Hello दोस्तों... Xossipy पर ये मेरी दूसरी कहानी है। इससे पहले मैंने एक कहानी और शेयर की थी जो मेरी नहीं थी लेकिन मैंने कहीं से कॉपी करके पोस्ट की थी। अब जो कहानी मैं आपके साथ शेयर करने जा रहा हूं ये मेरी अपनी और असली कहानी है जिसे मैंने सिर्फ लिखा नहीं बल्कि जिया है। ये कहानी लिखने के तीन मुख्य वजह हैं:-
पहला ये कि यहाँ पर ज्यादातर कहानियाँ शुरू तो होती हैं लेकिन सही तरीके से खत्म नहीं होती। दूसरा ये कि मुझे रोमन स्क्रिप्ट में लिखी कहानियाँ पसंद नहीं हैं इसलिए मैं अपनी ये कहानी देवनागरी स्क्रिप्ट में लिख रहा हूं। तीसरा ये कि मुझे लगता है यहाँ पर लिखी ज्यादातर कहानियाँ Fake हैं जो पढ़ने से ही पता चल जाती हैं। ऐसे में जो लोग मेरी तरह Mom Incest हैं उन्हें एक सच्ची कहानी पढ़ने को मिले मैं यही चाहता हूं।
कहानी का नाम मैंने धुरंधर रखा है....क्यूंकि भाई अपनी सगी मम्मी को चोदने वाला धुरंधर ही होता है...जो भी अपनी माँ को चोदना चाहते हैं मगर चोद नहीं पा रहे वो मेरी बात समझ सकते हैं|
इस कहानी के पार्ट्स आपको नियमित मिलेंगे बस बदले में आपका सपोर्ट और कमेंट्स मिलते रहे। शुरुआत में कहानी आपको थोड़ा बोरिंग लग सकती है क्योंकि वहां कहानी बढ़ेगी... लेकिन जैसे-जैसे बढ़ती जाएगी आपको मजा आएगा। तो अब आते हैं कहानी पर।
Chapter 1 : Introduction
मेरा नाम अजय है और मैं U.P. के सुलतानपुर का रहने वाला हूँ। मेरे परिवार में मेरे पापा, मम्मी और एक छोटा भाई है। पापा एक सरकारी नौकरी में हैं, मैं अभी एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता हूँ, छोटा भाई इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है और मम्मी एक हाउसवाइफ है। मम्मी की उम्र अभी 46 साल है और मैं अभी 26 का हूँ। इस कहानी की शुरुआत आज से 4 साल पहले हुई थी यानी 2022 में जब मम्मी 42 की और मैं 22 का था। कहते हैं एक मां को अपना बेटा और एक बेटे को अपनी मां हमेशा प्यारे लगते हैं चाहे फिर वो दुनिया को देखने में कैसे भी लगे। और यहाँ तो मेरी मम्मी सच में बहुत सुंदर है। 5 फीट 4 इंच का कद, दूध में जैसे थोड़ा सा रूह आफ़ज़ा डाल दिया हो ऐसा रंग और गज़ब का फिगर। सबसे अच्छी बात यह है कि उनके बूब्स का साइज 38-D होने के बाद भी इस उम्र में भी वो एकदम गोल और सुडोल हैं और गांड का तो कहना ही क्या।
Real Pic of Mummy
मुझे याद नहीं मुझमें मम्मी को लेकर फीलिंग्स कब से आईं लेकिन इतना पता है जब से होश संभाला है तब से मैं मम्मी की तरफ अट्रैक्टेड हूँ। शायद पहली मुट्ठी भी मम्मी को सोच के ही मारी थी। मेरी हमेशा से 2 Fantasies थीं| पहली तो मम्मी की चूत मारना और दूसरा मम्मी की चौड़ी गांड मारना|
2019 में इंजीनियरिंग करने के बाद मेरी नौकरी लग गई थी और मैं गुड़गांव चला गया था पर वहाँ भी मम्मी को लेकर मेरा अट्रैक्शन खत्म नहीं हुआ। हमेशा सोचता था कि काश एक बार मम्मी को चोद पाऊं। लेकिन ये संभव नहीं हो पा रहा था तो इंटरनेट पर मां और बेटे की सेक्स स्टोरीज़ पढ़के या वीडियो देख के ही काम चल रहा था।
2020 में हालात बदले और कोविड के वजह से मैं वर्क फ्रॉम होम लेकर घर आ गया। यहाँ मम्मी को सामने देखकर और हालात खराब होती थी मेरी लेकिन मैं कुछ कर नहीं सकता था। फिर आया 2022, जहाँ से सब बदलना शुरू हुआ। अप्रैल 2021 में पापा का ट्रांसफर दूसरे शहर में हो चुका था तो वो वहीं पे रूम लेकर रहने लगे थे। वहाँ से उनका घर आना तभी हो पाता था जब 2-3 दिन की छुट्टी एक साथ मिल पाती थी। घर में सिर्फ मैं, मेरा छोटा भाई और मम्मी थे। जुलाई 2022 में भाई का एडमिशन इंजीनियरिंग में हो गया और वो बैंगलोर चला गया। मेरा सीन ये था कि मेरा WFH (वर्क फ्रॉम होम) अभी भी कंटिन्यू था। महीने में 3-4 दिन के लिए गुड़गांव चला जाता था ऑफिस के लिए और फिर वापस घर। तो इस तरह से घर में अब हम 2 लोग ही बचे थे। ये मेरे लिए एक मौका था लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या और कैसे करूं क्योंकि मैंने उन्हें हमेशा उनके घरेलू अवतार में ही देखा था। घर में रहने वाली, पूजा-पाठ करने वाली मम्मी को उनके बेटे तो क्या किसी भी दूसरे आदमी के साथ सेक्स के लिए राजी कर पाना लगभग impossible था।
Chapter 2 : The Plan
जैसा कि मैं पहले ही बता चुका हूँ कि मैं माँ-बेटा सेक्स स्टोरीज़ पढ़ा करता था, तो मैंने कहीं एक सेक्स स्टोरी पढ़ी थी जिसमें एक बेटा फेसबुक की मदद से अपनी माँ के साथ सेक्स करता है। मुझे लगा कि शायद इस कहानी से आइडिया लिया जाए तो काम बन सकता है क्योंकि मेरी मम्मी भी फेसबुक और व्हाट्सएप वगैरह यूज़ करती थीं। मेरे पास एक एडवांटेज ये थी कि मम्मी बहुत Tech savvy नहीं हैं। उनको जब मैंने स्मार्टफोन दिया था तो उनकी जीमेल आईडी, यूट्यूब, फेसबुक, व्हाट्सएप सब अकाउंट मैंने ही बना के दिए थे और मुझे स्क्रीन लॉक और पासवर्ड सब पता थे यहाँ तक कि उनके फोन में मैंने अपना फिंगरप्रिंट भी लगा रखा था।
मैंने अपने प्लान पर काम करना शुरू किया मगर मन में ढेरों डाउट्स भी थे और साथ ही ये लालच भी था कि अगर प्लान सफल हो गया तो धरती पर ही जन्नत मिल जाएगी।
तो मैंने सोचा कि एक फेक फेसबुक प्रोफाइल बनाऊँ एक ऐसी लेडी के नाम से जो दिखने में आलमोस्ट मम्मी की ही उम्र की हो और उसकी फैमिली भी हमारी फैमिली जैसी हो जिससे कि मम्मी उसके साथ कनेक्ट कर पाए। फिर मैंने इंटरनेट पर बहुत सी फोटोज़, प्रोफाइल्स सर्च की जहाँ से मुझे इस फेक प्रोफाइल को असली जैसा फील कराने के लिए फोटोज़ मिल जाएँ। बड़ी मेहनत के बाद एक औरत की फोटोज़ मुझे मिली जो आलमोस्ट मम्मी की एज की थी और उसके कुछ फैमिली फोटोज़ भी थे। फिर मैंने इन फोटोज़ को यूज़ करके एक अच्छी सी फेसबुक प्रोफाइल बनाई और कुछ पोस्ट्स भी अपलोड कर दिए।
अब प्रॉब्लम ये थी कि इस फेक फेसबुक प्रोफाइल को मम्मी से इंट्रोड्यूस कैसे करूँ। मुझे कोई कॉमन लिंक चाहिए था। फिर मुझे ध्यान आया कि मम्मी ने एक सत्संग ग्रुप जॉइन कर रखा था। इस ग्रुप की कई ब्रांचेज़ हैं मेरे आस-पास के जिलों में तो मैंने डिसाइड किया कि इसी का सहारा लिया जाए। यह सोच के मैंने मम्मी को अंजलि नाम की इस फेक फेसबुक आईडी से फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दी।
एक दिन हो गया, दो दिन हो गए…धीरे-धीरे करके 5 दिन बीत गए लेकिन फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट नहीं हुई। मुझे लगा मेरा प्लान तो पहले ही स्टेज में फेल हो गया।
फिर मैंने सोचा कि अगर मम्मी रिक्वेस्ट नहीं एक्सेप्ट कर रही हैं तो मुझे खुद ही उनके फोन से रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर देनी चाहिए। अगले दिन जैसे ही मम्मी नहाने के लिए बाथरूम में गई, मैंने उनका फोन अनलॉक किया और उनकी फेसबुक आईडी ओपन करके अंजलि की फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर दी और उन्हें जैसा उनके सत्संग ग्रुप में हेल्लो बोला जाता था का एक मैसेज भेज दिया।
लेकिन इससे भी कुछ खास फायदा नहीं हुआ… 2 दिन तक वो मैसेज सीन ही नहीं हुआ। मुझे फिर नाउम्मीदी होने लगी। ऐसा लग रहा था कि किस्मत मेरे साथ नहीं है। फिर मैंने एक लास्ट ट्राई करने की सोची कि अगर इससे बात नहीं बनी तो किसी और आइडिया पर ट्राई करेंगे। तो उस दिन जब मम्मी किचन में काम कर रही थीं तो मैंने किसी बहाने से उनका फोन उनसे मांगा… मम्मी ने कहा, "देख लो, चार्जिंग में लगा है।" तो मैंने रूम में जाकर फोन उठाया और 2 मिनट बाद उनसे कहा: -
मैं:- "देखो मम्मी, इसमें किसी अंजलि का मैसेज आया है। शायद आपके सत्संग ग्रुप की कोई मेंबर है।"
मम्मी:- "ठीक है। फ्री होकर देखती हूं।"
मैं:- "इतने दिन तक मैसेज क्यों अनसीन छोड़ देती हो?"
मम्मी:- "अरे बेटा! काम के चक्कर में ध्यान नहीं गया होगा। आज फ्री होऊंगी तो बात कर लूंगी ना।"
मम्मी का रोज का एक फिक्स शेड्यूल था… सुबह जल्दी उठना फिर झाड़ू पोछा करके नहाना धोना और पूजन करना। उसके बाद मम्मी रसोई के कामों में लग जाती थीं तो 1-1:30 बजे ही फ्री होती थीं। फिर दिन में आराम करके शाम समय सत्संग जाती थीं और वहां से वापसी करके फिर वही किचन के काम।
तो उस दिन जब मम्मी 1 बजे के आस-पास फ्री हुईं तो उन्होंने मैसेंजर खोला और अंजलि को जवाब दिया। उस समय मैं अपने रूम में बैठा था और ऑफिस का काम होल्ड पर रख के बड़ी बेसब्री से मम्मी के मैसेज का इंतजार कर रहा था कि कब वो मेरी बनाई फेक आईडी पर मैसेज करेंगी। अचानक से मेरे लैपटॉप की स्क्रीन पर चैट विंडो में मम्मी का मैसेज फ्लैश हुआ।
मम्मी:- "**** अंजलि जी!"
अंजलि:- "**** सारिका जी! कैसी हैं आप?" (मम्मी का नाम सारिका है)
मम्मी:- "जी मैं ठीक हूं। माफ कीजिए, मैंने आपको पहचाना नहीं।"
अंजलि:- "जी मैं ***** सत्संग ग्रुप से जुड़ी हूं। आपकी प्रोफाइल देखी तो लगा कि शायद आप भी उसी से जुड़ी हैं। तभी आपको मैसेज किया।"
मम्मी:- "मगर मैंने कभी आपको सत्संग में देखा नहीं।"
अंजलि:- "मैं अमेठी (मेरे पड़ोस का जिला) से हूं और यहां के ग्रुप में जुड़ी हूं।"
इस तरह से दोनों में बातचीत की शुरुआत हो गई। शुरू में तो मैं ही उनसे ज्यादा से ज्यादा सवाल पूछता था लेकिन फिर धीरे-धीरे वो भी अपनी तरफ से बातें करने लगी। बातों-बातों में मैंने उनसे उनके परिवार के बारे में पूछा और उन्होंने भी मेरी फैमिली के बारे में पूछा तो मैंने कहा कि मेरी फैमिली में मेरे पति, एक बेटा और एक बेटी है। मैंने उन्हें बताया कि मेरे यानी की अंजलि के पति एक MNC में थे और काम के सिलसिले में अक्सर बाहर ही रहते थे और बेटी की शादी हो चुकी थी। घर में अक्सर सिर्फ मैं और मेरा बेटा ही रहते थे।
Chapter 3 : The Game
खैर इस तरह धीरे-धीरे बातें करते-करते 10-12 दिन हो गए अभी। अब हम लोगों की बातें परिवार और Personal life से जुड़ने लगी थीं। कभी-कभार हंसी-मजाक और डबल मीनिंग बातें भी हो जाती थीं। शुरुआत में तो मैं ही अपनी तरफ से ऐसी बातें करता था लेकिन कुछ दिनों के बाद मम्मी भी कोई नॉटी बात बोल देती थीं। कई बार मैं अपनी तरफ से मैसेज नहीं करता तो मम्मी का ही मैसेज आ जाता। इससे मुझे आइडिया लग गया था कि अब मम्मी की अंजलि से अच्छी दोस्ती हो गई है और अब मेरा मन था कि बातों को दूसरी तरफ ले जाया जाए। क्योंकि सास-नंद की बातें करने के लिए तो मैंने आईडी नहीं बनवाई थी।
लगभग 15 दिन बाद मैंने तय किया कि अब प्लान के अगले स्टेप पर काम किया जाए। तो उस दिन की चैट में मैंने कुछ देर इधर-उधर की बातें करने के बाद कहा –
अंजलि :- सारिका यार एक बात बताओ
मम्मी :- क्या अंजू (मम्मी भी मुझे अंजू बुलाने लगी थीं)
अंजलि :- तुम्हारे पति इतने दिनों तक बाहर रहते हैं….कैसे मैनेज करती हो?
मम्मी :- मैनेज करने जैसा क्या है….मेरा बेटा है वो ध्यान रखता है मेरा भी और घर का भी। सामान वगैरह जो भी लाना होता है वो उसी से मंगवा लेती हूं।
अंजलि :- अरे नहीं यार मैं वो नहीं कह रही। मैं दूसरे वाले मैनेज की बात कर रही हूँ ?
मम्मी :- ओह्ह
अंजलि :- हाँ
मम्मी :- पति तो तुम्हारे भी बाहर रहते हैं…ये सवाल तो मैं भी तुमसे पूछ सकती हूं।
अंजलि :- नहीं सवाल पहले मैंने किया है…तो पहले आप बताओ
मम्मी :- अच्छा
अंजलि :- हाँ
मम्मी :- यार सच कहूं तो मैनेज नहीं हो पा रहा है…बहुत मन करता है
अंजलि :- हाँ मुझे लगा ही था
मम्मी :- अच्छा! तुम्हें कैसे लगा था?
अंजलि :- यार मैं भी एक औरत हूँ तो औरत के मन की बात और शरीर की डिमांड तो समझ ही सकती हूँ।
मम्मी :- हाँ यार
अंजलि :- और तुम इतनी सुंदर और सेक्सी भी हो तो जाहिर ही है
मम्मी :- अच्छा जी ?
अंजलि :- तो बताया नहीं आपने
मम्मी :- क्या
अंजलि :- यही कि कैसे मैनेज करती हो
मम्मी :- बताया तो कि नहीं मैनेज हो पा रहा है। यही सोच के सत्संग जॉइन किया था कि माइंड कुछ डाइवर्ट हो लेकिन कोई फायदा नहीं हो रहा है। एक तो इनकी उम्र भी हो रही है तो पहले जैसी बात नहीं रही और उपर से आते भी बहुत कम हैं घर पे
अंजलि :- अच्छा
मम्मी:- हाँ
अंजलि :- तो कोई BF बना लो या कोई पुराना लवर हो कॉलेज टाइम का
मम्मी :- कॉलेज में ये सब कर पाने का टाइम ही नहीं मिला.. फर्स्ट ईयर में ही थी कि इनसे शादी हो गई…ग्रैजुएशन भी फिर यही से कंप्लीट किया। और अब इस उम्र में कहां BF बना लूं। किसी को पता चल गया तो बदनामी हो जाएगी।
अंजलि :- हाँ यार ये तो सही कहा तुमने
मम्मी :- अच्छा अब तुम बताओ
अंजलि :- क्या?
मम्मी :- यही कि कैसे मैनेज करती हो तुम? तुम्हारे भी तो same problem है |
अब ये वो टाइम था जहाँ से आर या पार का फैसला होना था। अब मुझे मम्मी को आइडिया देना था कि वो अपने बेटे के साथ सेक्स करे और ये सोच के मेरी धड़कनें बहुत बढ़ी हुई थीं। क्योंकि किसी के लिए भी ये जानना बहुत बड़ी बात होती तो मैंने तय किया कि एकदम से नहीं बताऊंगा। इसीलिए मैंने कुछ ऐसे रिप्लाई किया।
अंजलि :- नहीं यार मैं नहीं बता सकती।
मम्मी :- क्यों?
अंजलि :- नहीं यार थोड़ा awkward होगा तुम्हारे लिए…पता नहीं तुम्हें कैसा लगे सुनकर। फिर तुम जज करोगी
मम्मी :- अरे ऐसा भी क्या है…किसी पड़ोसी का पुराने आशिक को अपने हुस्न के जाल में फसा लिया होगा :D
शर्माओ नहीं…बताओ तो
अब आगे टाइप करने की मेरी हिम्मत नहीं पड़ रही थी…धड़कनें बेकाबू हो रही थीं और मुंह सूखने लगा था तो मैं झट से ऑफलाइन हो गया।
खैर इस तरह धीरे-धीरे बातें करते-करते 10-12 दिन हो गए अभी। अब हम लोगों की बातें परिवार और Personal life से जुड़ने लगी थीं। कभी-कभार हंसी-मजाक और डबल मीनिंग बातें भी हो जाती थीं। शुरुआत में तो मैं ही अपनी तरफ से ऐसी बातें करता था लेकिन कुछ दिनों के बाद मम्मी भी कोई नॉटी बात बोल देती थीं। कई बार मैं अपनी तरफ से मैसेज नहीं करता तो मम्मी का ही मैसेज आ जाता। इससे मुझे आइडिया लग गया था कि अब मम्मी की अंजलि से अच्छी दोस्ती हो गई है और अब मेरा मन था कि बातों को दूसरी तरफ ले जाया जाए। क्योंकि सास-नंद की बातें करने के लिए तो मैंने आईडी नहीं बनवाई थी।
लगभग 15 दिन बाद मैंने तय किया कि अब प्लान के अगले स्टेप पर काम किया जाए। तो उस दिन की चैट में मैंने कुछ देर इधर-उधर की बातें करने के बाद कहा –
अंजलि :- सारिका यार एक बात बताओ
मम्मी :- क्या अंजू (मम्मी भी मुझे अंजू बुलाने लगी थीं)
अंजलि :- तुम्हारे पति इतने दिनों तक बाहर रहते हैं….कैसे मैनेज करती हो?
मम्मी :- मैनेज करने जैसा क्या है….मेरा बेटा है वो ध्यान रखता है मेरा भी और घर का भी। सामान वगैरह जो भी लाना होता है वो उसी से मंगवा लेती हूं।
अंजलि :- अरे नहीं यार मैं वो नहीं कह रही। मैं दूसरे वाले मैनेज की बात कर रही हूँ ?
मम्मी :- ओह्ह
अंजलि :- हाँ
मम्मी :- पति तो तुम्हारे भी बाहर रहते हैं…ये सवाल तो मैं भी तुमसे पूछ सकती हूं।
अंजलि :- नहीं सवाल पहले मैंने किया है…तो पहले आप बताओ
मम्मी :- अच्छा
अंजलि :- हाँ
मम्मी :- यार सच कहूं तो मैनेज नहीं हो पा रहा है…बहुत मन करता है
अंजलि :- हाँ मुझे लगा ही था
मम्मी :- अच्छा! तुम्हें कैसे लगा था?
अंजलि :- यार मैं भी एक औरत हूँ तो औरत के मन की बात और शरीर की डिमांड तो समझ ही सकती हूँ।
मम्मी :- हाँ यार
अंजलि :- और तुम इतनी सुंदर और सेक्सी भी हो तो जाहिर ही है
मम्मी :- अच्छा जी ?
अंजलि :- तो बताया नहीं आपने
मम्मी :- क्या
अंजलि :- यही कि कैसे मैनेज करती हो
मम्मी :- बताया तो कि नहीं मैनेज हो पा रहा है। यही सोच के सत्संग जॉइन किया था कि माइंड कुछ डाइवर्ट हो लेकिन कोई फायदा नहीं हो रहा है। एक तो इनकी उम्र भी हो रही है तो पहले जैसी बात नहीं रही और उपर से आते भी बहुत कम हैं घर पे
अंजलि :- अच्छा
मम्मी:- हाँ
अंजलि :- तो कोई BF बना लो या कोई पुराना लवर हो कॉलेज टाइम का
मम्मी :- कॉलेज में ये सब कर पाने का टाइम ही नहीं मिला.. फर्स्ट ईयर में ही थी कि इनसे शादी हो गई…ग्रैजुएशन भी फिर यही से कंप्लीट किया। और अब इस उम्र में कहां BF बना लूं। किसी को पता चल गया तो बदनामी हो जाएगी।
अंजलि :- हाँ यार ये तो सही कहा तुमने
मम्मी :- अच्छा अब तुम बताओ
अंजलि :- क्या?
मम्मी :- यही कि कैसे मैनेज करती हो तुम? तुम्हारे भी तो same problem है |
अब ये वो टाइम था जहाँ से आर या पार का फैसला होना था। अब मुझे मम्मी को आइडिया देना था कि वो अपने बेटे के साथ सेक्स करे और ये सोच के मेरी धड़कनें बहुत बढ़ी हुई थीं। क्योंकि किसी के लिए भी ये जानना बहुत बड़ी बात होती तो मैंने तय किया कि एकदम से नहीं बताऊंगा। इसीलिए मैंने कुछ ऐसे रिप्लाई किया।
अंजलि :- नहीं यार मैं नहीं बता सकती।
मम्मी :- क्यों?
अंजलि :- नहीं यार थोड़ा awkward होगा तुम्हारे लिए…पता नहीं तुम्हें कैसा लगे सुनकर। फिर तुम जज करोगी
मम्मी :- अरे ऐसा भी क्या है…किसी पड़ोसी का पुराने आशिक को अपने हुस्न के जाल में फसा लिया होगा :D
शर्माओ नहीं…बताओ तो
अब आगे टाइप करने की मेरी हिम्मत नहीं पड़ रही थी…धड़कनें बेकाबू हो रही थीं और मुंह सूखने लगा था तो मैं झट से ऑफलाइन हो गया।


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