31-03-2026, 12:55 PM
मेनका अभी भी अपने ससुर की गोद मे उनका लंड अपनी चूत मे लिए बैठी उन्हे चूम रही थी। राजासाहब थोड़ी ही देर पहले झडे थे पर दोनो का दिल अभी भी नही भरा था। राजासाहब झुक कर उसकी चूचियाँ चूसने लगे तो मेनका मस्त हो कर नीचे से कमर हिलाने लगी। राजासाहब ने उसकी गांड मसलते हुए एक उंगली उसकी गांड के छेद मे डाल दी। मेनका चिहुनक के और ज़ोर से उनके लंड पे उछलने लगी। राजासाहब का सोया लंड एक बार फिर से उनकी बहू की चूत के अंदर फिर से अपनी जगह बना रहा था। वो भी नीचे से अपनी कमर हिलाने लगे। उन्होने अपने हाथों मे उसकी गांड की फांके भर एक उंगली उसमे घुसाए हुए उठ कर अपने घुटनो पे बैठ गये और लगे उसे चोदने। मेनका मस्त हो गयी और उनसे लिपट कर चुदाई का मज़ा लेने लगी। राजासाहब झुक कर बारी-बारी से उसकी चूचिया और कड़े निपल्स को निचोड़ रहे थे। कमरे मे गीली चूत मे अंदर-बाहर होते लंड की फॅक-फॅक,राजासाहब की भारी साँसे और मेनका की आँहे गूँज रही थी। मैत्री की रचना.
मेनका के बदन मे बिजली दौड़ गयी और उसकी चूत ने चुतरस छोड़ दिया। राजासाहब की बहू उनसे कस के लिपट गयी,वो समझ गयी को वो झड़ रही है,उन्होने ने भी 2-3 ज़ोरदार धक्के लगाए और उसकी चूत मे पानी छोड़ दिया।
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उधर....
बने रहिये.................
मेनका के बदन मे बिजली दौड़ गयी और उसकी चूत ने चुतरस छोड़ दिया। राजासाहब की बहू उनसे कस के लिपट गयी,वो समझ गयी को वो झड़ रही है,उन्होने ने भी 2-3 ज़ोरदार धक्के लगाए और उसकी चूत मे पानी छोड़ दिया।
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