31-03-2026, 12:57 PM
उधर....
विश्वा होश मे आया तो उसने अपने को एक बंध गंदे कमरे मे कुर्सी पे बँधा पाया। सामने जब्बार,कल्लन और मलिका खड़े थे।
"तू!!?" वो अपने बंधन खोलने की कोशिश करने लगा।
"आराम से कुंवर", जब्बार ने अपने दोनो साथियो को इशारा किया,"कुंवर साहब की खातिर शुरू करो।“
कल्लन और मलिका ने उसके बँधे हाथो की नसो मे इंजेक्षन्स लगाने शुरू कर दिए। मैत्री की पेशकश.
"नही..नही...मुझे छोड़ दे बहनचोद,कमीने!",विश्वा चिल्लाने लगा तो जब्बार ने उसके मुँह मे कपड़ा ठूंस दिया।" लगाते रहो इम्जेक्षन यह भोसड़ीके को, तब तक जब तक कुंवर साहब भगवान के पास ना पहुँच जाए।।"
विश्वा की आँखे ख़ौफ्फ से फैल गयी और कल्लन और मलिका उसे इंजेक्षन लगाते रहे।
थोड़ी ही देर बाद विश्वा बेसूध हो गया। तीनो ने दस्ताने पहने हुए थे और मलिका यूज़ की हुई सरिंजस उठा कर एक पॅकेट मे रख रही थी। कल्लन विश्वा की नब्ज़ देख रहा था, "काम हो गया।"
"यस!",जब्बार खुशी से चिल्लाया। खोलो इस बहनचोदकी रस्सियाँ और चलो बाहर।"
उन्होने विश्वा की लाश गली के एक नाले के पास गिरा दी और उस कमरे को वैसे ही खुला छोड़ कर अलग-अलग रस्तो से बॅंगलुर छोड़ने की तैयारी करने लगे।
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सुबह के 4 बज रहे था और राजासाहब अपने पलंग पे लेटे थे। उनकी बाई बाँह मेनका की गर्दन के नीचे थी और वो करवट ले उनके साथ उनके होठों को चूम रही थी। उसने अपनी बाई जाँघ अपने ससुर के जिस्म पे इस तरह चढ़ा रखी थी की उनका लंड उसके नीचे दबा था। वो अपने बाए हाथ से उनके सीने के बाल सहला रही थी और राजासाहब अपने दाए हाथ से उसकी बाई जाँघ को।
तभी राजासाहब का मोबाइल बजा,"हेलो!!! क्या?!!!।।"वो चौंक कर उठ बैठे और थोड़ी देर तक फोन सुनते रहे।
"क्या हुआ?",मेनका उठ कर उनके कंधे पे हाथ फेरने लगी।
"विश्वा सेंटर से भाग गया है। बस अपने लॅपटॉप पे मेसेज लिख छोडा है कि ड्रग्स की तलब अब उस से बर्दाश्त नही हो रही।"
"क्या?",मेनका के माथे पे चिंता की रेखाएँ खींच गयी। मैत्री की रचना.
कहानी अभी जारी है कृपया बने रहे और अपनी राय देते रहे।
क्रमशः............
दोस्तों आज के लिए बस यही तक.
जय भारत.
विश्वा होश मे आया तो उसने अपने को एक बंध गंदे कमरे मे कुर्सी पे बँधा पाया। सामने जब्बार,कल्लन और मलिका खड़े थे।
"तू!!?" वो अपने बंधन खोलने की कोशिश करने लगा।
"आराम से कुंवर", जब्बार ने अपने दोनो साथियो को इशारा किया,"कुंवर साहब की खातिर शुरू करो।“
कल्लन और मलिका ने उसके बँधे हाथो की नसो मे इंजेक्षन्स लगाने शुरू कर दिए। मैत्री की पेशकश.
"नही..नही...मुझे छोड़ दे बहनचोद,कमीने!",विश्वा चिल्लाने लगा तो जब्बार ने उसके मुँह मे कपड़ा ठूंस दिया।" लगाते रहो इम्जेक्षन यह भोसड़ीके को, तब तक जब तक कुंवर साहब भगवान के पास ना पहुँच जाए।।"
विश्वा की आँखे ख़ौफ्फ से फैल गयी और कल्लन और मलिका उसे इंजेक्षन लगाते रहे।
थोड़ी ही देर बाद विश्वा बेसूध हो गया। तीनो ने दस्ताने पहने हुए थे और मलिका यूज़ की हुई सरिंजस उठा कर एक पॅकेट मे रख रही थी। कल्लन विश्वा की नब्ज़ देख रहा था, "काम हो गया।"
"यस!",जब्बार खुशी से चिल्लाया। खोलो इस बहनचोदकी रस्सियाँ और चलो बाहर।"
उन्होने विश्वा की लाश गली के एक नाले के पास गिरा दी और उस कमरे को वैसे ही खुला छोड़ कर अलग-अलग रस्तो से बॅंगलुर छोड़ने की तैयारी करने लगे।
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सुबह के 4 बज रहे था और राजासाहब अपने पलंग पे लेटे थे। उनकी बाई बाँह मेनका की गर्दन के नीचे थी और वो करवट ले उनके साथ उनके होठों को चूम रही थी। उसने अपनी बाई जाँघ अपने ससुर के जिस्म पे इस तरह चढ़ा रखी थी की उनका लंड उसके नीचे दबा था। वो अपने बाए हाथ से उनके सीने के बाल सहला रही थी और राजासाहब अपने दाए हाथ से उसकी बाई जाँघ को।
तभी राजासाहब का मोबाइल बजा,"हेलो!!! क्या?!!!।।"वो चौंक कर उठ बैठे और थोड़ी देर तक फोन सुनते रहे।
"क्या हुआ?",मेनका उठ कर उनके कंधे पे हाथ फेरने लगी।
"विश्वा सेंटर से भाग गया है। बस अपने लॅपटॉप पे मेसेज लिख छोडा है कि ड्रग्स की तलब अब उस से बर्दाश्त नही हो रही।"
"क्या?",मेनका के माथे पे चिंता की रेखाएँ खींच गयी। मैत्री की रचना.
कहानी अभी जारी है कृपया बने रहे और अपनी राय देते रहे।
क्रमशः............
दोस्तों आज के लिए बस यही तक.
जय भारत.


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