29-03-2026, 12:43 PM
रात को महल से सारे नौकर बाहर चले गये तो राजासाहब ने दरवाज़ा बंद किया और केवल एक पायजामा पहने क्लॉज़ेट के रास्ते अपनी बहू के क्लॉज़ेट मे पहुँच गये। मेनका वहा अपनी साडी उतारना शुरू ही कर रही थी कि उन्हे देख चिहुन्क पड़ी। मैत्री की पेशकश.
"अरे ये शुभ काम हमे करने दो, मेमसाब।",राजासाहब ने उसका आँचल पकड़ कर खींच दिया।
"अभी जाओ। हमे कपड़े बदलने दो ना।",मेनका उनके हाथ से अपनी साडी खींचने लगी।
"फिर ये दरवाज़ा क्यू खुला छोडा?",राजासाहब ने क्लॉज़ेट के सीक्रेट दरवाज़े की ओर इशारा किया।
"ये तो कपड़े चेंज करने के बाद के लिए।",मेनका शर्मा गयी तो उसके ससुर ने उसे खींच अपने सीने से लगा लिया और उसके चेहरे को हाथों मे ले निहारने लगे। उसका आँचल नीचे गिर गया था और उसकी ब्लाउस मे भारी बोबले उनके बालों भरे सीने से दबी हुई थी।
"तुम कितनी खूबसूरत हो,मेनका। हमे तो यकीन ही नही होता कि तुम सिर्फ़ हमारी हो।।",मेनका के गाल शर्म से लाल हो गये थे और आँखें बंद। राजासाहब ने उसकी बंद पलकों को और फिर गालों को चूम लिया। फिर हाथ उसकी कमर मे डाल उसके होठ चूमने लगे। मेनका भी उनसे लिपट गयी और अपनी जीभ उनके मुँह मे डाल उनकी जीभ से खेलने लगी।राजासाहब एक हाथ आगे लाए और उसकी कमर पे अटकी साडी को खींच दिया और फिर उसे उसके बदन से अलग कर दिया।
मेनका के हाथ उनकी पीठ पर घूम रहे थे और वो अपनी चूचियो को उनके सीने पे हल्के-हलके रगड़ रही थी। बीच-बिच मे हाथ नीचे ले जाकर उनके पायजामा मे घुसा वो उनकी गांड पे भी अपने नाख़ून गढ़ा रही थी। राजासाहब ने उसके पेटिकोट को भी नीचे सरका दिया। आज मेनका ने पेंटी नही पहनी थी तो राजासाहब अब उसकी नंगी गांड को जम के दबा रहे थे। उसकी चूत उसके ससुर की हरकतों से गीली होने लगी थी। इस बार जब उसके हाथ नीचे गये तो उन्होने उनके पायजामा को उनकी गांड से नीचे उतार दिया। पायजामा घुटनो तक आया तो उसने अपनी एक टाँग उठाई और पैर से उसे नीचे उनकी टांगो से उतार कर अलग कर दिया। मैत्री की प्रस्तुति.
अब राजासाहब पूरे नंगे थे और मेनका केवल ब्लाउस मे थी,दोनो एक दूसरे से चिपके एक दूसरे की पीठ और गांड सहलाते,अपनी छातिया रगड़ते चूम रहे थे। राजासाहब का तना हुआ लंड उनकी बहू की गीली चूत से सटा था और दोनो अपनी-अपनी कमर हिला कर लंड और चूत को एक साथ रगड़ रहे थे।
राजासाहब ने अपने हाथ पीछे ले जाकर मेनका के ब्लाउस के हुक खोल दिए और उसे नीचे उतार दिया। मेनका अब बिल्कुल गरम हो गयी थी,जब राजासाहब उसके ब्रा को उतारने लगे तो उसने हाथ नीचे कर अपनी चूचियाँ नंगी करने मे उनकी पूरी मदद की। अब दोनो पूरे नगे एक दूसरे के जिस्मो से खेल रहे थे।
चूमते हुए राजासाहब की नज़र बगल मे पड़ी तो उन्होने देखा की ड्रेसिंग टेबल के शीशे मे दोनो की परछाई नज़र आ रही थी। उन्होने चूमते हुए मेनका को इशारे से ये दिखाया तो वो शर्मा कर क्लॉज़ेट से बाहर जाने लगी। पर राजासाहब ने हाथ पकड़ कर उसे शीशे के सामने खड़ा कर दिया और पीछे से उसकी कमर मे हाथ डाल कर खड़े हो गये।
"क्या कर रहे हो? कमरे मे चलो ना।" मेनका का शर्म से बुरा हाल था। शीशे मे उसका पूरा हुस्न नज़र आ रहा था और पीछे से चिपके उसके ससुर भी। उसे लग रहा था जैसे कोई और उन दोनो को देख रहा हो।
"प्लीज़,यश चलो ना।!" मैत्री की रचना.
"क्यू मेरी जान?",राजासाहब उसकी चूचियाँ दबाते हुए उसके निपल्स मसल रहे थे और उनका मुँह उसकी गर्दन मे था।
दोस्तों बने रहिये...................
मैत्री.
"अरे ये शुभ काम हमे करने दो, मेमसाब।",राजासाहब ने उसका आँचल पकड़ कर खींच दिया।
"अभी जाओ। हमे कपड़े बदलने दो ना।",मेनका उनके हाथ से अपनी साडी खींचने लगी।
"फिर ये दरवाज़ा क्यू खुला छोडा?",राजासाहब ने क्लॉज़ेट के सीक्रेट दरवाज़े की ओर इशारा किया।
"ये तो कपड़े चेंज करने के बाद के लिए।",मेनका शर्मा गयी तो उसके ससुर ने उसे खींच अपने सीने से लगा लिया और उसके चेहरे को हाथों मे ले निहारने लगे। उसका आँचल नीचे गिर गया था और उसकी ब्लाउस मे भारी बोबले उनके बालों भरे सीने से दबी हुई थी।
"तुम कितनी खूबसूरत हो,मेनका। हमे तो यकीन ही नही होता कि तुम सिर्फ़ हमारी हो।।",मेनका के गाल शर्म से लाल हो गये थे और आँखें बंद। राजासाहब ने उसकी बंद पलकों को और फिर गालों को चूम लिया। फिर हाथ उसकी कमर मे डाल उसके होठ चूमने लगे। मेनका भी उनसे लिपट गयी और अपनी जीभ उनके मुँह मे डाल उनकी जीभ से खेलने लगी।राजासाहब एक हाथ आगे लाए और उसकी कमर पे अटकी साडी को खींच दिया और फिर उसे उसके बदन से अलग कर दिया।
मेनका के हाथ उनकी पीठ पर घूम रहे थे और वो अपनी चूचियो को उनके सीने पे हल्के-हलके रगड़ रही थी। बीच-बिच मे हाथ नीचे ले जाकर उनके पायजामा मे घुसा वो उनकी गांड पे भी अपने नाख़ून गढ़ा रही थी। राजासाहब ने उसके पेटिकोट को भी नीचे सरका दिया। आज मेनका ने पेंटी नही पहनी थी तो राजासाहब अब उसकी नंगी गांड को जम के दबा रहे थे। उसकी चूत उसके ससुर की हरकतों से गीली होने लगी थी। इस बार जब उसके हाथ नीचे गये तो उन्होने उनके पायजामा को उनकी गांड से नीचे उतार दिया। पायजामा घुटनो तक आया तो उसने अपनी एक टाँग उठाई और पैर से उसे नीचे उनकी टांगो से उतार कर अलग कर दिया। मैत्री की प्रस्तुति.
अब राजासाहब पूरे नंगे थे और मेनका केवल ब्लाउस मे थी,दोनो एक दूसरे से चिपके एक दूसरे की पीठ और गांड सहलाते,अपनी छातिया रगड़ते चूम रहे थे। राजासाहब का तना हुआ लंड उनकी बहू की गीली चूत से सटा था और दोनो अपनी-अपनी कमर हिला कर लंड और चूत को एक साथ रगड़ रहे थे।
राजासाहब ने अपने हाथ पीछे ले जाकर मेनका के ब्लाउस के हुक खोल दिए और उसे नीचे उतार दिया। मेनका अब बिल्कुल गरम हो गयी थी,जब राजासाहब उसके ब्रा को उतारने लगे तो उसने हाथ नीचे कर अपनी चूचियाँ नंगी करने मे उनकी पूरी मदद की। अब दोनो पूरे नगे एक दूसरे के जिस्मो से खेल रहे थे।
चूमते हुए राजासाहब की नज़र बगल मे पड़ी तो उन्होने देखा की ड्रेसिंग टेबल के शीशे मे दोनो की परछाई नज़र आ रही थी। उन्होने चूमते हुए मेनका को इशारे से ये दिखाया तो वो शर्मा कर क्लॉज़ेट से बाहर जाने लगी। पर राजासाहब ने हाथ पकड़ कर उसे शीशे के सामने खड़ा कर दिया और पीछे से उसकी कमर मे हाथ डाल कर खड़े हो गये।
"क्या कर रहे हो? कमरे मे चलो ना।" मेनका का शर्म से बुरा हाल था। शीशे मे उसका पूरा हुस्न नज़र आ रहा था और पीछे से चिपके उसके ससुर भी। उसे लग रहा था जैसे कोई और उन दोनो को देख रहा हो।
"प्लीज़,यश चलो ना।!" मैत्री की रचना.
"क्यू मेरी जान?",राजासाहब उसकी चूचियाँ दबाते हुए उसके निपल्स मसल रहे थे और उनका मुँह उसकी गर्दन मे था।
दोस्तों बने रहिये...................
मैत्री.


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