27-03-2026, 02:15 PM
काफ़ी देर तक उसकी गांड को उंगली से मारते हुए वो उसको चूमते और सहलाते रहे। जब उन्होने देखा कि मेनका अब रिलॅक्स हो रही है तो उन्होने उसे उठा कर घुटनो पे कर दिया। मेनका ने भी अपनी गांड हवा मे उठा दी और मुँह तकिये मे छुपा लिया। राजासाहब अपनी उंगलियो मे क्रीम लगा कर उसके छेद मे लगा रहे थे। कुछ क्रीम उन्होने अपने लंड पे भी लगाई और फिर उसकी गांड के पीछे पोज़िशन ले ली। मैत्री की पेशकश।
अपने हाथ से पकड़ कर उन्होने बहुत धीरे-2 से अपना लंड उसकी गांड मे घुसाना शुरू किया। लंड का सूपड़ा बहुत मोटा था, ऊ...ओ...ऊहह..",मेनका की आह निकल गयी।
"बस मेरी जान शुरू मे थोड़ी तकलीफ़ होगी।" राजासाहब उसकी पीठ सहलाते हुए अपने सूपदे को अंदर धकेलने लगे। थोड़ी ही देर मे सूपड़ा अंदर था और उन्होने बस सुपारे को ही गांड में अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। मेनका दर्द ख़तम हो गया और उसे अब मज़ा आने लगा। उसने सोचा भी नही था कि गांड मे लंड इतना मज़ा देता है। जब लंड अंदर जाता था तो उसकी गांड अपनेआप सिकुड कर लंड को कस लेती थी और उसके बदन मे मज़े की लहरें दौड़ जाती थी। गांड की इस हरकत से राजासाहब भी पागल हो रहे थे।
हल्के-2 धक्कों से उन्होने अब अपने पूरे लंड को गांड मे घुसाना शुरू किया। मेनका को हल्का दर्द हो रहा था पर उस से कही ज़्यादा मज़ा आ रहा था। गांड मरवाने से होनेवाले दर्द का डर भी ख़तम हो गया था और वो अब पूरा लुत्फ़ उठा रही थी।
थोड़ी ही देर मे लंड जड़ तक उसकी गांड मे था। जब राजासाहब ने धक्का मारा तो वो उठ कर पीछे बैठ गयी तो राजासाहब भी बैठ गये।
अब राजासाहब अपने घुटनो पे बैठे थे और उनकी गांड उनकी अंडे पे थी और मेनका भी वैसे ही उनके उपर बैठी थी और उसकी गांड उनके लंड से भरी थी। राजासाहब ने हाथ आगे ले जाकर उसकी चूचियो को मसलने लगे। उसके निपल्स पहले ही कड़े हो गये थे। राजासाहब उसकी गर्दन को चूम रहे थे की मेनका ने अपनी गर्दन घुमाई औरअपने होठों को उनके होठों पर कस दिया।
"दर्द तो नही हो रहा?",उन्होने उसके होठों को छोड़ते हुए और उसकी चुचियाँ दबाते हुए पूछा।अब उनका एक हाथ उसकी चूत पे था और उसके दाने को सहला रहा था।
"उन्न,उन्ह।" मेनका ने इनकार किया। राजासाहब अब फिर से उठ गये और दोनो डॉगी पोज़िशन मे आ गये। अब मेनका ने अपना सारा वजन अपने हाथों और घुटनो पे लिया हुआ था और पीछे से अपने ससुर से गांड मरवा रही थी। थोड़ी देर तक राजासाहब उसकी कमर थामे घुटनो पे खड़े बस उसकी गांड मारते रहे।
फिर वो झुक गये और अपना सीना उसकी पीठ से सटा दिया,अपना मुँह उसकी गर्दन मे च्छूपा लिया और एक हाथ नीचे ले जाकर उसकी चूचियो दबाने लगे। मेनका को अपनी पीठ पे राजासाहब के सीने के बाल गुदगुदी करते महसूस हुए। उसकी चूत तो बस पानी छोड़े जा रही थी और गांड मे तो वो मज़ेदार एहसास हो रहा था की पुछो मत। मैत्री की लेखनी।
राजासाहब ने अपना हाथ उसकी चूचियो से हटा उसकी चूत पे लगा दिया और लगे उसकी चूत मे उंगली करने और उसके दाने को रगड़ने। मेनका ने मुँह पीछे किया और अपने ससुर को पागलों की तरह चूमने लगी। राजासाहब ने भी लंड के धक्के और उंगलियो की रगड़ तेज़ कर दी। मेनका की गांड ने भी अब तेज़ी से उनके लंड को कसना शुरू कर दिया था और उसकी चूत बस पानी छोड़ ने ही वाली थी।
राजसाहब ने अपनी जीभ से उसकी जीभ के साथ खेलना शुरू कर दिया कि तभी मेनका का जिस्म अकड़ गया और उसकी कमर हिलने लगी और उसकी चूत ने उनकी उंगली और गांड ने लंड को बिल्कुल कस के जाकड़ लिया। वो झड़ गयी थी और गांड ने जैसी ही लंड को दबोचा,उनके लंड ने भी पानी छोड़ दिया। मेनका की गांड ने अपने आप सिकुड कर उनके लंड का सारा पानी निचोड़ लिया।
दोनो निढाल होकर बिस्तर पे गिर गये। जब लंड सिकुड गया तो राजासाहब ने उसे बाहर खींचा और मेनका को सीधा कर अपनी बाहों मे भर लिया।,"तकलीफ़ नही हुई ना?",वो उसके चेहरे को चूम रहे थे।
"नही।।",मेनका ने उन्हे अपने पास खींचा और उनके सीने मे मुँह छुपाकर वहा हौले-हौले चूमने लगी।
क्रमशः।।।।।।।।।।।।।।।।।।
दोस्तों बने रहिये ..................
अपने हाथ से पकड़ कर उन्होने बहुत धीरे-2 से अपना लंड उसकी गांड मे घुसाना शुरू किया। लंड का सूपड़ा बहुत मोटा था, ऊ...ओ...ऊहह..",मेनका की आह निकल गयी।
"बस मेरी जान शुरू मे थोड़ी तकलीफ़ होगी।" राजासाहब उसकी पीठ सहलाते हुए अपने सूपदे को अंदर धकेलने लगे। थोड़ी ही देर मे सूपड़ा अंदर था और उन्होने बस सुपारे को ही गांड में अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। मेनका दर्द ख़तम हो गया और उसे अब मज़ा आने लगा। उसने सोचा भी नही था कि गांड मे लंड इतना मज़ा देता है। जब लंड अंदर जाता था तो उसकी गांड अपनेआप सिकुड कर लंड को कस लेती थी और उसके बदन मे मज़े की लहरें दौड़ जाती थी। गांड की इस हरकत से राजासाहब भी पागल हो रहे थे।
हल्के-2 धक्कों से उन्होने अब अपने पूरे लंड को गांड मे घुसाना शुरू किया। मेनका को हल्का दर्द हो रहा था पर उस से कही ज़्यादा मज़ा आ रहा था। गांड मरवाने से होनेवाले दर्द का डर भी ख़तम हो गया था और वो अब पूरा लुत्फ़ उठा रही थी।
थोड़ी ही देर मे लंड जड़ तक उसकी गांड मे था। जब राजासाहब ने धक्का मारा तो वो उठ कर पीछे बैठ गयी तो राजासाहब भी बैठ गये।
अब राजासाहब अपने घुटनो पे बैठे थे और उनकी गांड उनकी अंडे पे थी और मेनका भी वैसे ही उनके उपर बैठी थी और उसकी गांड उनके लंड से भरी थी। राजासाहब ने हाथ आगे ले जाकर उसकी चूचियो को मसलने लगे। उसके निपल्स पहले ही कड़े हो गये थे। राजासाहब उसकी गर्दन को चूम रहे थे की मेनका ने अपनी गर्दन घुमाई औरअपने होठों को उनके होठों पर कस दिया।
"दर्द तो नही हो रहा?",उन्होने उसके होठों को छोड़ते हुए और उसकी चुचियाँ दबाते हुए पूछा।अब उनका एक हाथ उसकी चूत पे था और उसके दाने को सहला रहा था।
"उन्न,उन्ह।" मेनका ने इनकार किया। राजासाहब अब फिर से उठ गये और दोनो डॉगी पोज़िशन मे आ गये। अब मेनका ने अपना सारा वजन अपने हाथों और घुटनो पे लिया हुआ था और पीछे से अपने ससुर से गांड मरवा रही थी। थोड़ी देर तक राजासाहब उसकी कमर थामे घुटनो पे खड़े बस उसकी गांड मारते रहे।
फिर वो झुक गये और अपना सीना उसकी पीठ से सटा दिया,अपना मुँह उसकी गर्दन मे च्छूपा लिया और एक हाथ नीचे ले जाकर उसकी चूचियो दबाने लगे। मेनका को अपनी पीठ पे राजासाहब के सीने के बाल गुदगुदी करते महसूस हुए। उसकी चूत तो बस पानी छोड़े जा रही थी और गांड मे तो वो मज़ेदार एहसास हो रहा था की पुछो मत। मैत्री की लेखनी।
राजासाहब ने अपना हाथ उसकी चूचियो से हटा उसकी चूत पे लगा दिया और लगे उसकी चूत मे उंगली करने और उसके दाने को रगड़ने। मेनका ने मुँह पीछे किया और अपने ससुर को पागलों की तरह चूमने लगी। राजासाहब ने भी लंड के धक्के और उंगलियो की रगड़ तेज़ कर दी। मेनका की गांड ने भी अब तेज़ी से उनके लंड को कसना शुरू कर दिया था और उसकी चूत बस पानी छोड़ ने ही वाली थी।
राजसाहब ने अपनी जीभ से उसकी जीभ के साथ खेलना शुरू कर दिया कि तभी मेनका का जिस्म अकड़ गया और उसकी कमर हिलने लगी और उसकी चूत ने उनकी उंगली और गांड ने लंड को बिल्कुल कस के जाकड़ लिया। वो झड़ गयी थी और गांड ने जैसी ही लंड को दबोचा,उनके लंड ने भी पानी छोड़ दिया। मेनका की गांड ने अपने आप सिकुड कर उनके लंड का सारा पानी निचोड़ लिया।
दोनो निढाल होकर बिस्तर पे गिर गये। जब लंड सिकुड गया तो राजासाहब ने उसे बाहर खींचा और मेनका को सीधा कर अपनी बाहों मे भर लिया।,"तकलीफ़ नही हुई ना?",वो उसके चेहरे को चूम रहे थे।
"नही।।",मेनका ने उन्हे अपने पास खींचा और उनके सीने मे मुँह छुपाकर वहा हौले-हौले चूमने लगी।
क्रमशः।।।।।।।।।।।।।।।।।।
दोस्तों बने रहिये ..................


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