31-03-2026, 01:05 PM
गतान्क से आगे।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
आइए अब समय मे थोड़ा आगे चलते हैं-बस 2 दिन आगे।
महल मे मातम छाया हुआ था। राजासाहब अभी-अभी अपने हाथों से अपने दूसरे बेटे की भी चिता को आग दे कर लौटे थे। उस सुबह डॉक्टर पुरन्दारे के फोन के करीब 3 घंटे बाद बॅंगलुर पोलीस ने विश्वा की लाश को उस बदनाम मोहल्ले की गली से बरामद कर लिया था। राजासाहब तो बस बॅंगलुर के लिए निकलने ही वाले थे जब उन्हे ये मनहूस खबर मिली।
पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट मे मौत की वजह ड्रग ओवरडोस बताई गयी थी पर डॉक्टर पुरन्दारे का कहना था कि विश्वा अपनी लत को काफ़ी हद तक छोड़ चुका था और उन्हे बिल्कुल भी यकीन नही हो रहा था कि वो सेंटर से भाग गया था वो भी ड्रग्स के लिए। राजासाहब के लिए इन बतो का कोई मायने नही रह गया था, उनका दूसरा बेटा भी मौत के मुँह मे जा चुका था और अब वो अकेले थे, उनका वंश उनके बाद ख़तम हो जाने वाला था।
विश्वा की मौत ने उन्हे तोड़ दिया था और वो अपनी स्टडी मे बैठे अपनी किस्मत पे रो रहे थे। और मेनका......
मेनका को विश्वजीत की मौत का अफ़सोस था पर दुख...दुख नही था। और होता भी कैसे,उसने उसे कभी एक पत्नी का दर्जा दिया ही नही था। उसके लिए तो बस वो उसकी जिस्म की भूख मिटाने की चीज़ थी बस। मेनका को उसकी मौत पे जितना अफ़सोस था उस से कही ज़्यादा अपने ससुर की चिंता थी। इस हादसे के बाद वो बिल्कुल निराश और हताश हो गये थे। वो शख्स जो अभी तक ज़िंदगी की सभी मुश्किलो का सामना एक चट्टान की तरह करता आया था, आज उस सूखे पत्ते की तरह था जिसे वक़्त की हवाएँ जब चाहे, जहा चाहे उड़ा सकती थी।
मेनका उन्हे संभालना चाहती थी पर इस समय महल मे रिश्तेदारो की भीड़ थी, उसके मा-बाप भी वही थे। इन सब के होते उसे राजासाहब से बात करने का मौका ही नही मिल रहा था। और मौका मिलता भी तो क्या होता, वो अभी उनसे खुल कर बात भी तो नही कर पाती, तो बस मेनका बस सही मौके का इंतेज़ार करने लगी। उसने ठान लिया था कि वो अपने ससुर और उनके द्वारा खड़े किए गये बिज़नेस को बर्बाद नही होने देगी। मैत्री की पेशकश.
उधर जब्बार जश्न मना रहा था,"ये लो मेरी जान,पियो।" उसने मलिका की कमर मे हाथ डाल बियर की बॉटल उसके होठ से लगा दी।
"ये बताओ की मेरे अकाउंट मे मेरे पैसे जमा कराए की नही?" मलिका ने एकघूँट भरा।
"हा,मेरी जान,कल बॅंक जाकर चेक कर लेना।" जब्बार ने उसकी कमर से हाथ उपर लाते हुए उसके टॉप मे घुसा कर एक चूची को दबोच लिया। मलिका ने उसके होठ चूम लिए,"एयेए...अहह...पूरे पैसे डाले है ना? या पिच्छली बार की तरह आधे ही डाले हैं?"
"तू बस कल बॅंक जाकर देख लेना।",जब्बार ने उसका टॉप उतार फेंका और उसकी चूचियो को चूसने लगा। थोड़ी देर तक मलिका खड़ी उस से अपनी छातिया चुसवाती रही फिर उसे धकेल कर परे कर दिया और ज़मीन पे सोफे से पीठ लगा कर बैठ गयी और बियर की बॉटल मुँह से लगा ली। जब्बार को तो बस उसे चोदने का भूत सवार था। उसने अपने कपड़े उतार दिए और मलिका के पास जाकर उसके हाथो से बॉटल छीन के अपना लंड उसके मुँह मे डाल दिया,"इसे पी,बियर से ज़्यादा नशा है इसमे।"
ये बात सच थी, मलिका के लिए तो एक मर्द का कड़ा और बड़ा लंड दुनिया की सबसे ज़्यादा नशीली चीज़ थी। वो लंड अपने मुँह मे ले चूसने लगी पर उसकी चूत को कल्लन के लंड का चस्का लग गया था और कल्लन उनके साथ राजपुरा आया नही था।
"तेरा वो पालतू कहा है,ज़ालिम?",उसने जब्बार के आंडो को हाथ से दबाया और जीभ उसके लंड की छेद पे लगा दी।
"उसे कुछ दीनो के लिए अंडरग्राउंड रहने को कहा है। जब ये विश्वा की मौत की खबर थोड़ी बासी हो जाए फिर वो बाहर आएगा।",उसने मलिका के सर को पकड़ लिया और अपनी कमर हिलाते हुए उसके मुँह को चोदने लगा।
"अभी थोड़ी देर पहले जब तू नहा रही थी तब साले ने फोन किया था। उसे भी तेरी तरह अपने पैसों की चिंता लगी हुई थी।" जब्बार ने मलिका को वही ज़मीन पर लिटा दिया और उस पर चढ़ कर अपना लंड उसके अंदर घुसा दिया।
"आआनन्नऊम्मन्नह...",मलिका उस से चुदने लगी और वो जानती थी की उसकी चुदाई से वो झडेगी भी फिर भी जब्बार मे वो कल्लन वाली बात नही थी। करीब 15 मिनिट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद जब्बार ने उसे छोडा और उठ कर बाथरूम चला गया। उसके जाते ही मलिका ने उसका मोबाइल उठाया, उसमे कल्लन का नंबर देखा और अपने मोबाइल से डायल करने लगी, "कहा है ज़ालिम? मेरी प्यास तो बुझा जाता।",वो फुसफुसाइ। कल्लन ने उसे अपना ठिकाना बता दिया पर शायद उसे पता नही था कि वो कितनी बड़ी ग़लती कर रहा था। मैत्री रचित कहानी.
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जय भारत.
आइए अब समय मे थोड़ा आगे चलते हैं-बस 2 दिन आगे।
महल मे मातम छाया हुआ था। राजासाहब अभी-अभी अपने हाथों से अपने दूसरे बेटे की भी चिता को आग दे कर लौटे थे। उस सुबह डॉक्टर पुरन्दारे के फोन के करीब 3 घंटे बाद बॅंगलुर पोलीस ने विश्वा की लाश को उस बदनाम मोहल्ले की गली से बरामद कर लिया था। राजासाहब तो बस बॅंगलुर के लिए निकलने ही वाले थे जब उन्हे ये मनहूस खबर मिली।
पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट मे मौत की वजह ड्रग ओवरडोस बताई गयी थी पर डॉक्टर पुरन्दारे का कहना था कि विश्वा अपनी लत को काफ़ी हद तक छोड़ चुका था और उन्हे बिल्कुल भी यकीन नही हो रहा था कि वो सेंटर से भाग गया था वो भी ड्रग्स के लिए। राजासाहब के लिए इन बतो का कोई मायने नही रह गया था, उनका दूसरा बेटा भी मौत के मुँह मे जा चुका था और अब वो अकेले थे, उनका वंश उनके बाद ख़तम हो जाने वाला था।
विश्वा की मौत ने उन्हे तोड़ दिया था और वो अपनी स्टडी मे बैठे अपनी किस्मत पे रो रहे थे। और मेनका......
मेनका को विश्वजीत की मौत का अफ़सोस था पर दुख...दुख नही था। और होता भी कैसे,उसने उसे कभी एक पत्नी का दर्जा दिया ही नही था। उसके लिए तो बस वो उसकी जिस्म की भूख मिटाने की चीज़ थी बस। मेनका को उसकी मौत पे जितना अफ़सोस था उस से कही ज़्यादा अपने ससुर की चिंता थी। इस हादसे के बाद वो बिल्कुल निराश और हताश हो गये थे। वो शख्स जो अभी तक ज़िंदगी की सभी मुश्किलो का सामना एक चट्टान की तरह करता आया था, आज उस सूखे पत्ते की तरह था जिसे वक़्त की हवाएँ जब चाहे, जहा चाहे उड़ा सकती थी।
मेनका उन्हे संभालना चाहती थी पर इस समय महल मे रिश्तेदारो की भीड़ थी, उसके मा-बाप भी वही थे। इन सब के होते उसे राजासाहब से बात करने का मौका ही नही मिल रहा था। और मौका मिलता भी तो क्या होता, वो अभी उनसे खुल कर बात भी तो नही कर पाती, तो बस मेनका बस सही मौके का इंतेज़ार करने लगी। उसने ठान लिया था कि वो अपने ससुर और उनके द्वारा खड़े किए गये बिज़नेस को बर्बाद नही होने देगी। मैत्री की पेशकश.
उधर जब्बार जश्न मना रहा था,"ये लो मेरी जान,पियो।" उसने मलिका की कमर मे हाथ डाल बियर की बॉटल उसके होठ से लगा दी।
"ये बताओ की मेरे अकाउंट मे मेरे पैसे जमा कराए की नही?" मलिका ने एकघूँट भरा।
"हा,मेरी जान,कल बॅंक जाकर चेक कर लेना।" जब्बार ने उसकी कमर से हाथ उपर लाते हुए उसके टॉप मे घुसा कर एक चूची को दबोच लिया। मलिका ने उसके होठ चूम लिए,"एयेए...अहह...पूरे पैसे डाले है ना? या पिच्छली बार की तरह आधे ही डाले हैं?"
"तू बस कल बॅंक जाकर देख लेना।",जब्बार ने उसका टॉप उतार फेंका और उसकी चूचियो को चूसने लगा। थोड़ी देर तक मलिका खड़ी उस से अपनी छातिया चुसवाती रही फिर उसे धकेल कर परे कर दिया और ज़मीन पे सोफे से पीठ लगा कर बैठ गयी और बियर की बॉटल मुँह से लगा ली। जब्बार को तो बस उसे चोदने का भूत सवार था। उसने अपने कपड़े उतार दिए और मलिका के पास जाकर उसके हाथो से बॉटल छीन के अपना लंड उसके मुँह मे डाल दिया,"इसे पी,बियर से ज़्यादा नशा है इसमे।"
ये बात सच थी, मलिका के लिए तो एक मर्द का कड़ा और बड़ा लंड दुनिया की सबसे ज़्यादा नशीली चीज़ थी। वो लंड अपने मुँह मे ले चूसने लगी पर उसकी चूत को कल्लन के लंड का चस्का लग गया था और कल्लन उनके साथ राजपुरा आया नही था।
"तेरा वो पालतू कहा है,ज़ालिम?",उसने जब्बार के आंडो को हाथ से दबाया और जीभ उसके लंड की छेद पे लगा दी।
"उसे कुछ दीनो के लिए अंडरग्राउंड रहने को कहा है। जब ये विश्वा की मौत की खबर थोड़ी बासी हो जाए फिर वो बाहर आएगा।",उसने मलिका के सर को पकड़ लिया और अपनी कमर हिलाते हुए उसके मुँह को चोदने लगा।
"अभी थोड़ी देर पहले जब तू नहा रही थी तब साले ने फोन किया था। उसे भी तेरी तरह अपने पैसों की चिंता लगी हुई थी।" जब्बार ने मलिका को वही ज़मीन पर लिटा दिया और उस पर चढ़ कर अपना लंड उसके अंदर घुसा दिया।
"आआनन्नऊम्मन्नह...",मलिका उस से चुदने लगी और वो जानती थी की उसकी चुदाई से वो झडेगी भी फिर भी जब्बार मे वो कल्लन वाली बात नही थी। करीब 15 मिनिट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद जब्बार ने उसे छोडा और उठ कर बाथरूम चला गया। उसके जाते ही मलिका ने उसका मोबाइल उठाया, उसमे कल्लन का नंबर देखा और अपने मोबाइल से डायल करने लगी, "कहा है ज़ालिम? मेरी प्यास तो बुझा जाता।",वो फुसफुसाइ। कल्लन ने उसे अपना ठिकाना बता दिया पर शायद उसे पता नही था कि वो कितनी बड़ी ग़लती कर रहा था। मैत्री रचित कहानी.
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जय भारत.


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