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Incest खेल ससुर बहु का
"हमे शरम आती है।"उसने एक हाथ अपने ससुर के बालों मे फिराते हुए कहा।

"अरे अब हमसे कैसी शर्म?",राजासाहब ने उसे थोडा सा अपनी तरफ घूमाते हुए अपने होठ उसकी एक चूची से लगा दिए।

"ऊओ..ऊवन्न....हह...!",मेनका की आँखे बंद हो गयी और वो अपनी गांड से अपने ससुर के लंड पर रगड़ने लगी। राजासाहब का मुँह उसकी एक चूची पे,उनका एक हाथ उसकी दूसरी चूची पे और उनका दूसरा हाथ उसकी चूत पे लग गये थे। मेनका तो जन्नत मे पहुँच गयी थी। उसके ससुर उसके नाज़ुक अंगो को छेड़ रहे थे और खास कर उनकी उंगली तो उसकी चूत को रगड़-रगड़ कर उसे गीली पर गीली किए जा रही थी।
मैत्री की पेशकश.


ये सारा नज़ारा दोनो शीशे मे देख और मस्त हो रहे थे। तभी राजासाहब ने उसे आगे झुकाया तो वो ड्रेसिंग टेबल का सहारा ले झुक गयी। उन्होने उसकी कमर पकड़ी और पीछे से अपना लंड उसकी चूत मे पेल दिया और उसे चोदने लगे। मेनका आँहे भरने लगी। चोद्ते हुए उन्होने ड्रेसिंग टेबल से क्रीम उठाई और उसकी गांड मे लगाने लगे। मेनका समझ गयी कि आज फिर उसकी गांड मारी जाएगी और ये ख़याल आते ही उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।

राजासाहब वैसे ही चोद्ते रहे और थोड़ी देर बाद लंड उसकी चूत से निकाल उसकी गांड मे उतार दिया। उसे हल्का सा दर्द हुआ पर जैसे ही लंड गांड मे उतरा,उसके ससुर ने उसकी चूचिया और चूत को फिर से रगड़ना शुरू कर दिया और उसे दर्द से ज़्यादा मज़ा आने लगा। राजासाहब थोड़ी देर तक उसकी गांड मारते रहे और फिर लंड निकाल कर फिर से चूत मे डाल दिया। काफ़ी देर तक वो ऐसे ही शीशे मे अपनी बहू से नज़रे मिलाते हुए, बारी-बारी से उसकी चूत और गांड मारते रहे और इस दौरान मेनका 3 बार और झड़ गयी। अब उसकी टांगे जवाब दे रही थी। राजासाहब भी ये भाँप गये थे। उन्होने अपना लंड निकाला और उसे गोद मे उठा कमरे मे बिस्तर पे ले गये।

अब मेनका लेटी हुई थी और उसके ससुर उसके उपर चढ़ कर लंड उसकी चूत मे घुसा रहे थे। मेनका ने अपनी टांगो और बाहों मे अपने ससुर के बदन को कस लिया। अब राजासाहब अपनी बहू को उसी के बिस्तर मे चोद रहे थे। उनका बड़ा लंड  उसकी चूत को तेज़ी से चोद्ते हुए उसकी कोख पे चोट कर रहा था। हर चोट पे मेनका के जिस्म मे मज़े की लहर दौड़ जाती और उसकी आह निकल जाती। उसकी कसी चूत की दीवारें भी उसके ससुर के लंड को अपनी पकड़ मे कसे हुए थी। प्रस्तुतकर्ता मैत्री.
 
राजासाहब काफ़ी देर से अपने आंडो मे उमड़ रहे सैलाब को रोके हुए थे और अब उनके धक्कों मे तेज़ी आ रही थी,मेनका भी नीचे से ज़ोर-जोर से अपनी कमर हिला रही थी। उसने अपने ससुर के बदन को कस के जाकड़ लिया और बिस्तर से उठती हुई उचक कर उन्हे चूमने लगी,उसकी चूत ने राजासाहब के लंड को बिल्कुल जाकड़ लिया और पानी छोड़ दिया। जैसे ही वो झड़ी की राजासाहब की कमर भी झटके खाने लगी और उनके लंड ने उसकी चूत को अपने पानी से लबालब भर दिया। मेनका के चेहरे पे खुशी और संतोष का भाव आया और वैसे ही अपने ससुर से लिपटी हुई थकान के मारे नींद की गोद मे चली गयी।

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आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे अक नए रहस्यमय प्रसंग के साथ तबै तक के लिए मैत्री की तरफ से
जय भारत
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RE: खेल ससुर बहु का - by maitripatel - 29-03-2026, 12:47 PM



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