31-03-2026, 05:27 PM
नेहा के पास्ट के बारे में मेरे मॉनोलॉग के बाद कमरे में सन्नाटा छा गया।
फोन की स्क्रीन अभी भी चमक रही थी, लेकिन हम दोनों का ध्यान कहीं और था।
वो धीरे से उठी।
बिस्तर से उतरी।
कमरे से बाहर चली गई।
मैंने सोचा—शायद मैंने कोई गलत स्ट्रिंग छू ली।
शायद वो गुस्सा हो गई।
शायद वो रोने लगी।
मेरा दिल धड़क रहा था।
मैंने सोचा—अब सब बर्बाद हो गया।
लेकिन... 1-2 मिनट में वो वापस आई।
उसके हाथ में वोदका की बॉटल थी।
वो मेरे सामने बैठ गई—बिस्तर पर, क्रॉस लेग्स में।
मैं भी बैठ गया—उसके सामने, क्रॉस लेग्स में।
बॉटल हमारे बीच में रखी थी।
उसने बॉटल खोली।
एक बड़ा सा घूँट लिया।
जैसे... हिम्मत जुटा रही हो।
उसका चेहरा अब सीरियस था—कोई हँसी नहीं, कोई शरारत नहीं।
बस... एक गहरी, पुरानी सच्चाई।
वो बोली—आवाज़ थोड़ी काँप रही थी—
"बेबी... मैं शादी के समय वर्जिन थी... लेकिन..."
वो रुकी।
एक और घूँट लिया।
फिर... एक साँस में बोली—
"लेकिन... मेरा बॉडी... यूज़ हुआ था।
ओरली... मेरे स्तन... मेरी चूत... दूसरे मर्दों ने छुए थे।"
मेरा लुंड... एक झटके से ट्विच कर गया।
ये वो रिएक्शन नहीं था जो मुझे अपेक्षित था।
मुझे गुस्सा आना चाहिए था... या शॉक... या दुख।
लेकिन... मेरा लुंड... और सख्त हो गया।
फड़कने लगा।
मैं शर्म से जल रहा था... लेकिन उत्तेजना भी बढ़ रही थी।
नेहा ने मेरी आँखों में देखा।
उसकी आँखें नम थीं।
"तुम्हें... बुरा लगा?"
मैंने कुछ नहीं कहा।
बस... उसकी आँखों में देखता रहा।
नेहा ने वो बात कही—"मैं वर्जिन थी... लेकिन मेरा बॉडी यूज़ हुआ था"—और मेरे दिमाग में तुरंत एक तस्वीर बन गई।
शादी की पहली रात।
होटल का कमरा... डिम लाइट्स... वो लाल साड़ी... उसकी नर्वस स्माइल।
मैंने उसे धीरे से अनड्रेस किया था।
उसकी चूत... इतनी टाइट... इतनी गर्म... जैसे कभी किसी ने छुआ ही न हो।
जब मैंने अंदर डाला... थोड़ा सा खून आया था।
वो दर्द से कराही थी... लेकिन आँखों में वो प्यार था।
मैंने सोचा था—वो सच में वर्जिन है।
फिर... श्रुति याद आई।
कॉलेज टाइम की गर्लफ्रेंड।
उसकी चूत... पहले टाइट थी... लेकिन मेरे साथ कई बार होने के बाद... लूज़ हो गई थी।
कुछ और सीज़न्स भी थे
तो... नेहा की टाइटनेस... वो खून... सब मेरे दिमाग में घूम रहा था।
उसने सिर उठाया।
उसकी आँखें मेरी आँखों में टिकीं—थोड़ी नम, थोड़ी दूर की यादों में खोई हुई।
मैंने धीरे से पूछा—आवाज़ में चिंता थी—
"कौन था वो?
और... सब कुछ कंसेंसुअल था ना?
तुम्हें कभी फोर्स नहीं किया गया... राइट?"
नेहा ने मेरी चिंता देखी।
उसके होंठों पर एक हल्की, थकी हुई मुस्कान आई।
वो मेरे गाल पर हाथ फेरा—वही गाल जहाँ उसने थप्पड़ मारा था।
"हाँ... सब कंसेंसुअल था।
सब कुछ... मेरी मर्ज़ी से।
मैं... उससे प्यार करती थी।"
"प्यार?" मैंने पूछा—आवाज़ में थोड़ा सा झटका।
"हाँ... प्यार।"
वो एक पल के लिए रुकी।
फिर... बॉटल से एक और घूँट लिया।
जैसे हिम्मत जुटा रही हो।
"वो... मुझसे बहुत प्यार करता था।
इतना प्यार... कि उसने कभी मुझे फक नहीं किया।
वो हमेशा मेरे फ्यूचर की फिक्र करता था।
मेरे फ्यूचर हसबैंड की... मेरी लाइफ की... मेरे घर की।
वो कहता था—'मैं तुम्हें खराब नहीं करना चाहता... तुम्हारा फ्यूचर परफेक्ट होना चाहिए।'
इसलिए... वो कभी आगे नहीं बढ़ा।
बस... छुआ... किस किया... मेरे स्तन दबाए... उँगली अंदर डाली... लेकिन पूरा सेक्स... कभी नहीं।"
मैंने पूछा—
"तो... फिर तुमने उससे शादी क्यों नहीं की?"
और बीच में ही रुक गया।
मुझे लगा... शायद मैं ज़्यादा पूछ रहा हूँ।
शायद वो अनकम्फर्टेबल हो जाए।
मैंने खुद को रोक लिया।
लेकिन नेहा ने सिर उठाया।
उसकी आँखें मेरी आँखों में टिकीं।
वो धीरे से बोली—
"बेबी... तुम सच में जानना चाहते हो?"
मैंने सिर हिलाया।
"हाँ... जानना चाहता हूँ।
पूरा।
फ्रॉम द बिगिनिंग।"
नेहा ने एक गहरी साँस ली।
फिर... बॉटल से एक और घूँट लिया।
जैसे... हिम्मत जुटा रही हो।
उसने बॉटल साइड में रखी।
मेरे सामने क्रॉस लेग्स में बैठ गई।
उसकी आँखें अब सीरियस थीं।
"तुम्हें यकीन है... ये सुन सकते हो?"
मैंने उसके हाथ को पकड़ा।
"ऑफ कोर्स... हर किसी ने युवा होने पर एक बार प्यार किया है।
मैं... सब सुनना चाहता हूँ।"
"बेबी... मैं 19 की थी... 12वीं के बाद।
JEE की तैयारी के लिए एक अकादमी जॉइन की थी।
सेंटर दूसरे शहर में था—देहरादून।
हमारे घर से २ घंटे की दूरी।
एक मारुति ओमनी आती थी... रोज़ 5-6 स्टूडेंट्स को पिकअप करने।
मैं पहली स्टूडेंट थी... जिसे सबसे पहले उठाया जाता था।
और... वहीं... मुझे अपना प्यार मिला।"
मैंने बीच में पूछ लिया—
"फेलो स्टूडेंट?"
नेहा ने सिर हिलाया—नहीं में।
उसके चेहरे पर शर्म और मुस्कान दोनों थीं।
"नहीं... ड्राइवर।"
मैं स्तब्ध रह गया।
एक सेकंड के लिए... दिमाग खाली हो गया।
फिर... मैंने धीरे से कहा—
"ड्राइवर...?"
वो मेरे सीने पर सिर टिका दिए।
उसकी साँसें मेरी गर्दन पर लग रही थीं।
वो बोली—धीरे से, जैसे पुरानी यादों में खो गई हो—
"कैसे शुरू हुआ... मैं ठीक-ठीक नहीं बता सकती... लेकिन क्यूरियोसिटी से शुरू हुआ।"
वो एक पल के लिए रुकी।
फिर... जारी रखा—
"मैंने तुम्हें बताया था... मैंने 18 की उम्र में फिंगरिंग शुरू की थी।
पोर्न लैपटॉप पर आसानी से मिल जाता था।
मेरे पास अपना पीसी था—१२वीं में कंप्यूटर साइंस सब्जेक्ट था... तो पापा ने दिलवा दिया था।
रात को... जब सब सो जाते... मैं अकेले में... पोर्न देखती थी।
हर रात।
फिर... एक दिन मेरी एक फ्रेंड ने कहा—'पोर्न देखते हुए अपनी पुसी से खेलो।'
मैंने ट्राई किया।
पोर्न स्टार जो कर रही थी... मैंने वैसा ही करने की कोशिश की।
कैसे वो कर रही थी... कैसे उँगली डाल रही थी... कैसे रगड़ रही थी...
और... कुछ देर बाद... मुझे पहला ऑर्गेज़्म मिला।
बहुत... अजीब लगा।
बहुत... अच्छा लगा।
फिर... रोज़ करने लगी।
"मैं... बहुत इंटेलिजेंट लड़की थी... एकेडमिक्स में।
तो... किसी को कभी शक नहीं हुआ।
लेकिन... मेरी क्यूरियोसिटी... बहुत इमेजिनेटिव हो गई थी।
मैं... मर्दों की क्रॉच की तरफ देखती थी... सोचती थी—उसका लुंड कैसा होगा?
कॉलेज में टीचर... मार्केट में अनजान आदमी... यहाँ तक कि मेरे करीबी रिश्तेदार भी...
सबके बारे में सोचती थी।
उनके कपड़ों के नीचे... क्या छुपा है... कैसा लगेगा... कैसा फील होगा..."
वो रुकी।
एक गहरी साँस ली।
फिर... जारी रखा—
"फिर... एग्जाम हुए।
फिर... कोचिंग शुरू हुई।
मैं बहुत बिज़ी हो गई।
लेकिन... रात को पोर्न... वो वही रहा।
हर रात... देखती थी... उँगली से खेलती थी... ऑर्गेज़्म लेती थी।
"रात को पोर्न देखने के बाद... सुबह 7 बजे... पहला चेहरा जो मुझे दिखता था.ड्राइवर
वो असल में ड्राइवर नहीं था... उसके पास ट्रैवल एजेंसी थी।
लेकिन... इतनी सुबह कोई और ड्राइवर नहीं आता था... तो वो खुद ही स्टूडेंट्स को ड्रॉप करता था।
ट्रैकसूट में होता था... और... उसके पैंट में... टेंट लगा हुआ।
मैंने कभी किसी मर्द में ऐसा नहीं देखा था।
अब... मुझे पता है... इसे 'मॉर्निंग वुड' कहते हैं... तुम लोगों का लुंड... तुमसे पहले जाग जाता है।"
वो हँसी—एक छोटी, शरारती हँसी।
उसकी हँसी में अब कोई ग्लानि नहीं थी... बस... एक पुरानी याद की मिठास।
"एक दिन... मैंने उसे पेशाब करते देखा।
पहली बार... मैंने किसी ग्रोनअप मर्द का लुंड रियल में देखा।
वो पर्पल हेड... काली स्किन...
मैं... इंस्टेंट गीली हो गई।
ये... नया फीलिंग थी।
उस दिन से... मेरे अंदर कुछ बदल गया।
मैं... उसका ध्यान खींचने की कोशिश करने लगी।
रोज़... १५-२० मिनट... अकेले में... अगले बच्चे को पिक करने से पहले।
कभी-कभी... मैं अपनी यूनिफॉर्म की ऊपरी बटन खोल देती थी... अपनी नई उभरी हुई चेस्ट दिखाने के लिए।
उठाकर स्कर्ट थोड़ी ऊपर करती थी... लेकिन... वो कभी कुछ नहीं करता था।
हमेशा... स्ट्रेट फेस।
न कोई बात... न कोई नज़र।
बस... ड्राइव करता रहता था।"
रोज़... सबसे पहले मुझे पिक करता था।
कार में... सिर्फ़ मैं और वो... 15-20 मिनट।
"एक दिन... मैंने कार का गियर पकड़ा।
जैसे... मैं कोई लुंड पकड़ रही हूँ।
पोर्न में देखा था... कैसे वो औरत हाथ ऊपर-नीचे करती है... मैंने वैसा ही किया।
मेरा हाथ... गियर पर... ऊपर-नीचे... धीरे-धीरे... जैसे मसाज कर रही हूँ।
पहली बार... वो मुस्कुराया।
उसकी वो स्ट्रेट फेस... टूट गई।
वो बोला—'क्या कर रही हो बेटी?'"
मैंने बीच में पूछ लिया—
"बेटी?"
नेहा ने उँगली दाँतों में दबा ली।
उसके चेहरे पर शर्म थी... बहुत गहरी शर्म।
वो मेरी तरफ देखकर बोली—आवाज़ काँप रही थी—
"वो... मुझसे बहुत बड़ा था।"
"कितना बड़ा?" मैंने पूछा।
नेहा ने मेरी आँखों में देखा।
उसकी आँखें नम हो गईं।
"प्लीज़... जज मत करना... प्लीज़ बेबी।"
मैंने उसके हाथ को पकड़ा।
उसे किस किया।
"नहीं करूँगा... बताओ।"
वो एक गहरी साँस ली।
फिर... धीरे से बोली—
"वो... उस टाइम मेरे पापा जितना बड़ा था... या शायद उससे भी बड़ा।"
मैं स्तब्ध रह गया।
मेरा दिल एक झटके से धड़का।
"उस टाइम... वो बूढ़ा आदमी... मेरे लिए सबसे बेहतर था।
मैं... उसकी तरफ बहुत अट्रैक्टेड थी।
उसकी वो सादगी... वो इज्ज़त... वो कंट्रोल... सब मुझे पागल कर देता था।
एक दिन... उसका हाथ मेरी जांघ पर लगा।
जानबूझकर... या गलती से... पता नहीं।
लेकिन... स्कर्ट के ऊपर से... मेरी इनर थाइज़ पर।
उसकी उँगलियाँ... हल्के से रगड़ रही थीं।
मैंने कहा—'अंकल...'
वो तुरंत हाथ हटा लिया।
'सॉरी बेटा... गियर बदल रहा था... गलती से हो गया।'
मैंने कहा—'इट्स ओके अंकल।'
लेकिन... उस रात... मैंने उँगली से खुद को बहुत जोर से किया... सिर्फ़ उसके टच को याद करके।
उसकी उँगलियाँ... मेरी जांघ पर... वो गर्माहट... वो दबाव... सब मेरे दिमाग में घूम रहा था।
मैं... झड़ी... बहुत जोर से।"
वो रुकी।
उसकी साँसें थोड़ी तेज़ हो गईं।
फिर... जारी रखा—
"अगले दिन... जब उसका हाथ फिर गियर पर था... मैंने उसका हाथ पकड़ा।
और... धीरे से अपनी जांघ पर रख दिया।
वो हाथ हटाने की कोशिश करने लगा... लेकिन मैंने दबाकर रखा।
मैंने कहा—'इट्स ओके अंकल... मुझे अच्छा लगता है।'
वो... रुक गया।
उसका हाथ... वहाँ रहा।
धीरे-धीरे... रगड़ने लगा।
१० मिनट तक... अगले बच्चे को पिक करने तक।
उसकी उँगलियाँ... मेरी स्कर्ट के ऊपर से... इनर थाइज़ पर... हल्के-हल्के दबाव डाल रही थीं।
मैं... गीली हो गई थी।
बहुत गीली।
उसके बाद... हर दिन... यही होता।
कार में... अकेले में... वो मुझे छूता था।
धीरे-धीरे... और गहराई से।
लेकिन... कभी आगे नहीं बढ़ा।
हमेशा... रुक जाता था।
फोन की स्क्रीन अभी भी चमक रही थी, लेकिन हम दोनों का ध्यान कहीं और था।
वो धीरे से उठी।
बिस्तर से उतरी।
कमरे से बाहर चली गई।
मैंने सोचा—शायद मैंने कोई गलत स्ट्रिंग छू ली।
शायद वो गुस्सा हो गई।
शायद वो रोने लगी।
मेरा दिल धड़क रहा था।
मैंने सोचा—अब सब बर्बाद हो गया।
लेकिन... 1-2 मिनट में वो वापस आई।
उसके हाथ में वोदका की बॉटल थी।
वो मेरे सामने बैठ गई—बिस्तर पर, क्रॉस लेग्स में।
मैं भी बैठ गया—उसके सामने, क्रॉस लेग्स में।
बॉटल हमारे बीच में रखी थी।
उसने बॉटल खोली।
एक बड़ा सा घूँट लिया।
जैसे... हिम्मत जुटा रही हो।
उसका चेहरा अब सीरियस था—कोई हँसी नहीं, कोई शरारत नहीं।
बस... एक गहरी, पुरानी सच्चाई।
वो बोली—आवाज़ थोड़ी काँप रही थी—
"बेबी... मैं शादी के समय वर्जिन थी... लेकिन..."
वो रुकी।
एक और घूँट लिया।
फिर... एक साँस में बोली—
"लेकिन... मेरा बॉडी... यूज़ हुआ था।
ओरली... मेरे स्तन... मेरी चूत... दूसरे मर्दों ने छुए थे।"
मेरा लुंड... एक झटके से ट्विच कर गया।
ये वो रिएक्शन नहीं था जो मुझे अपेक्षित था।
मुझे गुस्सा आना चाहिए था... या शॉक... या दुख।
लेकिन... मेरा लुंड... और सख्त हो गया।
फड़कने लगा।
मैं शर्म से जल रहा था... लेकिन उत्तेजना भी बढ़ रही थी।
नेहा ने मेरी आँखों में देखा।
उसकी आँखें नम थीं।
"तुम्हें... बुरा लगा?"
मैंने कुछ नहीं कहा।
बस... उसकी आँखों में देखता रहा।
नेहा ने वो बात कही—"मैं वर्जिन थी... लेकिन मेरा बॉडी यूज़ हुआ था"—और मेरे दिमाग में तुरंत एक तस्वीर बन गई।
शादी की पहली रात।
होटल का कमरा... डिम लाइट्स... वो लाल साड़ी... उसकी नर्वस स्माइल।
मैंने उसे धीरे से अनड्रेस किया था।
उसकी चूत... इतनी टाइट... इतनी गर्म... जैसे कभी किसी ने छुआ ही न हो।
जब मैंने अंदर डाला... थोड़ा सा खून आया था।
वो दर्द से कराही थी... लेकिन आँखों में वो प्यार था।
मैंने सोचा था—वो सच में वर्जिन है।
फिर... श्रुति याद आई।
कॉलेज टाइम की गर्लफ्रेंड।
उसकी चूत... पहले टाइट थी... लेकिन मेरे साथ कई बार होने के बाद... लूज़ हो गई थी।
कुछ और सीज़न्स भी थे
तो... नेहा की टाइटनेस... वो खून... सब मेरे दिमाग में घूम रहा था।
उसने सिर उठाया।
उसकी आँखें मेरी आँखों में टिकीं—थोड़ी नम, थोड़ी दूर की यादों में खोई हुई।
मैंने धीरे से पूछा—आवाज़ में चिंता थी—
"कौन था वो?
और... सब कुछ कंसेंसुअल था ना?
तुम्हें कभी फोर्स नहीं किया गया... राइट?"
नेहा ने मेरी चिंता देखी।
उसके होंठों पर एक हल्की, थकी हुई मुस्कान आई।
वो मेरे गाल पर हाथ फेरा—वही गाल जहाँ उसने थप्पड़ मारा था।
"हाँ... सब कंसेंसुअल था।
सब कुछ... मेरी मर्ज़ी से।
मैं... उससे प्यार करती थी।"
"प्यार?" मैंने पूछा—आवाज़ में थोड़ा सा झटका।
"हाँ... प्यार।"
वो एक पल के लिए रुकी।
फिर... बॉटल से एक और घूँट लिया।
जैसे हिम्मत जुटा रही हो।
"वो... मुझसे बहुत प्यार करता था।
इतना प्यार... कि उसने कभी मुझे फक नहीं किया।
वो हमेशा मेरे फ्यूचर की फिक्र करता था।
मेरे फ्यूचर हसबैंड की... मेरी लाइफ की... मेरे घर की।
वो कहता था—'मैं तुम्हें खराब नहीं करना चाहता... तुम्हारा फ्यूचर परफेक्ट होना चाहिए।'
इसलिए... वो कभी आगे नहीं बढ़ा।
बस... छुआ... किस किया... मेरे स्तन दबाए... उँगली अंदर डाली... लेकिन पूरा सेक्स... कभी नहीं।"
मैंने पूछा—
"तो... फिर तुमने उससे शादी क्यों नहीं की?"
और बीच में ही रुक गया।
मुझे लगा... शायद मैं ज़्यादा पूछ रहा हूँ।
शायद वो अनकम्फर्टेबल हो जाए।
मैंने खुद को रोक लिया।
लेकिन नेहा ने सिर उठाया।
उसकी आँखें मेरी आँखों में टिकीं।
वो धीरे से बोली—
"बेबी... तुम सच में जानना चाहते हो?"
मैंने सिर हिलाया।
"हाँ... जानना चाहता हूँ।
पूरा।
फ्रॉम द बिगिनिंग।"
नेहा ने एक गहरी साँस ली।
फिर... बॉटल से एक और घूँट लिया।
जैसे... हिम्मत जुटा रही हो।
उसने बॉटल साइड में रखी।
मेरे सामने क्रॉस लेग्स में बैठ गई।
उसकी आँखें अब सीरियस थीं।
"तुम्हें यकीन है... ये सुन सकते हो?"
मैंने उसके हाथ को पकड़ा।
"ऑफ कोर्स... हर किसी ने युवा होने पर एक बार प्यार किया है।
मैं... सब सुनना चाहता हूँ।"
"बेबी... मैं 19 की थी... 12वीं के बाद।
JEE की तैयारी के लिए एक अकादमी जॉइन की थी।
सेंटर दूसरे शहर में था—देहरादून।
हमारे घर से २ घंटे की दूरी।
एक मारुति ओमनी आती थी... रोज़ 5-6 स्टूडेंट्स को पिकअप करने।
मैं पहली स्टूडेंट थी... जिसे सबसे पहले उठाया जाता था।
और... वहीं... मुझे अपना प्यार मिला।"
मैंने बीच में पूछ लिया—
"फेलो स्टूडेंट?"
नेहा ने सिर हिलाया—नहीं में।
उसके चेहरे पर शर्म और मुस्कान दोनों थीं।
"नहीं... ड्राइवर।"
मैं स्तब्ध रह गया।
एक सेकंड के लिए... दिमाग खाली हो गया।
फिर... मैंने धीरे से कहा—
"ड्राइवर...?"
वो मेरे सीने पर सिर टिका दिए।
उसकी साँसें मेरी गर्दन पर लग रही थीं।
वो बोली—धीरे से, जैसे पुरानी यादों में खो गई हो—
"कैसे शुरू हुआ... मैं ठीक-ठीक नहीं बता सकती... लेकिन क्यूरियोसिटी से शुरू हुआ।"
वो एक पल के लिए रुकी।
फिर... जारी रखा—
"मैंने तुम्हें बताया था... मैंने 18 की उम्र में फिंगरिंग शुरू की थी।
पोर्न लैपटॉप पर आसानी से मिल जाता था।
मेरे पास अपना पीसी था—१२वीं में कंप्यूटर साइंस सब्जेक्ट था... तो पापा ने दिलवा दिया था।
रात को... जब सब सो जाते... मैं अकेले में... पोर्न देखती थी।
हर रात।
फिर... एक दिन मेरी एक फ्रेंड ने कहा—'पोर्न देखते हुए अपनी पुसी से खेलो।'
मैंने ट्राई किया।
पोर्न स्टार जो कर रही थी... मैंने वैसा ही करने की कोशिश की।
कैसे वो कर रही थी... कैसे उँगली डाल रही थी... कैसे रगड़ रही थी...
और... कुछ देर बाद... मुझे पहला ऑर्गेज़्म मिला।
बहुत... अजीब लगा।
बहुत... अच्छा लगा।
फिर... रोज़ करने लगी।
"मैं... बहुत इंटेलिजेंट लड़की थी... एकेडमिक्स में।
तो... किसी को कभी शक नहीं हुआ।
लेकिन... मेरी क्यूरियोसिटी... बहुत इमेजिनेटिव हो गई थी।
मैं... मर्दों की क्रॉच की तरफ देखती थी... सोचती थी—उसका लुंड कैसा होगा?
कॉलेज में टीचर... मार्केट में अनजान आदमी... यहाँ तक कि मेरे करीबी रिश्तेदार भी...
सबके बारे में सोचती थी।
उनके कपड़ों के नीचे... क्या छुपा है... कैसा लगेगा... कैसा फील होगा..."
वो रुकी।
एक गहरी साँस ली।
फिर... जारी रखा—
"फिर... एग्जाम हुए।
फिर... कोचिंग शुरू हुई।
मैं बहुत बिज़ी हो गई।
लेकिन... रात को पोर्न... वो वही रहा।
हर रात... देखती थी... उँगली से खेलती थी... ऑर्गेज़्म लेती थी।
"रात को पोर्न देखने के बाद... सुबह 7 बजे... पहला चेहरा जो मुझे दिखता था.ड्राइवर
वो असल में ड्राइवर नहीं था... उसके पास ट्रैवल एजेंसी थी।
लेकिन... इतनी सुबह कोई और ड्राइवर नहीं आता था... तो वो खुद ही स्टूडेंट्स को ड्रॉप करता था।
ट्रैकसूट में होता था... और... उसके पैंट में... टेंट लगा हुआ।
मैंने कभी किसी मर्द में ऐसा नहीं देखा था।
अब... मुझे पता है... इसे 'मॉर्निंग वुड' कहते हैं... तुम लोगों का लुंड... तुमसे पहले जाग जाता है।"
वो हँसी—एक छोटी, शरारती हँसी।
उसकी हँसी में अब कोई ग्लानि नहीं थी... बस... एक पुरानी याद की मिठास।
"एक दिन... मैंने उसे पेशाब करते देखा।
पहली बार... मैंने किसी ग्रोनअप मर्द का लुंड रियल में देखा।
वो पर्पल हेड... काली स्किन...
मैं... इंस्टेंट गीली हो गई।
ये... नया फीलिंग थी।
उस दिन से... मेरे अंदर कुछ बदल गया।
मैं... उसका ध्यान खींचने की कोशिश करने लगी।
रोज़... १५-२० मिनट... अकेले में... अगले बच्चे को पिक करने से पहले।
कभी-कभी... मैं अपनी यूनिफॉर्म की ऊपरी बटन खोल देती थी... अपनी नई उभरी हुई चेस्ट दिखाने के लिए।
उठाकर स्कर्ट थोड़ी ऊपर करती थी... लेकिन... वो कभी कुछ नहीं करता था।
हमेशा... स्ट्रेट फेस।
न कोई बात... न कोई नज़र।
बस... ड्राइव करता रहता था।"
रोज़... सबसे पहले मुझे पिक करता था।
कार में... सिर्फ़ मैं और वो... 15-20 मिनट।
"एक दिन... मैंने कार का गियर पकड़ा।
जैसे... मैं कोई लुंड पकड़ रही हूँ।
पोर्न में देखा था... कैसे वो औरत हाथ ऊपर-नीचे करती है... मैंने वैसा ही किया।
मेरा हाथ... गियर पर... ऊपर-नीचे... धीरे-धीरे... जैसे मसाज कर रही हूँ।
पहली बार... वो मुस्कुराया।
उसकी वो स्ट्रेट फेस... टूट गई।
वो बोला—'क्या कर रही हो बेटी?'"
मैंने बीच में पूछ लिया—
"बेटी?"
नेहा ने उँगली दाँतों में दबा ली।
उसके चेहरे पर शर्म थी... बहुत गहरी शर्म।
वो मेरी तरफ देखकर बोली—आवाज़ काँप रही थी—
"वो... मुझसे बहुत बड़ा था।"
"कितना बड़ा?" मैंने पूछा।
नेहा ने मेरी आँखों में देखा।
उसकी आँखें नम हो गईं।
"प्लीज़... जज मत करना... प्लीज़ बेबी।"
मैंने उसके हाथ को पकड़ा।
उसे किस किया।
"नहीं करूँगा... बताओ।"
वो एक गहरी साँस ली।
फिर... धीरे से बोली—
"वो... उस टाइम मेरे पापा जितना बड़ा था... या शायद उससे भी बड़ा।"
मैं स्तब्ध रह गया।
मेरा दिल एक झटके से धड़का।
"उस टाइम... वो बूढ़ा आदमी... मेरे लिए सबसे बेहतर था।
मैं... उसकी तरफ बहुत अट्रैक्टेड थी।
उसकी वो सादगी... वो इज्ज़त... वो कंट्रोल... सब मुझे पागल कर देता था।
एक दिन... उसका हाथ मेरी जांघ पर लगा।
जानबूझकर... या गलती से... पता नहीं।
लेकिन... स्कर्ट के ऊपर से... मेरी इनर थाइज़ पर।
उसकी उँगलियाँ... हल्के से रगड़ रही थीं।
मैंने कहा—'अंकल...'
वो तुरंत हाथ हटा लिया।
'सॉरी बेटा... गियर बदल रहा था... गलती से हो गया।'
मैंने कहा—'इट्स ओके अंकल।'
लेकिन... उस रात... मैंने उँगली से खुद को बहुत जोर से किया... सिर्फ़ उसके टच को याद करके।
उसकी उँगलियाँ... मेरी जांघ पर... वो गर्माहट... वो दबाव... सब मेरे दिमाग में घूम रहा था।
मैं... झड़ी... बहुत जोर से।"
वो रुकी।
उसकी साँसें थोड़ी तेज़ हो गईं।
फिर... जारी रखा—
"अगले दिन... जब उसका हाथ फिर गियर पर था... मैंने उसका हाथ पकड़ा।
और... धीरे से अपनी जांघ पर रख दिया।
वो हाथ हटाने की कोशिश करने लगा... लेकिन मैंने दबाकर रखा।
मैंने कहा—'इट्स ओके अंकल... मुझे अच्छा लगता है।'
वो... रुक गया।
उसका हाथ... वहाँ रहा।
धीरे-धीरे... रगड़ने लगा।
१० मिनट तक... अगले बच्चे को पिक करने तक।
उसकी उँगलियाँ... मेरी स्कर्ट के ऊपर से... इनर थाइज़ पर... हल्के-हल्के दबाव डाल रही थीं।
मैं... गीली हो गई थी।
बहुत गीली।
उसके बाद... हर दिन... यही होता।
कार में... अकेले में... वो मुझे छूता था।
धीरे-धीरे... और गहराई से।
लेकिन... कभी आगे नहीं बढ़ा।
हमेशा... रुक जाता था।


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