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Chapter 6 : Working On Plan (Mummy Ki Malish)
अब मेरे मन में चल रहा था कि जो भी करना है बहुत सोच-समझ के करना होगा... जल्दबाज़ी में काम बिगड़ जाएगा। खैर... जैसा मैंने माँ को समझाया था... उसी दिन शाम को सत्संग से वापस आने के बाद माँ ने किचन से मुझे आवाज़ दी।
मम्मी: "अजय!"
मैं: "आया मम्मी।"
मैं किचन में पहुँचा और पूछा, "क्या हुआ?"
मम्मी: "बेटा, थोड़ी हेल्प करा दे मेरी किचन में।"
मैं (इरिटेशन के एक्सप्रेशन देते हुए): "मम्मी यार!"
मम्मी: "क्या 'मम्मी यार'? अब तो तेरा ऑफिस भी नहीं है... थोड़ी सी हेल्प करा दे। सुबह से शाम तक अकेले सब करती हूँ... तुझे तो माँ की कोई फिक्र ही नहीं है।"
मैं: "अरे नहीं मेरी प्यारी मम्मी... फिक्र है! बोलो क्या करना है?"
मम्मी: "ये ज़रा आलू छिलवा दे।"
मैं: "ओके।"
फिर थोड़ी देर बाद मैंने पूछा कि पापा कब आने वाले हैं?
मम्मी: "पता नहीं... अबकी शायद टाइम ज़्यादा लगे आने में। कह रहे थे ऑफिस में काम ज़्यादा है। कोई इन्सपेक्शन के लिए आने वाला है।"
मैं: "अच्छा।"
ऐसी ही कुछ हल्की-फुल्की बातें हुईं और उसके बाद मैं बाहर आ गया। रात में मैंने ही माँ को मैसेज किया फेक आईडी से—
अंजलि: "सारिका?"
मम्मी: "हाँ।"
अंजलि: "क्या रहा आज? बुलाया था बेटे को किचन में?"
मम्मी: "हाँ।"
अंजलि: "फिर क्या रहा?"
मम्मी: "कुछ नहीं, पहले नखरे कर रहा था फिर हेल्प कराई मेरी।"
अंजलि: "एक काम करो... उसे बुलाओ और कहो कि तुम्हारी कमर में दर्द है तो तुम्हारी मालिश कर दे। और जब वो अपने कमरे में जाए तो एक गुड नाइट किस देकर भेजना।"
मम्मी: "अच्छा।"
फिर मम्मी ने मुझे आवाज़ दी। मैं उनके रूम में पहुँचा तो उन्होंने कहा—
मम्मी: "बेटा, मेरी कमर में दर्द हो रहा है, थोड़ी देर मालिश कर देगा क्या?"
अजय: "ओके मम्मी, कर तो दूँगा पर साड़ी में मालिश कैसे होगी?"
मम्मी: "ठीक है... इसे हटाए देती हूँ। तुम लाइट बंद करके ये छोटा वाला बल्ब जला दो।"
मैं: "ओके।"
ये कह के मैं जाकर ऑयल ले आया और मैंने ज़ीरो वॉट का बल्ब जला दिया... तब तक माँ साड़ी उतार के पेट के बल लेट गयी थीं। लाइट ग्रीन कलर का ब्लाउज़ और बादामी कलर का पेटीकोट और बीच में मम्मी की दूध जैसी गोरी कमर, और ऊपर को उभरी हुई बड़ी सी गाँड़। हालाँकि ये सीन मेरे लिए कोई नया नहीं था क्योंकि इसके पहले भी मैंने कई बार माँ को सिर्फ़ ब्लाउज़ और पेटीकोट में देखा था... वरना आपको क्या लगता है मेरे अंदर ऐसी फीलिंग्स कहाँ से आईं? घर में अक्सर ऐसा होता था कि पापा को सुबह जल्दी जाना होता तो माँ सिर्फ़ ब्लाउज़-पेटीकोट में ही उनके लिए नाश्ता बना रही होती थीं।
खैर वो टाइम और हालात दूसरे थे और आज का सीन कुछ और ही था। ऐसा नहीं था कि मैंने कभी उनकी मालिश नहीं की थी या पैर नहीं दबाए थे, पर आज ये जानते हुए मालिश करना कि उनके मन में क्या चल रहा है... अलग ही एक्साइटमेंट हो रही थी। मैं उनके साइड में बैठ गया और तेल लगाना शुरू किया। वो आँखें बंद करके लेटी हुई थीं और उनके बड़े-बड़े चूचे पेट के बल लेटे होने की वजह से साइड से निकले जा रहे थे। मेरी एक्साइटमेंट बढ़ती जा रही थी और मैंने थोड़ा और मज़े लेने की सोची। मैंने उनसे कहा—
मैं: "मम्मी, ऐसे सही से ताक़त नहीं लग रही है।"
मम्मी: "तो फिर जैसे ताक़त लगे, वैसे लगाओ।"
मैं फिर बेड के ऊपर आ गया और उनके पैरों के दोनों तरफ पैर करके बैठ गया और तेल लगाने लगा। उनकी मखमली कमर को छूकर, मसलकर और दबाकर कितना मज़ा आ रहा था, बता नहीं सकता। ये सब महसूस करते-करते मेरा लंड एकदम टाइट हो चुका था। अब सिचुएशन ये थी कि जब ऐसे बैठे-बैठे मैं उन्हें तेल लगाने के लिए आगे झुकता, तो मेरा लंड उनकी गाँड़ से ऑलमोस्ट टच हो जा रहा था, लेकिन मैंने होने नहीं दिया। क्योंकि अगर पहले ही दिन ये हो जाता तो बड़ी गड़बड़ हो जाती। थोड़ी देर ऐसे कमर पे मालिश करने के बाद मैंने माँ से पूछा—
मैं: "मम्मी, पैरों में भी मालिश कर दूँ?"
मम्मी: "ठीक है।"
फिर मैं ऐसे ही नीचे आ गया और पैरों में तेल लगाने लगा। थोड़ी देर मालिश करने के बाद माँ ने कहा, "बस कर बेटा… हो गया।" ये कह के वो सीधी हुईं और प्यार से मेरे गालों पे हाथ फेरा। फिर मेरे गाल पे किस करके बोलीं, "गुड नाइट बेटा।" पहली बार माँ के मुलायम होंठों का एहसास अपने गालों पे पाकर तो जैसे मैं जन्नत में था। ऐसा लग रहा था कि मेरी अब तक की लाइफ का वो बेस्ट पल है। इसके बाद मुझसे रहा नहीं गया। मैंने भी माँ के मुलायम गालों को चूमते हुए कहा, "गुड नाइट मम्मी।" ये कह के मैं अपने कमरे में आ गया… अब इस खड़े लंड को शांत करना ज़रूरी था। तो मैंने आज जो भी चीज़ें हुईं, उनको सोचकर मुठ मारी और सो गया।
अगले दिन मैंने चैट पे उनसे पूछा –
अंजलि :- कैसा लगा कल मालिश करवा के?
मम्मी :- अच्छा लगा… सारी थकान दूर हो गयी
अंजलि :- गुड
मम्मी :- अब आगे क्या करना है?
अंजलि :- अब तुम्हें रोज रात में बेटे से मालिश करवानी है और सोने के पहले उसे एक गुड नाईट किस (good night kiss) देनी है।
मम्मी :- ओके…. और कुछ
अंजलि :- हाँ एक और काम
मम्मी :- क्या?
अंजलि :- कल जब नहाने जाना तो बेटे को बाथरूम में बुलाना और कहना मेरी पीठ पे सही से साबुन नहीं लग पा रहा तो वो लगा दे।
मम्मी :- हाय ये सब नहीं होगा मुझसे
अंजलि :- अब चैलेंज लिया है तुमने तो पूरा करके भी तो देखो
मम्मी :- हाँ लेकिन ये सब कैसे… शर्म आएगी मुझे। रात में तो अंधेरा रहता है रूम में तो इतना नहीं लगता
अंजलि :- अरे यार तो मैं कौन सा तुम्हें बेटे के सामने न्यूड होने को कह रही हूँ। पेटीकोट ऊपर करके बाँध लेना और साबुन लगवा लेना
मम्मी :- अच्छा ठीक है सोचूँगी
अंजलि :- ओके और जैसा रिएक्शन हो बेटे का वो ज़रूर बताना
Chapter 7 : Mummy ki Gori Peeth
अब मेरे मन में चल रहा था कि जो भी करना है बहुत सोच-समझ के करना होगा... जल्दबाज़ी में काम बिगड़ जाएगा। खैर... जैसा मैंने माँ को समझाया था... उसी दिन शाम को सत्संग से वापस आने के बाद माँ ने किचन से मुझे आवाज़ दी।
मम्मी: "अजय!"
मैं: "आया मम्मी।"
मैं किचन में पहुँचा और पूछा, "क्या हुआ?"
मम्मी: "बेटा, थोड़ी हेल्प करा दे मेरी किचन में।"
मैं (इरिटेशन के एक्सप्रेशन देते हुए): "मम्मी यार!"
मम्मी: "क्या 'मम्मी यार'? अब तो तेरा ऑफिस भी नहीं है... थोड़ी सी हेल्प करा दे। सुबह से शाम तक अकेले सब करती हूँ... तुझे तो माँ की कोई फिक्र ही नहीं है।"
मैं: "अरे नहीं मेरी प्यारी मम्मी... फिक्र है! बोलो क्या करना है?"
मम्मी: "ये ज़रा आलू छिलवा दे।"
मैं: "ओके।"
फिर थोड़ी देर बाद मैंने पूछा कि पापा कब आने वाले हैं?
मम्मी: "पता नहीं... अबकी शायद टाइम ज़्यादा लगे आने में। कह रहे थे ऑफिस में काम ज़्यादा है। कोई इन्सपेक्शन के लिए आने वाला है।"
मैं: "अच्छा।"
ऐसी ही कुछ हल्की-फुल्की बातें हुईं और उसके बाद मैं बाहर आ गया। रात में मैंने ही माँ को मैसेज किया फेक आईडी से—
अंजलि: "सारिका?"
मम्मी: "हाँ।"
अंजलि: "क्या रहा आज? बुलाया था बेटे को किचन में?"
मम्मी: "हाँ।"
अंजलि: "फिर क्या रहा?"
मम्मी: "कुछ नहीं, पहले नखरे कर रहा था फिर हेल्प कराई मेरी।"
अंजलि: "एक काम करो... उसे बुलाओ और कहो कि तुम्हारी कमर में दर्द है तो तुम्हारी मालिश कर दे। और जब वो अपने कमरे में जाए तो एक गुड नाइट किस देकर भेजना।"
मम्मी: "अच्छा।"
फिर मम्मी ने मुझे आवाज़ दी। मैं उनके रूम में पहुँचा तो उन्होंने कहा—
मम्मी: "बेटा, मेरी कमर में दर्द हो रहा है, थोड़ी देर मालिश कर देगा क्या?"
अजय: "ओके मम्मी, कर तो दूँगा पर साड़ी में मालिश कैसे होगी?"
मम्मी: "ठीक है... इसे हटाए देती हूँ। तुम लाइट बंद करके ये छोटा वाला बल्ब जला दो।"
मैं: "ओके।"
ये कह के मैं जाकर ऑयल ले आया और मैंने ज़ीरो वॉट का बल्ब जला दिया... तब तक माँ साड़ी उतार के पेट के बल लेट गयी थीं। लाइट ग्रीन कलर का ब्लाउज़ और बादामी कलर का पेटीकोट और बीच में मम्मी की दूध जैसी गोरी कमर, और ऊपर को उभरी हुई बड़ी सी गाँड़। हालाँकि ये सीन मेरे लिए कोई नया नहीं था क्योंकि इसके पहले भी मैंने कई बार माँ को सिर्फ़ ब्लाउज़ और पेटीकोट में देखा था... वरना आपको क्या लगता है मेरे अंदर ऐसी फीलिंग्स कहाँ से आईं? घर में अक्सर ऐसा होता था कि पापा को सुबह जल्दी जाना होता तो माँ सिर्फ़ ब्लाउज़-पेटीकोट में ही उनके लिए नाश्ता बना रही होती थीं।
खैर वो टाइम और हालात दूसरे थे और आज का सीन कुछ और ही था। ऐसा नहीं था कि मैंने कभी उनकी मालिश नहीं की थी या पैर नहीं दबाए थे, पर आज ये जानते हुए मालिश करना कि उनके मन में क्या चल रहा है... अलग ही एक्साइटमेंट हो रही थी। मैं उनके साइड में बैठ गया और तेल लगाना शुरू किया। वो आँखें बंद करके लेटी हुई थीं और उनके बड़े-बड़े चूचे पेट के बल लेटे होने की वजह से साइड से निकले जा रहे थे। मेरी एक्साइटमेंट बढ़ती जा रही थी और मैंने थोड़ा और मज़े लेने की सोची। मैंने उनसे कहा—
मैं: "मम्मी, ऐसे सही से ताक़त नहीं लग रही है।"
मम्मी: "तो फिर जैसे ताक़त लगे, वैसे लगाओ।"
मैं फिर बेड के ऊपर आ गया और उनके पैरों के दोनों तरफ पैर करके बैठ गया और तेल लगाने लगा। उनकी मखमली कमर को छूकर, मसलकर और दबाकर कितना मज़ा आ रहा था, बता नहीं सकता। ये सब महसूस करते-करते मेरा लंड एकदम टाइट हो चुका था। अब सिचुएशन ये थी कि जब ऐसे बैठे-बैठे मैं उन्हें तेल लगाने के लिए आगे झुकता, तो मेरा लंड उनकी गाँड़ से ऑलमोस्ट टच हो जा रहा था, लेकिन मैंने होने नहीं दिया। क्योंकि अगर पहले ही दिन ये हो जाता तो बड़ी गड़बड़ हो जाती। थोड़ी देर ऐसे कमर पे मालिश करने के बाद मैंने माँ से पूछा—
मैं: "मम्मी, पैरों में भी मालिश कर दूँ?"
मम्मी: "ठीक है।"
फिर मैं ऐसे ही नीचे आ गया और पैरों में तेल लगाने लगा। थोड़ी देर मालिश करने के बाद माँ ने कहा, "बस कर बेटा… हो गया।" ये कह के वो सीधी हुईं और प्यार से मेरे गालों पे हाथ फेरा। फिर मेरे गाल पे किस करके बोलीं, "गुड नाइट बेटा।" पहली बार माँ के मुलायम होंठों का एहसास अपने गालों पे पाकर तो जैसे मैं जन्नत में था। ऐसा लग रहा था कि मेरी अब तक की लाइफ का वो बेस्ट पल है। इसके बाद मुझसे रहा नहीं गया। मैंने भी माँ के मुलायम गालों को चूमते हुए कहा, "गुड नाइट मम्मी।" ये कह के मैं अपने कमरे में आ गया… अब इस खड़े लंड को शांत करना ज़रूरी था। तो मैंने आज जो भी चीज़ें हुईं, उनको सोचकर मुठ मारी और सो गया।
अगले दिन मैंने चैट पे उनसे पूछा –
अंजलि :- कैसा लगा कल मालिश करवा के?
मम्मी :- अच्छा लगा… सारी थकान दूर हो गयी
अंजलि :- गुड
मम्मी :- अब आगे क्या करना है?
अंजलि :- अब तुम्हें रोज रात में बेटे से मालिश करवानी है और सोने के पहले उसे एक गुड नाईट किस (good night kiss) देनी है।
मम्मी :- ओके…. और कुछ
अंजलि :- हाँ एक और काम
मम्मी :- क्या?
अंजलि :- कल जब नहाने जाना तो बेटे को बाथरूम में बुलाना और कहना मेरी पीठ पे सही से साबुन नहीं लग पा रहा तो वो लगा दे।
मम्मी :- हाय ये सब नहीं होगा मुझसे
अंजलि :- अब चैलेंज लिया है तुमने तो पूरा करके भी तो देखो
मम्मी :- हाँ लेकिन ये सब कैसे… शर्म आएगी मुझे। रात में तो अंधेरा रहता है रूम में तो इतना नहीं लगता
अंजलि :- अरे यार तो मैं कौन सा तुम्हें बेटे के सामने न्यूड होने को कह रही हूँ। पेटीकोट ऊपर करके बाँध लेना और साबुन लगवा लेना
मम्मी :- अच्छा ठीक है सोचूँगी
अंजलि :- ओके और जैसा रिएक्शन हो बेटे का वो ज़रूर बताना
Chapter 7 : Mummy ki Gori Peeth
फिर अगले दिन जब मैं उठा तो मैंने देखा कि मम्मी ने अभी तक नहाया नहीं था। जबकि अक्सर वो सुबह जल्दी ही नहा लेती थीं। मैंने उनसे पूछा तो बोलीं कि थोड़ा सफ़ाई कर रही थी छत पे तो लेट हो गया।
फिर मेरे उठने के करीब आधे घंटा बाद मम्मी नहाने के लिए गयीं और थोड़ी देर बाद मुझे आवाज़ दी… अजय
मैं :- हाँ मम्मी
मम्मी :- क्या कर रहा है?
मैं :- कुछ नहीं… क्या हुआ… बताओ
मम्मी :- ज़रा यहाँ आके मेरी पीठ पे साबुन लगा दो… मेरा हाथ सही से नहीं पहुँचता
मैं :- ओके मम्मी… आ रहा हूँ
फिर मैं बाथरूम में गया तो देखा मम्मी चौकी पे सिर्फ़ पेटीकोट पहने मेरी तरफ़ पीठ करके बैठी हुई थीं। पेटीकोट उन्होंने अपने बूब्स (boobs) के ऊपर चढ़ा के पहन लिया था तो नीचे से उनकी गोरी टांगे दिख रही थीं। पेटीकोट गीला होके उनके शरीर से चिपक गया था और उनके गोरे जिस्म पे पानी की बूंदें चमक रही थीं।
मैं जब उन्हें साबुन लगाने गया तो उन्होंने पेटीकोट आगे से थोड़ा ढीला करके पीछे से नीचे कर लिया। मैं उनकी पीठ पे साबुन लगाने लगा। उनकी गोरी गोरी पीठ पे मेरे साबुन वाले हाथ फिसल रहे थे। इधर मेरा लंड मेरे बरमूडा में तम्बू बना हुआ था। थोड़ी देर तक मैं ऐसे ही उनकी पीठ पे हाथ फिराता रहा। बीच में कई बार हाथ फिसल के उनके बूब्स की तरफ़ भी चला जाता जिसे हम दोनों ने ही इग्नोर कर दिया। फिर मैं बाहर आ गया।
दोपहर में काम खत्म होने के बाद मम्मी ने मुझे यानी अंजलि को मैसेज किया।
मम्मी :- अंजलि !
अंजलि :- हाँ.. क्या हुआ आज?
मम्मी :- मैंने आज बेटे को साबुन लगवाने के लिए बुलाया था बाथरूम में
अंजलि :- ओहो… फिर
मम्मी :- फिर क्या उसने लगाया लेकिन एक चीज़ हुई पता नहीं जान बूझ के या अनजाने में
अंजलि :- क्या
मम्मी :- जब वो साबुन लगा रहा था तो एक आध बार उसका हाथ फिसल के मेरे बूब्स (boobs) की साइड में आ गया था
ओह… तो इसका मतलब मम्मी ने इग्नोर नहीं किया था। अब इसके रिएक्शन पे पता लगना था कि आगे क्या होने वाला है तो मैंने पूछा
अंजलि :- तो फिर… कैसा लगा तुम्हें?
मम्मी :- पता नहीं कैसा लगा… थोड़ा अजीब सा।
अंजलि :- अच्छा लगा या खराब?
मम्मी :- नहीं खराब तो नहीं लगा
अंजलि :- ठीक है फिर तो… बीच बीच में ऐसे ही उसे बुला लिया करना और बाकी तो तुम्हें पता है ही… जो कर रही हो वो करती रहो।
धीरे धीरे ऐसे ही चलता रहा। मम्मी मुझे अपने साथ कामों में लगाये रहती। मैं भी ख़ुशी ख़ुशी उनकी हेल्प करता, उनसे बातें करता और उनके करीब रहता…उनका ध्यान रखता। मैं जैसा जैसा आईडिया उन्हें चैट पे देता वैसे ही वो मेरे साथ करती और फिर मेरा रिएक्शन मुझे ही चैट पे बताती :D। इन दिनों में मैंने मम्मी को कुछ आदतें डलवा दी थीं जैसे कि रोज़ सोने से पहले मैं उनकी पीठ और पैरों की मालिश करता और फिर वो मुझे गुड नाईट किस (good night kiss) करतीं। और मैं जब सुबह उठता और मम्मी किचन में काम कर रही होतीं तो मैं उन्हें पीछे से जाके हग (hug) करता और सुबह का खड़ा लंड उन्हें फील कराने की कोशिश करता। 12-15 दिनों में हम दोनों काफी क्लोज़ आ गए थे और मुझे लग रहा था कि ये सब मम्मी को भी अच्छा लग रहा है।
फिर मेरे उठने के करीब आधे घंटा बाद मम्मी नहाने के लिए गयीं और थोड़ी देर बाद मुझे आवाज़ दी… अजय
मैं :- हाँ मम्मी
मम्मी :- क्या कर रहा है?
मैं :- कुछ नहीं… क्या हुआ… बताओ
मम्मी :- ज़रा यहाँ आके मेरी पीठ पे साबुन लगा दो… मेरा हाथ सही से नहीं पहुँचता
मैं :- ओके मम्मी… आ रहा हूँ
फिर मैं बाथरूम में गया तो देखा मम्मी चौकी पे सिर्फ़ पेटीकोट पहने मेरी तरफ़ पीठ करके बैठी हुई थीं। पेटीकोट उन्होंने अपने बूब्स (boobs) के ऊपर चढ़ा के पहन लिया था तो नीचे से उनकी गोरी टांगे दिख रही थीं। पेटीकोट गीला होके उनके शरीर से चिपक गया था और उनके गोरे जिस्म पे पानी की बूंदें चमक रही थीं।
मैं जब उन्हें साबुन लगाने गया तो उन्होंने पेटीकोट आगे से थोड़ा ढीला करके पीछे से नीचे कर लिया। मैं उनकी पीठ पे साबुन लगाने लगा। उनकी गोरी गोरी पीठ पे मेरे साबुन वाले हाथ फिसल रहे थे। इधर मेरा लंड मेरे बरमूडा में तम्बू बना हुआ था। थोड़ी देर तक मैं ऐसे ही उनकी पीठ पे हाथ फिराता रहा। बीच में कई बार हाथ फिसल के उनके बूब्स की तरफ़ भी चला जाता जिसे हम दोनों ने ही इग्नोर कर दिया। फिर मैं बाहर आ गया।
दोपहर में काम खत्म होने के बाद मम्मी ने मुझे यानी अंजलि को मैसेज किया।
मम्मी :- अंजलि !
अंजलि :- हाँ.. क्या हुआ आज?
मम्मी :- मैंने आज बेटे को साबुन लगवाने के लिए बुलाया था बाथरूम में
अंजलि :- ओहो… फिर
मम्मी :- फिर क्या उसने लगाया लेकिन एक चीज़ हुई पता नहीं जान बूझ के या अनजाने में
अंजलि :- क्या
मम्मी :- जब वो साबुन लगा रहा था तो एक आध बार उसका हाथ फिसल के मेरे बूब्स (boobs) की साइड में आ गया था
ओह… तो इसका मतलब मम्मी ने इग्नोर नहीं किया था। अब इसके रिएक्शन पे पता लगना था कि आगे क्या होने वाला है तो मैंने पूछा
अंजलि :- तो फिर… कैसा लगा तुम्हें?
मम्मी :- पता नहीं कैसा लगा… थोड़ा अजीब सा।
अंजलि :- अच्छा लगा या खराब?
मम्मी :- नहीं खराब तो नहीं लगा
अंजलि :- ठीक है फिर तो… बीच बीच में ऐसे ही उसे बुला लिया करना और बाकी तो तुम्हें पता है ही… जो कर रही हो वो करती रहो।
धीरे धीरे ऐसे ही चलता रहा। मम्मी मुझे अपने साथ कामों में लगाये रहती। मैं भी ख़ुशी ख़ुशी उनकी हेल्प करता, उनसे बातें करता और उनके करीब रहता…उनका ध्यान रखता। मैं जैसा जैसा आईडिया उन्हें चैट पे देता वैसे ही वो मेरे साथ करती और फिर मेरा रिएक्शन मुझे ही चैट पे बताती :D। इन दिनों में मैंने मम्मी को कुछ आदतें डलवा दी थीं जैसे कि रोज़ सोने से पहले मैं उनकी पीठ और पैरों की मालिश करता और फिर वो मुझे गुड नाईट किस (good night kiss) करतीं। और मैं जब सुबह उठता और मम्मी किचन में काम कर रही होतीं तो मैं उन्हें पीछे से जाके हग (hug) करता और सुबह का खड़ा लंड उन्हें फील कराने की कोशिश करता। 12-15 दिनों में हम दोनों काफी क्लोज़ आ गए थे और मुझे लग रहा था कि ये सब मम्मी को भी अच्छा लग रहा है।


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