01-04-2026, 04:11 PM
विश्वा की मौत को एक महीने से उपर हो गया। मेनका की मा भी आज वापस चली गयी थी,उसके पिता तो काफ़ी पहले ही चले गये थे। माँ उसे अपने साथ ले जाना चाहती थी पर उसी ने बाद मे आने को कह के बात टाल दी। आज उसे मौका मिला था अपने ससुर से बात करने का।
रात नौकरो के जाते ही वो उनके कमरे मे पहुँच गयी। राजासाहब सर झुकाए बैठे थे।
"आप राजा यशवीरसिंग ही है ना?" मैत्री की रचना.
राजासाहब ने सर उठा कर उसकी तरफ सवालिया नज़रो से देखा।
"मैं जिस राजा यशवीरसिंग को जानती थी वो तो एक हिम्मतवार और हौसले वाले इंसान थे।आप तो मुझे कोई और लग रहे हैं...एक ऐसा इंसान जिसकी शक्ल राजासाहब से मिलती है,बस।"
"मेनका, हमे प्लीज़ अकेला छोड़ दो।"
"क्यू? यहा अंधेरे मे हार मान कर आँसू बहाने के लिए?" मेनका उनके घुटनो पे हाथ रख उनके सामने बैठ गयी। "मेरी तरफ देखो,यश,बॅंगलुर पोलीस को शक़ था कि विश्वा की मौत उतनी सिंपल नही जितनी दिखती है। सेंटर के डॉक्टर्स और बाकी लोगो से बात करने के बाद ये बात साफ़ थी कि विश्वा ठीक होने की पूरी कोशिश कर रहा था फिर आख़िर उस रात ऐसा क्या हुआ कि वो वहा से भाग गया या फिर वो भागा नही उसे भगाया गया?"
"राजासाहब ने उसकी तरफ देखा,"देखो, मेनका हमारा बेटा अब वापस नही आएगा। अब क्या फायदा है इन बातो का।", वो उठ कर खिड़की पे चले गये और बाहर देखने लगे।
"फायदा नही राजा यशवीरसिंग, क़र्ज़ है आपके बेटे की मौत का। उसे हक़ है कि अगर उसकी मौत उसकी बुरी लत के बजाय किसी और कारण से हुई है, तो उस कारण का पता लगाया जाए और मौत के ज़िम्मेदार को सज़ा मिले।"उसने राजासाहब को अपनी तरफ घुमाया," ये देखिए",उसने उनका हाथ उठा कर उनके सामने किया जिसमे उसका दिया ब्रेस्लेट चमक रहा था।" राजकुल के सुर्य की चमक बरकरार रखने की ज़िम्मेदारी आपकी है। राजकुल का खून बहाया गया है और जिसने भी ये काम किया है उसे इसकी कीमत आपको चुकानी पड़ेगी।"
राजासाहब की नज़रे ब्रेस्लेट मे बने सुर्य पर टिकी हुई थी। किसी ने उनके बेटे की जान ली है और वो चुपचाप बैठे हैं? नही...आख़िर उन्हे हुआ क्या था जो वो इतने दीनो तक बैठे आँसू बहाते रहे? आज मेनका ने उन्हे फिर से जगाया है। अब तो वो अपने बेटे की मौत की गुत्थी सुलझा कर रहेंगे।
उन्होने ने मेनका के हाथ अपने हाथों मे ले लिए,"हमे होश मे लाने के लिए शुक्रिया,पता नही हमे क्या हो गया था। थॅंक यू,मेनका। अगर तुम नही होती तो हमारा क्या होता?" मैत्री की पेशकश.
"नही,यश,अगर तुम नही होते तो हमारा क्या होता। तुमने इतनी मेहनत से कुल का मान और बिज़नेस को बनाए रखा है। ये सब हम अपनी आँखो के सामने मिट्टी मे मिलते तो नही देख सकते थे ना।"
राजासाहब ने मेनका की बात सुनकर उसे सीने से लगा लिया,फिर हाथों मे उसका चेहरा ले लिया, "इतने दीनो हम अपने गम मे खोए रहे,ये भी नही सोचा कि तुम पर क्या बीत रही होगी।", उनका ध्यान मेनका की सफेद साडी पे गया, "कल से ये मनहूस लिबास पहनने की कोई ज़रूरत नही है।"
बने रहिये..................दोस्तों...........
रात नौकरो के जाते ही वो उनके कमरे मे पहुँच गयी। राजासाहब सर झुकाए बैठे थे।
"आप राजा यशवीरसिंग ही है ना?" मैत्री की रचना.
राजासाहब ने सर उठा कर उसकी तरफ सवालिया नज़रो से देखा।
"मैं जिस राजा यशवीरसिंग को जानती थी वो तो एक हिम्मतवार और हौसले वाले इंसान थे।आप तो मुझे कोई और लग रहे हैं...एक ऐसा इंसान जिसकी शक्ल राजासाहब से मिलती है,बस।"
"मेनका, हमे प्लीज़ अकेला छोड़ दो।"
"क्यू? यहा अंधेरे मे हार मान कर आँसू बहाने के लिए?" मेनका उनके घुटनो पे हाथ रख उनके सामने बैठ गयी। "मेरी तरफ देखो,यश,बॅंगलुर पोलीस को शक़ था कि विश्वा की मौत उतनी सिंपल नही जितनी दिखती है। सेंटर के डॉक्टर्स और बाकी लोगो से बात करने के बाद ये बात साफ़ थी कि विश्वा ठीक होने की पूरी कोशिश कर रहा था फिर आख़िर उस रात ऐसा क्या हुआ कि वो वहा से भाग गया या फिर वो भागा नही उसे भगाया गया?"
"राजासाहब ने उसकी तरफ देखा,"देखो, मेनका हमारा बेटा अब वापस नही आएगा। अब क्या फायदा है इन बातो का।", वो उठ कर खिड़की पे चले गये और बाहर देखने लगे।
"फायदा नही राजा यशवीरसिंग, क़र्ज़ है आपके बेटे की मौत का। उसे हक़ है कि अगर उसकी मौत उसकी बुरी लत के बजाय किसी और कारण से हुई है, तो उस कारण का पता लगाया जाए और मौत के ज़िम्मेदार को सज़ा मिले।"उसने राजासाहब को अपनी तरफ घुमाया," ये देखिए",उसने उनका हाथ उठा कर उनके सामने किया जिसमे उसका दिया ब्रेस्लेट चमक रहा था।" राजकुल के सुर्य की चमक बरकरार रखने की ज़िम्मेदारी आपकी है। राजकुल का खून बहाया गया है और जिसने भी ये काम किया है उसे इसकी कीमत आपको चुकानी पड़ेगी।"
राजासाहब की नज़रे ब्रेस्लेट मे बने सुर्य पर टिकी हुई थी। किसी ने उनके बेटे की जान ली है और वो चुपचाप बैठे हैं? नही...आख़िर उन्हे हुआ क्या था जो वो इतने दीनो तक बैठे आँसू बहाते रहे? आज मेनका ने उन्हे फिर से जगाया है। अब तो वो अपने बेटे की मौत की गुत्थी सुलझा कर रहेंगे।
उन्होने ने मेनका के हाथ अपने हाथों मे ले लिए,"हमे होश मे लाने के लिए शुक्रिया,पता नही हमे क्या हो गया था। थॅंक यू,मेनका। अगर तुम नही होती तो हमारा क्या होता?" मैत्री की पेशकश.
"नही,यश,अगर तुम नही होते तो हमारा क्या होता। तुमने इतनी मेहनत से कुल का मान और बिज़नेस को बनाए रखा है। ये सब हम अपनी आँखो के सामने मिट्टी मे मिलते तो नही देख सकते थे ना।"
राजासाहब ने मेनका की बात सुनकर उसे सीने से लगा लिया,फिर हाथों मे उसका चेहरा ले लिया, "इतने दीनो हम अपने गम मे खोए रहे,ये भी नही सोचा कि तुम पर क्या बीत रही होगी।", उनका ध्यान मेनका की सफेद साडी पे गया, "कल से ये मनहूस लिबास पहनने की कोई ज़रूरत नही है।"
बने रहिये..................दोस्तों...........


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