31-03-2026, 12:46 PM
हर रात की तरह इस रात भी मेनका और राजासाहब उनके बिस्तर मे एक दूसरे की बाहों मे नंगे पड़े एक दूसरे के होंठ चूम रहे थे। राजासाहब के हाथ मेनका की गांड और चूची मसल रहे थे और मेनका उनका लंड हिला रही थी। राजासाहब उसके होठ छोड़ नीचे आए और उसकी एक चूची को मुँह मे भर लिया और चूसने लगे। मैत्री की प्रस्तुति.
मेनका बहुत गरम हो चुकी थाई। उसने अपने ससुर को अपनी चूची से अलग किया और लिटा दिया और उनकी बगल मे घुटनो पे आके उनका लंड अपने मुँह मे ले लिया। राजासाहब ने हाथ बढ़ा कर उसकी गांड पकड़ी और खींच कर उसे अपने उपर ले लिया। अब दोनो 69 पोज़िशन मे थे। मेनका झुक कर अपने ससुर का लंड अपने हाथों मे भर अपने मुँह मे ले रही थी और वो नीचे से अपने हाथों से उसकी कमर पकड़ उसकी चूत को अपनी जीभ पे लगा रहे थे।
उसके ससुर की लपलपाति जीभ ने मेनका की चूत को पानी छोड़ने के लिए विवश कर दिया और वो कमर हिलाती हुई अपने ससुर के लंड को और ज़ोर से पकड़ कर चूसने लगी। वो उनके सुपारे से चूमती हुई नीचे लंड की जड़ तक आती और फिर उनके अंडो को एक-एक कर के अपने मुँह मे भर लेती। फिर जड़ से चूमती हुई वापस उपर सुपारे तक आती और फिर उसे अपने मुँह मे ले चूसने लगती। राजासाहब की जीभ तो लगातार उसकी चूत के दाने को छेड़ रही थी। बहुत देर तक दोनो ऐसे ही लगे रहे।
फिर राजासाहब उठे और मेनका को घुमा कर अपनी गोद मे बिठा कर उसकी चूत मे नीचे से लंड डाल दिया। अब मेनका अपने ससुर की गोद मे बैठी उनके लंड पे धीरे-धीरे हिल रही थी,उसकी बाहें उनकी गर्दन मे लिपटी थी और हाथ उनके बालों मे थे,टांगे उसने उनकी कमर पे लपेट रखी थी। राजासाहब भी नीचे से अपनी कमर हिला रहे थे,मेनका को बाहों मे भर वो उसकी पीठ और गांड सहला रहे थे। दोनो के होंठ एक दूसरे से जुड़े हुए थे।
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बने रहिये दोस्तों.............
मेनका बहुत गरम हो चुकी थाई। उसने अपने ससुर को अपनी चूची से अलग किया और लिटा दिया और उनकी बगल मे घुटनो पे आके उनका लंड अपने मुँह मे ले लिया। राजासाहब ने हाथ बढ़ा कर उसकी गांड पकड़ी और खींच कर उसे अपने उपर ले लिया। अब दोनो 69 पोज़िशन मे थे। मेनका झुक कर अपने ससुर का लंड अपने हाथों मे भर अपने मुँह मे ले रही थी और वो नीचे से अपने हाथों से उसकी कमर पकड़ उसकी चूत को अपनी जीभ पे लगा रहे थे।
उसके ससुर की लपलपाति जीभ ने मेनका की चूत को पानी छोड़ने के लिए विवश कर दिया और वो कमर हिलाती हुई अपने ससुर के लंड को और ज़ोर से पकड़ कर चूसने लगी। वो उनके सुपारे से चूमती हुई नीचे लंड की जड़ तक आती और फिर उनके अंडो को एक-एक कर के अपने मुँह मे भर लेती। फिर जड़ से चूमती हुई वापस उपर सुपारे तक आती और फिर उसे अपने मुँह मे ले चूसने लगती। राजासाहब की जीभ तो लगातार उसकी चूत के दाने को छेड़ रही थी। बहुत देर तक दोनो ऐसे ही लगे रहे।
फिर राजासाहब उठे और मेनका को घुमा कर अपनी गोद मे बिठा कर उसकी चूत मे नीचे से लंड डाल दिया। अब मेनका अपने ससुर की गोद मे बैठी उनके लंड पे धीरे-धीरे हिल रही थी,उसकी बाहें उनकी गर्दन मे लिपटी थी और हाथ उनके बालों मे थे,टांगे उसने उनकी कमर पे लपेट रखी थी। राजासाहब भी नीचे से अपनी कमर हिला रहे थे,मेनका को बाहों मे भर वो उसकी पीठ और गांड सहला रहे थे। दोनो के होंठ एक दूसरे से जुड़े हुए थे।
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बने रहिये दोस्तों.............


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