31-03-2026, 12:51 PM
कल्लन कल रात की तरह ही सेंटर के अंदर घुसा और सीधा दूसरी मंज़िल पे पहुँच गया। यहा ड्यूटी रूम मे एक डॉक्टर सो रहा था। कल्लन विश्वा के कमरे मे पहुँचा,वो गहरी नींद मे था। कल्लन ने अपनी जेब से एक शीशी निकाल कर उसमे से एक लिक्विड निकाल अपने रुमाल को भिगोया और फिर वो रुमाल कस के विश्वा की नाक पे दबा दिया। विश्वा थोडा छटपटाया पर थोड़ी ही देर मे बेहोश हो गया। विश्वा के रूम मे उसका लॅपटॉप भी पड़ा था। उसकी हालत मे सुधार देखते हुए और उसका मन लगाए रखने के लिए डॉक्टर पुरन्दारे ने उसे ये रखने की इजाज़त दी थी पर बिना नेट कनेक्शन के। कल्लन ने लॅपटॉप ऑन कर कुछ टाइप किया और फिर उसे वैसे ही ओं छोड़ विश्वा के पास गया और उसे अपने कंधे पे उठाया और नीचे की तरफ बढ़ गया।
जब वो नीचे पहली मंज़िल पे पहुँचा तो किसी के आने की आहट सुनाई दी तो वो जल्दी से बगल के एक कमरे मे घुस गया। वहा एक मरीज़ सोया पड़ा था। कल्लन ने दरवाज़े की ओट से देखा,इस फ्लोर का डॉक्टर राउंड लेता हुआ हर कमरे मे देख रहा था और उसी के कमरे की ओर आ रहा था। कल्लन दरवाज़े के पीछे हो गया। अगर डॉक्टर अंदर आया तो उसके हाथों बेहोश ज़रूर होगा।
तभी दरवाज़ा खुला,विश्वा को अपने दाए कंधे पे उठाए अपना बाया हाथ उसने उपर उठा लिया,अगर डॉक्टर अंदर आया तो बस गर्दन के पीछे एक वार पड़ेगा और वो बेहोश हो जाएगा। डॉक्टर ने दरवाज़ा खोल बाहर से ही झाँका और अंदर सोते हुए मरीज़ को देख दरवाज़ा खींच कर वापस चला गया। कल्लन ने राहत की सांस ली और थोड़ी देर उसी कमरे मे खड़ा रहा। फिर उसने बाहर झाँका,डॉ.अपने ड्यूटी रूम मे चला गया था। मैत्री की प्रस्तुति.
कल्लन नीचे आया और बेसमेंट मे पहुँचा। वहा एक कार कवर पड़ा था। उसने विश्वा को उसी कवर मे लपेटा और वही छोड़ दिया। फिर उसने जनरेटर के कनेक्शन्स निकाल दिए। तभी जब्बार बेस्कॉम की वॅन ले मैन गेट पे पहुँचा,"गार्ड भाई,उधर के कॉलेज हॉस्टिल से कंप्लेंट आई है,वहा कि बिजली ठीक करने के लिए थोड़ी देर के लिए पूरे फेज़ की लाइट बंद करेंगे, परेशान होके फोन पे कंप्लेंट मत करना,बस 25-30 मिनट का काम है।"
"ठीक है,भाई! वैसे भी यहा जनरेटर है,कोई परेशानी नही होगी।" सेंटर के पास ही एक इंजिनियरिंग कॉलेज कम हॉस्टिल था और इसके अलावा 2-3 बिल्डिंग्स अंडर कन्स्ट्रक्षन थी। जब्बार वॅन ले आगे बढ़ा और जंक्शन बॉक्स खोल उसने सेंटर की बत्ती काट दी और वेन वापस ले कॉलेज की ओर जाने लगा।
जैसे ही वान सेंटर के पास पहुँची वो गार्ड हाथ हिलाता नज़र आया।
"क्या हुआ?"
"अरे भाई,हमारा जनरेटर नही चल रहा?"
"अरे,अभी लाइट आ जाएगी,जेनरेटर का क्या करना है।"
"देख लो भाई,मरीज़ो को तकलीफ़ हो जाएगी।" गार्ड ने बोला।
"अच्छा भाई,पहले तुम्हारा ही काम करते हैं। गेट खोलो।"
वॅन अंदर लगा कर जब्बार उतरा,"कहा है जेनरेटर?"
"वहा नीचे।",गार्ड नीचे जाने लगा। मैत्री रचित कहानी.
"तुम रहने दो,मैं देखता हू।",जब्बार बेसमेंट मे चला गया।
"वॅन खुली है, इसे चुपके से उसमे पहुँचाओ और तुम भी उसमे छिप जाओ।"
"ओके!" कल्लन धीरे-धीरे बाहर पहुँचा,गार्ड गेट के पास घूम रहा था। उस से छिपते हुए कल्लन ने विश्वा को अंदर डाला और खुद भी लेट गया। थोड़ी देर बाद जब्बार जनरेटर स्टार्ट कर बाहर निकला और वेन स्टार्ट कर दी,"हो गया भाई तेरा काम।"
"शुक्रिया भाई।" गार्ड ने गेट खोला। इस पूरे दौरान जब्बार ने टोपी पहने हुई थी और अंधेरे की वजह से गार्ड ठीक से उसका चेहरा नही देख पाया। जब्बार ने वॅन कॉलेज की तरफ घुमाई और फिर पीछे आके दीवार के पास गिरी सीढ़ी उठाई और फिर घुमा कर जंक्शन बॉक्स के पास गया और सेंटर की बिजली कनेक्ट कर दी।
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आज के लिएय बस यही तक फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ तब तक के लिए मैत्री की तरफ से जय भारत.
जब वो नीचे पहली मंज़िल पे पहुँचा तो किसी के आने की आहट सुनाई दी तो वो जल्दी से बगल के एक कमरे मे घुस गया। वहा एक मरीज़ सोया पड़ा था। कल्लन ने दरवाज़े की ओट से देखा,इस फ्लोर का डॉक्टर राउंड लेता हुआ हर कमरे मे देख रहा था और उसी के कमरे की ओर आ रहा था। कल्लन दरवाज़े के पीछे हो गया। अगर डॉक्टर अंदर आया तो उसके हाथों बेहोश ज़रूर होगा।
तभी दरवाज़ा खुला,विश्वा को अपने दाए कंधे पे उठाए अपना बाया हाथ उसने उपर उठा लिया,अगर डॉक्टर अंदर आया तो बस गर्दन के पीछे एक वार पड़ेगा और वो बेहोश हो जाएगा। डॉक्टर ने दरवाज़ा खोल बाहर से ही झाँका और अंदर सोते हुए मरीज़ को देख दरवाज़ा खींच कर वापस चला गया। कल्लन ने राहत की सांस ली और थोड़ी देर उसी कमरे मे खड़ा रहा। फिर उसने बाहर झाँका,डॉ.अपने ड्यूटी रूम मे चला गया था। मैत्री की प्रस्तुति.
कल्लन नीचे आया और बेसमेंट मे पहुँचा। वहा एक कार कवर पड़ा था। उसने विश्वा को उसी कवर मे लपेटा और वही छोड़ दिया। फिर उसने जनरेटर के कनेक्शन्स निकाल दिए। तभी जब्बार बेस्कॉम की वॅन ले मैन गेट पे पहुँचा,"गार्ड भाई,उधर के कॉलेज हॉस्टिल से कंप्लेंट आई है,वहा कि बिजली ठीक करने के लिए थोड़ी देर के लिए पूरे फेज़ की लाइट बंद करेंगे, परेशान होके फोन पे कंप्लेंट मत करना,बस 25-30 मिनट का काम है।"
"ठीक है,भाई! वैसे भी यहा जनरेटर है,कोई परेशानी नही होगी।" सेंटर के पास ही एक इंजिनियरिंग कॉलेज कम हॉस्टिल था और इसके अलावा 2-3 बिल्डिंग्स अंडर कन्स्ट्रक्षन थी। जब्बार वॅन ले आगे बढ़ा और जंक्शन बॉक्स खोल उसने सेंटर की बत्ती काट दी और वेन वापस ले कॉलेज की ओर जाने लगा।
जैसे ही वान सेंटर के पास पहुँची वो गार्ड हाथ हिलाता नज़र आया।
"क्या हुआ?"
"अरे भाई,हमारा जनरेटर नही चल रहा?"
"अरे,अभी लाइट आ जाएगी,जेनरेटर का क्या करना है।"
"देख लो भाई,मरीज़ो को तकलीफ़ हो जाएगी।" गार्ड ने बोला।
"अच्छा भाई,पहले तुम्हारा ही काम करते हैं। गेट खोलो।"
वॅन अंदर लगा कर जब्बार उतरा,"कहा है जेनरेटर?"
"वहा नीचे।",गार्ड नीचे जाने लगा। मैत्री रचित कहानी.
"तुम रहने दो,मैं देखता हू।",जब्बार बेसमेंट मे चला गया।
"वॅन खुली है, इसे चुपके से उसमे पहुँचाओ और तुम भी उसमे छिप जाओ।"
"ओके!" कल्लन धीरे-धीरे बाहर पहुँचा,गार्ड गेट के पास घूम रहा था। उस से छिपते हुए कल्लन ने विश्वा को अंदर डाला और खुद भी लेट गया। थोड़ी देर बाद जब्बार जनरेटर स्टार्ट कर बाहर निकला और वेन स्टार्ट कर दी,"हो गया भाई तेरा काम।"
"शुक्रिया भाई।" गार्ड ने गेट खोला। इस पूरे दौरान जब्बार ने टोपी पहने हुई थी और अंधेरे की वजह से गार्ड ठीक से उसका चेहरा नही देख पाया। जब्बार ने वॅन कॉलेज की तरफ घुमाई और फिर पीछे आके दीवार के पास गिरी सीढ़ी उठाई और फिर घुमा कर जंक्शन बॉक्स के पास गया और सेंटर की बिजली कनेक्ट कर दी।
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आज के लिएय बस यही तक फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ तब तक के लिए मैत्री की तरफ से जय भारत.


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