22-03-2026, 03:17 PM
"नही,हमारा है।"उनका इशारा मेनका और अपनी तरफ था। मेनका ने नीचे देखा तो लंड झड़ने के बाद सिकुड़ने के बावजूद उसकी चूत मे ऐसे पड़ा था जैसे की अभी भी खड़ा हो। उसने अपनी चूत को हल्के से हिलाना शुरू किया।
"ये उन्ही प्रॉपर्टीस मे से एक है जिनके पेपर्स स्टडी मे हैं।"
"तुम तो ये सब दान करने वाले हो ना।"
"हा,बिल्कुल। पर सोचते हैं कि इस फार्म हाउस को अपने नाम कर ले और इसे अपने प्यार का आशियाना बना ले। क्या कहती हो?"
जवाब मे मेनका ने मुस्करा कर उनके होठ चूम लिए। उसकी चूत की हरकतों से राजासाहब का लंड फिर से गरम हो गया। वो वैसे ही उसकी चूत मे लंड डाले हुए खड़े हो गये और फार्महाउस के बेडरूम की तरफ बढ़ गये।
बेडरूम मे दाखिल होते ही मेनका चौंक गयी। पूरा कमरा जैसे सुहागरात के लिए सज़ा हुआ था। कमरे मे चारो तरफ फूल ही फूल भरे थे और बीचोबीच रखे बड़े से पलंग पर लाल गुलाब की पंखुड़िया बिखरी हुई थी।
उसने राजासाहब की तरफ सवालिया नज़रो से देखा।,"हमने केर टेकर को कहा कि हमारा कोई जान-पहचान वाला अपनी नयी दुल्हन को लेकर यहा आएगा और एक रात ठहरेगा तो उनके लिए उसने ये सजावट की और इसी बहाने हमने उसे छुट्टी भी दे दी कि वो जोड़ा नही चाहता कि कोई उन्हे डिस्टर्ब करे।"
मेनका को लिए दिए राजासाहब बिस्तर पर लेट गये और लगे फिर से उसे चोदने लगे। थोड़ी देर तक मेनका उनके नीचे पड़ी चुदती रही,फिर उसने उन्हे पकड़े हुए करवट ले उन्हे अपने नीचे किया और उपर से कमर हिला-हिला कर चोदने लगी। उसकी भारी चूचिया उसके ससुर के बालों भरे सीने पे रगड़ खा रही थी और होठ उनके होठों से सटे थे।
थोड़ी देर दोनो ऐसे ही चुदाई करते रहे कि फिर राजासाहब उसे पलट कर उस पर सवार हो गये और उसे चोदने लगे। दोनो की इस उठा-पटक से गुलाब की पंखुड़ीयान मसल रही थी और कमरे मे मदहोश करने वाली खुश्बू फैला रही थी। मेनका फिर से हवा मे उड़ रही थी। उसने अपनी टांगे अपने ससुर की कमर पे कस दी और नीचे से झटके मारने लगी।राजासाहब ने अपना लंड पूरा बाहर निकाला और फिर एक ही झटके मे जड़ तक अंदर डाल दिया।
"ऊओ...ऊव्वववव...!",मेनका चिल्लाई। राजासाहब ने फिर से यही हरकत दुहराते हुए उसे और ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया। मेनका अब बिल्कुल आपे से बाहर हो गयी। उस ने अपने नाख़ून अपने ससुर की गांड मे गड़ा दिए और उसकी चूत पानी छोड़ने लगी। नाखूनओ की चुभन ने राजासाहब की कमर के हिलाने को और तेज़ कर दिया और वो एक बार फिर अपनी बहू की चूत के अंदर अपना पानी छोड़ने लगे।
क्रमशः..........
"ये उन्ही प्रॉपर्टीस मे से एक है जिनके पेपर्स स्टडी मे हैं।"
"तुम तो ये सब दान करने वाले हो ना।"
"हा,बिल्कुल। पर सोचते हैं कि इस फार्म हाउस को अपने नाम कर ले और इसे अपने प्यार का आशियाना बना ले। क्या कहती हो?"
जवाब मे मेनका ने मुस्करा कर उनके होठ चूम लिए। उसकी चूत की हरकतों से राजासाहब का लंड फिर से गरम हो गया। वो वैसे ही उसकी चूत मे लंड डाले हुए खड़े हो गये और फार्महाउस के बेडरूम की तरफ बढ़ गये।
बेडरूम मे दाखिल होते ही मेनका चौंक गयी। पूरा कमरा जैसे सुहागरात के लिए सज़ा हुआ था। कमरे मे चारो तरफ फूल ही फूल भरे थे और बीचोबीच रखे बड़े से पलंग पर लाल गुलाब की पंखुड़िया बिखरी हुई थी।
उसने राजासाहब की तरफ सवालिया नज़रो से देखा।,"हमने केर टेकर को कहा कि हमारा कोई जान-पहचान वाला अपनी नयी दुल्हन को लेकर यहा आएगा और एक रात ठहरेगा तो उनके लिए उसने ये सजावट की और इसी बहाने हमने उसे छुट्टी भी दे दी कि वो जोड़ा नही चाहता कि कोई उन्हे डिस्टर्ब करे।"
मेनका को लिए दिए राजासाहब बिस्तर पर लेट गये और लगे फिर से उसे चोदने लगे। थोड़ी देर तक मेनका उनके नीचे पड़ी चुदती रही,फिर उसने उन्हे पकड़े हुए करवट ले उन्हे अपने नीचे किया और उपर से कमर हिला-हिला कर चोदने लगी। उसकी भारी चूचिया उसके ससुर के बालों भरे सीने पे रगड़ खा रही थी और होठ उनके होठों से सटे थे।
थोड़ी देर दोनो ऐसे ही चुदाई करते रहे कि फिर राजासाहब उसे पलट कर उस पर सवार हो गये और उसे चोदने लगे। दोनो की इस उठा-पटक से गुलाब की पंखुड़ीयान मसल रही थी और कमरे मे मदहोश करने वाली खुश्बू फैला रही थी। मेनका फिर से हवा मे उड़ रही थी। उसने अपनी टांगे अपने ससुर की कमर पे कस दी और नीचे से झटके मारने लगी।राजासाहब ने अपना लंड पूरा बाहर निकाला और फिर एक ही झटके मे जड़ तक अंदर डाल दिया।
"ऊओ...ऊव्वववव...!",मेनका चिल्लाई। राजासाहब ने फिर से यही हरकत दुहराते हुए उसे और ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया। मेनका अब बिल्कुल आपे से बाहर हो गयी। उस ने अपने नाख़ून अपने ससुर की गांड मे गड़ा दिए और उसकी चूत पानी छोड़ने लगी। नाखूनओ की चुभन ने राजासाहब की कमर के हिलाने को और तेज़ कर दिया और वो एक बार फिर अपनी बहू की चूत के अंदर अपना पानी छोड़ने लगे।
क्रमशः..........


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)