27-03-2026, 02:11 PM
राजासाहब अपनी बहू के साथ वापस महल आ गये थे और अब बैठ कर टीवी पर न्यूज़ देख रहे थे। मेनका अपने कमरे मे थी। सारे नौकर जा चुके थे और उन्हे डिस्टर्ब करने वाला कोई भी नही था। मैत्री की पेशकश.
तभी मेनका वहा आ गयी, उसने फिर वोही बॉमबे वाली काली नाइटी पहनी थी और उसके गले मे से उसका क्लीवेज चमक रहा था।,"क्या देख रहे हो,सोना नही है क्या?"
"नही।",कह कर उन्होने उसे खींच कर अपने पास बिठा लिया।
"फिर वही बात,अभी तक मन नही भरा?",उसने उनके शरारती हाथों को अपने सीने से हटाते हुए बोला।
"नही और कभी भरेगा भी नही।",वो उसे चूमने लगे और रिमोट उठा कर टीवी बंद कर दिया।
फिर उसे गोद मे उठा लिया और चढ़ने लगे सीढ़ियाँ। थोड़ी देर बाद दोनो उनके बिस्तर मे लेते एक दूसरे को चूम रहे थे। राजासाहब उसके उपर चढ़े हुए थे और उनके हाथ उसकी नाइटी मे घुस कर उसकी ब्रा मे कसी चुचियाँ दबा रहे थे।मेनका उनके कुर्ते मे हाथ डाल उनकी पीठ सहला रही थी।
राजासाहब बेसबरे हो गये और उठ कर नंगे हो गये और अपनी बहू को भी नंगा कर दिया। मेनक अब केवल काले रंग की ब्रा और पेंटी मे थी। राजासाहब उस पर सवार हो उसे पागलों की तरह चूमने लगे। मेनका उनकी मर्दानगी का लोहा मान गयी पिछले 2 दीनो से इस आदमी ने सिवाय उसे चोदने के और कोई काम नही किया था फिर भी इतने जोश मे था। मैत्री की पेशकश.
उसने उनकी गांड को दबाना और अपने नाकुनो से हल्के-हलके नोचना शुरू कर दिया। राजासाहब पेंटी के उपर से ही उसकी चूत पर धक्के लगा रहे थे और मेनका गीली होती जा रही थी। उसने हाथ गांड से हटा उनका लंड पकड़ लिया और हिलाने लगी। राजासाहब ने करवट ली और उसे सीने से चिपका लिया औरचूमते हुए हाथ पीछे ले जाके उसकी ब्रा खोल दी।
थोड़ी देर तक उसकी पीठ सहलाते हुए उसके मुँह मे अपनी जीभ घुसा उसकी जीभ से खेलते रहे और फिर अपना हाथ पीछे से उसकी पेंटी के अंदर उसकी गांड पे सरका दिया और उसकी फांकों को मसलने लगे। मेनका मस्त हो गयी और जब राजासाहब उसकी पेंटी सरका कर घुटनो तक ले आए तो उसने खुद ही उसे अपने जिस्म से अलग कर दिया।
राजासाहब ने उसकी गांड मसल्ते हुए उसकी दरार को सहलाना शुरू कर दिया। ऐसा पहले उन्होने कभी नही किया था और मेनका के लिए ये बिल्कुल नया एहसास था। तभी उन्होने अपनी एक उंगली उसकी गांड की छेद मे डाल दी।
"ओउ..च!",मेनक चिहुनक कर उनसे अलग होने लगी पर राजासाहब ने अपनी पकड़ मजबूत कर उसकी गांड मे उंगली जस की तस रहने दी।
"क्या कर रहे हो! वहा नही?"
"प्लीज़...",
"नही, तुम पागल हो, दर्द होगा।"मेनका शर्मा गयी।
"नही होगा,प्रॉमिस, होगा तो निकाल लूँगा, प्लीज़,जान,प्लीज़!",राजासाहब बच्चों की तरह ज़िद करने लगे।
"ओके, पर दर्द हुआ तो मैं फिर कभी कैसे भी प्यार नही करने दूँगी।"
"अरे मेरी जान दर्द होगा तब तो!" राजासाहब ने उसके होठों को अपने होठ से बंद कर दिया औरअपनी उंगली से उसकी गांड मारने लगे। थोड़ी देर मे 2 फिर 3 उंगलिया उसकी गांड मे अंदर-बाहर हो रही थी। मेनका को मज़ा आ रहा था। उसने सिर्फ़ सुना था पर आज पहली बार वो गांड मरवाने वाली थी।
राजासाहब उस से अलग होकर अपने क्लॉज़ेट मे गये और वहा से एक क्रीम ले कर आए। उन्होने अपनी बहू को उल्टा कर दिया और झुक कर उसकी मोटी गांड को चूमनेऔर चूसने लगे। जम के चूसने के बाद उन्होने अपनी जीभ उसकी गांड के छेद मे डाल दी। मेनका फिर चिहुनकि,"..ऊऊ...ऊ..."
पर राजासाहब उसे मज़बूती से थामे अपनी जीभ से उसके छेद को चाट ते रहे। थोड़ी देर के बाद उसकी गांड सहलाते हुए उन्होने कहा,"जान,बिल्कुल मत घबराना, हम पर भरोसा रखो। ज़रा भी दर्द होगा तो हम रुक जाएँगे। तुम बस रिलॅक्स होकर अपने बदन और इसको ढीला छोड़ दो।",उन्होने उसकी गांड मे फिर उंगली कर दी।
बने रहिये दोस्तों..........
तभी मेनका वहा आ गयी, उसने फिर वोही बॉमबे वाली काली नाइटी पहनी थी और उसके गले मे से उसका क्लीवेज चमक रहा था।,"क्या देख रहे हो,सोना नही है क्या?"
"नही।",कह कर उन्होने उसे खींच कर अपने पास बिठा लिया।
"फिर वही बात,अभी तक मन नही भरा?",उसने उनके शरारती हाथों को अपने सीने से हटाते हुए बोला।
"नही और कभी भरेगा भी नही।",वो उसे चूमने लगे और रिमोट उठा कर टीवी बंद कर दिया।
फिर उसे गोद मे उठा लिया और चढ़ने लगे सीढ़ियाँ। थोड़ी देर बाद दोनो उनके बिस्तर मे लेते एक दूसरे को चूम रहे थे। राजासाहब उसके उपर चढ़े हुए थे और उनके हाथ उसकी नाइटी मे घुस कर उसकी ब्रा मे कसी चुचियाँ दबा रहे थे।मेनका उनके कुर्ते मे हाथ डाल उनकी पीठ सहला रही थी।
राजासाहब बेसबरे हो गये और उठ कर नंगे हो गये और अपनी बहू को भी नंगा कर दिया। मेनक अब केवल काले रंग की ब्रा और पेंटी मे थी। राजासाहब उस पर सवार हो उसे पागलों की तरह चूमने लगे। मेनका उनकी मर्दानगी का लोहा मान गयी पिछले 2 दीनो से इस आदमी ने सिवाय उसे चोदने के और कोई काम नही किया था फिर भी इतने जोश मे था। मैत्री की पेशकश.
उसने उनकी गांड को दबाना और अपने नाकुनो से हल्के-हलके नोचना शुरू कर दिया। राजासाहब पेंटी के उपर से ही उसकी चूत पर धक्के लगा रहे थे और मेनका गीली होती जा रही थी। उसने हाथ गांड से हटा उनका लंड पकड़ लिया और हिलाने लगी। राजासाहब ने करवट ली और उसे सीने से चिपका लिया औरचूमते हुए हाथ पीछे ले जाके उसकी ब्रा खोल दी।
थोड़ी देर तक उसकी पीठ सहलाते हुए उसके मुँह मे अपनी जीभ घुसा उसकी जीभ से खेलते रहे और फिर अपना हाथ पीछे से उसकी पेंटी के अंदर उसकी गांड पे सरका दिया और उसकी फांकों को मसलने लगे। मेनका मस्त हो गयी और जब राजासाहब उसकी पेंटी सरका कर घुटनो तक ले आए तो उसने खुद ही उसे अपने जिस्म से अलग कर दिया।
राजासाहब ने उसकी गांड मसल्ते हुए उसकी दरार को सहलाना शुरू कर दिया। ऐसा पहले उन्होने कभी नही किया था और मेनका के लिए ये बिल्कुल नया एहसास था। तभी उन्होने अपनी एक उंगली उसकी गांड की छेद मे डाल दी।
"ओउ..च!",मेनक चिहुनक कर उनसे अलग होने लगी पर राजासाहब ने अपनी पकड़ मजबूत कर उसकी गांड मे उंगली जस की तस रहने दी।
"क्या कर रहे हो! वहा नही?"
"प्लीज़...",
"नही, तुम पागल हो, दर्द होगा।"मेनका शर्मा गयी।
"नही होगा,प्रॉमिस, होगा तो निकाल लूँगा, प्लीज़,जान,प्लीज़!",राजासाहब बच्चों की तरह ज़िद करने लगे।
"ओके, पर दर्द हुआ तो मैं फिर कभी कैसे भी प्यार नही करने दूँगी।"
"अरे मेरी जान दर्द होगा तब तो!" राजासाहब ने उसके होठों को अपने होठ से बंद कर दिया औरअपनी उंगली से उसकी गांड मारने लगे। थोड़ी देर मे 2 फिर 3 उंगलिया उसकी गांड मे अंदर-बाहर हो रही थी। मेनका को मज़ा आ रहा था। उसने सिर्फ़ सुना था पर आज पहली बार वो गांड मरवाने वाली थी।
राजासाहब उस से अलग होकर अपने क्लॉज़ेट मे गये और वहा से एक क्रीम ले कर आए। उन्होने अपनी बहू को उल्टा कर दिया और झुक कर उसकी मोटी गांड को चूमनेऔर चूसने लगे। जम के चूसने के बाद उन्होने अपनी जीभ उसकी गांड के छेद मे डाल दी। मेनका फिर चिहुनकि,"..ऊऊ...ऊ..."
पर राजासाहब उसे मज़बूती से थामे अपनी जीभ से उसके छेद को चाट ते रहे। थोड़ी देर के बाद उसकी गांड सहलाते हुए उन्होने कहा,"जान,बिल्कुल मत घबराना, हम पर भरोसा रखो। ज़रा भी दर्द होगा तो हम रुक जाएँगे। तुम बस रिलॅक्स होकर अपने बदन और इसको ढीला छोड़ दो।",उन्होने उसकी गांड मे फिर उंगली कर दी।
बने रहिये दोस्तों..........


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