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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#75
अब आगे….
किचन में पहुंच कर रिशा घर के काम में व्यस्त हो गई। उधर राजू भी लाला जी बताए कामो को निपटाने निकल पड़ा। रह रह कर रिशा का ध्यान सुबह राजू के संग बिताये उन पलो की तरफ जा रहा था। काम वाली बाई ने एक दो बार रिशा से पूछा भी कि दीदी क्या आपकी तबीयत ठीक है...आप कुछ खोई खोई सी लग रही हो। रिशा बस मुस्कुरा के रह गई! रिशा का दिल धड़क रहा था कि कहीं बाई को कुछ शक न हो जाए! कुछ समय बाद बाई काम निपटा के निकल गई तो रिशा ने खाना बनाने की सोची। फ्रिज में सब्जी लेने गई तो हाथ में एक लंबा मोटा बैंगन आ गया।

[Image: IMG-6884.jpg]








बैंगन हाथ में पकड़ते ही रिशा को राजू के लंड का ध्यान आ गया... उफ्फ्फ राजू का भी इतना ही लंबा और मोटा औज़ार था.. और कड़क तो इस से कहीं ज़्यादा। और सुबह जब उसकी मुट्ठी मारी थी तो कितना ज्यादा माल निकला था ये सब सोचते हुए रिशा की चूत फिर से गीली हो गई। उसकी चूत में चींटियाँ रेगने लगी. सब्जी को वही छोड़ रिशा वापस अपने बेडरूम में आ धड़ाम से बेड पर गिर पड़ी ! राजू का मोटा और लम्बा मदमस्त लण्ड रिशा कि आँखो के आगे बार-बार घूम रहा था ! उसका खूबसूरत चेहरा, उसका बलिष्ठ शरीर उसको बैचेन कर रहा था। रिशा कि सांस तेज हो चली थी। पसीना छलक उठा था। रिशा बिस्तर पर बिना जल की मछली की तरह तड़पने लगी।
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RE: लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल... - by nitya.bansal3 - 20-03-2026, 12:30 PM



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