31-03-2026, 05:25 PM
हम खाना खाते रहे... चैट करते रहे... पीते रहे... स्मोक करते रहे।
नेहा टी-शर्ट और ब्लैक पैंटी में थी—बैठी हुई, पैर सोफे पर मोड़कर, जैसे कोई नॉर्मल शाम हो।
मैं शॉर्ट्स में—एक हाथ में विस्की का ग्लास, दूसरा सिगरेट।
टीवी पर वही शो चल रहा था।
हम उसकी बातें कर रहे थे—कैरेक्टर कौन सा अच्छा है, ट्विस्ट क्या होगा, हँसी-मज़ाक।
उसका चेहरा पूरी तरह बबली था—वही पुरानी वाली नेहा—कोई ट्रेस नहीं कि एक घंटा पहले वो मुझे "भेनचोद" कहकर थप्पड़ मार रही थी, दरवाज़ा खुला रखकर मेरी चूत चटवा रही थी।
कोई शर्म नहीं... कोई ग्लानि नहीं... जैसे कुछ हुआ ही नहीं।
मैं भी हँस रहा था... जवाब दे रहा था... लेकिन दिमाग कहीं और था।
विस्की मदद कर रही थी—थोड़ा डिस्ट्रैक्ट कर रही थी—लेकिन बार-बार वो बातें वापस आ रही थीं।
उसने पहली बार मेरे लुंड को "छोटा" कहा था।
"सब मर्द हँसेंगे... तुम्हारे छोटे लुंड पर।"
क्या ये सिर्फ़ रोल प्ले का हिस्सा था?
क्या वो बस मुझे ह्यूमिलिएट करने के लिए बोला था—कैरेक्टर में रहने के लिए?
या... सच में वो सोचती है?
क्या मैं उसके लिए काफी नहीं हूँ?
क्या मेरा लुंड... उसके लिए इनएडिक्वेट है?
क्या वो कभी किसी और के बारे में सोचती है... जो बड़ा हो... जो उसे भर दे... जो मुझे भर नहीं पाता?
हम डिनर खत्म करके बेडरूम में आ गए।
दोनों बिस्तर पर लेट गए—फोन हाथ में।
पहले की तरह... बोरिंग कपल वाली रूटीन।
मैं स्क्रीन पर रील्स टैप कर रहा था—ध्यान कहीं नहीं था।
नींद आने की उम्मीद में बस स्क्रॉल करता रहा।
नेहा भी अपने फोन में खोई हुई थी।
हमारे शरीर एक-दूसरे को छू भी नहीं रहे थे।
बस... सन्नाटा।
फोन की रोशनी हमारे चेहरों पर पड़ रही थी।
फिर... नेहा की आवाज़ आई—धीमी, लेकिन साफ़।
"क्या हुआ बेबी?"
मैंने फोन नीचे रखा।
उसकी तरफ देखा।
वो मुझे देख रही थी—उसकी आँखें थोड़ी चिंतित, थोड़ी प्यारी।
मैंने कुछ नहीं कहा।
बस... सोच रहा था कि वो क्या बात कर रही है।
वो थोड़ा करीब आई।
फोन साइड में रख दिया।
उसने मेरी तरफ हाथ बढ़ाया—मेरे गाल पर हल्के से लगाया।
"डोन्ट यू लाइक इट बेबी... क्या मैं बहुत हार्श थी?"
उसकी आवाज़ में अब वो क्रूरता नहीं थी।
बस... चिंता।
वो सच में जानना चाह रही थी।
मेरे दिमाग में दो हिस्से लड़ रहे थे।
एक हिस्सा—मेरा मेल ईगो—चिल्ला रहा था—
"ये सब बकवास है... कभी मत करना... कैसे तुमने मेरा लुंड 'छोटा' कहा... मैं तुम्हें माफ नहीं करूँगा..."
ये सब खत्म हो जाता।
सब नॉर्मल हो जाता।
लेकिन... दूसरा हिस्सा... वो बहुत ज़्यादा चाहता था।
नेहा की वो रफ ट्रीटमेंट... वो गालियाँ... वो डोमिनेशन...
उसकी क्यूट, मासूम फेस पर वो क्रूरता...
उसने जो किया... वो मुझे और चाहता था।
और जानना चाहता था—वो कितनी दूर जा सकती है।
कितनी गहरी... कितनी क्रूर... कितनी गंदी।
मेरा सबमिसिव माइंड... हमेशा की तरह... जीत गया।
दिमाग के दोनों हिस्से लड़ रहे थे—एक तरफ ईगो चिल्ला रहा था कि "ये सब बंद करो... ये गलत है... वो तुम्हें छोटा कह रही थी..."
दूसरी तरफ... वो गहरी, पुरानी क्यूरियोसिटी... वो बचपन से चली आ रही आदत... कि "देखें... ये कितनी दूर तक जा सकती है... कितनी गहरी... कितनी क्रूर..."
और हमेशा की तरह... वो दूसरा हिस्सा जीत गया।
मैंने धीरे से कहा—आवाज़ में अभी भी थोड़ी काँप...
"नो... इट वॉज़ फाइन... बहुत अच्छा था।"
नेहा ने मेरी तरफ देखा।
उसकी आँखें अब फिर से वही पुरानी वाली—प्यारी, चिंतित, लेकिन अब थोड़ी राहत वाली।
वो मेरे करीब आई।
मेरे बाइसेप्स पर सिर टिका दिया।
उसकी ब्रालेस टी-शर्ट में उसके स्तन मेरी साइड चेस्ट से दब रहे थे—नरम, गरम।
उसकी नंगी जांघें मेरी जांघों पर रख दीं।
उसका हाथ मेरे सीने पर—धीरे-धीरे घूम रहा था... मेरे निप्पल्स के आसपास... छूता हुआ... खेलता हुआ।
वो धीरे से बोली—
"सच में?
मुझे डर लग रहा था... कहीं तुम्हें बुरा न लगे।
मैंने पहली बार... इतना हार्श किया।
तुम्हें... थप्पड़... गालियाँ... सब... मैंने सोचा था... शायद तुम्हें पसंद आएगा... लेकिन कन्फर्म नहीं थी।"
मैंने उसके बालों में हाथ फेरा।
उसकी खुशबू... अभी भी मेरे नाक में थी—पसीने, उसके रस की, सिगरेट की मिली हुई।
"नहीं... बेबी... मुझे बहुत अच्छा लगा।"
वो धीरे से बोली—आवाज़ में अब वो पुरानी वाली मासूमियत लौट आई थी—
"जस्ट फाइन? मतलब... तुम्हें ज्यादा पसंद नहीं आया?"
उसने अपना हाथ मेरे गाल पर रखा—वही गाल जहाँ उसने थप्पड़ मारा था।
उसकी उँगलियाँ अभी भी गर्म थीं।
गाल अभी भी लाल था... जलन अभी भी बाकी थी।
"इतना हार्ड लगा क्या?"
मैंने हल्के से सिर हिलाया।
"नहीं... अब ज्यादा नहीं... पहले से कम हो गया है।"
वो हँसी—एक नॉटी, शरारती हँसी।
उसकी उँगलियाँ मेरे गाल पर घूम रही थीं—हल्के से मसाज करती हुईं।
"ओह्ह... मैं तो सोच रही थी... तुम इन सॉफ्ट हाथों के थप्पड़ को भी एक मर्द की तरह बर्दाश्त कर लोगे... लेकिन सॉरी बेबी... ये सब तो प्ले के लिए था।"
मैंने उसके हाथ को पकड़ा।
उस हाथ को जो मुझे थप्पड़ मार चुका था... मैंने उसे किस किया।
धीरे से... होंठों से।
"नो... मैं सच में बहुत पसंद करता हूँ... सच में।"
वो मेरी तरफ मुड़ी।
उसकी आँखें चमक रही थीं।
उसने मेरे गाल पर फिर किस किया—इस बार प्यार से।
"ओह्ह... सो स्वीट..."
वो मुझे ऐसे देख रही थी... जैसे कोई छोटा कॉलेज बॉय हो।
मासूम... नाज़ुक... जिसे प्यार से सहलाना है।
उसकी उँगलियाँ अब मेरे सीने पर घूम रही थीं—धीरे-धीरे... मेरे निप्पल्स को छूते हुए।
मैं सोच रहा था...
"लाइक ए मैन..."
क्या वो अभी भी प्ले में है?
या... ये उसकी असली फीलिंग है?
क्या वो सच में सोचती है... कि मैं "मर्द की तरह" नहीं बर्दाश्त कर सका?
क्या वो मेरे सबमिसिव साइड को... और गहराई से देख रही है?
मैंने कुछ नहीं कहा।
बस... उसके हाथ को पकड़कर चूमता रहा।
वो मेरे सीने पर सिर टिका दिया।
उसकी साँस मेरी गर्दन पर लग रही थी।
वो अचानक उठी—कोहनी के बल।
उसकी आँखें मेरी आँखों में टिकीं—नॉटी, शरारती, लेकिन थोड़ी सीरियस।
"तो... स्वाद कैसा था?"
उसने नॉटिली अंदाज़ में पूछा।
मुझे पता था... वो मेरे कम के बारे में पूछ रही है।
मैंने मुस्कुराकर आँख मारी।
जवाब नहीं दिया।
अभी भी थोड़ा अनकम्फर्टेबल था—अपने कम का स्वाद... अपने मुँह में...
वो मेरे गाल पर हल्का-सा थप्पड़ मारा—प्यार से।
"बोलो ना... स्वाद कैसा था?"
मैंने फिर आँख मारी।
"अच्छा था..."
वो हँसी—एक छोटी, क्यूट हँसी।
फिर... और करीब आई।
उसकी साँस मेरे होंठों पर लग रही थी।
"क्या तुमने पहले कभी टेस्ट किया है?"
ये सवाल... मुझे झटका लगा।
मेरा दिल एक झटके से धड़का।
क्या वो सोचती है... कि मैं...
लेकिन मैंने हल्के से, सूटल तरीके से कहा—
"कई बार... जब तुम मुझे ब्लोजॉब के बाद किस करती हो... तो... थोड़ा-सा... मुँह में आ जाता है।"
वो हँसी—अब थोड़ी शरमाते हुए।
फिर... मेरे कान के पास मुँह ले जाकर फुसफुसाई—
"नहीं सिली... ऐसा नहीं।
जैसे मैंने आज किया... डायरेक्ट... अपनी उँगली से... अपना रस चूसा।
क्या तुमने कभी... अपना कम... अपने हाथ से... चाटा है?"
"ना..."
मैंने यह सवाल नेहा से किया ? क्या तुमने पहले इसे किआ है इसे। .. अपनी उंगली से चाटना
उसकी आँखें थोड़ी नीची हो गईं—शरम और नशे का मिक्स।
"हाँ... कई बार किया है।"
वो बोली—आवाज़ में अब वो बबलीपन नहीं था, बल्कि एक गहरी, पुरानी सच्चाई।
"तुम्हें पता है... मैंने मास्टरबेशन बहुत जल्दी शुरू कर दिया था।"
वो रुकी।
जैसे खुद को रोक रही हो।
जैसे उसे एहसास हो गया कि वो कुछ ऐसा बोल गई जो उसने पहले कभी नहीं बोला।
कमरे में सन्नाटा छा गया।
विस्की का नशा हमें दोनों को ढीला कर रहा था—बातें बाहर आ रही थीं, बिना सोचे।
मैंने सन्नाटा तोड़ा।
धीरे से, लेकिन साफ़—
"इट्स ओके... तुम शेयर कर सकती हो मेरे साथ।
तो... कब शुरू किया था?
मतलब... कितनी उम्र में?"
पहली बार... हम अपना पास्ट खोल रहे हैं।
मैंने कभी नहीं पूछा था।
शादी की पहली रात... मैंने उसे साफ़-साफ़ कहा था—
"मुझे तुम्हारा पास्ट नहीं जानना... ।"
नहीं पूछा कि छोटे शहर में... हमारी कास्ट की छोटी कम्युनिटी में... लोग तुम्हें क्यों नहीं चाहते थे।
क्यों सबने मना कर दिया—एक स्मार्ट इंजीनियरिंग ग्रेजुएट को... जो इतनी खूबसूरत है... इतनी सेक्सी है... इतनी इंडिपेंडेंट है।
क्यों कोई भी लड़का... या लड़के का परिवार... तुम्हें नहीं चाहता था।
क्यों... एक 24 साल की जवान लड़की... ने 34-35 साल के मिडिल एज मर्द से शादी कर ली।
मैंने कभी नहीं पूछा।
क्योंकि मुझे सच में फर्क नहीं पड़ता था।
मुझे बस... तुम चाहिए थी।
तुम्हारी स्माइल... तुम्हारी आँखें... तुम्हारा वो क्यूट, नॉटी अंदाज़... सब कुछ।
मैंने सोचा... पास्ट पास्ट है।
लेकिन आज... आज सब कुछ अलग था।
फिर... वो धीरे से बोली—
"18... मैं 18 की थी जब पहली बार किया था।"
मैंने "हम्म..." कहा—बिना सोचे।
मेरा दिमाग अभी भी घूम रहा था—उसके पास्ट के सवालों में।
फिर... अचानक... मैंने पूछ लिया—
"और... तुमने मुझसे शादी क्यों की?
मतलब... क्यों हाँ किया?"
नेहा एक झटके से सिर उठाया।
उसकी आँखें मेरी आँखों में टिकीं—थोड़ी चौड़ी, थोड़ी हैरान।
"क्यों पूछ रहे हो बेबी... अचानक?"
मैंने सिर हिलाया।
"बस... आज... जानना चाहता हूँ।
पहली बार... सच में जानना चाहता हूँ।"
वो मेरे गाल पर हाथ फेरा—वही गाल जहाँ उसने थप्पड़ मारा था।
उसकी उँगलियाँ अभी भी गर्म थीं।
"मैंने हाँ किया... क्योंकि मुझे तुम पसंद आए।
तुम्हारी बातें... तुम्हारे विचार... तुम्हारा मुझे देखने का तरीका... सब कुछ।
तुमने मुझे जज नहीं किया।
तुमने कहा—'मुझे तुम्हारा पास्ट नहीं चाहिए... बस तुम्हें चाहिए।'
और... मैं उस हेल से बाहर निकलना चाहती थी।
मेरे घर से... मेरे छोटे शहर से... वो सब...
मैं वहाँ से भागना चाहती थी।
तुम... मेरी आज़ादी थे।
तुमने मुझे वो जगह दी... जहाँ मैं वैसी ही रह सकती थी... जैसी मैं हूँ।
बिना किसी डर के... बिना किसी कंट्रोल के।"
"वो शहर... इतना खूबसूरत है... पहाड़... नदियाँ... फिर क्यों?
नेहा ने एक पल के लिए रुककर सिर उठाया।
उसकी आँखें थोड़ी नम हो गईं।
"क्योंकि... लोग थे।"
मैंने पूछा—
"कौन से लोग?"
वो रुकी।
फिर... धीरे से बोली—
"छोड़ो ना..."
मैंने उसके हाथ को पकड़ा।
उसे किस किया।
"बेबी... तुम मुझे बता सकती हो।
मैं तुम्हारे सामने एक ओपन बुक हूँ।
मैंने तुम्हें सब बताया—मेरी कॉलेज गर्लफ्रेंड श्रुति के बारे में... कि मैं वर्जिन नहीं था जब हम शादी की... सब कुछ।
क्या तुम्हें लगता है... हमारा रिलेशनशिप इतना कमज़ोर है कि तुम्हारा पास्ट हमें दूर कर देगा?
कम ऑन... हर किसी का पास्ट होता है।"
नेहा टी-शर्ट और ब्लैक पैंटी में थी—बैठी हुई, पैर सोफे पर मोड़कर, जैसे कोई नॉर्मल शाम हो।
मैं शॉर्ट्स में—एक हाथ में विस्की का ग्लास, दूसरा सिगरेट।
टीवी पर वही शो चल रहा था।
हम उसकी बातें कर रहे थे—कैरेक्टर कौन सा अच्छा है, ट्विस्ट क्या होगा, हँसी-मज़ाक।
उसका चेहरा पूरी तरह बबली था—वही पुरानी वाली नेहा—कोई ट्रेस नहीं कि एक घंटा पहले वो मुझे "भेनचोद" कहकर थप्पड़ मार रही थी, दरवाज़ा खुला रखकर मेरी चूत चटवा रही थी।
कोई शर्म नहीं... कोई ग्लानि नहीं... जैसे कुछ हुआ ही नहीं।
मैं भी हँस रहा था... जवाब दे रहा था... लेकिन दिमाग कहीं और था।
विस्की मदद कर रही थी—थोड़ा डिस्ट्रैक्ट कर रही थी—लेकिन बार-बार वो बातें वापस आ रही थीं।
उसने पहली बार मेरे लुंड को "छोटा" कहा था।
"सब मर्द हँसेंगे... तुम्हारे छोटे लुंड पर।"
क्या ये सिर्फ़ रोल प्ले का हिस्सा था?
क्या वो बस मुझे ह्यूमिलिएट करने के लिए बोला था—कैरेक्टर में रहने के लिए?
या... सच में वो सोचती है?
क्या मैं उसके लिए काफी नहीं हूँ?
क्या मेरा लुंड... उसके लिए इनएडिक्वेट है?
क्या वो कभी किसी और के बारे में सोचती है... जो बड़ा हो... जो उसे भर दे... जो मुझे भर नहीं पाता?
हम डिनर खत्म करके बेडरूम में आ गए।
दोनों बिस्तर पर लेट गए—फोन हाथ में।
पहले की तरह... बोरिंग कपल वाली रूटीन।
मैं स्क्रीन पर रील्स टैप कर रहा था—ध्यान कहीं नहीं था।
नींद आने की उम्मीद में बस स्क्रॉल करता रहा।
नेहा भी अपने फोन में खोई हुई थी।
हमारे शरीर एक-दूसरे को छू भी नहीं रहे थे।
बस... सन्नाटा।
फोन की रोशनी हमारे चेहरों पर पड़ रही थी।
फिर... नेहा की आवाज़ आई—धीमी, लेकिन साफ़।
"क्या हुआ बेबी?"
मैंने फोन नीचे रखा।
उसकी तरफ देखा।
वो मुझे देख रही थी—उसकी आँखें थोड़ी चिंतित, थोड़ी प्यारी।
मैंने कुछ नहीं कहा।
बस... सोच रहा था कि वो क्या बात कर रही है।
वो थोड़ा करीब आई।
फोन साइड में रख दिया।
उसने मेरी तरफ हाथ बढ़ाया—मेरे गाल पर हल्के से लगाया।
"डोन्ट यू लाइक इट बेबी... क्या मैं बहुत हार्श थी?"
उसकी आवाज़ में अब वो क्रूरता नहीं थी।
बस... चिंता।
वो सच में जानना चाह रही थी।
मेरे दिमाग में दो हिस्से लड़ रहे थे।
एक हिस्सा—मेरा मेल ईगो—चिल्ला रहा था—
"ये सब बकवास है... कभी मत करना... कैसे तुमने मेरा लुंड 'छोटा' कहा... मैं तुम्हें माफ नहीं करूँगा..."
ये सब खत्म हो जाता।
सब नॉर्मल हो जाता।
लेकिन... दूसरा हिस्सा... वो बहुत ज़्यादा चाहता था।
नेहा की वो रफ ट्रीटमेंट... वो गालियाँ... वो डोमिनेशन...
उसकी क्यूट, मासूम फेस पर वो क्रूरता...
उसने जो किया... वो मुझे और चाहता था।
और जानना चाहता था—वो कितनी दूर जा सकती है।
कितनी गहरी... कितनी क्रूर... कितनी गंदी।
मेरा सबमिसिव माइंड... हमेशा की तरह... जीत गया।
दिमाग के दोनों हिस्से लड़ रहे थे—एक तरफ ईगो चिल्ला रहा था कि "ये सब बंद करो... ये गलत है... वो तुम्हें छोटा कह रही थी..."
दूसरी तरफ... वो गहरी, पुरानी क्यूरियोसिटी... वो बचपन से चली आ रही आदत... कि "देखें... ये कितनी दूर तक जा सकती है... कितनी गहरी... कितनी क्रूर..."
और हमेशा की तरह... वो दूसरा हिस्सा जीत गया।
मैंने धीरे से कहा—आवाज़ में अभी भी थोड़ी काँप...
"नो... इट वॉज़ फाइन... बहुत अच्छा था।"
नेहा ने मेरी तरफ देखा।
उसकी आँखें अब फिर से वही पुरानी वाली—प्यारी, चिंतित, लेकिन अब थोड़ी राहत वाली।
वो मेरे करीब आई।
मेरे बाइसेप्स पर सिर टिका दिया।
उसकी ब्रालेस टी-शर्ट में उसके स्तन मेरी साइड चेस्ट से दब रहे थे—नरम, गरम।
उसकी नंगी जांघें मेरी जांघों पर रख दीं।
उसका हाथ मेरे सीने पर—धीरे-धीरे घूम रहा था... मेरे निप्पल्स के आसपास... छूता हुआ... खेलता हुआ।
वो धीरे से बोली—
"सच में?
मुझे डर लग रहा था... कहीं तुम्हें बुरा न लगे।
मैंने पहली बार... इतना हार्श किया।
तुम्हें... थप्पड़... गालियाँ... सब... मैंने सोचा था... शायद तुम्हें पसंद आएगा... लेकिन कन्फर्म नहीं थी।"
मैंने उसके बालों में हाथ फेरा।
उसकी खुशबू... अभी भी मेरे नाक में थी—पसीने, उसके रस की, सिगरेट की मिली हुई।
"नहीं... बेबी... मुझे बहुत अच्छा लगा।"
वो धीरे से बोली—आवाज़ में अब वो पुरानी वाली मासूमियत लौट आई थी—
"जस्ट फाइन? मतलब... तुम्हें ज्यादा पसंद नहीं आया?"
उसने अपना हाथ मेरे गाल पर रखा—वही गाल जहाँ उसने थप्पड़ मारा था।
उसकी उँगलियाँ अभी भी गर्म थीं।
गाल अभी भी लाल था... जलन अभी भी बाकी थी।
"इतना हार्ड लगा क्या?"
मैंने हल्के से सिर हिलाया।
"नहीं... अब ज्यादा नहीं... पहले से कम हो गया है।"
वो हँसी—एक नॉटी, शरारती हँसी।
उसकी उँगलियाँ मेरे गाल पर घूम रही थीं—हल्के से मसाज करती हुईं।
"ओह्ह... मैं तो सोच रही थी... तुम इन सॉफ्ट हाथों के थप्पड़ को भी एक मर्द की तरह बर्दाश्त कर लोगे... लेकिन सॉरी बेबी... ये सब तो प्ले के लिए था।"
मैंने उसके हाथ को पकड़ा।
उस हाथ को जो मुझे थप्पड़ मार चुका था... मैंने उसे किस किया।
धीरे से... होंठों से।
"नो... मैं सच में बहुत पसंद करता हूँ... सच में।"
वो मेरी तरफ मुड़ी।
उसकी आँखें चमक रही थीं।
उसने मेरे गाल पर फिर किस किया—इस बार प्यार से।
"ओह्ह... सो स्वीट..."
वो मुझे ऐसे देख रही थी... जैसे कोई छोटा कॉलेज बॉय हो।
मासूम... नाज़ुक... जिसे प्यार से सहलाना है।
उसकी उँगलियाँ अब मेरे सीने पर घूम रही थीं—धीरे-धीरे... मेरे निप्पल्स को छूते हुए।
मैं सोच रहा था...
"लाइक ए मैन..."
क्या वो अभी भी प्ले में है?
या... ये उसकी असली फीलिंग है?
क्या वो सच में सोचती है... कि मैं "मर्द की तरह" नहीं बर्दाश्त कर सका?
क्या वो मेरे सबमिसिव साइड को... और गहराई से देख रही है?
मैंने कुछ नहीं कहा।
बस... उसके हाथ को पकड़कर चूमता रहा।
वो मेरे सीने पर सिर टिका दिया।
उसकी साँस मेरी गर्दन पर लग रही थी।
वो अचानक उठी—कोहनी के बल।
उसकी आँखें मेरी आँखों में टिकीं—नॉटी, शरारती, लेकिन थोड़ी सीरियस।
"तो... स्वाद कैसा था?"
उसने नॉटिली अंदाज़ में पूछा।
मुझे पता था... वो मेरे कम के बारे में पूछ रही है।
मैंने मुस्कुराकर आँख मारी।
जवाब नहीं दिया।
अभी भी थोड़ा अनकम्फर्टेबल था—अपने कम का स्वाद... अपने मुँह में...
वो मेरे गाल पर हल्का-सा थप्पड़ मारा—प्यार से।
"बोलो ना... स्वाद कैसा था?"
मैंने फिर आँख मारी।
"अच्छा था..."
वो हँसी—एक छोटी, क्यूट हँसी।
फिर... और करीब आई।
उसकी साँस मेरे होंठों पर लग रही थी।
"क्या तुमने पहले कभी टेस्ट किया है?"
ये सवाल... मुझे झटका लगा।
मेरा दिल एक झटके से धड़का।
क्या वो सोचती है... कि मैं...
लेकिन मैंने हल्के से, सूटल तरीके से कहा—
"कई बार... जब तुम मुझे ब्लोजॉब के बाद किस करती हो... तो... थोड़ा-सा... मुँह में आ जाता है।"
वो हँसी—अब थोड़ी शरमाते हुए।
फिर... मेरे कान के पास मुँह ले जाकर फुसफुसाई—
"नहीं सिली... ऐसा नहीं।
जैसे मैंने आज किया... डायरेक्ट... अपनी उँगली से... अपना रस चूसा।
क्या तुमने कभी... अपना कम... अपने हाथ से... चाटा है?"
"ना..."
मैंने यह सवाल नेहा से किया ? क्या तुमने पहले इसे किआ है इसे। .. अपनी उंगली से चाटना
उसकी आँखें थोड़ी नीची हो गईं—शरम और नशे का मिक्स।
"हाँ... कई बार किया है।"
वो बोली—आवाज़ में अब वो बबलीपन नहीं था, बल्कि एक गहरी, पुरानी सच्चाई।
"तुम्हें पता है... मैंने मास्टरबेशन बहुत जल्दी शुरू कर दिया था।"
वो रुकी।
जैसे खुद को रोक रही हो।
जैसे उसे एहसास हो गया कि वो कुछ ऐसा बोल गई जो उसने पहले कभी नहीं बोला।
कमरे में सन्नाटा छा गया।
विस्की का नशा हमें दोनों को ढीला कर रहा था—बातें बाहर आ रही थीं, बिना सोचे।
मैंने सन्नाटा तोड़ा।
धीरे से, लेकिन साफ़—
"इट्स ओके... तुम शेयर कर सकती हो मेरे साथ।
तो... कब शुरू किया था?
मतलब... कितनी उम्र में?"
पहली बार... हम अपना पास्ट खोल रहे हैं।
मैंने कभी नहीं पूछा था।
शादी की पहली रात... मैंने उसे साफ़-साफ़ कहा था—
"मुझे तुम्हारा पास्ट नहीं जानना... ।"
नहीं पूछा कि छोटे शहर में... हमारी कास्ट की छोटी कम्युनिटी में... लोग तुम्हें क्यों नहीं चाहते थे।
क्यों सबने मना कर दिया—एक स्मार्ट इंजीनियरिंग ग्रेजुएट को... जो इतनी खूबसूरत है... इतनी सेक्सी है... इतनी इंडिपेंडेंट है।
क्यों कोई भी लड़का... या लड़के का परिवार... तुम्हें नहीं चाहता था।
क्यों... एक 24 साल की जवान लड़की... ने 34-35 साल के मिडिल एज मर्द से शादी कर ली।
मैंने कभी नहीं पूछा।
क्योंकि मुझे सच में फर्क नहीं पड़ता था।
मुझे बस... तुम चाहिए थी।
तुम्हारी स्माइल... तुम्हारी आँखें... तुम्हारा वो क्यूट, नॉटी अंदाज़... सब कुछ।
मैंने सोचा... पास्ट पास्ट है।
लेकिन आज... आज सब कुछ अलग था।
फिर... वो धीरे से बोली—
"18... मैं 18 की थी जब पहली बार किया था।"
मैंने "हम्म..." कहा—बिना सोचे।
मेरा दिमाग अभी भी घूम रहा था—उसके पास्ट के सवालों में।
फिर... अचानक... मैंने पूछ लिया—
"और... तुमने मुझसे शादी क्यों की?
मतलब... क्यों हाँ किया?"
नेहा एक झटके से सिर उठाया।
उसकी आँखें मेरी आँखों में टिकीं—थोड़ी चौड़ी, थोड़ी हैरान।
"क्यों पूछ रहे हो बेबी... अचानक?"
मैंने सिर हिलाया।
"बस... आज... जानना चाहता हूँ।
पहली बार... सच में जानना चाहता हूँ।"
वो मेरे गाल पर हाथ फेरा—वही गाल जहाँ उसने थप्पड़ मारा था।
उसकी उँगलियाँ अभी भी गर्म थीं।
"मैंने हाँ किया... क्योंकि मुझे तुम पसंद आए।
तुम्हारी बातें... तुम्हारे विचार... तुम्हारा मुझे देखने का तरीका... सब कुछ।
तुमने मुझे जज नहीं किया।
तुमने कहा—'मुझे तुम्हारा पास्ट नहीं चाहिए... बस तुम्हें चाहिए।'
और... मैं उस हेल से बाहर निकलना चाहती थी।
मेरे घर से... मेरे छोटे शहर से... वो सब...
मैं वहाँ से भागना चाहती थी।
तुम... मेरी आज़ादी थे।
तुमने मुझे वो जगह दी... जहाँ मैं वैसी ही रह सकती थी... जैसी मैं हूँ।
बिना किसी डर के... बिना किसी कंट्रोल के।"
"वो शहर... इतना खूबसूरत है... पहाड़... नदियाँ... फिर क्यों?
नेहा ने एक पल के लिए रुककर सिर उठाया।
उसकी आँखें थोड़ी नम हो गईं।
"क्योंकि... लोग थे।"
मैंने पूछा—
"कौन से लोग?"
वो रुकी।
फिर... धीरे से बोली—
"छोड़ो ना..."
मैंने उसके हाथ को पकड़ा।
उसे किस किया।
"बेबी... तुम मुझे बता सकती हो।
मैं तुम्हारे सामने एक ओपन बुक हूँ।
मैंने तुम्हें सब बताया—मेरी कॉलेज गर्लफ्रेंड श्रुति के बारे में... कि मैं वर्जिन नहीं था जब हम शादी की... सब कुछ।
क्या तुम्हें लगता है... हमारा रिलेशनशिप इतना कमज़ोर है कि तुम्हारा पास्ट हमें दूर कर देगा?
कम ऑन... हर किसी का पास्ट होता है।"


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