24-03-2026, 01:52 PM
मेनका हैरत से उन्हे देखने लगी। वो पहली बार किसी मर्द को इस तरह से अपने लंड से खेलते देख रही थी। उसकी निगाहे अपने ससुर के लंड से चिपक गयी। इस लंड की तो वो दीवानी हो गयी थी। उसने राजासाहब को यूही तड़पाने के लिए शर्त दी थी पर हक़ीक़त मे वो भी हर वक़्त बस उनसे लिपट कर उनके लंड को अपने हाथों मे,अपने मुँह मे या अपनी चूत मे महसूस करना चाहती थी।
उसका हाथ अपने आप अपनी चूत पर चला गया था और उसे सहलाने लगा था। राजासाहब अपना लंड हिलाए चले जा रहे थे और मेनका की चूत गीली हुए जा रही थी। वो मस्ती मे आ रही थी और उसे अब कोई शर्त याद नही थी। उसने अपने हाथों से बिकिनी की डोरिया खोल दी और उसे पूल के पानी मे गिर जाने दिया।
राजासाहब की चाल काम कर गयी थी। वो भी पूल मे उतर गये और उसे बाहों मे भर उसे चूमने लगे। मेनका ने अपने हाथ मे उनका लंड पकड़ लिया और उनकी किस का जवाब देने लगी। राजासाहब ने उसकी गांड को दबाना चालू कर दिया तो मेनका हंसते हुए छटक कर उनसे दूर हो गयी और पानी मे तैरने लगी। राजासाहब भी उसके पीछे हो लिए और थोड़ी ही देर मे उसे पकड़ लिया।
पीछे से पकड़ के वो उस से चिपक गये और अपना लंड उसकी गांड की दरार मे अटका दिया। फिर तैरते हुए उसे कम गहराई वाली जगह लाके पूल की दीवार से लगा के पीछे से लंड चूत मे डालने लगे।
मेनका पलट गयी और उनके गले से लग गयी। अब उसकी चूत उसके ससुर के लंड के सामने थी उसने अपनी टाँगे फैला कर अपने हाथ से उनका लंड अपनी चूत मे डाला और फिर टाँगे उनकी कमर पर कस दी। दोनो के पेट के नीचे के हिस्से पानी मे थे। राजासाहब इसी तरह अपनी बहू की चूत चोदने लगे। मेनका उनसे चिपक कर मज़े के समंदर मे गोते लगाने लगी। अपने ससुर की चुदाई से ना जाने वो कितनी बार झड़ी उसे बाद मे याद भी नही था। बस इतना याद था कि उसकी चूत मे उसके ससुर का गरम वीर्या गिरा था और उसके बाद वो वैसे ही चूत मे लंड डाले उसे उठाए घर के अंदर आ गये थे और वो थक कर उनकी बाहों मे सो गयी थी।
मेनका की नींद खुली तो उसने देखा कि वो ड्रॉयिंग रूम के मखमली ईरानी गाळीचे पे लेटी थी,बगल मे उसके ससुर लेते थे और अपने ख़यालों मे खोए थे। घड़ी देखी तो 4 बज रहे थे, तो वो पिछले 4-5 घंटो से सो रही थी,और सोती भी क्यू ना,कल पूरी रात चुदाने के बाद राजासाहब ने उसे सुबह 3:30 बजे छोड़ा था। उसने करवट लेके उनके सीने पे सर रख दिया और वाहा पर के बालों से खेलने लगी,"क्या सोच रहे हो?"
"कुछ नही।",राजासाहब उसके सर पे हाथ फेरने लगे। मैत्री की पेशकश
"ऐसी क्या बात है जो तुम मुझे बता नही रहे? उस दिन भी फोन आया और तुम भागते हुए शहर चले गये। आख़िर क्या मामला है,मैं जानना चाहती हू।",मेनका उनके सीने पे कोहनी रख उनके चेहरे को देख रही थी।
"बात तुम्हे पसंद नही आएगी।"
"मैं फिर भी सुनना चाहती हू।"
"तो सुनो मैं विश्वा के बारे मे सोच रहा था।"
मेनका मुँह घुमा कर दूसरी तरफ देखने लगी।
"देखा,मैने कहा था ना! हो गयी ना अपसेट।" उ उसके गालों को सहलाने लगे।
"फिर भी बताओ शहर शहर क्यू गये थे?"
"तो सुनो।" राजासाहब ने करवट ली तो मेनका भी करवट लेकर लेट गयी। अब दोनो एक दूसरे को देखते हुए करवट से लेते थे,"ये विश्वा की अपनी कमज़ोरी है कि वो इस बुरी लत का शिकार हुआ पर आख़िर वो कौन शख्स था जो उसे ड्रग्स देता था। मैं यही जानने की कोशिश कर रहा हू।" फिर उन्होने उसे दुष्यंत वर्मा और उनके इन्वेस्टिगेशन के बारे मे बताया।
उन्होने उसकी बाई जाँघ खींच कर अपनी दाई जाँघ पर चढ़ा दी और अपनी दाई टांग उसकी टांगो के बीच ऐसे डाल दी की लंड चूत से आ सटा। अपनी बाई हाथ उसकी गर्दन के नीचे दल उसी हाथ से उसके कंधे को सहलाने लगे और डाए हाथ से उसकी चूत को। मेनका ने अपना बाया हाथ उनकी गांड पे रख दिया और दया नीचे ले जाकर उनके लंड और अंडो को रगड़ने लगी।
"आख़िर ये जब्बार आपसे इतनी नफ़रत क्यू करता है?"
"इसका जवाब तो हम नही जानते, पहले तो सोचते थे कि वो पैसो के लिए ऐसा कर रहा है पर अब लगता है कि दुश्मनी की वजह कुछ और है। पर हमे समझ नही आता कि क्या? हम तो उसे जानते तक नही थे जब उसने हमारी मिल्स मे हंगामा करने की कोशिश की थी।"अब तक लंड तन चुका था और चूत भी गीली हो गयी थी। उन्होने अपनी बहू को लिटाया और एक बार फिर उस पर सवार हो उसकी चिकनी चूत चोदने लगे।
-------------------------------------------------------------------------------
क्रमश.......
उसका हाथ अपने आप अपनी चूत पर चला गया था और उसे सहलाने लगा था। राजासाहब अपना लंड हिलाए चले जा रहे थे और मेनका की चूत गीली हुए जा रही थी। वो मस्ती मे आ रही थी और उसे अब कोई शर्त याद नही थी। उसने अपने हाथों से बिकिनी की डोरिया खोल दी और उसे पूल के पानी मे गिर जाने दिया।
राजासाहब की चाल काम कर गयी थी। वो भी पूल मे उतर गये और उसे बाहों मे भर उसे चूमने लगे। मेनका ने अपने हाथ मे उनका लंड पकड़ लिया और उनकी किस का जवाब देने लगी। राजासाहब ने उसकी गांड को दबाना चालू कर दिया तो मेनका हंसते हुए छटक कर उनसे दूर हो गयी और पानी मे तैरने लगी। राजासाहब भी उसके पीछे हो लिए और थोड़ी ही देर मे उसे पकड़ लिया।
पीछे से पकड़ के वो उस से चिपक गये और अपना लंड उसकी गांड की दरार मे अटका दिया। फिर तैरते हुए उसे कम गहराई वाली जगह लाके पूल की दीवार से लगा के पीछे से लंड चूत मे डालने लगे।
मेनका पलट गयी और उनके गले से लग गयी। अब उसकी चूत उसके ससुर के लंड के सामने थी उसने अपनी टाँगे फैला कर अपने हाथ से उनका लंड अपनी चूत मे डाला और फिर टाँगे उनकी कमर पर कस दी। दोनो के पेट के नीचे के हिस्से पानी मे थे। राजासाहब इसी तरह अपनी बहू की चूत चोदने लगे। मेनका उनसे चिपक कर मज़े के समंदर मे गोते लगाने लगी। अपने ससुर की चुदाई से ना जाने वो कितनी बार झड़ी उसे बाद मे याद भी नही था। बस इतना याद था कि उसकी चूत मे उसके ससुर का गरम वीर्या गिरा था और उसके बाद वो वैसे ही चूत मे लंड डाले उसे उठाए घर के अंदर आ गये थे और वो थक कर उनकी बाहों मे सो गयी थी।
मेनका की नींद खुली तो उसने देखा कि वो ड्रॉयिंग रूम के मखमली ईरानी गाळीचे पे लेटी थी,बगल मे उसके ससुर लेते थे और अपने ख़यालों मे खोए थे। घड़ी देखी तो 4 बज रहे थे, तो वो पिछले 4-5 घंटो से सो रही थी,और सोती भी क्यू ना,कल पूरी रात चुदाने के बाद राजासाहब ने उसे सुबह 3:30 बजे छोड़ा था। उसने करवट लेके उनके सीने पे सर रख दिया और वाहा पर के बालों से खेलने लगी,"क्या सोच रहे हो?"
"कुछ नही।",राजासाहब उसके सर पे हाथ फेरने लगे। मैत्री की पेशकश
"ऐसी क्या बात है जो तुम मुझे बता नही रहे? उस दिन भी फोन आया और तुम भागते हुए शहर चले गये। आख़िर क्या मामला है,मैं जानना चाहती हू।",मेनका उनके सीने पे कोहनी रख उनके चेहरे को देख रही थी।
"बात तुम्हे पसंद नही आएगी।"
"मैं फिर भी सुनना चाहती हू।"
"तो सुनो मैं विश्वा के बारे मे सोच रहा था।"
मेनका मुँह घुमा कर दूसरी तरफ देखने लगी।
"देखा,मैने कहा था ना! हो गयी ना अपसेट।" उ उसके गालों को सहलाने लगे।
"फिर भी बताओ शहर शहर क्यू गये थे?"
"तो सुनो।" राजासाहब ने करवट ली तो मेनका भी करवट लेकर लेट गयी। अब दोनो एक दूसरे को देखते हुए करवट से लेते थे,"ये विश्वा की अपनी कमज़ोरी है कि वो इस बुरी लत का शिकार हुआ पर आख़िर वो कौन शख्स था जो उसे ड्रग्स देता था। मैं यही जानने की कोशिश कर रहा हू।" फिर उन्होने उसे दुष्यंत वर्मा और उनके इन्वेस्टिगेशन के बारे मे बताया।
उन्होने उसकी बाई जाँघ खींच कर अपनी दाई जाँघ पर चढ़ा दी और अपनी दाई टांग उसकी टांगो के बीच ऐसे डाल दी की लंड चूत से आ सटा। अपनी बाई हाथ उसकी गर्दन के नीचे दल उसी हाथ से उसके कंधे को सहलाने लगे और डाए हाथ से उसकी चूत को। मेनका ने अपना बाया हाथ उनकी गांड पे रख दिया और दया नीचे ले जाकर उनके लंड और अंडो को रगड़ने लगी।
"आख़िर ये जब्बार आपसे इतनी नफ़रत क्यू करता है?"
"इसका जवाब तो हम नही जानते, पहले तो सोचते थे कि वो पैसो के लिए ऐसा कर रहा है पर अब लगता है कि दुश्मनी की वजह कुछ और है। पर हमे समझ नही आता कि क्या? हम तो उसे जानते तक नही थे जब उसने हमारी मिल्स मे हंगामा करने की कोशिश की थी।"अब तक लंड तन चुका था और चूत भी गीली हो गयी थी। उन्होने अपनी बहू को लिटाया और एक बार फिर उस पर सवार हो उसकी चिकनी चूत चोदने लगे।
-------------------------------------------------------------------------------
क्रमश.......


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)