31-03-2026, 12:38 PM
बेस्कॉम की वॅन रिहेब सेंटर के पीछे की दीवार के साथ बने उस सुनसान रास्ते पे खड़ी थी। उसके काले शीशों के अंदर कोई नही देख पाता पर अंदर जब्बार और मलिका बैठे थे। रात के 2 बज रहे थे और कल्लन सीडी के सहारे रिहेब सेंटर की दीवार पर चढ़ गया था। चढ़ने के बाद उसने सीडी उठा कर सेंटर के अंदर के तरफ लगा दी और उतर गया। उसने सीडी ज़मीन पे लिटा कर रख दी,उस एक मात्र गार्ड को दूर से वो सीढ़ी कभी नज़र नही आती,वैसे भी वो अपने गेट के कॅबिन से बाहर निकलता था ही नही।
कल्लन चुपके से सेंटर के अंदर जाकर दोनो मंज़िलो पे मरीज़ो के कमरे मे देखने लगा। हर मरीज़ के कमरे मे दीवार पे एक बोर्ड पे उस मरीज़ का नाम और उसकी केस डीटेल्स लगे थे। दूसरी मंज़िल के चौथे कमरे मे उसकी खोज ख़त्म हो गयी। विश्वा वहा बेख़बर सो रहा था। कल्लन फ़ौरन वहा से निकल बिल्डिंग का मुआयना करने लगा,बेसमेंट मे जनरेटर लगा था पावर बॅकप के लिए। उस जनरेटर को देखते ही उसके होठों पे मुस्कान खेलने लगी।
वॅन मे बैठे जब्बार से इंतेज़ार मुश्किल हो गया था। वो वक़्त काटने के लिए मलिका के जिस्म से खेलने लगा। उसकी शर्ट के बटन खोल वो उसकी चूचिया चूस रहा था और मलिका उसके पॅंट की ज़िप खोल उसके लंड को हिला रही थी कि तभी वॅन के शीशे पे दस्तक हुई। जब्बार ने अपना लंड अंदर किया और शीशा उतारा,कल्लन था। उसने दरवाज़ा खोला तो वो सीडी वॅन की छत पे चढ़ा अंदर पीछे की सीट पे बैठ गया।
"कुछ बात बनी?",जब्बार वॅन स्टार्ट कर शहर की ओर चलने लगा।
"हा,उसका कमरा भी मिल गया और उसे निकालने का रास्ता भी पर सब कल ही करना पड़ेगा।"
"ठीक है।"
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बने रहिये...........
कल्लन चुपके से सेंटर के अंदर जाकर दोनो मंज़िलो पे मरीज़ो के कमरे मे देखने लगा। हर मरीज़ के कमरे मे दीवार पे एक बोर्ड पे उस मरीज़ का नाम और उसकी केस डीटेल्स लगे थे। दूसरी मंज़िल के चौथे कमरे मे उसकी खोज ख़त्म हो गयी। विश्वा वहा बेख़बर सो रहा था। कल्लन फ़ौरन वहा से निकल बिल्डिंग का मुआयना करने लगा,बेसमेंट मे जनरेटर लगा था पावर बॅकप के लिए। उस जनरेटर को देखते ही उसके होठों पे मुस्कान खेलने लगी।
वॅन मे बैठे जब्बार से इंतेज़ार मुश्किल हो गया था। वो वक़्त काटने के लिए मलिका के जिस्म से खेलने लगा। उसकी शर्ट के बटन खोल वो उसकी चूचिया चूस रहा था और मलिका उसके पॅंट की ज़िप खोल उसके लंड को हिला रही थी कि तभी वॅन के शीशे पे दस्तक हुई। जब्बार ने अपना लंड अंदर किया और शीशा उतारा,कल्लन था। उसने दरवाज़ा खोला तो वो सीडी वॅन की छत पे चढ़ा अंदर पीछे की सीट पे बैठ गया।
"कुछ बात बनी?",जब्बार वॅन स्टार्ट कर शहर की ओर चलने लगा।
"हा,उसका कमरा भी मिल गया और उसे निकालने का रास्ता भी पर सब कल ही करना पड़ेगा।"
"ठीक है।"
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