19-03-2026, 03:35 PM
(This post was last modified: 19-03-2026, 09:46 PM by Life_is_short. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
[color=#384764][size=small][font=-apple-system, BlinkMacSystemFont,][size=large][color=#2c82c9]नेहा मेरे सामने खड़ी थी—टाइट ब्लैक जींस में।
जींस इतनी टाइट थी कि उसकी गांड का शेप पूरी तरह उभर आया था—गोल, भरी हुई, जैसे कोई मूर्ति हो।
उसकी कमर पतली, जांघें मजबूत, और वो हाई हील्स में और लंबी लग रही थी।
बाल पोनी में बाँधे हुए थे—पीछे की तरफ खींचकर, जो उसके चेहरे को और सख्त, और डोमिनेंट बना रहा था।
डार्क लिपस्टिक—गहरी लाल, लगभग काली।
वो क्रूर दिखने की पूरी कोशिश कर रही थी—आँखें सिकोड़ी हुईं, होंठ कसे हुए।
लेकिन... वो अभी भी क्यूट लग रही थी।
उसकी बड़ी-बड़ी आँखें... वो मासूमियत... वो क्लासी, रिच लुक... सब कुछ परफेक्ट।
उसकी खूबसूरती... घरेलू और नॉटी का परफेक्ट मिक्स।
अगर कोई पूछे कि नेहा में सबसे अच्छी चीज़ क्या है... तो मैं बिना सोचे कहूँगा—उसका चेहरा।
उसकी खूबसूरती।
मैं घुटनों पर था—पैर फैले हुए।
दरवाज़ा अभी भी खुला था।
मैंने नेहा की तरफ देखा।
आँखों से इशारा किया—जैसे कह रहा हो—"गुप्ता जी... उन्होंने देख लिया... दरवाज़ा बंद कर दो..."
लेकिन नेहा ने कुछ नहीं किया।
उसने बस... मेरी आँखों में देखा।
उसकी मुस्कान और गहरी हो गई—एक क्रूर, मालकिन वाली मुस्कान।
वो सच में कैरेक्टर में थी।
उसे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।
वो जानती थी—दरवाज़ा खुला है।
कोई भी देख सकता है।
नेहा का थप्पड़ अभी भी मेरे गाल पर जल रहा था।
जलन... दर्द... और एक अजीब सी गर्मी।
मेरा चेहरा लाल हो गया था—उसकी उँगलियों का निशान साफ़ महसूस हो रहा था।
मैंने मुंह खोला—गुप्ता जी का नाम लेने वाला था।
"गुप्ता जी... उन्होंने..."
लेकिन शब्द गले में अटक गए।
मैं डर गया।
सच में डर गया।
पहली बार... अपनी नेहा से डर लगा।
वो मासूम, प्यारी नेहा... जो कभी मेरे सामने शरमाती थी... अब मेरी आँखों में देखकर सख्ती से बोल रही थी।
मैंने सोचा—सेफ वर्ड बोल दूँ?
"नेगी जी"।
बस इतना बोलना था... और सब रुक जाता।
रोल प्ले खत्म।
लेकिन... मैं नहीं बोल पाया।
मैंने खुद से कहा—
मैंने नेहा को कितनी बार स्लेव बनाया था।
उसे स्पैंक किया था—जोर से।
उसके बाल खींचे थे।
उसके गाल पर थप्पड़ मारे थे।
वो कभी नहीं बोली—"नहीं"।
वो कभी नहीं बोली—"रुक जाओ"।
वो हमेशा कहती थी—"और जोर से..."
और अब... वो मेरे साथ वैसा ही कर रही थी।
और मैं... 5 मिनट में ही पीछे हटना नहीं चाहता था।
खेल अभी शुरू भी नहीं हुआ था।
मैं कमिट होना चाहता था।
पूरी तरह।
नेहा ने नीचे देखा।
उसकी आँखें मेरी आँखों से मिलीं।
वो समझ गई कि मैं कुछ कहना चाहता हूँ।
वो बोली—आवाज़ में वो ठंडी, क्रूर धमकी—
"बोल ना चूतिए... क्या हुआ??"
मैं डर रहा था... शर्म से मर रहा था... लेकिन साथ ही... मेरा लुंड फड़क रहा था।
मुझे समझ नहीं आ रहा था—मुझे नेहा से डर लग रहा है... या ये सब मुझे एक्साइट कर रहा है?
मैंने फुसफुसाया—बहुत धीरे—
"गुप्ता जी..."
नेहा ने मेरे बाल पकड़े।
मेरा सिर ऊपर खींचा।
उसकी आँखें सिकुड़ गईं।
"जोर से बोल भोसड़ीके..."
मैंने हिम्मत करके आवाज़ थोड़ी ऊँची की—इतनी कि बाहर न कोई सुन ले।
"गुप्ता जी... अभी-अभी दरवाज़े से गुज़रे... और उन्होंने मुझे ऐसे देखा..."
मैंने सोचा—अब वो शरमाएगी।
अब वो दरवाज़ा बंद कर देगी।
अब वो कहेगी—"ओह नहीं... कोई देख लेगा..."
लेकिन... उसके चेहरे पर कोई एक्सप्रेशन नहीं आया।
न शर्म... न डर... न हँसी।
बस... एक ठंडी, क्रूर मुस्कान।
वो बोली—आवाज़ में कोई भावना नहीं—
"तो क्या?"
मैं स्तब्ध रह गया।
नेहा ने मेरे बाल और ज़ोर से पकड़े।
मेरा सिर पीछे खींचा—जोर से।
उसकी आँखें मेरी आँखों में टिकी हुईं थीं।
उसकी आवाज़ में अब वो ठंडी, क्रूर हँसी थी।
"शर्म आ रही है तुम्हें, भेनचोद?
बोल... शर्म आ रही है?"
मैंने कुछ नहीं कहा।
बस... हल्का-सा "हम्म..." निकला।
वो हँसी—एक छोटी ।
फिर मेरे कान के पास मुँह ले जाकर बोली
"तुम्हें शर्म आ रही है... क्योंकि गुप्ता जी ने देख लिया?
तुम्हें शर्म आ रही है... क्योंकि वो तुम्हें ऐसे देख रहे हैं—घुटनों पर... मेरे सामने...
वो रुकी।
फिर... मेरी ही आवाज़ में मिमिक्री करने लगी—वो पुरानी वाली मेरी आवाज़...
"बेबी... ये बैकलेस पहनो... ये डीप नेक पहनो...
बेबी... गुप्ता जी के पैर छूओ... साड़ी में...
तुम जानत हो... अगर मैं झुकोगी... तो उन्हें तुम्हारी बीवी की पूरी चेस्ट दिख जाएगी
वो मेरे बाल और कसकर पकड़कर बोली—
"तब तुम्हें कभी शर्म नहीं आई?
तब तुम्हें कभी डर नहीं लगा?
तब तुम मुझे सबके सामने डिस्प्ले करते थे... और तुम्हें अच्छा लगता था।
अब... क्या हो गया?
ये सब समय... नेहा ने जो भी किया... वो सब मेरे कहने पर किया।
मैंने कभी उसे नहीं बताया कि मैं सच में क्या चाहता हूँ।
मैंने हमेशा सोचा कि मैं बहुत स्मार्ट हूँ—बस इतना कह दूँगा, "बेबी... ये बैकलेस बहुत अच्छा लग रहा है... तुम इसमें कमाल लगती हो..."
"ये डीप नेक पहनो... तुम्हारी खूबसूरती और निकलेगी..."
मैंने सोचा... वो नहीं समझेगी।
मैंने सोचा... मैंने बहुत अच्छे से छुपा लिया है कि मैं उसे सबके सामने डिस्प्ले करना चाहता हूँ।
गुप्ता जी जैसे लोगों के सामने... उनकी भूखी नज़रों के सामने... मेरी नेहा... थोड़ी कम कपड़ों में... थोड़ी झुकती हुई... थोड़ी शरमाती हुई...
लेकिन अब... सब साफ़ हो गया।
नेहा बेवकूफ नहीं थी।
वो हमेशा समझती थी।
हर बार समझती थी।
जब मैं कहता था—"ये पहनो... अच्छा लगेगा..."
वो जानती थी कि मैं क्या चाहता हूँ।
वो जानती थी कि मैं उसे उन नज़रों के सामने लाना चाहता हूँ।
फिर भी... वो कभी नहीं मना करती थी।
वो पहन लेती थी।
झुक जाती थी।
पल्लू सरकने देती थी।
क्योंकि... उसे भी अच्छा लगता था।
उनकी भूख... उनकी नज़रें... वो सब उसे भी एक्साइट करता था।
और मैं... कभी नहीं समझ पाया।
मैंने सोचा... मैं बहुत स्मार्ट हूँ।
लेकिन... वो मुझसे कहीं ज़्यादा स्मार्ट थी।
नेहा मेरे सामने खड़ी थी—उसकी आँखें मेरी आँखों में टिकी हुईं, चेहरा बिल्कुल स्ट्रेट, कोई एक्सप्रेशन नहीं।
जैसे वो जानबूझकर मुझे सोचने दे रही हो—सारे वो पुराने स्टेटमेंट्स, सारे वो बहाने, सारे वो "तुम इसमें बहुत अच्छी लगती हो" वाले लाइन।
वो सब मेरे दिमाग में घूम रहे थे।
मैं घुटनों पर बैठा था... पैर फैले हुए... दरवाज़ा अभी भी खुला... और मेरा लुंड सख्त होकर फड़क रहा था।
फिर वो बोली—आवाज़ में अब कोई क्रूरता नहीं, बस एक शांत, कमांडिंग टोन।
"ओके... अब उठो।
दरवाज़ा बंद करो।
फिर अंडरवियर उतारो।
और अंदर आओ।"
मैंने जल्दी से उठा।
दरवाज़ा बंद किया—जल्दी से, धड़ाम से।
शुक्र है... गुप्ता जी के अलावा किसी ने नहीं देखा।
या... शायद देखा भी हो... लेकिन अब क्या फर्क पड़ता है।
मैं अंदर आया।
नेहा सोफे पर बैठ गई—रिलैक्स्ड, पैर क्रॉस करके, जैसे कोई क्वीन बैठी हो।
उसकी जींस अभी भी टाइट थी—उसकी गांड सोफे पर दबी हुई।
टी-शर्ट से उसके स्तन उभरे हुए।
वो मेरी तरफ देख रही थी।
मैंने अंडरवियर उतारा।
पूरी तरह नंगा खड़ा हो गया।
मेरा लुंड सख्त था—फड़क रहा था, प्रीकम टिप पर चमक रहा था।
नेहा ने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा।
फिर... हल्के से मुस्कुराई।
नेहा मेरे सामने खड़ी थी—उसकी आँखें सीधे मेरे लुंड पर टिकी हुईं।
वो धीरे से मुस्कुराई—एक ठंडी, जानकार वाली मुस्कान।
"देखो... तुम मेरी बातों में इतना खोए हुए थे... फिर भी इतना सख्त।
तेरा लुंड तो अपनी ही ज़िंदगी जी रहा है..."
वो मेरे करीब आई।
उसकी उँगली मेरे लुंड की टिप पर हल्के से लगी—बस छूकर।
मैं काँप गया।
"चलो अब, सैम... उस लुंड को सहलाओ।
मैं देखना चाहती हूँ... तुम कितने पर्व हो... कैसे मज़ा लेते हो... जब दूसरे मेरी तरफ देखते हैं।
अच्छा शो दो... स्लेव।"
मेरा चेहरा अब जल रहा था—गाल लाल, सीना धड़क रहा था।
शर्म से मर रहा था... लेकिन लुंड पहले से ज़्यादा सख्त।
लगभग दर्द कर रहा था।
मैंने हाथ नीचे किया।
लुंड पकड़ा।
धीरे-धीरे सहलाना शुरू किया।
नेहा सोफे पर बैठ गई—पैर क्रॉस करके, जैसे कोई क्वीन बैठी हो।
वो मुझे घूर रही थी—आँखें नहीं हटा रही थी।
"धीरे... चूतिए।
जल्दी मत करना।
मैं चाहती हूँ... तुम टाइम लो।
और... बिना मेरी इजाज़त के... झड़ने की हिम्मत मत करना।"
मैंने स्पीड कम की।
धीरे-धीरे... ऊपर-नीचे।
प्रीकम टिप पर आ रहा था—चमक रहा था।
नेहा ने हँसी—एक छोटी, क्रूर हँसी।
"देखो... कितना एक्साइटेड हो।
सोच रहे हो... गुप्ता जी ने देख लिया... पड़ोसी ने देख लिया...
कितना पर्व हो तुम... सैम।
मेरा पर्व स्लेव।"
मैंने कुछ नहीं कहा।
बस... सहलाता रहा।
धीरे-धीरे।
नेहा ने अपना एक पैर आगे बढ़ाया।
उसकी हाई हील की नोक मेरे बॉल्स से छू गई।
हल्का-सा, जानबूझकर।
मैं अभी भी घुटनों पर था... लुंड हाथ में... धीरे-धीरे सहला रहा था।
उसकी हील मेरे बॉल्स पर रगड़ रही थी—धीमी, तड़पाने वाली हरकत।
दर्द और मज़ा एक साथ।
मैं काँप रहा था।
वो मेरी आँखों में देखकर बोली—आवाज़ में वो ठंडी, कमांडिंग टोन—
"तुम पोर्न देखते हो ना... सैम... जब अकेले होते हो?"
मैंने काँपते हुए कहा—
"हाँ.. ज्यादा नहीं..."
वो हँसी—एक छोटी, क्रूर हँसी।
फिर अचानक बोली—
"मेरी हील्स को किस करो।"
मैंने उसकी तरफ देखा।
उसकी आँखें मेरी आँखों में टिकी हुईं।
मैंने झुककर उसकी बायीं हील की नोक पर होंठ रख दिए।
धीरे से... ऊपरी हिस्से पर।
धीमे-धीमे किस करने लगा।
हर किस में थोड़ा सा दबाव... थोड़ा सा चूसना।
तभी... उसने दूसरा पैर बढ़ाया।
उसकी हील की तलवा—वो गंदी, धूल वाली तलवा—मेरे चेहरे पर रगड़ने लगी।
गाल पर... नाक पर... होंठों पर।
धूल... गंदगी... सब मेरे चेहरे पर।
लेकिन मैं रुका नहीं।
मैंने बायीं हील को किस करना जारी रखा।
धीमे-धीमे... ऊपर से नीचे।
"अच्छा... तो बताओ... तुम और किस तरह का पोर्न देखते हो?"
मैं उसके हील्स की टिप को किस कर रहा था—धीमे-धीमे, ऊपरी हिस्से पर।
मेरा चेहरा जल रहा था—शर्म से।
मैंने कुछ नहीं कहा।
बस... किस करता रहा।
वो फिर बोली—आवाज़ में अब वो क्रूर शरारत—
"बोलो ना... क्या इतना शर्म आ रहा है?
ट्रांस वुमन?
बॉय ऑन बॉय?
या... क्योंकि तुम सिसी बॉय जैसे लगते हो?"
वो हँसी—एक छोटी, कड़वी हँसी।
उसने अपना होमवर्क अच्छे से किया था।
वो जानती थी... कैसे अपमान करना है।
कैसे मेरे दिमाग में घुसना है।
मैंने किस करना बंद कर दिया।
मेरा चेहरा और जलने लगा।
मैंने कुछ नहीं कहा।
वो झुकी।
मेरे बाल पकड़े।
मेरा सिर ऊपर खींचा।
"मैंने तुम्हें रुकने को कहा, भेनचोद?"
मैंने सिर हिलाया—नहीं में।
फिर... धीरे से हील्स की टिप पर किस करना शुरू किया।
वो बोली—
"जब मैं पूछूँ... तो जवाब दो।
हमेशा।
समझे?"
मैंने काँपते हुए कहा—
"जी..."
वो मेरी आँखों में देखकर बोली—आवाज़ में वो ठंडी, कमांडिंग टोन—
"तो बताओ... तुम कौन सा पोर्न देखते हो... जब अकेले होते हो?"
मैं उसके हील्स की टिप को किस कर रहा था—धीमे-धीमे।
मेरा चेहरा जल रहा था—शर्म से।
मैंने हकलाते हुए कहा—
"मैं... रेगुलर पोर्न देखता हूँ..."
मैंने सच नहीं बताया।
कॉकॉल्ड वीडियोज़... वो सब... अभी नहीं बताना चाहता था।
बहुत जल्दी।
नेहा ने हँसी—एक छोटी, कड़वी हँसी।
फिर अपना पैर और आगे बढ़ाया।
उसकी हील की तलवा अब मेरे होंठों पर थी।
"ओके... तो तुम दूसरी लड़कियों को देखकर झड़ते हो... सही?"
वो अपना पैर थोड़ा और दबा रही थी—ताकि मुझे उसकी गंदी तलवा चाटनी पड़े।
मैंने जीभ निकाली।
उसकी तलवा चाटी—धीरे-धीरे... पूरी तरह साफ़ करने की कोशिश में।
उसकी हील अब चमक रही थी।
वो बोली—
"अच्छा बॉय।
अब... बताओ... तुम्हें किस तरह की लड़कियों को देखकर मज़ा आता है?
कौन सी स्लटी, गंदी वीडियोज़... जो तुम्हें झड़ने पर मजबूर कर देती हैं?
और अगर तुम मुझे काफी गर्म कर दोगे... तो शायद... मैं तुम्हें रिवॉर्ड दूँ।"
मैंने हकलाते हुए कहा—
"मैडम... मैं... हमेशा आपको इमेजिन करता हूँ... जब मैं ये वीडियोज़ देखता हूँ।"
नेहा ने एक पल के लिए रुककर मुझे देखा।
उसके चेहरे पर पहली बार... एक सच्ची, प्यारी मुस्कान आई।
कैरेक्टर थोड़ा टूटा।
वो बोली—
"गुड... गुड बॉय।
ये... बहुत हॉट था मेरे लिए।
मतलब... तुम सच में मुझे ही सोचते हो... जब तुम झड़ते हो?"
मैंने सिर हिलाया।
वो मुस्कुराई।
फिर... कैरेक्टर में वापस आई।
"अच्छा... तो अब... तुम्हें रिवॉर्ड मिलेगा।
हील्स चाटना बंद करो... अभी।"
मैंने तुरंत रुक गया।
वो बोली—
"अब... ज़मीन पर... हाथों और घुटनों के बल।
अब।"
मैं ज़मीन पर गिर गया।
हाथों और घुटनों पर।
मेरा लुंड मेरी जांघों के बीच लटक रहा था—सख्त, फड़कता हुआ।
नेहा ने कहा—
"अब... कुत्ते की तरह क्रॉल करो... और मेरी जांघों के बीच आओ।"
मैंने क्रॉल किया।
मेरा लुंड मेरी जांघों से टकरा रहा था।
अजीब... शर्मनाक... लेकिन एक्साइटिंग।
वो बोली—
"गुड बॉय... क्या मेरी स्लेव को... इस परफेक्ट चूत का स्वाद चखने का मन है?"
मैंने कराहा।
उसकी चूत की तरफ नाक ले जाकर सूंघा।
तेज़ी से क्रॉल किया।
तभी... उसने मेरे चिन को पकड़ा।
मेरा चेहरा ऊपर खींचा।
मुझे उसकी आँखों में देखना पड़ा।
और उसके चेहरे पर... गुस्सा था।
मेरा सिर पीछे खींचा—जोर से।
"व्हाट द फक डिड आई टेल यू अर्लियर?"
सकी आवाज़ तेज़ थी—जैसे कोई असली मालकिन अपने स्लेव को डाँट रही हो।
मैंने काँपते हुए कहा—
"आपने कहा था... घुटनों पर बैठो...
वो हँसी—एक छोटी, कड़वी हँसी।
फिर मेरे चेहरे पर हल्का-सा थप्पड़ मारा—इस बार भी दर्द हुआ।
"और?"
मैंने हकलाते हुए कहा—
"और... कुत्ते की तरह क्रॉल करके... आपकी जांघों के बीच आओ..."
"और मैंने तुम्हें मेरी चूत पर अपना मुँह रगड़ने को कहा था?"
मैंने सिर हिलाया—नहीं में।
वो बोली—आवाज़ में अब कोई दया नहीं—
"तो फिर... क्या कर रहे हो?
वो मेरे चेहरे के ठीक सामने झुकी हुई थी—उसकी साँस मेरे गाल पर लग रही थी।
मैंने काँपते हुए, शर्म से जलते हुए चेहरे के साथ कहा—
"सॉरी... मैं बस एक डंब लिटिल स्लट हूँ... एक हॉर्नी पर्व... ।
मैं... बहुत एक्साइटेड हूँ... आपकी परफेक्ट चूत का स्वाद चखने के लिए... अगर आप अभी भी मुझे इजाज़त देंगी, मैडम।"
नेहा ने एक पल के लिए रुककर मुझे देखा।
फिर... हल्के से "हम्म..." कहा।
उसकी आवाज़ में अब वो ठंडी संतुष्टि थी।
"शिफ़ इट वेल..."
कुछ देर बाद... वो बोली—
"अब... मेरी टाइट जींस खोलो।"
मैंने दाँतों से उसकी जींस की बटन खोली।
ज़िप नीचे की।
उसने अपना एक पैर उठाया।
मैंने उसकी हाई हील उतारी—धीरे से।
फिर दूसरी।
उसके नंगे पैर मेरे सामने।
उसके टो नेल्स—लाल पॉलिश लगे हुए।
मैंने झुककर उसके टो नेल्स चूसे।
एक-एक करके।
सकते हुए... चूसते हुए... जीभ से खेलते हुए।
मैं... सच में एक रियल बिच बन गया था।
कोई सेल्फ रिस्पेक्ट नहीं बचा था।
मैं एंजॉय कर रहा था।
नेहा इस बीच सिगरेट पी रही थी।
वो सोफे पर बैठी थी—एक हाथ में सिगरेट... दूसरा मेरे बालों में।
धुआँ मेरे चेहरे पर आ रहा था।
वो सेक्सी लग रही थी—बहुत सेक्सी।
उसकी टी-शर्ट से स्तन उभरे हुए... जींस अभी भी टाइट... लेकिन अब वो धीरे-धीरे उतार रही थी।
वो जींस पूरी उतारकर मेरे सामने।
बॉटमलेस।
उसकी पैंटी गीली थी—पसीने और उसके रस से।
उसकी चूत की खुशबू... पसीने की मिली हुई... मीठी, मस्की, गर्म।
मैं उसके सामने हंच्ड था—घुटनों पर... घुटनों में फ्लोर बर्न हो रहा था।
उसकी चूत मेरे मुँह से सिर्फ़ कुछ इंच दूर।
तभी... उसने मेरे सिर के पीछे हाथ रखा।
मेरा चेहरा अपनी चूत की तरफ खींच लिया।
मुझे और इंट्रोडक्शन की ज़रूरत नहीं थी।
मैंने जीभ निकाली।
उसकी सुंदर, नरम जांघों पर जीभ फेरी।
उसकी जांघें काँप रही थीं—उसकी डोमिनेशन की इंपल्स अब धीरे-धीरे कम हो रही थी।
उसकी भूख अब बढ़ रही थी—मेरी जीभ को अपनी क्लिट पर... अपनी चूत पर महसूस करने की।
वो ग्लिस्टनिंग थी।
उसकी चूत की मस्की, स्वीट खुशबू ने मेरे सारे होश उड़ा दिए।
मैंने जीभ को सीधा अंदर डाला—जितना गहरा हो सके।
धीरे-धीरे... उसे फक करने लगा जीभ से।
फिर... उसकी लेबिया पर जीभ फेरी।
जीभ को फ्लैट करके... छोटे-छोटे लिक्स... फिर लंबे, गहरे स्ट्रोक्स।
मेरा पूरा चेहरा अब उसके रस में भीगा हुआ था।
उसकी खुशबू... इतनी ओवरवेल्मिंग... कि मैं पूरी तरह सबमिसिव हो गया।
सिर्फ़ एक ही चीज़ चाहिए थी—उसकी चूत खाना... अपनी बीवी की सेवा करना... उसका पर्सनल पुसी-ईटिंग सेक्स स्लेव बनना।
क्या हो गया था मुझे?
क्या सच में ये सब... इतना अच्छा लग रहा था?
नेहा कराह रही थी—अब उसकी आवाज़ में वो क्रूरता नहीं थी।
बस... भूख।
नेहा की जांघें मेरे सिर के दोनों तरफ कस गईं थीं।
उसकी साँसें तेज़... कराहें अब और ऊँची।
"मम्म्म्ह्ह्ह... गुड बॉय..." वो प्यार से गुर्राई, लेकिन उसकी आवाज़ में अब वो डोमिनेंट एज वापस आ गई थी।
मैंने जीभ ऊपर की तरफ खींची—उसकी क्लिट पर तेज़ी से फ्लिक करने लगा।
उसकी चूत गीली थी—रस बह रहा था मेरे होंठों पर, मेरी ठोड़ी पर।
वो चीखी—"उग्ग्ग्ग्ग... येस... राइट देयर... ओह फक... डोन्ट स्टॉप... ओह फक डोन्ट स्टॉप..."
उसकी जांघें मेरे कनपटियों पर दबाव डाल रही थीं—इनवॉलंटरी, जैसे वो खुद को कंट्रोल नहीं कर पा रही हो।
मैंने एक हाथ नीचे किया।
मिडिल फिंगर उसकी चूत के छेद पर रखा।
धीरे से अंदर डाला—गर्म, गीली, टाइट।
"ओह फक..." वो आधी चीखी, आधी कराही।
मैंने फिंगर को अंदर-बाहर करना शुरू किया—धीमे से तेज़।
जीभ अभी भी उसकी क्लिट पर—तेज़, लगातार फ्लिक्स।
"ओह येस... ओह गॉड... ओह येस... ओह गॉड्ड्ड्ड..."
उसकी आवाज़ अब टूट रही थी।
उसने अपना हाथ नीचे किया—मेरे सिर को पकड़कर और ज़ोर से अपनी चूत पर दबाया।
उसकी जांघें काँप रही थीं।
फिर... वो टेंस हुई।
एक छोटा सा रश—उसका रस मेरे मुँह में भर गया।
मैंने जीभ तेज़ की—जितना तेज़ कर सकता था।
फिंगर को जैकहैमर की तरह अंदर-बाहर।
वो दूसरी बार झड़ गई—कुछ ही मिनटों में।
"ओह्ह्ह्ह्ह... फक..."
उसने मेरे सिर को पकड़कर धक्का देने की कोशिश की—जैसे अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा हो।
लेकिन मैं पीछे नहीं हटा।
मैंने जीभ चलानी जारी रखी—धीमी, गहरी स्ट्रोक्स।
उसका रस मेरे पूरे चेहरे पर था।
ठोड़ी, गाल, होंठ—सब गीले।
उसकी मस्की, स्वीट खुशबू मेरे नाक में घुस गई थी।
मैं पूरी तरह सबमिसिव हो गया था।
सिर्फ़ एक ही चीज़ चाहिए थी—उसकी चूत खाना... अपनी बीवी की सेवा करना... उसका पर्सनल पुसी-ईटिंग सेक्स स्लेव बनना।
क्या हो गया था मुझे?
जींस इतनी टाइट थी कि उसकी गांड का शेप पूरी तरह उभर आया था—गोल, भरी हुई, जैसे कोई मूर्ति हो।
उसकी कमर पतली, जांघें मजबूत, और वो हाई हील्स में और लंबी लग रही थी।
बाल पोनी में बाँधे हुए थे—पीछे की तरफ खींचकर, जो उसके चेहरे को और सख्त, और डोमिनेंट बना रहा था।
डार्क लिपस्टिक—गहरी लाल, लगभग काली।
वो क्रूर दिखने की पूरी कोशिश कर रही थी—आँखें सिकोड़ी हुईं, होंठ कसे हुए।
लेकिन... वो अभी भी क्यूट लग रही थी।
उसकी बड़ी-बड़ी आँखें... वो मासूमियत... वो क्लासी, रिच लुक... सब कुछ परफेक्ट।
उसकी खूबसूरती... घरेलू और नॉटी का परफेक्ट मिक्स।
अगर कोई पूछे कि नेहा में सबसे अच्छी चीज़ क्या है... तो मैं बिना सोचे कहूँगा—उसका चेहरा।
उसकी खूबसूरती।
मैं घुटनों पर था—पैर फैले हुए।
दरवाज़ा अभी भी खुला था।
मैंने नेहा की तरफ देखा।
आँखों से इशारा किया—जैसे कह रहा हो—"गुप्ता जी... उन्होंने देख लिया... दरवाज़ा बंद कर दो..."
लेकिन नेहा ने कुछ नहीं किया।
उसने बस... मेरी आँखों में देखा।
उसकी मुस्कान और गहरी हो गई—एक क्रूर, मालकिन वाली मुस्कान।
वो सच में कैरेक्टर में थी।
उसे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।
वो जानती थी—दरवाज़ा खुला है।
कोई भी देख सकता है।
नेहा का थप्पड़ अभी भी मेरे गाल पर जल रहा था।
जलन... दर्द... और एक अजीब सी गर्मी।
मेरा चेहरा लाल हो गया था—उसकी उँगलियों का निशान साफ़ महसूस हो रहा था।
मैंने मुंह खोला—गुप्ता जी का नाम लेने वाला था।
"गुप्ता जी... उन्होंने..."
लेकिन शब्द गले में अटक गए।
मैं डर गया।
सच में डर गया।
पहली बार... अपनी नेहा से डर लगा।
वो मासूम, प्यारी नेहा... जो कभी मेरे सामने शरमाती थी... अब मेरी आँखों में देखकर सख्ती से बोल रही थी।
मैंने सोचा—सेफ वर्ड बोल दूँ?
"नेगी जी"।
बस इतना बोलना था... और सब रुक जाता।
रोल प्ले खत्म।
लेकिन... मैं नहीं बोल पाया।
मैंने खुद से कहा—
मैंने नेहा को कितनी बार स्लेव बनाया था।
उसे स्पैंक किया था—जोर से।
उसके बाल खींचे थे।
उसके गाल पर थप्पड़ मारे थे।
वो कभी नहीं बोली—"नहीं"।
वो कभी नहीं बोली—"रुक जाओ"।
वो हमेशा कहती थी—"और जोर से..."
और अब... वो मेरे साथ वैसा ही कर रही थी।
और मैं... 5 मिनट में ही पीछे हटना नहीं चाहता था।
खेल अभी शुरू भी नहीं हुआ था।
मैं कमिट होना चाहता था।
पूरी तरह।
नेहा ने नीचे देखा।
उसकी आँखें मेरी आँखों से मिलीं।
वो समझ गई कि मैं कुछ कहना चाहता हूँ।
वो बोली—आवाज़ में वो ठंडी, क्रूर धमकी—
"बोल ना चूतिए... क्या हुआ??"
मैं डर रहा था... शर्म से मर रहा था... लेकिन साथ ही... मेरा लुंड फड़क रहा था।
मुझे समझ नहीं आ रहा था—मुझे नेहा से डर लग रहा है... या ये सब मुझे एक्साइट कर रहा है?
मैंने फुसफुसाया—बहुत धीरे—
"गुप्ता जी..."
नेहा ने मेरे बाल पकड़े।
मेरा सिर ऊपर खींचा।
उसकी आँखें सिकुड़ गईं।
"जोर से बोल भोसड़ीके..."
मैंने हिम्मत करके आवाज़ थोड़ी ऊँची की—इतनी कि बाहर न कोई सुन ले।
"गुप्ता जी... अभी-अभी दरवाज़े से गुज़रे... और उन्होंने मुझे ऐसे देखा..."
मैंने सोचा—अब वो शरमाएगी।
अब वो दरवाज़ा बंद कर देगी।
अब वो कहेगी—"ओह नहीं... कोई देख लेगा..."
लेकिन... उसके चेहरे पर कोई एक्सप्रेशन नहीं आया।
न शर्म... न डर... न हँसी।
बस... एक ठंडी, क्रूर मुस्कान।
वो बोली—आवाज़ में कोई भावना नहीं—
"तो क्या?"
मैं स्तब्ध रह गया।
नेहा ने मेरे बाल और ज़ोर से पकड़े।
मेरा सिर पीछे खींचा—जोर से।
उसकी आँखें मेरी आँखों में टिकी हुईं थीं।
उसकी आवाज़ में अब वो ठंडी, क्रूर हँसी थी।
"शर्म आ रही है तुम्हें, भेनचोद?
बोल... शर्म आ रही है?"
मैंने कुछ नहीं कहा।
बस... हल्का-सा "हम्म..." निकला।
वो हँसी—एक छोटी ।
फिर मेरे कान के पास मुँह ले जाकर बोली
"तुम्हें शर्म आ रही है... क्योंकि गुप्ता जी ने देख लिया?
तुम्हें शर्म आ रही है... क्योंकि वो तुम्हें ऐसे देख रहे हैं—घुटनों पर... मेरे सामने...
वो रुकी।
फिर... मेरी ही आवाज़ में मिमिक्री करने लगी—वो पुरानी वाली मेरी आवाज़...
"बेबी... ये बैकलेस पहनो... ये डीप नेक पहनो...
बेबी... गुप्ता जी के पैर छूओ... साड़ी में...
तुम जानत हो... अगर मैं झुकोगी... तो उन्हें तुम्हारी बीवी की पूरी चेस्ट दिख जाएगी
वो मेरे बाल और कसकर पकड़कर बोली—
"तब तुम्हें कभी शर्म नहीं आई?
तब तुम्हें कभी डर नहीं लगा?
तब तुम मुझे सबके सामने डिस्प्ले करते थे... और तुम्हें अच्छा लगता था।
अब... क्या हो गया?
ये सब समय... नेहा ने जो भी किया... वो सब मेरे कहने पर किया।
मैंने कभी उसे नहीं बताया कि मैं सच में क्या चाहता हूँ।
मैंने हमेशा सोचा कि मैं बहुत स्मार्ट हूँ—बस इतना कह दूँगा, "बेबी... ये बैकलेस बहुत अच्छा लग रहा है... तुम इसमें कमाल लगती हो..."
"ये डीप नेक पहनो... तुम्हारी खूबसूरती और निकलेगी..."
मैंने सोचा... वो नहीं समझेगी।
मैंने सोचा... मैंने बहुत अच्छे से छुपा लिया है कि मैं उसे सबके सामने डिस्प्ले करना चाहता हूँ।
गुप्ता जी जैसे लोगों के सामने... उनकी भूखी नज़रों के सामने... मेरी नेहा... थोड़ी कम कपड़ों में... थोड़ी झुकती हुई... थोड़ी शरमाती हुई...
लेकिन अब... सब साफ़ हो गया।
नेहा बेवकूफ नहीं थी।
वो हमेशा समझती थी।
हर बार समझती थी।
जब मैं कहता था—"ये पहनो... अच्छा लगेगा..."
वो जानती थी कि मैं क्या चाहता हूँ।
वो जानती थी कि मैं उसे उन नज़रों के सामने लाना चाहता हूँ।
फिर भी... वो कभी नहीं मना करती थी।
वो पहन लेती थी।
झुक जाती थी।
पल्लू सरकने देती थी।
क्योंकि... उसे भी अच्छा लगता था।
उनकी भूख... उनकी नज़रें... वो सब उसे भी एक्साइट करता था।
और मैं... कभी नहीं समझ पाया।
मैंने सोचा... मैं बहुत स्मार्ट हूँ।
लेकिन... वो मुझसे कहीं ज़्यादा स्मार्ट थी।
नेहा मेरे सामने खड़ी थी—उसकी आँखें मेरी आँखों में टिकी हुईं, चेहरा बिल्कुल स्ट्रेट, कोई एक्सप्रेशन नहीं।
जैसे वो जानबूझकर मुझे सोचने दे रही हो—सारे वो पुराने स्टेटमेंट्स, सारे वो बहाने, सारे वो "तुम इसमें बहुत अच्छी लगती हो" वाले लाइन।
वो सब मेरे दिमाग में घूम रहे थे।
मैं घुटनों पर बैठा था... पैर फैले हुए... दरवाज़ा अभी भी खुला... और मेरा लुंड सख्त होकर फड़क रहा था।
फिर वो बोली—आवाज़ में अब कोई क्रूरता नहीं, बस एक शांत, कमांडिंग टोन।
"ओके... अब उठो।
दरवाज़ा बंद करो।
फिर अंडरवियर उतारो।
और अंदर आओ।"
मैंने जल्दी से उठा।
दरवाज़ा बंद किया—जल्दी से, धड़ाम से।
शुक्र है... गुप्ता जी के अलावा किसी ने नहीं देखा।
या... शायद देखा भी हो... लेकिन अब क्या फर्क पड़ता है।
मैं अंदर आया।
नेहा सोफे पर बैठ गई—रिलैक्स्ड, पैर क्रॉस करके, जैसे कोई क्वीन बैठी हो।
उसकी जींस अभी भी टाइट थी—उसकी गांड सोफे पर दबी हुई।
टी-शर्ट से उसके स्तन उभरे हुए।
वो मेरी तरफ देख रही थी।
मैंने अंडरवियर उतारा।
पूरी तरह नंगा खड़ा हो गया।
मेरा लुंड सख्त था—फड़क रहा था, प्रीकम टिप पर चमक रहा था।
नेहा ने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा।
फिर... हल्के से मुस्कुराई।
नेहा मेरे सामने खड़ी थी—उसकी आँखें सीधे मेरे लुंड पर टिकी हुईं।
वो धीरे से मुस्कुराई—एक ठंडी, जानकार वाली मुस्कान।
"देखो... तुम मेरी बातों में इतना खोए हुए थे... फिर भी इतना सख्त।
तेरा लुंड तो अपनी ही ज़िंदगी जी रहा है..."
वो मेरे करीब आई।
उसकी उँगली मेरे लुंड की टिप पर हल्के से लगी—बस छूकर।
मैं काँप गया।
"चलो अब, सैम... उस लुंड को सहलाओ।
मैं देखना चाहती हूँ... तुम कितने पर्व हो... कैसे मज़ा लेते हो... जब दूसरे मेरी तरफ देखते हैं।
अच्छा शो दो... स्लेव।"
मेरा चेहरा अब जल रहा था—गाल लाल, सीना धड़क रहा था।
शर्म से मर रहा था... लेकिन लुंड पहले से ज़्यादा सख्त।
लगभग दर्द कर रहा था।
मैंने हाथ नीचे किया।
लुंड पकड़ा।
धीरे-धीरे सहलाना शुरू किया।
नेहा सोफे पर बैठ गई—पैर क्रॉस करके, जैसे कोई क्वीन बैठी हो।
वो मुझे घूर रही थी—आँखें नहीं हटा रही थी।
"धीरे... चूतिए।
जल्दी मत करना।
मैं चाहती हूँ... तुम टाइम लो।
और... बिना मेरी इजाज़त के... झड़ने की हिम्मत मत करना।"
मैंने स्पीड कम की।
धीरे-धीरे... ऊपर-नीचे।
प्रीकम टिप पर आ रहा था—चमक रहा था।
नेहा ने हँसी—एक छोटी, क्रूर हँसी।
"देखो... कितना एक्साइटेड हो।
सोच रहे हो... गुप्ता जी ने देख लिया... पड़ोसी ने देख लिया...
कितना पर्व हो तुम... सैम।
मेरा पर्व स्लेव।"
मैंने कुछ नहीं कहा।
बस... सहलाता रहा।
धीरे-धीरे।
नेहा ने अपना एक पैर आगे बढ़ाया।
उसकी हाई हील की नोक मेरे बॉल्स से छू गई।
हल्का-सा, जानबूझकर।
मैं अभी भी घुटनों पर था... लुंड हाथ में... धीरे-धीरे सहला रहा था।
उसकी हील मेरे बॉल्स पर रगड़ रही थी—धीमी, तड़पाने वाली हरकत।
दर्द और मज़ा एक साथ।
मैं काँप रहा था।
वो मेरी आँखों में देखकर बोली—आवाज़ में वो ठंडी, कमांडिंग टोन—
"तुम पोर्न देखते हो ना... सैम... जब अकेले होते हो?"
मैंने काँपते हुए कहा—
"हाँ.. ज्यादा नहीं..."
वो हँसी—एक छोटी, क्रूर हँसी।
फिर अचानक बोली—
"मेरी हील्स को किस करो।"
मैंने उसकी तरफ देखा।
उसकी आँखें मेरी आँखों में टिकी हुईं।
मैंने झुककर उसकी बायीं हील की नोक पर होंठ रख दिए।
धीरे से... ऊपरी हिस्से पर।
धीमे-धीमे किस करने लगा।
हर किस में थोड़ा सा दबाव... थोड़ा सा चूसना।
तभी... उसने दूसरा पैर बढ़ाया।
उसकी हील की तलवा—वो गंदी, धूल वाली तलवा—मेरे चेहरे पर रगड़ने लगी।
गाल पर... नाक पर... होंठों पर।
धूल... गंदगी... सब मेरे चेहरे पर।
लेकिन मैं रुका नहीं।
मैंने बायीं हील को किस करना जारी रखा।
धीमे-धीमे... ऊपर से नीचे।
"अच्छा... तो बताओ... तुम और किस तरह का पोर्न देखते हो?"
मैं उसके हील्स की टिप को किस कर रहा था—धीमे-धीमे, ऊपरी हिस्से पर।
मेरा चेहरा जल रहा था—शर्म से।
मैंने कुछ नहीं कहा।
बस... किस करता रहा।
वो फिर बोली—आवाज़ में अब वो क्रूर शरारत—
"बोलो ना... क्या इतना शर्म आ रहा है?
ट्रांस वुमन?
बॉय ऑन बॉय?
या... क्योंकि तुम सिसी बॉय जैसे लगते हो?"
वो हँसी—एक छोटी, कड़वी हँसी।
उसने अपना होमवर्क अच्छे से किया था।
वो जानती थी... कैसे अपमान करना है।
कैसे मेरे दिमाग में घुसना है।
मैंने किस करना बंद कर दिया।
मेरा चेहरा और जलने लगा।
मैंने कुछ नहीं कहा।
वो झुकी।
मेरे बाल पकड़े।
मेरा सिर ऊपर खींचा।
"मैंने तुम्हें रुकने को कहा, भेनचोद?"
मैंने सिर हिलाया—नहीं में।
फिर... धीरे से हील्स की टिप पर किस करना शुरू किया।
वो बोली—
"जब मैं पूछूँ... तो जवाब दो।
हमेशा।
समझे?"
मैंने काँपते हुए कहा—
"जी..."
वो मेरी आँखों में देखकर बोली—आवाज़ में वो ठंडी, कमांडिंग टोन—
"तो बताओ... तुम कौन सा पोर्न देखते हो... जब अकेले होते हो?"
मैं उसके हील्स की टिप को किस कर रहा था—धीमे-धीमे।
मेरा चेहरा जल रहा था—शर्म से।
मैंने हकलाते हुए कहा—
"मैं... रेगुलर पोर्न देखता हूँ..."
मैंने सच नहीं बताया।
कॉकॉल्ड वीडियोज़... वो सब... अभी नहीं बताना चाहता था।
बहुत जल्दी।
नेहा ने हँसी—एक छोटी, कड़वी हँसी।
फिर अपना पैर और आगे बढ़ाया।
उसकी हील की तलवा अब मेरे होंठों पर थी।
"ओके... तो तुम दूसरी लड़कियों को देखकर झड़ते हो... सही?"
वो अपना पैर थोड़ा और दबा रही थी—ताकि मुझे उसकी गंदी तलवा चाटनी पड़े।
मैंने जीभ निकाली।
उसकी तलवा चाटी—धीरे-धीरे... पूरी तरह साफ़ करने की कोशिश में।
उसकी हील अब चमक रही थी।
वो बोली—
"अच्छा बॉय।
अब... बताओ... तुम्हें किस तरह की लड़कियों को देखकर मज़ा आता है?
कौन सी स्लटी, गंदी वीडियोज़... जो तुम्हें झड़ने पर मजबूर कर देती हैं?
और अगर तुम मुझे काफी गर्म कर दोगे... तो शायद... मैं तुम्हें रिवॉर्ड दूँ।"
मैंने हकलाते हुए कहा—
"मैडम... मैं... हमेशा आपको इमेजिन करता हूँ... जब मैं ये वीडियोज़ देखता हूँ।"
नेहा ने एक पल के लिए रुककर मुझे देखा।
उसके चेहरे पर पहली बार... एक सच्ची, प्यारी मुस्कान आई।
कैरेक्टर थोड़ा टूटा।
वो बोली—
"गुड... गुड बॉय।
ये... बहुत हॉट था मेरे लिए।
मतलब... तुम सच में मुझे ही सोचते हो... जब तुम झड़ते हो?"
मैंने सिर हिलाया।
वो मुस्कुराई।
फिर... कैरेक्टर में वापस आई।
"अच्छा... तो अब... तुम्हें रिवॉर्ड मिलेगा।
हील्स चाटना बंद करो... अभी।"
मैंने तुरंत रुक गया।
वो बोली—
"अब... ज़मीन पर... हाथों और घुटनों के बल।
अब।"
मैं ज़मीन पर गिर गया।
हाथों और घुटनों पर।
मेरा लुंड मेरी जांघों के बीच लटक रहा था—सख्त, फड़कता हुआ।
नेहा ने कहा—
"अब... कुत्ते की तरह क्रॉल करो... और मेरी जांघों के बीच आओ।"
मैंने क्रॉल किया।
मेरा लुंड मेरी जांघों से टकरा रहा था।
अजीब... शर्मनाक... लेकिन एक्साइटिंग।
वो बोली—
"गुड बॉय... क्या मेरी स्लेव को... इस परफेक्ट चूत का स्वाद चखने का मन है?"
मैंने कराहा।
उसकी चूत की तरफ नाक ले जाकर सूंघा।
तेज़ी से क्रॉल किया।
तभी... उसने मेरे चिन को पकड़ा।
मेरा चेहरा ऊपर खींचा।
मुझे उसकी आँखों में देखना पड़ा।
और उसके चेहरे पर... गुस्सा था।
मेरा सिर पीछे खींचा—जोर से।
"व्हाट द फक डिड आई टेल यू अर्लियर?"
सकी आवाज़ तेज़ थी—जैसे कोई असली मालकिन अपने स्लेव को डाँट रही हो।
मैंने काँपते हुए कहा—
"आपने कहा था... घुटनों पर बैठो...
वो हँसी—एक छोटी, कड़वी हँसी।
फिर मेरे चेहरे पर हल्का-सा थप्पड़ मारा—इस बार भी दर्द हुआ।
"और?"
मैंने हकलाते हुए कहा—
"और... कुत्ते की तरह क्रॉल करके... आपकी जांघों के बीच आओ..."
"और मैंने तुम्हें मेरी चूत पर अपना मुँह रगड़ने को कहा था?"
मैंने सिर हिलाया—नहीं में।
वो बोली—आवाज़ में अब कोई दया नहीं—
"तो फिर... क्या कर रहे हो?
वो मेरे चेहरे के ठीक सामने झुकी हुई थी—उसकी साँस मेरे गाल पर लग रही थी।
मैंने काँपते हुए, शर्म से जलते हुए चेहरे के साथ कहा—
"सॉरी... मैं बस एक डंब लिटिल स्लट हूँ... एक हॉर्नी पर्व... ।
मैं... बहुत एक्साइटेड हूँ... आपकी परफेक्ट चूत का स्वाद चखने के लिए... अगर आप अभी भी मुझे इजाज़त देंगी, मैडम।"
नेहा ने एक पल के लिए रुककर मुझे देखा।
फिर... हल्के से "हम्म..." कहा।
उसकी आवाज़ में अब वो ठंडी संतुष्टि थी।
"शिफ़ इट वेल..."
कुछ देर बाद... वो बोली—
"अब... मेरी टाइट जींस खोलो।"
मैंने दाँतों से उसकी जींस की बटन खोली।
ज़िप नीचे की।
उसने अपना एक पैर उठाया।
मैंने उसकी हाई हील उतारी—धीरे से।
फिर दूसरी।
उसके नंगे पैर मेरे सामने।
उसके टो नेल्स—लाल पॉलिश लगे हुए।
मैंने झुककर उसके टो नेल्स चूसे।
एक-एक करके।
सकते हुए... चूसते हुए... जीभ से खेलते हुए।
मैं... सच में एक रियल बिच बन गया था।
कोई सेल्फ रिस्पेक्ट नहीं बचा था।
मैं एंजॉय कर रहा था।
नेहा इस बीच सिगरेट पी रही थी।
वो सोफे पर बैठी थी—एक हाथ में सिगरेट... दूसरा मेरे बालों में।
धुआँ मेरे चेहरे पर आ रहा था।
वो सेक्सी लग रही थी—बहुत सेक्सी।
उसकी टी-शर्ट से स्तन उभरे हुए... जींस अभी भी टाइट... लेकिन अब वो धीरे-धीरे उतार रही थी।
वो जींस पूरी उतारकर मेरे सामने।
बॉटमलेस।
उसकी पैंटी गीली थी—पसीने और उसके रस से।
उसकी चूत की खुशबू... पसीने की मिली हुई... मीठी, मस्की, गर्म।
मैं उसके सामने हंच्ड था—घुटनों पर... घुटनों में फ्लोर बर्न हो रहा था।
उसकी चूत मेरे मुँह से सिर्फ़ कुछ इंच दूर।
तभी... उसने मेरे सिर के पीछे हाथ रखा।
मेरा चेहरा अपनी चूत की तरफ खींच लिया।
मुझे और इंट्रोडक्शन की ज़रूरत नहीं थी।
मैंने जीभ निकाली।
उसकी सुंदर, नरम जांघों पर जीभ फेरी।
उसकी जांघें काँप रही थीं—उसकी डोमिनेशन की इंपल्स अब धीरे-धीरे कम हो रही थी।
उसकी भूख अब बढ़ रही थी—मेरी जीभ को अपनी क्लिट पर... अपनी चूत पर महसूस करने की।
वो ग्लिस्टनिंग थी।
उसकी चूत की मस्की, स्वीट खुशबू ने मेरे सारे होश उड़ा दिए।
मैंने जीभ को सीधा अंदर डाला—जितना गहरा हो सके।
धीरे-धीरे... उसे फक करने लगा जीभ से।
फिर... उसकी लेबिया पर जीभ फेरी।
जीभ को फ्लैट करके... छोटे-छोटे लिक्स... फिर लंबे, गहरे स्ट्रोक्स।
मेरा पूरा चेहरा अब उसके रस में भीगा हुआ था।
उसकी खुशबू... इतनी ओवरवेल्मिंग... कि मैं पूरी तरह सबमिसिव हो गया।
सिर्फ़ एक ही चीज़ चाहिए थी—उसकी चूत खाना... अपनी बीवी की सेवा करना... उसका पर्सनल पुसी-ईटिंग सेक्स स्लेव बनना।
क्या हो गया था मुझे?
क्या सच में ये सब... इतना अच्छा लग रहा था?
नेहा कराह रही थी—अब उसकी आवाज़ में वो क्रूरता नहीं थी।
बस... भूख।
नेहा की जांघें मेरे सिर के दोनों तरफ कस गईं थीं।
उसकी साँसें तेज़... कराहें अब और ऊँची।
"मम्म्म्ह्ह्ह... गुड बॉय..." वो प्यार से गुर्राई, लेकिन उसकी आवाज़ में अब वो डोमिनेंट एज वापस आ गई थी।
मैंने जीभ ऊपर की तरफ खींची—उसकी क्लिट पर तेज़ी से फ्लिक करने लगा।
उसकी चूत गीली थी—रस बह रहा था मेरे होंठों पर, मेरी ठोड़ी पर।
वो चीखी—"उग्ग्ग्ग्ग... येस... राइट देयर... ओह फक... डोन्ट स्टॉप... ओह फक डोन्ट स्टॉप..."
उसकी जांघें मेरे कनपटियों पर दबाव डाल रही थीं—इनवॉलंटरी, जैसे वो खुद को कंट्रोल नहीं कर पा रही हो।
मैंने एक हाथ नीचे किया।
मिडिल फिंगर उसकी चूत के छेद पर रखा।
धीरे से अंदर डाला—गर्म, गीली, टाइट।
"ओह फक..." वो आधी चीखी, आधी कराही।
मैंने फिंगर को अंदर-बाहर करना शुरू किया—धीमे से तेज़।
जीभ अभी भी उसकी क्लिट पर—तेज़, लगातार फ्लिक्स।
"ओह येस... ओह गॉड... ओह येस... ओह गॉड्ड्ड्ड..."
उसकी आवाज़ अब टूट रही थी।
उसने अपना हाथ नीचे किया—मेरे सिर को पकड़कर और ज़ोर से अपनी चूत पर दबाया।
उसकी जांघें काँप रही थीं।
फिर... वो टेंस हुई।
एक छोटा सा रश—उसका रस मेरे मुँह में भर गया।
मैंने जीभ तेज़ की—जितना तेज़ कर सकता था।
फिंगर को जैकहैमर की तरह अंदर-बाहर।
वो दूसरी बार झड़ गई—कुछ ही मिनटों में।
"ओह्ह्ह्ह्ह... फक..."
उसने मेरे सिर को पकड़कर धक्का देने की कोशिश की—जैसे अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा हो।
लेकिन मैं पीछे नहीं हटा।
मैंने जीभ चलानी जारी रखी—धीमी, गहरी स्ट्रोक्स।
उसका रस मेरे पूरे चेहरे पर था।
ठोड़ी, गाल, होंठ—सब गीले।
उसकी मस्की, स्वीट खुशबू मेरे नाक में घुस गई थी।
मैं पूरी तरह सबमिसिव हो गया था।
सिर्फ़ एक ही चीज़ चाहिए थी—उसकी चूत खाना... अपनी बीवी की सेवा करना... उसका पर्सनल पुसी-ईटिंग सेक्स स्लेव बनना।
क्या हो गया था मुझे?


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