31-03-2026, 05:15 PM
"मम्ह्ह्ह्ह... गुड बॉय..."
वो मेरे चेहरे पर अपना पैर रखकर धक्का दिया—हल्का सा।
"अब... तुम्हारी बारी है... ।
और लगता है... तुम तैयार हो..."
उसने अपना पैर नीचे किया।
उसकी नज़र मेरे लुंड पर गई।
मैं अभी भी सेमी-हार्ड था—प्रीकम की बूँदें लुंड पर चमक रही थीं।
"क्या मदद चाहिए... कुछ देखने के लिए?"
वो अपनी निप्पल्स को ट्वीक करने लगी—धीरे से, होंठ काटते हुए।
एक गहरी साँस ली।
फिर... अपना पैर फैलाया—उसकी चूत अब पूरी तरह दिख रही थी—गीली, चमकती हुई।
फिर... पैर क्रॉस कर लिया—ज्यादातर छुपा दिया।
लेकिन वो जानती थी... मैं देख रहा हूँ।
वो सिगरेट का एक कश ली।
धुआँ मेरे चेहरे पर छोड़ा।
फिर बोली—आवाज़ में वो क्रूर, सेक्सी टोन—
"झड़ो मेरे लिए... माधरचोद।
मुझे दिखाओ... तुम कैसे खुद को सहलाते हो... जब ऑफिस में दूसरे मर्द मेरी तरफ देखते हैं।
बताओ... किस-किस को इमेजिन करते हो... मेरी गंदी, छोटी, हॉर्नी स्लट को चोदते हुए?"
मैं शर्म से लाल हो गया।
गाल जल रहे थे।
सीना धड़क रहा था।
लेकिन... मेरा लुंड अब पूरा रेजिंग हार्ड था।
वो अपनी निप्पल्स ट्वीक करती रही।
उसकी उँगली धीरे-धीरे नीचे गई—उसकी चूत की फोल्ड्स में।
उसने इंडेक्स फिंगर अंदर डाला।
फिर बाहर निकाला—उसका रस चमक रहा था।
उसने फिंगर को अपने होंठों पर रखा।
धीरे से चूसा।
"वाह... जस्ट वाह..."
वो कभी ऐसा नहीं करती थी।
अपना रस... अपने फिंगर से... मेरे सामने... चूस रही थी।
मैं... उस पल में ही झड़ गया।
अनएक्सपेक्टेड।
अनप्रिपेयर्ड।
बहुत ज़्यादा।
गाढ़े, चिपचिपे रस की लकीरें मेरे लुंड से निकलीं—उसके पैरों पर... उसके काफ पर... मेरे हाथ पर।
नेहा ने कराहा—"मम्ह्ह्ह्ह... येस... ब्यूटीफुल... कम फॉर मी... सिसी बॉय... लेट इट आउट..."
वो अपना फिंगर और गहरा चूस रही थी।
फिर... वापस अपनी चूत में डाला।
मैं काँप रहा था।
वाइब्रेट कर रहा था।
मुझे याद नहीं... आखिरी बार कब इतना जोर से झड़ा था।
नेहा ने मेरी तरफ देखा।
उसकी आँखें अभी भी चमक रही थीं।
"अब... चाट लो।"
मैंने उसकी तरफ देखा।
क्या उसने सच में कहा था?
पोस्ट-ऑर्गेज़्म क्लैरिटी अब आने लगी थी।
ये... ग्रॉस लग रहा था... शर्मनाक... गंदा...
लेकिन... मेरा शरीर... अभी भी हार्ड था।
मेरा दिमाग... अभी भी सबमिसिव था।
वो मेरे बालों को हल्का-सा खींचकर बोली—आवाज़ अब रफ़, ब्रेथी, लेकिन अभी भी कमांडिंग।
"कम ऑन, हनी... तुम्हें अच्छा लगा था ना... जब मैंने अपना रस चूसा?"
उसने अपना फिंगर फिर से अपनी चूत में डाला—धीरे से, गहराई से।
फिर बाहर निकाला—उसका रस चमक रहा था।
उसने फिंगर को अपने होंठों पर रखा।
धीरे से चूसा—मेरी आँखों में देखते हुए।
उसकी जीभ फिंगर पर घूम रही थी—लंबी, सेक्सी लिक।
"देखा... कैसा लगता है... अपनी ही चूत का स्वाद?"
मेरा लुंड फिर से हार्ड हो गया।
पोस्ट-ऑर्गेज़्म क्लैरिटी अब कहीं दूर जा चुकी थी।
मेरा शरीर फिर से जल रहा था।
उसकी आँखें... वो भूख... वो क्रूर मुस्कान... सब मुझे अंदर से जला रही थीं।
मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी नेहा... इतनी डोमिनेंट हो सकती है।
इतनी सेक्सी... इतनी क्रूर।
मैं घुटनों पर था... शर्म से काँप रहा था... लेकिन लुंड फिर से हार्ड हो गया था।
पोस्ट-ऑर्गेज़्म क्लैरिटी आ रही थी—वो "ईक" फैक्टर... वो ग्रॉस फीलिंग... वो शर्म... सब वापस आ गया था।
मैं सोच रहा था—ये गंदा है... ये गलत है... मैं ऐसा नहीं कर सकता।
लेकिन नेहा ने मेरे बाल पकड़े।
मेरा सिर ऊपर खींचा।
उसकी आँखें अब जल रही थीं—गुस्सा, भूख, और एक गहरी क्रूरता।
उसकी आवाज़ पूरी तरह बदल गई—रफ़, तेज़, गाली देने वाली।
"कम ऑन यू स्टूपिड स्लट..."
वो मेरे चेहरे के ठीक सामने झुकी।
उसकी साँस मेरे गाल पर लग रही थी।
"अपना कम चाटो... मिस नेहा के लिए।
वरना... मैं तुम्हें ऐसे ही बाहर ले जाऊँगी।
सिर्फ़ अंडरवियर में... नंगे... सबके सामने।
और सब मर्द हँसेंगे... तुम्हारे छोटे लुंड पर।"
फक...
ये पहली बार था... उसने मेरे लुंड पर कमेंट किया।
"छोटा लुंड"।
वो सच में गुस्से में लग रही थी।
लेकिन साथ ही... उसकी उँगली उसकी चूत में तेज़ी से अंदर-बाहर हो रही थी।
उसकी कराहें बीच-बीच में आ रही थीं—अनकंट्रोल्ड।
"आह्ह... आह्ह... ओह फक..."
मैंने एक सेकंड भी नहीं सोचा।
अपना हाथ उठाया—जो अभी भी मेरे कम से गीला था।
उसे अपने होंठों पर ले गया।
जीभ निकाली।
चाटा—एक-एक बूँद।
नमकीन... मस्की... गाढ़ा।
गर्ल कम जितना स्वादिष्ट नहीं... लेकिन... मैंने सब चाट लिया।
पाम... उँगलियाँ... हर ड्रॉप।
नेहा ने देखा।
उसकी उँगली अभी भी उसकी क्लिट पर रगड़ रही थी—तेज़ी से।
वो कराही—"आआह्ह... आह्ह्ह्ह... गॉड... यू बिच..."
फिर... उसने अपना पैर आगे बढ़ाया।
उसके पैरों पर मेरे कम की बूँदें चमक रही थीं, उसके काफ पर।
वो बोली—
"अब... मेरे पैर चाटो।
अपना कम... मेरे पैरों से साफ़ करो।"
मैंने झुककर चाटा।
उसके पैरों पर... काफ पर।
नमकीन... गाढ़ा... उसकी स्किन की खुशबू के साथ मिला हुआ।
मैं... सच में एक रियल बिच बन गया था।
कोई सेल्फ रिस्पेक्ट नहीं बचा था।
लेकिन... मैं एंजॉय कर रहा था।
मेरा लुंड फिर से हार्ड हो गया था।
मैं कह नहीं सकता था "नहीं"।
नेहा कराह रही थी—"उग्ग्ग्ग्ग्ह्ह्ह्ह... ओह्ह फक... ओओओह्ह येस... येस... येस..."
उसकी आवाज़ में अब वो प्लेजर और टेंशन दोनों थे।
वो काँप रही थी—उसकी जांघें हिल रही थीं।
फिर... वो शांत हुई।
एक गहरी, संतुष्ट साँस ली।
"वेल... दैट वॉज़ फन... माय पर्वी लिटिल चूतिया..."
वो हँसी।
मेरे गाल पर हल्का-सा थप्पड़ मारा—प्यार से।
फिर... तेज़ी से उठी।
बेडरूम की तरफ चली गई।
उसकी गांड लहरा रही थी—सोफे से उठते हुए।
मैं... अभी भी घुटनों पर था।
उसकी स्विंगिंग गांड को देखता रहा।
मेरा लुंड... अभी भी हार्ड... इम्पॉसिबली हॉर्नी।
और दिमाग में एक ही सवाल घूम रहा था—
मेरी नेहा के साथ... ये क्या हो गया?
मैं वहीं घुटनों पर बैठा रहा... काफी देर तक।
पता नहीं क्या होने वाला है।
क्या खेल खत्म हो गया?
या आज रात नेहा के और शेड्स देखने को मिलेंगे?
घुटने दुख रहे थे—फ्लोर बर्न हो रहा था।
लेकिन मैं उठने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था।
कहीं नेहा गुस्सा न हो जाए।
कहीं वो सोचे कि मैं कमिट नहीं हूँ।
करीब 15 मिनट हो गए।
मैं धीरे से उठा।
सीधा किचन की तरफ गया।
विस्की की बॉटल निकाली।
ग्लास में डाला—एक बड़ा पैग।
एक घूँट में गटक लिया।
अपने कम का वो नमकीन, मस्की स्वाद... जल्दी से मुँह से निकालना था।
फिर बालकनी पर गया।
सिगरेट सुलगाई।
एक-दो कश लिए।
धुआँ बाहर छोड़ा।
दिमाग थोड़ा साफ हुआ... लेकिन अभी भी घूम रहा था।
वापस हॉल में आया।
नेहा का कोई नामोनिशान नहीं।
मैं धीरे-धीरे बेडरूम की तरफ बढ़ा।
दरवाज़ा आधा खुला था।
अंदर झाँका।
नेहा बिस्तर पर पड़ी थी।
सिर्फ़ टी-शर्ट में—नीचे कुछ नहीं।
पेट के बल लेटी हुई।
उसकी गोरी, गोल गांड डिम लाइट में चमक रही थी।
वो सो रही लग रही थी।
मैं धीरे से पास गया।
हमने डिनर नहीं किया था।
वो भूखी होगी।
उसकी जांघें अभी भी गीली थीं—पसीने और उसके रस से।
वो तीन बार झड़ी थी—पीछे-पीछे।
मैंने हल्के से उसके कंधे पर टैप किया।
नहीं पता था कैसे अप्रोच करूँ—"नेहा" या "मास्टर"?
लेकिन मैंने नेहा चुना।
खेल खत्म लग रहा था।
"नेहा... हनी... सो रही हो?"
वो एक झटके से जागी।
"हाँ..."
जैसे गहरी नींद से उठी हो।
उसने मेरी तरफ देखा।
फिर मुस्कुराई—वो पुरानी वाली प्यारी मुस्कान।
"तुम ठीक हो... बेबी?"
मेरे दिमाग में राहत हुई।
लेकिन एक कोने में... अभी भी वो चाहत बाकी थी।
क्या पता... वो और प्लान कर रही हो।
क्या पता... अभी भी मालकिन बनी रहे।
लेकिन वो अब कैरेक्टर से बाहर थी।
फिर से वही नेहा—केयरिंग, ऑबिडिएंट वाइफ।
"बेबी... डिनर?
ऑर्डर करूँ... या बाहर चलें?"
वो बिस्तर से उठी।
टी-शर्ट नीचे खींची।
"नहीं... कोई बात नहीं।
मैं कुछ बना लेती हूँ।"
वो किचन की तरफ चली गई।
उसकी गांड अभी भी लहरा रही थी।
मैं पीछे-पीछे गया।
वो स्टोव पर कुछ करने लगी।
मैंने सोचा—ये... ये सब कितनी जल्दी बदल गया।
एक पल पहले... वो मालकिन थी।
अब... फिर से मेरी नेहा।
केयरिंग... प्यारी... घरेलू।
मैं अब भी... थोड़ा डरा हुआ था।
थोड़ा एक्साइटेड।
थोड़ा कन्फ्यूज़।
लेकिन वो... फिर से वही नेहा बन गई थी।
जैसे कुछ हुआ ही नहीं।
नेहा ने अच्छी बीवी की तरह आधे घंटे में कुछ बना दिया।
सिंपल—रोटी, सब्जी, दाल।
खुशबू पूरे घर में फैल गई।
मैंने टीवी ऑन किया—कोई सीरियल या मूवी, ध्यान नहीं था।
दिमाग कहीं और था।
एक घंटा पहले... इसी कमरे में... मैं घुटनों पर था।
उसकी चूत चाट रहा था... दरवाज़ा खुला... गुप्ता जी ने देख लिया...
और अब... सब नॉर्मल।
जैसे कुछ हुआ ही नहीं।
मैं तीसरा ग्लास विस्की पी रहा था।
धीरे-धीरे... गटक-गटक।
हम दोनों में से कोई एक शब्द नहीं बोला।
सन्नाटा... लेकिन अजीब सा कम्फर्टेबल सन्नाटा।
फिर नेहा मेरे बगल में आकर बैठ गई।
उसने रिमोट उठाया।
"नेटफ्लिक्स लगा दो... जो हम देख रहे थे... उसको कंटिन्यू करते हैं।"
उसकी आवाज़ बिल्कुल वैसी ही—बबली, खुश, उत्साही।
कोई हार्शनेस नहीं... कोई मालकिन वाली ठंडक नहीं।
जैसे वो पूरी तरह स्विच ऑफ कर चुकी हो।
या... शायद खुद को फोर्स कर रही हो... उस सब को भूलने के लिए।
मैंने नेटफ्लिक्स खोला।
वही सीरियल प्ले किया।
हम खाना खाने लगे।
फिर वो हँसते हुए बोली—
"मेरी बियर कहाँ है?"
मैं हँसा।
"ओह... अभी लाता हूँ।"
उठा... फ्रिज से एक बियर निकाली।
उसे पकड़ाई।
वो मुस्कुराकर बोली—
"थैंक्स, हनी।"
हमने साथ में खाना खाया।
टीवी पर कुछ चल रहा था।
हँसते-हँसते बातें कीं—ऑफिस की, दोस्तों की, कुछ भी।
रोल प्ले का... एक शब्द नहीं।
जैसे... कुछ हुआ ही नहीं।
वो मेरे चेहरे पर अपना पैर रखकर धक्का दिया—हल्का सा।
"अब... तुम्हारी बारी है... ।
और लगता है... तुम तैयार हो..."
उसने अपना पैर नीचे किया।
उसकी नज़र मेरे लुंड पर गई।
मैं अभी भी सेमी-हार्ड था—प्रीकम की बूँदें लुंड पर चमक रही थीं।
"क्या मदद चाहिए... कुछ देखने के लिए?"
वो अपनी निप्पल्स को ट्वीक करने लगी—धीरे से, होंठ काटते हुए।
एक गहरी साँस ली।
फिर... अपना पैर फैलाया—उसकी चूत अब पूरी तरह दिख रही थी—गीली, चमकती हुई।
फिर... पैर क्रॉस कर लिया—ज्यादातर छुपा दिया।
लेकिन वो जानती थी... मैं देख रहा हूँ।
वो सिगरेट का एक कश ली।
धुआँ मेरे चेहरे पर छोड़ा।
फिर बोली—आवाज़ में वो क्रूर, सेक्सी टोन—
"झड़ो मेरे लिए... माधरचोद।
मुझे दिखाओ... तुम कैसे खुद को सहलाते हो... जब ऑफिस में दूसरे मर्द मेरी तरफ देखते हैं।
बताओ... किस-किस को इमेजिन करते हो... मेरी गंदी, छोटी, हॉर्नी स्लट को चोदते हुए?"
मैं शर्म से लाल हो गया।
गाल जल रहे थे।
सीना धड़क रहा था।
लेकिन... मेरा लुंड अब पूरा रेजिंग हार्ड था।
वो अपनी निप्पल्स ट्वीक करती रही।
उसकी उँगली धीरे-धीरे नीचे गई—उसकी चूत की फोल्ड्स में।
उसने इंडेक्स फिंगर अंदर डाला।
फिर बाहर निकाला—उसका रस चमक रहा था।
उसने फिंगर को अपने होंठों पर रखा।
धीरे से चूसा।
"वाह... जस्ट वाह..."
वो कभी ऐसा नहीं करती थी।
अपना रस... अपने फिंगर से... मेरे सामने... चूस रही थी।
मैं... उस पल में ही झड़ गया।
अनएक्सपेक्टेड।
अनप्रिपेयर्ड।
बहुत ज़्यादा।
गाढ़े, चिपचिपे रस की लकीरें मेरे लुंड से निकलीं—उसके पैरों पर... उसके काफ पर... मेरे हाथ पर।
नेहा ने कराहा—"मम्ह्ह्ह्ह... येस... ब्यूटीफुल... कम फॉर मी... सिसी बॉय... लेट इट आउट..."
वो अपना फिंगर और गहरा चूस रही थी।
फिर... वापस अपनी चूत में डाला।
मैं काँप रहा था।
वाइब्रेट कर रहा था।
मुझे याद नहीं... आखिरी बार कब इतना जोर से झड़ा था।
नेहा ने मेरी तरफ देखा।
उसकी आँखें अभी भी चमक रही थीं।
"अब... चाट लो।"
मैंने उसकी तरफ देखा।
क्या उसने सच में कहा था?
पोस्ट-ऑर्गेज़्म क्लैरिटी अब आने लगी थी।
ये... ग्रॉस लग रहा था... शर्मनाक... गंदा...
लेकिन... मेरा शरीर... अभी भी हार्ड था।
मेरा दिमाग... अभी भी सबमिसिव था।
वो मेरे बालों को हल्का-सा खींचकर बोली—आवाज़ अब रफ़, ब्रेथी, लेकिन अभी भी कमांडिंग।
"कम ऑन, हनी... तुम्हें अच्छा लगा था ना... जब मैंने अपना रस चूसा?"
उसने अपना फिंगर फिर से अपनी चूत में डाला—धीरे से, गहराई से।
फिर बाहर निकाला—उसका रस चमक रहा था।
उसने फिंगर को अपने होंठों पर रखा।
धीरे से चूसा—मेरी आँखों में देखते हुए।
उसकी जीभ फिंगर पर घूम रही थी—लंबी, सेक्सी लिक।
"देखा... कैसा लगता है... अपनी ही चूत का स्वाद?"
मेरा लुंड फिर से हार्ड हो गया।
पोस्ट-ऑर्गेज़्म क्लैरिटी अब कहीं दूर जा चुकी थी।
मेरा शरीर फिर से जल रहा था।
उसकी आँखें... वो भूख... वो क्रूर मुस्कान... सब मुझे अंदर से जला रही थीं।
मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी नेहा... इतनी डोमिनेंट हो सकती है।
इतनी सेक्सी... इतनी क्रूर।
मैं घुटनों पर था... शर्म से काँप रहा था... लेकिन लुंड फिर से हार्ड हो गया था।
पोस्ट-ऑर्गेज़्म क्लैरिटी आ रही थी—वो "ईक" फैक्टर... वो ग्रॉस फीलिंग... वो शर्म... सब वापस आ गया था।
मैं सोच रहा था—ये गंदा है... ये गलत है... मैं ऐसा नहीं कर सकता।
लेकिन नेहा ने मेरे बाल पकड़े।
मेरा सिर ऊपर खींचा।
उसकी आँखें अब जल रही थीं—गुस्सा, भूख, और एक गहरी क्रूरता।
उसकी आवाज़ पूरी तरह बदल गई—रफ़, तेज़, गाली देने वाली।
"कम ऑन यू स्टूपिड स्लट..."
वो मेरे चेहरे के ठीक सामने झुकी।
उसकी साँस मेरे गाल पर लग रही थी।
"अपना कम चाटो... मिस नेहा के लिए।
वरना... मैं तुम्हें ऐसे ही बाहर ले जाऊँगी।
सिर्फ़ अंडरवियर में... नंगे... सबके सामने।
और सब मर्द हँसेंगे... तुम्हारे छोटे लुंड पर।"
फक...
ये पहली बार था... उसने मेरे लुंड पर कमेंट किया।
"छोटा लुंड"।
वो सच में गुस्से में लग रही थी।
लेकिन साथ ही... उसकी उँगली उसकी चूत में तेज़ी से अंदर-बाहर हो रही थी।
उसकी कराहें बीच-बीच में आ रही थीं—अनकंट्रोल्ड।
"आह्ह... आह्ह... ओह फक..."
मैंने एक सेकंड भी नहीं सोचा।
अपना हाथ उठाया—जो अभी भी मेरे कम से गीला था।
उसे अपने होंठों पर ले गया।
जीभ निकाली।
चाटा—एक-एक बूँद।
नमकीन... मस्की... गाढ़ा।
गर्ल कम जितना स्वादिष्ट नहीं... लेकिन... मैंने सब चाट लिया।
पाम... उँगलियाँ... हर ड्रॉप।
नेहा ने देखा।
उसकी उँगली अभी भी उसकी क्लिट पर रगड़ रही थी—तेज़ी से।
वो कराही—"आआह्ह... आह्ह्ह्ह... गॉड... यू बिच..."
फिर... उसने अपना पैर आगे बढ़ाया।
उसके पैरों पर मेरे कम की बूँदें चमक रही थीं, उसके काफ पर।
वो बोली—
"अब... मेरे पैर चाटो।
अपना कम... मेरे पैरों से साफ़ करो।"
मैंने झुककर चाटा।
उसके पैरों पर... काफ पर।
नमकीन... गाढ़ा... उसकी स्किन की खुशबू के साथ मिला हुआ।
मैं... सच में एक रियल बिच बन गया था।
कोई सेल्फ रिस्पेक्ट नहीं बचा था।
लेकिन... मैं एंजॉय कर रहा था।
मेरा लुंड फिर से हार्ड हो गया था।
मैं कह नहीं सकता था "नहीं"।
नेहा कराह रही थी—"उग्ग्ग्ग्ग्ह्ह्ह्ह... ओह्ह फक... ओओओह्ह येस... येस... येस..."
उसकी आवाज़ में अब वो प्लेजर और टेंशन दोनों थे।
वो काँप रही थी—उसकी जांघें हिल रही थीं।
फिर... वो शांत हुई।
एक गहरी, संतुष्ट साँस ली।
"वेल... दैट वॉज़ फन... माय पर्वी लिटिल चूतिया..."
वो हँसी।
मेरे गाल पर हल्का-सा थप्पड़ मारा—प्यार से।
फिर... तेज़ी से उठी।
बेडरूम की तरफ चली गई।
उसकी गांड लहरा रही थी—सोफे से उठते हुए।
मैं... अभी भी घुटनों पर था।
उसकी स्विंगिंग गांड को देखता रहा।
मेरा लुंड... अभी भी हार्ड... इम्पॉसिबली हॉर्नी।
और दिमाग में एक ही सवाल घूम रहा था—
मेरी नेहा के साथ... ये क्या हो गया?
मैं वहीं घुटनों पर बैठा रहा... काफी देर तक।
पता नहीं क्या होने वाला है।
क्या खेल खत्म हो गया?
या आज रात नेहा के और शेड्स देखने को मिलेंगे?
घुटने दुख रहे थे—फ्लोर बर्न हो रहा था।
लेकिन मैं उठने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था।
कहीं नेहा गुस्सा न हो जाए।
कहीं वो सोचे कि मैं कमिट नहीं हूँ।
करीब 15 मिनट हो गए।
मैं धीरे से उठा।
सीधा किचन की तरफ गया।
विस्की की बॉटल निकाली।
ग्लास में डाला—एक बड़ा पैग।
एक घूँट में गटक लिया।
अपने कम का वो नमकीन, मस्की स्वाद... जल्दी से मुँह से निकालना था।
फिर बालकनी पर गया।
सिगरेट सुलगाई।
एक-दो कश लिए।
धुआँ बाहर छोड़ा।
दिमाग थोड़ा साफ हुआ... लेकिन अभी भी घूम रहा था।
वापस हॉल में आया।
नेहा का कोई नामोनिशान नहीं।
मैं धीरे-धीरे बेडरूम की तरफ बढ़ा।
दरवाज़ा आधा खुला था।
अंदर झाँका।
नेहा बिस्तर पर पड़ी थी।
सिर्फ़ टी-शर्ट में—नीचे कुछ नहीं।
पेट के बल लेटी हुई।
उसकी गोरी, गोल गांड डिम लाइट में चमक रही थी।
वो सो रही लग रही थी।
मैं धीरे से पास गया।
हमने डिनर नहीं किया था।
वो भूखी होगी।
उसकी जांघें अभी भी गीली थीं—पसीने और उसके रस से।
वो तीन बार झड़ी थी—पीछे-पीछे।
मैंने हल्के से उसके कंधे पर टैप किया।
नहीं पता था कैसे अप्रोच करूँ—"नेहा" या "मास्टर"?
लेकिन मैंने नेहा चुना।
खेल खत्म लग रहा था।
"नेहा... हनी... सो रही हो?"
वो एक झटके से जागी।
"हाँ..."
जैसे गहरी नींद से उठी हो।
उसने मेरी तरफ देखा।
फिर मुस्कुराई—वो पुरानी वाली प्यारी मुस्कान।
"तुम ठीक हो... बेबी?"
मेरे दिमाग में राहत हुई।
लेकिन एक कोने में... अभी भी वो चाहत बाकी थी।
क्या पता... वो और प्लान कर रही हो।
क्या पता... अभी भी मालकिन बनी रहे।
लेकिन वो अब कैरेक्टर से बाहर थी।
फिर से वही नेहा—केयरिंग, ऑबिडिएंट वाइफ।
"बेबी... डिनर?
ऑर्डर करूँ... या बाहर चलें?"
वो बिस्तर से उठी।
टी-शर्ट नीचे खींची।
"नहीं... कोई बात नहीं।
मैं कुछ बना लेती हूँ।"
वो किचन की तरफ चली गई।
उसकी गांड अभी भी लहरा रही थी।
मैं पीछे-पीछे गया।
वो स्टोव पर कुछ करने लगी।
मैंने सोचा—ये... ये सब कितनी जल्दी बदल गया।
एक पल पहले... वो मालकिन थी।
अब... फिर से मेरी नेहा।
केयरिंग... प्यारी... घरेलू।
मैं अब भी... थोड़ा डरा हुआ था।
थोड़ा एक्साइटेड।
थोड़ा कन्फ्यूज़।
लेकिन वो... फिर से वही नेहा बन गई थी।
जैसे कुछ हुआ ही नहीं।
नेहा ने अच्छी बीवी की तरह आधे घंटे में कुछ बना दिया।
सिंपल—रोटी, सब्जी, दाल।
खुशबू पूरे घर में फैल गई।
मैंने टीवी ऑन किया—कोई सीरियल या मूवी, ध्यान नहीं था।
दिमाग कहीं और था।
एक घंटा पहले... इसी कमरे में... मैं घुटनों पर था।
उसकी चूत चाट रहा था... दरवाज़ा खुला... गुप्ता जी ने देख लिया...
और अब... सब नॉर्मल।
जैसे कुछ हुआ ही नहीं।
मैं तीसरा ग्लास विस्की पी रहा था।
धीरे-धीरे... गटक-गटक।
हम दोनों में से कोई एक शब्द नहीं बोला।
सन्नाटा... लेकिन अजीब सा कम्फर्टेबल सन्नाटा।
फिर नेहा मेरे बगल में आकर बैठ गई।
उसने रिमोट उठाया।
"नेटफ्लिक्स लगा दो... जो हम देख रहे थे... उसको कंटिन्यू करते हैं।"
उसकी आवाज़ बिल्कुल वैसी ही—बबली, खुश, उत्साही।
कोई हार्शनेस नहीं... कोई मालकिन वाली ठंडक नहीं।
जैसे वो पूरी तरह स्विच ऑफ कर चुकी हो।
या... शायद खुद को फोर्स कर रही हो... उस सब को भूलने के लिए।
मैंने नेटफ्लिक्स खोला।
वही सीरियल प्ले किया।
हम खाना खाने लगे।
फिर वो हँसते हुए बोली—
"मेरी बियर कहाँ है?"
मैं हँसा।
"ओह... अभी लाता हूँ।"
उठा... फ्रिज से एक बियर निकाली।
उसे पकड़ाई।
वो मुस्कुराकर बोली—
"थैंक्स, हनी।"
हमने साथ में खाना खाया।
टीवी पर कुछ चल रहा था।
हँसते-हँसते बातें कीं—ऑफिस की, दोस्तों की, कुछ भी।
रोल प्ले का... एक शब्द नहीं।
जैसे... कुछ हुआ ही नहीं।


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