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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#77
राजू ने लंड अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया और कुछ ही धक्कों में रिशा को भी मजा आने लगा. रिशा कामुक सिसकारियां लेने लगीं- अह्ह इहह्ह उम्म … राजू तुम्हारा बहुत बड़ा है … तुम्हारे भइया का तो बस इसका आधा ही है.




राजू का लंड रिशा की बच्चेदानी तक तक पहुंच रहा था. मोटे लम्बे लंड से रिशा को काफी मजा आ रहा था और वो मजे ले लेकर राजू के लंड से चुदती रहीं. करीब 25 से 30 मिनट तक राजू चोदता रहा और वह भी चिल्ला चिल्ला कर चुदाई के मजे लेती रहीं.

रिशा …”बड़ा मजा आ रहा है राजा अह्ह्ह … कितना अन्दर तक पेल रहे हो राजू… आह मजा आ रहा … और जोर से पेलो … आंह और पेलो … आज मेरी चूत फाड़ दो!

कुछ देर बाद जब रिशा झड़ गईं तो राजू ने रिशा की चुत से लंड निकाला और उसे कपड़े से पौंछ कर उसे पोज बदलने को कहा. रिशा ने राजू की आँखों में में देखा, तो राजू ने उसको कुतिया बन जाने का इशारा किया.

रिशा पलंग से नीचे उतर कर कुतिया बन गईं.

अब राजू ने रिशा के पीछे आ कर रिशा की चूत में लंड घुसा दिया रिशा को कुतिया बनाकर चोदना चालू कर दिया . उसकी दोनों चुचिया पकड़ कर हचक हचक कर चोदा और रिशा को मस्त कर दिया.


कुछ देर बाद रिशा फिर से झड़ने लगीं लेकिन राजू अभी तक झड़ा नहीं था और अभी भी रिशा को उतने ही जोश से ठोक रहा था. रिशा की टांगें कांपने लगीं तो उसने राजू को अपने ऊपर आने को कहा.

राजू ने झट से रिशा को अपने नीचे लिया और लंड पेल दिया. ताबड तोड़ धक्को के साथ में राजू रिशा की चूत की धुनाई करने लगा। ऐसा जोश और जनून रिशा को पहले कभी महसूस नहीं हुआ था। वो भी कमर उठा कर राजू का साथ देने लगी रिशा ने कस कर राजू को पकड़ा और अपनी चूत ऊपर को उठा दी.

दस मिनट की धमाकेदार चुदाई के बाद राजू के लिंग में तनाव बढ़ने लगा।

राजू..." मेरा होने वाला है भाभी। अंदर ही निकल दूं क्या?

रिशा..नहीं नहीं राजू...मेरे मुँह के अंदर। मैं तेरा स्वाद चखना चाहती हूँ

राजू ने झटके से लंड चुत से निकाला और रिशा के मुंह में दे दिया..एक के बाद एक...आठ दस पिचकारियां रिशा के मुंह के अंदर। कुछ वीर्य तो रिशा के हलक के नीचे उत्तर गया और कुछ मुंह से बहने लगा. रिशा ने राजू की आंखों में देखते हुए सारा माल उंगली से चाट लिया।


दोनों बहुत देर तक ऐसे ही लेटे रहे और थोड़ी देर बाद रिशा ने लंड अपने मुँह में लेकर फिर से खड़ा कर दिया.

इस बार वो राजू के लंड पर अपनी चूत रख कर राजू के ऊपर उछलने लगीं.


इस तरह चुदाई का एक राउंड और शुरू हो गया. दुनिया से बेखबर दोनों एक दूजे की प्यास मिटाने में खो गए थे।



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RE: लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल... - by nitya.bansal3 - 20-03-2026, 01:05 PM



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