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Misc. Erotica एक रंडी की दास्तान
#4
लड़के ने धीरे-धीरे अपनी जींस की जिप खोली, उसके हाथ थोड़े कांप रहे थे। वहां की गर्म हवा ने उसकी त्वचा को छूते हुए उसे एक अजीब सी झनझनाहट महसूस कराई। जैसे ही उसने अपने अंदरूनी कपड़ों को हटाया, उसका लंड अचानक बाहर आ गया, जो अभी तक उत्तेजना से भरा हुआ था। वह औसत लंबाई और मोटाई का था, लेकिन अब पूरी तरह से सख्त हो चुका था, जिससे उसकी नसें साफ दिख रही थीं।

चैताली ने उसे देखा, फिर अपनी उंगलियों से उसे छुआ। लड़का कांप गया।

"क्या हुआ?" चैताली ने पूछा।

"कुछ नहीं," लड़के ने कहा, उसकी आवाज़ कांप रही थी।

चैताली ने एक लंबी सांस ली। उसकी आँखें बंद थीं, लेकिन उसके होंठों पर एक ऐसी थकान भरी मुस्कान थी जिसे वह अब छिपा नहीं पा रही थी। वह जानती थी कि आज फिर वही करना है जो वह रोज़ करती है। उसने अपने काले बालों को पीछे सरकाते हुए धीरे से अपने टॉप के निचले हिस्से को पकड़ा। कपड़े का मटेरियल उसकी उंगलियों के बीच से खिसकता हुआ महसूस हो रहा था। जैसे ही उसने टॉप को ऊपर उठाया, उसके भारी, ढीले मम्मे एक झटके के साथ बाहर आ गए। हवा का ठंडा स्पर्श उसके संवेदनशील निप्पलों पर चुभ गया, जो पहले से ही उभरे हुए थे। उसके गहरे भूरे निप्पल्स, जिन पर छोटे-छोटे दाने दिखाई दे रहे थे, अब पूरी तरह से खुले थे।

लड़का, जो अब तक बस देख रहा था, अचानक आगे बढ़ा। उसकी सांसें चैताली की त्वचा पर गर्माहट छोड़ रही थीं जब उसने अपना मुंह उसके बाएँ मम्मे पर टिका दिया। उसके होंठों ने निप्पल को चारों ओर से घेर लिया, और फिर एक तेज चूसने की आवाज़ के साथ उसने अपना मुँह कसकर बंद कर लिया। चैताली ने अपनी आँखें और ज़ोर से बंद कर लीं, उसकी भौंहें थोड़ी सिकुड़ गईं। यह वही पुरानी दिनचर्या थी - वह अनुभव जो उसके लिए अब मात्र एक यांत्रिक प्रक्रिया बन चुका था। पैसा। बस पैसा। वह यहाँ इसलिए नहीं थी क्योंकि उसे यह पसंद था, बल्कि इसलिए क्योंकि उसे इसकी ज़रूरत थी।

लेकिन आज... आज कुछ अलग सा लग रहा था। जब लड़के की जीभ उसके निप्पल के चारों ओर घूम रही थी, तो चैताली ने उसकी आँखों में झाँका। वहाँ एक अजीब सी मासूमियत थी - एक ऐसी भावना जिसे वह इस तरह के लोगों में कभी नहीं देखती थी। उसकी पलकें झपक रही थीं, और उसके होंठ थोड़े काँप रहे थे, जैसे कि वह पहली बार ऐसा कर रहा हो। चैताली के मन में एक विचार कौंधा - क्या यह वाकई उसका पहला अनुभव था? उसके मम्मे पर लड़के के हाथों का स्पर्श भी अजीब तरह से अनाड़ी सा था, जैसे वह नहीं जानता कि कितना दबाव डालना है। चैताली ने अपने होठों को दबाया। शायद आज का दिन उसके लिए बस पैसा कमाने से कुछ अधिक होगा।
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RE: एक रंडी की दास्तान - by MohdIqbal - Today, 07:24 AM



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