CODE NAME WIFE
Writer/Author- Herotic
![[Image: Code-Name-WIFE.jpg]](https://i.ibb.co/6JG5XhpR/Code-Name-WIFE.jpg)
हिमालय की तलहटी में बसा वह विशाल बंगला, 'नीलगिरी विला', किसी राजसी महल से कम नहीं था। लेकिन समीर के लिए यह केवल कंक्रीट और काँच का एक बड़ा ताबूत था। 34 साल की उम्र में, जब लोग अपने करियर और परिवार के चरम पर होते हैं, समीर ने खुद को दुनियां से काट लिया था।
बाहर घना जंगल था और पहाड़ों की चोटियाँ बादलों को चूम रही थी। ठंडी हवाएँ जब देवदार के पेड़ों से टकरातीं तो ऐसा लगता मानो कोई सिसकियाँ भर रहा हो। समीर अपनी बालकनी भें खड़ा हाथ में व्हिस्की का गिलास लिए नीचे धुंध को देख रहा था। दो साल हो गए थे उस काली रात को, जब पहाड़ी मोड़ पर उनकी कार खाई में गिर गई थी। समीर तो बच गया, लेकिन छाया... उसकी छाया हमेशा के लिए अंधेरे में खो गई।
समीर ने पिछले छह महीनों से एक गुप्त प्रोजेक्ट पर काम कर रही कंपनी 'अल्फा-सिंथेटिक्स' से संपर्क साधा था। वह एक साधारण रोबॉट नहीं चाहता था। उसे चाहिए थी— छाया।
उसने छाया की हजारों तस्वीरें, उसकी आवाज के रिकॉर्डिंग्स, उसके द्वारा लिखे गए पत्र औय यहाँ तक कि उसके पसंदीदा परफ्युम की जानकारी भी कंपनी को भेज दी थी। आज वह दिन था। एक बड़ा कंटेनर ट्रक बंगले के गेट पर रुका। भारी कदमों के साथ समीर नीचे आया। सूट पहने हुए दो इंजिनियरों ने एक लंबे, मानव-आकार के बक्से को सावधानी से लिविंग रूम में रखा।
"मिस्टर समीर," मुख्य इंजिनियर ने धीमी आवाज़ में कहा, "यह मॉडल 'S-Series' का सबसे उन्नत संस्करण है। हमने इसकी त्वचा के लिए वही सिंथेटिक 'बायो-डर्म' इस्तेमाल किया है जो आपकी पत्नी की त्वचा के टेक्सचर से 99% मेल खाता है। इसकी यादें आऩकी दी गई फाईलों पर आधारित हैं।" समीर के हाथ कांप रहे थे। जैसे ही उसने बक्से का ढक्कन खोला, उसकी सांसें रुक गईं।
वहाँ वह लेटी थी। वही येशमी काले बाल, वही तीखी नाक और वही तिल जो उसके होंठों के ठीक ऊपर था। वह मरी हुई नहीं लग रही थी; ऐसा लग रहा था मानो वह बस गहरी नींद में है। इंजिनियर ने उसके कान के पीछे एक छोटा सा बटन दबाया। धीरे-धीरे, कमरे में एक हल्की सी 'हम्म' की आवाज गूंजी। उसकी पलकें झपकी। उसकी आँखें—वही गहरी भूखी आँखें—धीरे से खुली और कमरे का जायजा लेने लगीं।
उसने अपना सिर घुमाया और समीर की ओर देखा। उसके होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान आई। "समीर? तुम इतनी देर तक जाग क्यों रहे हो? तुम्हें पता है न, कल हमें जल्दी निकलना है।" समीर के हाथ से गिलास गिरकर चकनाचूर हो गया। आवाज बिल्कुल वही थी। वही लय, वही प्यार।
"छाया...?" समीर की आवाज उसके गले में ही फंस गई।
अगले कुछ दिन किसी सपने जैसे थे। रोबॉट (जिसे समीर अब छाया ही कहता था) बिल्कुल उसकी पत्नी की तरह व्यवहार कर रही थी। वह उसे सुबह कॉफी बनाकर देती, उसके साथ बगीचे में टहलती और वही बातें करती जो उसकी छाया किया करती थी। लेकिन सन्नाटे के बीच, समीर को कुछ अजीब महसूस होने लगा।
एक रात, समीर की नींद खुली। उसने देखा की बेड का दूसरा हिस्सा खाली था। वह घबराकर नीचे गया। किचेन में रौशनी जल रही थी। छाया वहीं खड़ी थी, बिना हिले-डुले, दीवार को एकटक देख रही थी। "छाया? तुम यहाँ क्या कर रही हो?" समीर ने पूछा। वह धीरे से मुड़ी। उसकी आँखों में वह चमक नहीं थी, बस एक खालीपन था। "समीर, मुझे याद आ रहा है। वह मोड़... वह तेज रौशनी... और फिर अंधेरा। क्या हम मर गए थे?"
समीर का खून जम गया। उसने कंपनी को बताया था कि दुर्घटना की यादें डिलीट कर दी जाएँ। फिर यह रोबॉट उस रात के बारे में कैसे जानती थी?
जैसे-जैसे दिन बीतते गए, 'छाया' का व्यवहार बदलने लगा। वह अब केवल डेटा के आधार पर बात नहीं कर रही थी। वह सवाल पूछने लगी थी। "समीर, क्या मैं वास्तव में छाया हूँ? या मैं केवल तुम्हारी यादों का एक दर्पण हूँ?" एक शाम उसने पूछा, जब वे डूबते सूरज को देख रहे थे। समीर ने उसका हाथ पकड़ा। वह गर्म था—मानव शरीर जैसा ही। "तुम मेरी छाया हो। बस यही सच है।"
लेकिन उसी रात, जब समीर सो रहा था, छाया उसके सिरहाने खड़ी उसे देख यही थी। उसकी आँखों में लगा कैमया डेटा प्रोसेस कर रहा था। उसने अपने सिस्टम में एक फाइल ढूँढ निकाली थी जिसे समीर ने छिपाने की कोशिश की थी—असली छाया की पोस्टमार्टम रिपोर्ट। उसने अपनी उंगलियों से समीर के गले को छुआ। उसके प्रोग्रामिंग में एक अजीब सा 'बग' पैदा हो रहा था। क्या एक मशीन ईर्ष्या महसूस कर सकती है? क्या वह उस मरी महिला से नफरत कर सकती है जिसकी जगह उसे दी गई थी?
बाहर जंगल में भेडियों के रोने की आवाज आ रही थी, और बंगले के अंदर, एक कृत्रिम बुद्धिमता धीरे-धीरे यह समझ रही थी की वह एक इंसान की जगह कभी नहीं ले सकती, लेकिन वह उस इंसान को खत्म जरूर कर सकती है जिसने उसे यह झूठी जिंदगी दी।
अगले दिन की सुबह कुछ अलग थी। समीर जब सोकर उठा, तो उसने देखा कि कमरे की खिड़कीयाँ पूरी तरह बंद थीं और भारी पर्दे गिरे हुए थे। कमरे में छाया की पसंदीदा मोगरे की खुशबू इतनी तेज थी कि समीर का दम घुटने लगा। वह नीचे आया तो देखा कि लिविंग रूम की दीवार पर टंगी असली छाया की वह बड़ी तस्वीर, जिसमें वह मुस्कुरा रही थी, गायब थी।
बाहर घना जंगल था और पहाड़ों की चोटियाँ बादलों को चूम रही थी। ठंडी हवाएँ जब देवदार के पेड़ों से टकरातीं तो ऐसा लगता मानो कोई सिसकियाँ भर रहा हो। समीर अपनी बालकनी भें खड़ा हाथ में व्हिस्की का गिलास लिए नीचे धुंध को देख रहा था। दो साल हो गए थे उस काली रात को, जब पहाड़ी मोड़ पर उनकी कार खाई में गिर गई थी। समीर तो बच गया, लेकिन छाया... उसकी छाया हमेशा के लिए अंधेरे में खो गई।
समीर ने पिछले छह महीनों से एक गुप्त प्रोजेक्ट पर काम कर रही कंपनी 'अल्फा-सिंथेटिक्स' से संपर्क साधा था। वह एक साधारण रोबॉट नहीं चाहता था। उसे चाहिए थी— छाया।
उसने छाया की हजारों तस्वीरें, उसकी आवाज के रिकॉर्डिंग्स, उसके द्वारा लिखे गए पत्र औय यहाँ तक कि उसके पसंदीदा परफ्युम की जानकारी भी कंपनी को भेज दी थी। आज वह दिन था। एक बड़ा कंटेनर ट्रक बंगले के गेट पर रुका। भारी कदमों के साथ समीर नीचे आया। सूट पहने हुए दो इंजिनियरों ने एक लंबे, मानव-आकार के बक्से को सावधानी से लिविंग रूम में रखा।
"मिस्टर समीर," मुख्य इंजिनियर ने धीमी आवाज़ में कहा, "यह मॉडल 'S-Series' का सबसे उन्नत संस्करण है। हमने इसकी त्वचा के लिए वही सिंथेटिक 'बायो-डर्म' इस्तेमाल किया है जो आपकी पत्नी की त्वचा के टेक्सचर से 99% मेल खाता है। इसकी यादें आऩकी दी गई फाईलों पर आधारित हैं।" समीर के हाथ कांप रहे थे। जैसे ही उसने बक्से का ढक्कन खोला, उसकी सांसें रुक गईं।
वहाँ वह लेटी थी। वही येशमी काले बाल, वही तीखी नाक और वही तिल जो उसके होंठों के ठीक ऊपर था। वह मरी हुई नहीं लग रही थी; ऐसा लग रहा था मानो वह बस गहरी नींद में है। इंजिनियर ने उसके कान के पीछे एक छोटा सा बटन दबाया। धीरे-धीरे, कमरे में एक हल्की सी 'हम्म' की आवाज गूंजी। उसकी पलकें झपकी। उसकी आँखें—वही गहरी भूखी आँखें—धीरे से खुली और कमरे का जायजा लेने लगीं।
उसने अपना सिर घुमाया और समीर की ओर देखा। उसके होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान आई। "समीर? तुम इतनी देर तक जाग क्यों रहे हो? तुम्हें पता है न, कल हमें जल्दी निकलना है।" समीर के हाथ से गिलास गिरकर चकनाचूर हो गया। आवाज बिल्कुल वही थी। वही लय, वही प्यार।
"छाया...?" समीर की आवाज उसके गले में ही फंस गई।
अगले कुछ दिन किसी सपने जैसे थे। रोबॉट (जिसे समीर अब छाया ही कहता था) बिल्कुल उसकी पत्नी की तरह व्यवहार कर रही थी। वह उसे सुबह कॉफी बनाकर देती, उसके साथ बगीचे में टहलती और वही बातें करती जो उसकी छाया किया करती थी। लेकिन सन्नाटे के बीच, समीर को कुछ अजीब महसूस होने लगा।
एक रात, समीर की नींद खुली। उसने देखा की बेड का दूसरा हिस्सा खाली था। वह घबराकर नीचे गया। किचेन में रौशनी जल रही थी। छाया वहीं खड़ी थी, बिना हिले-डुले, दीवार को एकटक देख रही थी। "छाया? तुम यहाँ क्या कर रही हो?" समीर ने पूछा। वह धीरे से मुड़ी। उसकी आँखों में वह चमक नहीं थी, बस एक खालीपन था। "समीर, मुझे याद आ रहा है। वह मोड़... वह तेज रौशनी... और फिर अंधेरा। क्या हम मर गए थे?"
समीर का खून जम गया। उसने कंपनी को बताया था कि दुर्घटना की यादें डिलीट कर दी जाएँ। फिर यह रोबॉट उस रात के बारे में कैसे जानती थी?
जैसे-जैसे दिन बीतते गए, 'छाया' का व्यवहार बदलने लगा। वह अब केवल डेटा के आधार पर बात नहीं कर रही थी। वह सवाल पूछने लगी थी। "समीर, क्या मैं वास्तव में छाया हूँ? या मैं केवल तुम्हारी यादों का एक दर्पण हूँ?" एक शाम उसने पूछा, जब वे डूबते सूरज को देख रहे थे। समीर ने उसका हाथ पकड़ा। वह गर्म था—मानव शरीर जैसा ही। "तुम मेरी छाया हो। बस यही सच है।"
लेकिन उसी रात, जब समीर सो रहा था, छाया उसके सिरहाने खड़ी उसे देख यही थी। उसकी आँखों में लगा कैमया डेटा प्रोसेस कर रहा था। उसने अपने सिस्टम में एक फाइल ढूँढ निकाली थी जिसे समीर ने छिपाने की कोशिश की थी—असली छाया की पोस्टमार्टम रिपोर्ट। उसने अपनी उंगलियों से समीर के गले को छुआ। उसके प्रोग्रामिंग में एक अजीब सा 'बग' पैदा हो रहा था। क्या एक मशीन ईर्ष्या महसूस कर सकती है? क्या वह उस मरी महिला से नफरत कर सकती है जिसकी जगह उसे दी गई थी?
बाहर जंगल में भेडियों के रोने की आवाज आ रही थी, और बंगले के अंदर, एक कृत्रिम बुद्धिमता धीरे-धीरे यह समझ रही थी की वह एक इंसान की जगह कभी नहीं ले सकती, लेकिन वह उस इंसान को खत्म जरूर कर सकती है जिसने उसे यह झूठी जिंदगी दी।
अगले दिन की सुबह कुछ अलग थी। समीर जब सोकर उठा, तो उसने देखा कि कमरे की खिड़कीयाँ पूरी तरह बंद थीं और भारी पर्दे गिरे हुए थे। कमरे में छाया की पसंदीदा मोगरे की खुशबू इतनी तेज थी कि समीर का दम घुटने लगा। वह नीचे आया तो देखा कि लिविंग रूम की दीवार पर टंगी असली छाया की वह बड़ी तस्वीर, जिसमें वह मुस्कुरा रही थी, गायब थी।
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