहा से कहा पहुँच गया है और हमलोग अभी तक लिबास के रंग मे अटके हैं। हम देखेंगे कौन क्या कहता है।किस भोसड़ीके में इतना दम है की तुम्हे कुछ कह जाए।" मैत्री की पेशकश.
"समझने की कोशिश करो,यश। लोगो की हमारे परिवार से कुछ उम्मीदें होती हैं,उनके लिए हमे कुछ दिन तक ऐसे कपड़े पहन ने ही चाहिए।"
"ठीक है तो विश्वा की मौत के 3 महीने पूरे होने के बाद तुम ये सफेद साडी नही पहनॉगी।",राजासाहब उसे साथ लेकर अपने बिस्तर पे बैठ गये। उन्होने उसके कंधे पे अपना हाथ रखा हुआ था।
"अच्छा बाबा! जैसा तुम कहो।",मेनका ने उन से सॅट के बैठते हुए उनका हाथ अपने हाथों मे दबा लिया। मेनका पिछले एक महीने से नही चुदी थी। महल का माहौल विश्वा की मौत के कारण ऐसा हो गया था कि चुदाई का ख़याल उसके दिमाग़ से मीलो दूर था। पर इधर 2 दीनो से रात मे उसे राजासाहब के लंड की ज़रूरत महसूस होने लगी थी। मेनका,जोकि हर रात कम से कम 3-4 बार चुदती थी,उसे पिछली दो रातों को अपने जिस्म को ठंडा करने के लिए अपनी उंगली का सहारा लेना पड़ा था।
आज कई दीनो बाद उसका प्रेमी उसे अपने पुराने रंग मे आता दिख रहा था और उसकी चूत राजासाहब के लंड के लिए बेकरार होने लगी थी। उसे शांत करने के लिए वो अपनी टांग पे टांग चढ़ा के बैठ गयी और चूत को अपनी जांघों मे भींच लिया। उसे पता नही चल रहा था कि राजासाहब चुदाई के मूड मे है या नही। उसने बात आगे बढ़ने की गरज से पूछा,"तुम्हे तो याद भी नही होगा कि डॉक्टर पुरनदरे और बॅंगलुर पोलीस के अफ़सर तुमसे मिलके गये थे?"
"याद है पर बस इतना ही की डॉक्टर साहब माफी माँग रहे थे और पोलिस वाले फॉरमॅलिटीस पूरी करने के लिए कह रहे थे।",उनका हाथ मेनका के कंधे से फिसल कर नीचे उसकी नंगी कमर पे आ गया था। मैत्री की रचना.
"डॉक्टर साहब को यकीन है कि विश्वा खुद भागा नही था बल्कि कुछ और बात है। पोलिसवालो का भी कहना है की पोस्टमोर्टाम रिपोर्ट तो ड्रग ओवरडोस का कारण बताती है पर ये कौन बताएगा कि ड्रग्स उसने खुद लिए थे या किसी ने ज़बरदस्ती इंजेक्ट किए थे!" बात तो गंभीर हो रही थी पर मेनका इतने दीनो बाद अपने ससुर के करीब आने पर गरम हुए जा रही थी।
"ह्म्म। मुझे बॅंगलुर जाना पड़ेगा। अब पानी सर से उपर गुज़र गया है। इसके पीछे जो भी है उसे बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।"
"तुम पोलीस की मदद क्यू नही लेते? मैं नही चाहती तुम ख़तरे मे पडो।" उसने प्यार से राजासाहब के चेहरे पे हाथ फेरा।
"नही,मेनका,पोलीस के पास गया तो दुश्मन सतर्क हो जाएगा। इसबार मैं उसे बच के नही जाने दूँगा। हो ना हो इसमे जब्बार का ही हाथ है।"
"जो भी करना बहुत सावधानी से करना और ये ध्यान मे रखना कि तुम्हारे साथ मेरी जान भी जुड़ी है।", मेनका के जिस्म की आग की दाहक उसकी आँखों मे अब साफ़ नज़र आ रही थी। राजासाहब ने उसकी नशे से बोझिल आँखें देखी तो उनके दिल मे भी वोही आग भड़क उठी। उन्होने उसकी कमर पकड़ कर अपनी ओर खींची और अपने होठ उसके तपते होठों पे रख दिए। मेनका तो इसी बात का इंतेज़ार कर रही थी। वो उनसे चिपक गयी और दोनो एक दूसरे को पागलो की तरह चूमने लगे।राजासाहब उसके चेहरे को और गर्दन को अपनी किसो से सराबोर किए जा रहे थे।
आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ तब तक के लिए मैत्री की तरफ से जय भारत.


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)