24-03-2026, 01:55 PM
जब्बार बॅंगलुर पहुँच चुका था और डॉक्टर पुरन्दारे का क्लिनिक भी उसने देख लिया था। अब असल काम शुरू होता था,उसे अंदर जाकर ये पता करना था कि अंदर कितने लोग हैं और विश्वा कहाँ पे रहता है। तभी उसके मोबाइल पे मलिका को फ़ोन किया, वो बॅंगलुर एरपोर्ट से बोल रही थी। जब्बार जब तक उसे लेने एरपोर्ट पहुँचा तब तक उसके शैतानी दिमाग़ ने क्लिनिक के अंदर जाने का रास्ता सोच लिया था। मैत्री की प्रस्तुति।
थोड़ी देर बाद एक कार रिहेब सेंटर के गेट पर खड़ी थी,"प्लीज़ मैं देल्ही से आई हू और डॉक्टर साहब से मिलना बहुत ज़रूरी है।"
"मैं समझता हू,मेडम पर बिना अपायंटमेंट आप डॉक्टर साहब से नही मिल सकती।"
"अच्छा भैया तो बस एक बार मुझे उनसे फोन पर ही बात करवा दो,प्लीज़! मेरी रिसर्च का सवाल है।"
"अच्छा मेडम मैं कोशिश करता हू।" वो गार्ड अपने कॅबिन मे जा अपने फोन का रिसीवर उठा कर डाइयल करने लगा।
"लीजिए बात कीजिए।"
"हेलो!डॉक्टर पुरन्दारे,गुड ईव्निंग,सर! मेरा नाम कविता कपूर है, मैं देल्ही के 'हेल्ती' मॅगज़ीन मे रिपोर्टर हू। बेंगलूर एक पर्सनल विज़िट पे आई थी कि मुझे आपके सेंटर और आपकी डे-अडिक्षन थियरीस का पता चला, सर,मैं माफी चाहती हू कि बिना अपायंटमेंट,बिना फोन मैं इस तरह आ गयी, पर सर, क्या करू बिना आपका सेंटर देखे, आपसे मिले बिना जाने को मन नही माना।" जी हां,ये मलिका ही है जोकि सेंटर के अंदर जाने की कोशिश कर रही है।
जब्बार जानता था कि विश्वा उसे और कल्लन की शक्ल पहचानता है तो वो दोनो तो अंदर जा ही नही सकते, इसीलिए उसने मलिका को इस्तेमाल किया। उसे इतना पता था कि सनडे की वजह से 6 बजे शाम तक केवल ट्रेनी डॉक्टर ड्यूटी पे रहते हैं और सीनियर्स छुट्टी पे तो मलिका के पकड़े जाने का डर भी कम था।
"....थॅंक यू,सर! थॅंक यू सो मच!",उसने फोन गार्ड की तरफ बढ़ा दिया,"आपसे बात करेंगे।"
"मेडम,आपका काम हो गया। मैं आपको सेंटर डॉक्टर कुमार दिखा देंगे। जाइए।",मलिका के चेहरे पर जीत की मुस्कान खेल रही थी।
थोड़ी देर बाद मलिका की कार इन्स्टिट्यूट से बाहर आ गयी और बॅंगलुर शहर की ओर दौड़ने लगी। शहर पहुँचते ही जब्बार और वो एक रेस्टोरेंट मे बैठ गये,"क्या पता चला?"
"सेंटर मे सेक्यूरिटी बस गेट पे है। अंदर मे 2 फ्लोर्स पे 30 पेशेंट्स है। विश्वजीत किस फ्लोर पर है मुझे ये पता नही। पर रात मे बस एक-दो स्टाफ के लोग हैं और गेट पर एक गार्ड।" प्रस्तुतकर्ता मैत्री।
"वेल डन,जान!",जब्बार ने टेबल के नीचे उसकी जाँघ पे हाथ से दबाया।"अब बस कल्लन का इंतेज़ार है। चलो,कल तक वो भी आ जाएगा।"
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बने रहिये............
थोड़ी देर बाद एक कार रिहेब सेंटर के गेट पर खड़ी थी,"प्लीज़ मैं देल्ही से आई हू और डॉक्टर साहब से मिलना बहुत ज़रूरी है।"
"मैं समझता हू,मेडम पर बिना अपायंटमेंट आप डॉक्टर साहब से नही मिल सकती।"
"अच्छा भैया तो बस एक बार मुझे उनसे फोन पर ही बात करवा दो,प्लीज़! मेरी रिसर्च का सवाल है।"
"अच्छा मेडम मैं कोशिश करता हू।" वो गार्ड अपने कॅबिन मे जा अपने फोन का रिसीवर उठा कर डाइयल करने लगा।
"लीजिए बात कीजिए।"
"हेलो!डॉक्टर पुरन्दारे,गुड ईव्निंग,सर! मेरा नाम कविता कपूर है, मैं देल्ही के 'हेल्ती' मॅगज़ीन मे रिपोर्टर हू। बेंगलूर एक पर्सनल विज़िट पे आई थी कि मुझे आपके सेंटर और आपकी डे-अडिक्षन थियरीस का पता चला, सर,मैं माफी चाहती हू कि बिना अपायंटमेंट,बिना फोन मैं इस तरह आ गयी, पर सर, क्या करू बिना आपका सेंटर देखे, आपसे मिले बिना जाने को मन नही माना।" जी हां,ये मलिका ही है जोकि सेंटर के अंदर जाने की कोशिश कर रही है।
जब्बार जानता था कि विश्वा उसे और कल्लन की शक्ल पहचानता है तो वो दोनो तो अंदर जा ही नही सकते, इसीलिए उसने मलिका को इस्तेमाल किया। उसे इतना पता था कि सनडे की वजह से 6 बजे शाम तक केवल ट्रेनी डॉक्टर ड्यूटी पे रहते हैं और सीनियर्स छुट्टी पे तो मलिका के पकड़े जाने का डर भी कम था।
"....थॅंक यू,सर! थॅंक यू सो मच!",उसने फोन गार्ड की तरफ बढ़ा दिया,"आपसे बात करेंगे।"
"मेडम,आपका काम हो गया। मैं आपको सेंटर डॉक्टर कुमार दिखा देंगे। जाइए।",मलिका के चेहरे पर जीत की मुस्कान खेल रही थी।
थोड़ी देर बाद मलिका की कार इन्स्टिट्यूट से बाहर आ गयी और बॅंगलुर शहर की ओर दौड़ने लगी। शहर पहुँचते ही जब्बार और वो एक रेस्टोरेंट मे बैठ गये,"क्या पता चला?"
"सेंटर मे सेक्यूरिटी बस गेट पे है। अंदर मे 2 फ्लोर्स पे 30 पेशेंट्स है। विश्वजीत किस फ्लोर पर है मुझे ये पता नही। पर रात मे बस एक-दो स्टाफ के लोग हैं और गेट पर एक गार्ड।" प्रस्तुतकर्ता मैत्री।
"वेल डन,जान!",जब्बार ने टेबल के नीचे उसकी जाँघ पे हाथ से दबाया।"अब बस कल्लन का इंतेज़ार है। चलो,कल तक वो भी आ जाएगा।"
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बने रहिये............


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