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Adultery Compromise...
#82
निर्देश पालन

और हुआ भी वही...

“तो आशा, मुझे ‘फ़्री’ टाइप रहने वाली लेडीज बहुत पसंद है और फ़िलहाल तुम्हें देख कर ऐसा लग रहा है मानो तुम बहुत ‘ओवर- बर्डन’ हो अभी... बोझ बहुत ज़्यादा है. डू वन थिंग; रिमूव योर पल्लू...!!” वासनायुक्त अपना पहला ही आदेश खतरनाक ढंग से दिया रणधीर बाबू ने.

आशा चौंक उठी,

अविश्वास से आँखें बड़ी-बड़ी हो उठी,

मानो उसने भी पहला आदेश या यूँ समझें की ‘इंटरव्यू’ का पहला ही निर्देश कुछ ऐसा होने की 'आशा' नहीं की थी

प्रतिरोध स्वरुप कुछ कहने हेतु होंठ खोला उसने, पर कुछ याद आते ही तुरंत होंठों को बंद भी कर लिया.

रणधीर बाबू मुस्कराए. सुनहरे चश्मे से झाँकती उनकी आँखें किसी वहशी दरिंदे के माफिक चमकने लगीं.

गंभीर स्वर में बोले,

“आई एम सीरियसली सीरियस, आशा. अपना पल्लू हटाओ.”

अत्यंत स्पष्ट स्वर में स्पष्ट निर्देश आया रणधीर बाबू की तरफ़ से...


आशा हिचकी, आँसू रोकी, थूक का एक बड़ा गोला गटकी और धीरे से हाथ उठा कर बाएँ कँधे पर पिन के पास ले गई --- पिन खोलती कि तभी दूसरा आदेश आया,

“मेरी तरफ देखते हुए आशा. आँखों में आँखें डालकर.”

बड़ा ही सख्त कमीना जान पड़ा ये आदमी आशा को. घोर अपमानित-सा बोध करती हुई वह धीरे से आँखें उठा कर रणधीर बाबू की ओर देखी --- सीधे उसकी आँखों में --- बिना पलकें झपकाए --- फ़िर आहिस्ते से पिन खोल कर सामने टेबल पर रखी. कँधे पर ही पल्लू को ज़रा सा सरकाई और दोनों हाथ चेयर के आर्मरेस्ट पर रख दी. दो ही सेकंड में पल्लू सरसराता हुआ पूरा सरक कर आशा की गोद में आ गिरा. रणधीर बाबू के आँखों में लगातार देखे जा रही आशा उनके आँखों की चुभन अपने जिस्म की ऊपरी हिस्से पर साफ़ महसूस करने लगी और परिणामस्वरुप एक तेज़ सिहरन दौड़ गई उसके पूरे शरीर में.

आशा भले ही रणधीर बाबू के आँखों में बिन पलकें झपकाए देख रही थी पर ठरकी बुड्ढे की नज़र आशा के पिन खोलते ही उसके सुडौल उभरी छाती पर जा चिपके थे.

नीले ब्लाउज में गहरे गले से झाँकती बड़ी चूचियों की ऊपरी गोलाईयाँ और दोनों के आपस में अच्छे से सटे होने से बनने वाली बीच की दरार; अर्थात क्लीवेज, बरबस ही रणधीर बाबू की आँखों की दिशा को अपनी ओर बदलने पर मजबूर कर रही थीं. आशा की चूचियाँ और विशेषतः सामने नज़र आती उसकी चार इंच की क्लीवेज उसके लिए ऐसा नारीत्व वाला वरदान था जोकि उसे सम्पूर्ण नारी जाति की देवी बना रहे थे और इस वक़्त एक हवसी ठरकी बुड्ढे रणधीर बाबू का शिकार.

रणधीर बाबू अधीर होते हुए अपने होंठों पर जीभ फिराया और ख़ुद को चेयर पर एडजस्ट करते हुए अपनी दृष्टि को और अधिक केन्द्रित किया आशा के वक्षों पर.

और जो दिखा उसे उससे और भी अधिक मनचला और उत्तेजित हो उठे वो.

आशा के ब्लाउज के ऊपर से ब्रा की पतली रेखा दोनों कन्धों पर से होते हुए नीचे उसके छाती और छाती से दोनों चूचियों को दृढ़ता से ऊपर की ओर उठाकर पकड़े; ब्रा कप में बदलते हुए साफ-साफ नज़र आ रहे हैं ऐसा दृश्य तो शायद किसी अस्सी बरस के बूढ़े के बंद होती दिल और मुरझाये लंड में जान फूँक दे --- फिर रणधीर जैसे पैंसठ वर्षीय हवसी ठरकी की बिसात ही क्या है ??


रणधीर बाबू ने गौर किया --- नीले ब्लाउज में गोरी चूचियों की गोलाईयाँ जितनी फ़ब रही हैं --- उन दोनों गोलाईयों के बीच की दरार --- ऊपर में थोड़ी कत्थे रंग की और फिर जैसे - जैसे नीचे, ब्लाउज के पहले हुक के पीछे छिपने से पहले, वह शानदार क्लीवेज की लाइन – वह दरार; काली होती चली गई --- ज़रा ख़ुद ही कल्पना कर सकते हैं पाठकगण – एक चालीस वर्षीया सुंदर गोरी महिला --- उनके सामने अपनी नीली साड़ी की पल्लू को गोद में गिराए; गहरे गले का ब्लाउज पहने बैठी है --- ब्लाउज के ऊपर से ब्रा स्ट्रेप की दो पतली धारियाँ कंधे पर से होते हुए --- सीने के पास चूचियों को सख्ती से पकड़ कर इस तरह से उठाए हुए हैं कि क्लीवेज नार्मल से भी दो इंच और बन जाए तो??!! रणधीर बाबू की भी हालत कुछ - कुछ ऐसी ही बनी हुई थी. लाख चाहते हुए भी अपनी नज़रें आशा की दो गोल गोरी चूचियों और उनके मध्य के लंबी काली दरार पर से हटा ही नहीं पा रहे हैं. स्तनों का आकर्षण ही कुछ ऐसा होता है --- करे तो क्या करे --- बेचारा बुढ़ऊ!

उत्तेजना की अधिकता में रणधीर बाबू के मुख से बरबस ही निकल गया,

“पहला हुक खोलो आशा.”

“ऊंह!”

आशा चिहुंकी. निर्देश का आशय समझने के लिए रणधीर बाबू की ओर देखी. पर रणधीर बाबू की आँखें तो अभी भी उस गहरी घाटी में विचरण कर रही थीं. उनकी नज़रों को फॉलो करते हुए आशा अपने पल्लू विहीन ब्लाउज की ओर नज़र डाली और ऐसा करते ही वह अपने नए नवेले बॉस के निर्देश का आशय समझ गई. थोड़ी ठिठकी, पल भर को सही-गलत, पाप-पुण्य का विचार उसके दिल – ओ – दिमाग में आया भी और आ कर क्षण भर में चला भी गया. आखिर निर्देश का पालन तो करना ही है --- रणधीर बाबू इज़ हर बॉस एंड बॉस इज़ ऑलवेज़ राईट !

नज़रें नीची किए आहिस्ते से ब्लाउज के ऊपरी दोनों सिरों को पकड़ते हुए पहला हुक खोल दी...

अभी खोली ही थी कि दूसरा निर्देश तुरंत आया,

‘थोड़ा फैलाओ.’

रणधीर बाबू की ओर देखे बिना ही आशा अब थोड़ा मुक्त हुए ब्लाउज के ऊपरी दोनों दोनों सिरों को प्रथम हुक समेत ज़रा सा मोड़ते हुए अंदर कर दी --- मतलब अपने बूब्स की ओर अंदर कर दी दोनों ऊपरी उन्मुक्त सिरों को --- इससे ब्लाउज की नेकलाइन और गहरी हो गई और क्लीवेज का दर्शनीय हिस्सा थोड़ा और बढ़ गया बिना कोई अतिरिक्त या विशेष जतन किए.

“थोड़ा आगे की ओर करो” अगला निर्देश !

आशा समझी नहीं --- सवालिया दृष्टि से रणधीर की ओर देखी.

रणधीर बाबू ने हथेलियों के इशारे से थोड़ा आगे होने को कहा.

इस बार चूक नहीं हुई आशा से.

बहुत हल्का सा झुककर अपने सुपुष्ट को उभारों को तानकर सामने की ओर बढ़ा दी !!  आहह...!!  स्वर्ग !! यही एक शब्द कौंधा रणधीर बाबू के दिमाग में. सचमुच, अप्रतिम सुडौलता लिए हुए परम आकर्षणमय लग रहे हैं दोनों — आशा और उसके दो उभार!

कुछ मिनटों तक घूरते रहने के बाद रणधीर बाबू ने अपना आईफ़ोन निकाला और आशा को सिर एक तरफ़ झुका कर आँखें ज़रा सा बंद करने को कहा ---- जैसे कि वो नशे में हो --- नशीली आँखें --- जैसा रणधीर बाबू चाहते थे बिल्कुल वैसा करते ही रणधीर बाबू ने फटाफट तीन-चार पिक्स खिंच लिए.

फ़िर आँखों को नार्मल रखने को बोल कर फ़िर से तीन - चार पिक्स लिए --- यह सोच कर कि अगर किसी दिन थोड़ी ऊँच-नीच हो जाए तो वह प्रमाण के तौर पर यह दिखा सके कि उन्होंने वो पिक्स आशा के पूरे होशो हवास और उसकी सहमति से ही लिए थे.

उन पिक्स में कमाल की कामुक औरत लग रही थी आशा. मानो हरेक अंग-प्रत्यंग से, रोम रोम से कामुकता टपक रही हो. बिल्कुल किसी काम देवी की भाँति और स्वर्गीय आनंद क्या होता है और उसका अर्थ क्या होता है यह तो उसके ठीक सामने की ओर तने हुए बूब्स और डीप क्लीवेज बता ही रहे हैं रणधीर बाबू को.

रणधीर बाबू के शैतानी खोपड़ी में अब एक और बात खेल गई कि स्वर्ग तो सामने देख लिया पर यदि स्वर्गलाभ नहीं लिया तो फ़िर क्या किया. अभी तक इतना खेल खेलने का परिश्रम तो व्यर्थ ही चला जाएगा.

एक दीर्घ श्वास लेकर रणधीर बाबू ने एक निर्णय और लिया --- कुछ और बोल्ड करने का --- सुस्त गति से वो बाद में भी खेल सकता है --- फिलहाल वक़्त है इस खेल का लेवल बढ़ाने का.

खड़े लंड को वैसे ही पैंट की ज़िप से बाहर निकला रख, रणधीर बाबू अपने उस आरामदायक विशेष रेवोल्विंग चेयर से उठे और चार ही कदमों में आशा के निकट पहुँच गए.

आशा धौंकनी की तरह बढ़ी हुई दिल की धड़कन पर नियंत्रण का बेहद असफ़ल प्रयास करते हुए तिरछी निगाहों से अपने दाईं ओर बिल्कुल पास आ कर उसकी कुर्सी से सट कर खड़े हुए रणधीर बाबू की ओर देखी. उनकी बढ़ी हुई पेट से ऊपर का हिस्सा तो नहीं देख सकी पर नज़र एकदम से उनके पैंट की ज़िप से बाहर बिल्कुल काले रंग के लंड की ओर गई; जो किसी स्टार्ट की हुई खटारे इंजन वाले किसी खटारे टेम्पो की छत पर रखे बांस की तरह हिल रहा था.


अग्र भाग के चमड़ी के मध्य से हल्का सा दिख रहा हल्की गुलाबी रंग का लंडमुंड धीरे धीरे बिल से बाहर आता किसी खतरनाक सांप की भाँति सामने आ रहा था --- आशा ने देखा, लंड के अग्र भाग की थोड़ी सी चमड़ी धीरे-धीरे पीछे की ओर जा रही है और हल्की गुलाबी रंग का प्रतीत होता मशरूम-नुमा लंडमुंड अत्यधिक रक्त प्रवाह के कारण लाल रंग अख्तियार करता जा रहा है. मशरूम नुमा भाग के टॉप पर बना हुआ चीरा बिल्कुल आशा के चेहरे के बहुत पास है एवं पसीने और मूत्र की एक अजीब मिली-जुली गंध उसकी नाक में समा रही है.

एक पुरुष के यौननांग को अपने इतने समीप पाकर आशा तो एकदम से सकपका गई --- बेचारी बिल्कुल किंकर्तव्यविमूढ़ सी हो कर रह गई और जब यह बात ध्यान आई कि जिसका यौननांग उसके इतने पास खड़ा है; वह उससे कहीं, कहीं अधिक उम्र के व्यक्ति का है तो शर्म से दुहरा कर लाल हो गई. तुरंत ही अपने चेहरे को दूसरी तरफ़ घूमा कर बोली,

“स... सर... यह क्या....?”

“ओह कम ऑन आशा, डोंट बिहेव लाइक अ सिली गर्ल... यू आर अ मैरिड वुमन. तुम्हें तो अच्छे से पता है न, कि यह क्या है ??”

चेहरे पर ऐसे भाव लिए और ऐसे टोन में बोले रणधीर बाबू मानो, परीक्षा केंद्र में किसी छात्रा ने एक जाना हुआ क्वेश्चन का मतलब पूछ ली हो और इससे इन्विजिलेटर को बहुत अफ़सोस हुआ है...

“न..न.. नो सर... म.. मेरा मतलब... आप ये क्या...क्या क...कर रहे ....हैं...?”

अति घबराहट के कारण सूखते अपने होंठों पर जीभ फ़िरा कर भिगाने की कोशिश करती आशा ने किसी तरह अपना सवाल पूरा की.

“ओह... यू मीन दिस?!!” अपने तने लंड को देखते हुए आशा की ओर देख कर रणधीर बाबू अपने हल्के पीले-सफ़ेद दांतों की चमक बिखेरते हुए बोले,

“म्मम्म.... आशा.... अब ऐसे सवाल करने और इस तरह से दूसरी ओर मुँह घुमा लेने तो काम नहीं चलेगा?? अब इस बेचारे का ध्यान तो तुम्हें ही रखना है --- कम ऑन --- टर्न दिस साइड --- लुक एट इट ---- इट्स डाईंग फॉर योर लव एंड डिवाइन अटेंशन.”

आशा फिर भी नहीं मुड़ी. रणधीर बाबू ने दो - तीन बार अच्छे से, नर्म लहजे में आशा को मानाने की कोशिश की --- पर फिर भी जब आशा अपेक्षाकृत उत्तर नहीं दी तो रणधीर बाबू का स्वर एकाएक ही बहुत हार्श हो गया.

“आशा !! आई एम नॉट आस्किंग यू टू डू दिस… एम टेलिंग यू, एम ऑर्डरिंग यू टू डू दिस !!”

रणधीर बाबू की आवाज़ में इस बार एक अलग ही धमक थी.

आशा सहम कर तुरंत ही अपना चेहरा दाईं ओर की --- और ऐसा करते ही उसकी नजर सीधे रणधीर बाबू के फनफनाते लंड पर पड़ी.

रणधीर बाबू बोले,

“गिव सम लव, आशा.”

आशा आँखें उठा कर रणधीर बाबू की ओर देखी --- सुनहरे फ्रेम के ब्राउन ग्लास के अंदर से झाँकते रणधीर बाबू की आँखें एक खास तरह से सिकुड़ कर एक अलग मतलब बयाँ कर रही है.

आशा के अंदर की बची - खुची प्रतिरोधक क्षमता भी हवा में फुर्रर हो गई. किस्मत का खेल समझ कर अब मन ही मन खुद को तन-मन से पूरी तरह रणधीर बाबू को समर्पित कर उनका मिस्ट्रेस बनने का दृढ़ निश्चय कर अपना दाहिना हाथ उठाई और काले, सख्त तने हुए लंड को अपने नर्म हाथों की नर्म उँगलियों की गिरफ़्त में ली और बहुत ही हिचकिचाहट से; बहुत धीरे - धीरे अपना हाथ आगे पीछे करने लगी...

और ऐसा करते ही, रणधीर बाबू सुख और आनंद की चरम सीमा पर पहुँच गए. आखिर उनकी ड्रीमगर्ल (यहाँ शायद ड्रीमलेडी कहना उचित होगा) ने उनके हथियार को अपने नर्म हाथों के गिरफ़्त में जो ले ली है. लंड के चमड़े पर हथेली के नर्म स्पर्श का अहसास ही उन्हें वो सुख दे रहा है जो शायद किसी कॉल गर्ल की अनुभवी चूत ने भी नहीं दी होगी.





जारी है.....

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Compromise  Running











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Compromise... - by The_Writer - 13-02-2026, 11:00 PM
RE: Compromise... - by The_Writer - 14-02-2026, 12:23 AM
RE: Compromise... - by rangeeladesi - 18-02-2026, 03:59 PM
RE: Compromise... - by The_Writer - 14-02-2026, 12:28 AM
RE: Compromise... - by Blackdick11 - 14-02-2026, 06:51 AM
RE: Compromise... - by The_Writer - 14-02-2026, 09:06 PM
RE: Compromise... - by The_Writer - 14-02-2026, 09:10 PM
RE: Compromise... - by Bakchod Londa - 15-02-2026, 04:46 AM
RE: Compromise... - by The_Writer - 15-02-2026, 04:26 PM
RE: Compromise... - by Blackdick11 - 15-02-2026, 11:17 AM
RE: Compromise... - by The_Writer - 15-02-2026, 04:29 PM
RE: Compromise... - by rangeeladesi - 18-02-2026, 04:03 PM
RE: Compromise... - by The_Writer - 17-02-2026, 10:57 AM
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RE: Compromise... - by The_Writer - 17-02-2026, 07:29 PM
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RE: Compromise... - by Blackdick11 - 18-02-2026, 06:50 AM
RE: Compromise... - by Loveakb18 - 18-02-2026, 08:38 AM
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RE: Compromise... - by The_Writer - 21-02-2026, 03:35 PM
RE: Compromise... - by rangeeladesi - 18-02-2026, 04:05 PM
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RE: Compromise... - by Blackdick11 - 19-02-2026, 03:14 PM
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RE: Compromise... - by Blackdick11 - 20-02-2026, 11:51 AM
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RE: Compromise... - by Loveakb18 - 21-02-2026, 05:26 PM
RE: Compromise... - by The_Writer - 24-02-2026, 09:59 PM
RE: Compromise... - by Blackdick11 - 22-02-2026, 04:02 AM
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RE: Compromise... - by Bakchod Londa - 22-02-2026, 11:22 AM
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RE: Compromise... - by Lovecraft - 23-02-2026, 10:49 AM
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RE: Compromise... - by rangeeladesi - 23-02-2026, 04:59 PM
RE: Compromise... - by Lovecraft - 24-02-2026, 01:06 PM
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RE: Compromise... - by Blackdick11 - 25-02-2026, 05:50 AM
RE: Compromise... - by The_Writer - 28-02-2026, 10:27 AM
RE: Compromise... - by Bakchod Londa - 25-02-2026, 10:12 AM
RE: Compromise... - by BHOG LO - 25-02-2026, 01:18 PM
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RE: Compromise... - by Bakchod Londa - 01-03-2026, 02:27 AM
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RE: Compromise... - by Blackdick11 - 01-03-2026, 06:03 PM
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RE: Compromise... - by Bakchod Londa - 05-03-2026, 09:41 AM
RE: Compromise... - by garamrohan - 05-03-2026, 03:30 PM
RE: Compromise... - by The_Writer - 06-03-2026, 09:00 PM
RE: Compromise... - by giffsmaster_pro - 06-03-2026, 12:47 AM
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RE: Compromise... - by The_Writer - 06-03-2026, 09:13 PM
RE: Compromise... - by The_Writer - 06-03-2026, 09:17 PM
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RE: Compromise... - by Loveakb18 - 06-03-2026, 10:31 PM
RE: Compromise... - by Lovecraft - 07-03-2026, 06:09 AM
RE: Compromise... - by The_Writer - 09-03-2026, 02:40 PM
RE: Compromise... - by Bakchod Londa - 07-03-2026, 02:23 PM
RE: Compromise... - by Blackdick11 - 08-03-2026, 12:07 PM
RE: Compromise... - by The_Writer - 09-03-2026, 02:43 PM
RE: Compromise... - by Blackdick11 - 09-03-2026, 03:06 PM
RE: Compromise... - by Blackdick11 - 16-03-2026, 12:29 PM
RE: Compromise... - by The_Writer - 19-03-2026, 11:43 AM
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RE: Compromise... - by Blackdick11 - 19-03-2026, 03:50 PM
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RE: Compromise... - by Bakchod Londa - 20-03-2026, 11:37 AM
RE: Compromise... - by Blackdick11 - 20-03-2026, 01:04 PM
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RE: Compromise... - by Bakchod Londa - 27-03-2026, 11:32 AM
RE: Compromise... - by The_Writer - 01-04-2026, 10:25 PM
RE: Compromise... - by The_Writer - 01-04-2026, 10:33 PM
RE: Compromise... - by Blackdick11 - 02-04-2026, 09:47 AM
RE: Compromise... - by Bakchod Londa - 02-04-2026, 02:40 PM
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RE: Compromise... - by The_Writer - 07-04-2026, 09:48 PM
RE: Compromise... - by Bakchod Londa - 11-04-2026, 08:09 AM



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