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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#76
ना जाने कितनी राते उसने या तो अंगुली से या मोमबत्ती को अपनी चूत में घुसा कर अपनी छटपटाहट कम की थी। पर चूत की प्यास तो लण्ड ही बुझा सकता है। जब से उसका राजू से सामना हुआ था वो अब बस उसके लंड से चुदने के ख्वाब देख रही थी!

रिशा ने अपनी साड़ी और ब्रा निकाल फ़ेंकी नीचे से भी पेन्टी उतार दी। आलमारी से उसने अपना डिल्डो निकाला और झट से चूत में घुसा दिया.. साथ साथ अपनी चूंचियाँ दबाती जाती और आहें भरने लगती…. बाहर बरसात का महौल हो रहा था। कमरे में उमस भी काफ़ी थी। पसीना छलक आया था। पांच सात मिनट तक वो नकली लंड चूत में पेलने के बाद रिशा का पानी निकल गया तो रिशा को कुछ आराम मिला.

रिशा ने अपने कपडे पहने और बाथरूम में जाकर अपना चेहरा धोया। इतने में बाहर दरवाजे पर घंटी बजी। बाहर राजू खड़ा था, आँखों में शरारत लिये।


रिशा.."अरे राजू इतनी जल्दी कैसे आ गये?"

राजू.. "भाभी बाहर बारिश का मौसम बन रहा था और मेरे को ठंडी भी लग रही थी.. "तुम्हारे हाथ की चाय का स्वाद चखने आया हूँ," उसने फुसफुसाया।

रिशा का चेहरा गुलाबी हो गया। रसोई में चाय की तैयारी शुरू हुई। इलायची और अदरक की खुशबू हवा में फैली। उसने चाय पकड़ते हुए रिशा की उंगलियों को छुआ। "भाभी ये चाय का जादू है या तुम्हारा?" उसकी आवाज में गर्मी थी। रिशा ने चाय की चुस्की लेते वक्त उसकी नजरों से नजरें मिलाईं। वो पास आया, उसने अपना हाथ रिशा की कमर पर रखा।


"भाभी सब कुछ भूल जाओ, आज सिर्फ हम," राजू ने कहा। रिशा की साँसें रुक गईं, पर उसने विरोध नहीं किया। चाय भाप छोड़ रही थी, मगर उनके बीच का तनाव गर्म था।

राजू करीब आया और उसने रिशा के बालों में उंगली फेरी। "भाभी तुम चाय से भी ज्यादा नशीली हो," रिशा ने शरमाते हुए उसकी बाँहों में सिर छिपाया और उसकी आँखों में डूब गई। चाय ठंडी हो गई, पर उनके बीच की गर्मी बढ़ती रही। दोनों के होंठ आपस में मिल गए और दोनों एक दूजे के होठों को जी भर के चूसने लगे.


राजू ने वही रसोई में खड़े खड़े ही रिशा को नंगा करना शुरू कर दिया और उसे सिर से लेकर पैरों तक चूमने लगा। रिशा मदहोश होने लगी..


रिशा..यहाँ नहीं राजू...मुझे कमरे में ले चल.

राजू ने झटके से रिशा को अपनी मजबूत बाहों में उठा लिया और बेडरूम की ओर बढ़ गया


कमरे में आकर राजू ने रिशा को सोफे पर गिरा दिया और उसके चुचे मसलने लगा. गर्दन पर किस करने लगा.

रिशा भी मदमस्त होने लगीं और जोर जोर से सांसें लेने लगीं. रिशा के बड़े बड़े टाइट चुचे देख कर राजू पागल ही हो गया. सरिता के मुकाबले रिशा के दूध एकदम टाईट थे और जरा भी नहीं ढलके थे. रिशा भी बड़ी अदा से राजू को अपनी चूचियों को हिला कर मदहोश कर रही थीं.



राजू ने भी देर नहीं की और झट से अपने होंठ आगे बढ़ा दिए. रिशा ने भी अपने एक चुची को राजू के लिए आगे कर दिया.राजू ने एक निप्पल को अपने मुँह में भर लिया और खींचते हुए चूसने लगा. रिशा भी मस्त होने लगीं और मादक सिसकारियां लेने लगीं.

राजू ने उसकी आंखों में देखा तो रिशा ने राजू के सर को अपने हाथ से पकड़ा और अपना दूध पिलाने लगीं.



एक मिनट बाद रिशा बोलीं- एक से ही मजा ले लेगा क्या? राजू ने झट से दूसरे दूध के निप्पल को अपने मुँह में भर लिया.


अब रिशा अपने दोनों मम्मों को बारी बारी से चुसवाने लगीं और मादक आवाजें लेती हुई राजू को अपने मम्मों का रस पिलाने लगीं.


चुचियो का अच्छे से निचोडने और रसपान करने के बाद राजू खड़ा हुआ! राजू का कड़कता हुआ लण्ड सीधा खड़ा तन्ना रहा था। रिशा शरम के मारे सिमटी जा रही रही थी।उसका लण्ड रिशा के मुख के करीब था। राजू ने और पास कर लण्ड रिशा के मुँह के पास सटा दिया। रिशा ने ऊपर देखा…. बाहर बिजली कड़की….शायद बरसात तेज हो चुकी थी।

“भाभी….! ले लो लण्ड मुँह में ले लो….! चूस लो….! अपना मन भर लो…. !” उसने अपना लण्ड रिशा के चेहरे पर बेशर्मी से रगड़ दिया। उसकी लण्ड की टोपी में से दो बूंद चिकनाई की छलक उठी थी। रिशा बैचेन हो उठी। उसने उसके लण्ड की चमड़ी उपर की और लाल सुपाड़ा बाहर निकाल लिया। और अपने मुँह में रख लिया।


उसका टमाटर सा मोटा सुपाड़ा प्यार से घुमा घुमा कर चुसने लगी। मन की भड़ास निकालने लगी। इतना जवान लण्ड…. कड़क….बेहद तन्नाया हुआ…. राजू सिसकारियाँ भरने लगा।

अपने लंड को चुसवाने के बाद राजू ने रिशा को पकड़ कर खड़ा कर दिया. रिशा पूरी नंगी राजू के सामने खड़ी हो गईं.



राजू की नजरें रिशा की चुत पर ही टिकी थी.
रिशा ने अपने दोनों टांगें चिपका चुत को छिपा लिया!

राजू ने रिशा को धक्का दिया और पलंग पर लिटा दिया.
अगले ही पल राजू ने अपने सारे कपड़े उतार दिए और रिशा की तरफ वासना से देखने लगा.

राजू को नंगा देख कर रिशा पलंग पर पीछे को खिसक कर लेट गईं और अपनी टांगें फैला दीं.

राजू ने बिस्तर के नीचे से ही चुत पर अपनी जीभ लगा दी और चूत में जीभ डाल कर चाटने लगा.



रिशा की चुदास भरी सिसकारियां और तेज हो गईं.
राजू ने रिशा की दोनों टांगों को कुछ ज्यादा फैलाया और खुद बिस्तर के किनारे बैठ कर चुत पर झुक गया और चुत को तेज तेज चाटने लगा.

रिशा अपने दोनों फैलाए हुए पैरों को घुटनों से मोड़ कर राजू के सर को अपनी चुत पर दबाने लगीं.

राजू चुत के दाने को अपने होंठों से पकड़ कर खींचते हुए चुत चटाई का मजा लेने लगा.रिशा भी मादक आवाजों के साथ मजे लेने लगीं- उईई अह्ह उह्ह म्ह्ह …


कुछ देर बाद रिशा का पानी छूट गया.
राजू ने एक बूंद रस भी बर्बाद नहीं होने दिया और अपनी जीभ से चुत को अन्दर तक चाटने लगा.


रिशा उसके बाल पकड़ कर सिसकारियां लेती रहीं.

पूरा रस चाट लेने के बाद भी राजू चुत चाटता रहा.
रिशा उसको हटने को बोल रही थीं लेकिन राजू हटा ही नहीं और चाटने में लगा रहा.

इससे थोड़ी देर बाद रिशा फिर से गर्म हो गईं.

अब राजू ने रिशा की दोनों टांगें अपने दोनों कंधों पर रख चूत के होठों पर अपना लम्बा मोटा लंड रख दिया.


राजू चुत की फांकों में लंड का सुपारा घिसने लगा और चुत को लंड लेने के लिए ललचाने लगा.

रिशा की बेताबी बढ़ती जा रही थी और वो अपनी गांड ऊपर को उठा कर लंड चुत में लेने की कोशिश कर रही थीं.
राजू दबाव देते हुए लंड चुत में घुसेड़ने लगा.

अभी लंड का सुपाड़ा भर ही रिशा की चुत में घुसा था कि वह लंड की मोटाई से चीख पड़ीं. उसकी चुत चिरने सी लगी थी.

राजू ने अपने होंठ बढ़ाए और रिशा का मुँह बंद कर दिया.


नीचे राजू का सुपाड़ा चुत फाड़ने की तैयारी में गुर्रा रहा था.उसी पल राजू ने एक तेज शॉट मारा और अपना आधा

लंड चूत में डाल दिया. रिशा छटपटा उठीं और उसकी आंखों से आंसू आ गए.

राजू उसी पल रुक गया और उसके शांत होने का इन्तजार करने लगा. रिशा की कसमसाहट कम होने लगी थी.


लंड ने चुत को अपने मुताबिक पसार लिया था. राजू ने मौका देख फिर लंड को बाहर खींचा और इस बार एक तेज धक्के के साथ अपना पूरा लंड रिशा की चूत में घुसा दिया. रिशा की चीख पूरे कमरे में गूंज गई..ओह माँ मर गई। फाड़ डाली मेरी चूत इस कमीने ने। लेकिन राजू रुका नहीं। रिशा की चीखो कि परवाह किये बिना वो जोर जोर से लंड पेलता रहा ! कुछ समय बाद चूत ने पानी छोड़ कर चालू कर दिया जिस से चूत में चिकनाहट बढ़ गई और रिशा का दर्द कम हो गया l
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RE: लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल... - by nitya.bansal3 - 20-03-2026, 01:02 PM



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