19-03-2026, 02:13 PM
नेहा पूरे दिन एक्साइटेड थी।
सुबह से ही वो मेरे कंधे मसाज कर रही थी, मेरे लिए कॉफी बना रही थी, और बीच-बीच में फोन पर आर्टिकल्स शेयर कर रही थी।
"ये देखो... सेफ वर्ड का क्या मतलब होता है।"
"ये पढ़ो... डोमिनेशन में कैसे सेफ्टी रखनी है।"
लेकिन आज... वो मालकिन बनने वाली थी।
मुझे डर था... और एक्साइटमेंट भी था।)
रात हुई।
नेहा ने पहले ही ऑर्डर दे दिया था—
"तुम सिर्फ़ अंडरवियर में रहना... दरवाज़ा खोलने के लिए तैयार रहना।
और... सॉरी इन एडवांस।"
"हमारा सेफ वर्ड... नेगी जी।"
(हमने साथ में पढ़ा था—अगर कुछ एक्सट्रीम हो जाए, या कोई चीज़ हमें असहज लगे, तो बस सेफ वर्ड बोलना।
प्ले रुक जाएगा।
पहले जब मैं मास्टर होता था... हमने ये शब्द कभी यूज़ नहीं किया।
मैं अंडरवियर में ही था—वही काला, टाइट वाला जो उसने चुना था।
दरवाज़े के पास खड़ा था।
दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।
मुझे डर था—कहीं पड़ोसी ने देख लिया तो?
कहीं कोई आ गया तो?
मैं जल्दी-जल्दी दरवाज़ा खोलकर बंद करना चाहता था।
फिर... नॉक हुई।
मैंने दरवाज़ा खोला।
नेहा अंदर आई।
उसने लंबी हाई हील्स पहनी थीं—काली, चमकती हुईं।
जींस टाइट थी—उसकी जांघें और गांड उभरी हुईं।
टी-शर्ट साधारण लेकिन टाइट—उसके स्तन साफ़ नज़र आ रहे थे।
बाल खुले, होंठों पर डार्क लिपस्टिक।
वो मुझे देखकर मुस्कुराई।
फिर... धीरे से, फुसफुसाहट में कहा—
"गुड बॉय..."
मैं दरवाज़ा बंद करने के लिए मुड़ा।
तभी उसकी आवाज़ आई—एकदम सख्त, तेज़, जैसे कोई असली मालकिन डाँट रही हो।
"क्या मैंने तुम्हें दरवाज़ा बंद करने को कहा था, भेनचोद?"
शब्द मेरे कानों में बिजली की तरह गिरे।
"भेनचोद"।
वो शब्द... इतना कड़वा, इतना अपमानजनक।
मैं स्तब्ध रह गया।
मेरा शरीर फ्रीज हो गया।
दरवाज़ा अभी भी खुला था।
मैं सिर्फ़ अंडरवियर में खड़ा था—लगभग नंगा।
अगर कोई बाहर से देख लेता... पड़ोसी... कोई भी...
मैंने सोचा था—नेहा मालकिन बनेगी... लेकिन इतना हार्श?
इतना गंदा?
ये... मेरी उम्मीद से कहीं ज़्यादा था।
मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।
शर्म से चेहरा जल रहा था।
लेकिन... साथ ही... मेरा लुंड... पहले से ज़्यादा सख्त हो गया।
दर्द करने लगा।
नेहा मेरी तरफ मुड़ी।
उसकी आँखों में अब वो मासूमियत नहीं थी।
बस... एक ठंडी, क्रूर कमांडिंग लुक।
वो बोली—आवाज़ में कोई दया नहीं।
"घुटनों पर बैठ...
और पैर फैला... अच्छे से।"
मैं घुटनों पर बैठ गया।
दरवाज़ा अभी भी खुला था।
मेरा शरीर काँप रहा था—शर्म से, डर से, और उत्तेजना से।
मैं लगभग नंगा था—सिर्फ़ वो छोटा अंडरवियर, जो अब मेरे सख्त लुंड की वजह से तन गया था।
अगर कोई बाहर से देख ले... पड़ोसी... कोई भी...
मैंने हल्के से कहा—आवाज़ काँप रही थी—
"बेबी... दरवाज़ा खुला है... कोई देख लेगा..."
चटाक!
एक जोरदार थप्पड़ मेरे गाल पर पड़ा।
दर्द इतना तेज़ था कि मेरी आँखों में पानी आ गया।
मेरा गाल जलने लगा।
उसकी उँगलियों का निशान साफ़ महसूस हो रहा था।
नेहा ने मेरे बाल पकड़े।
मेरा सिर ऊपर खींचा।
उसकी आँखों में अब कोई मासूमियत नहीं थी।
बस... गुस्सा, कमांड, और एक गहरी भूख।
"कौन बेबी???
मुझे मास्टर बोलो, भेनचोद!"
उसकी आवाज़ इतनी तेज़ थी कि मेरे कानों में गूंज गई।
मैं डर गया।
सच में डर गया।
मैंने पहले नेहा को स्लेव बनाया था।
वो अक्सर कहती थी—"मुझे गाल पर थप्पड़ मारो..."
मैं मारता था... लेकिन कभी इतना जोर से नहीं।
हमेशा सोचता था—कहीं उसे चोट न लग जाए।
कहीं दर्द न हो।
लेकिन आज... नेहा ने नहीं सोचा।
उसने जोर से मारा।
मेरा गाल लाल हो गया।
उसकी उँगलियों का निशान साफ़।
और दरवाज़ा खुला था।
अगर कोई बाहर से देख ले... मेरे लाल गाल को... उसकी उँगलियों का निशान...
और मैं... सिर्फ़ अंडरवियर में... घुटनों पर...
मैंने सोचा—उसकी हथेली को भी दर्द हुआ होगा।
लेकिन वो... बिल्कुल नहीं रुकी।
वो मेरे बाल और कसकर पकड़कर बोली—
"अब... फिर से... मास्टर बोलो।
और घुटनों पर... पैर फैलाओ।
अगर कोई देख लेगा... तो देख लेगा।
मैं घुटनों पर बैठा था... पैर फैले हुए... नेहा के सामने।
मेरा पूरा शरीर काँप रहा था—शर्म से, डर से, और एक अजीब सी उत्तेजना से।
दरवाज़ा अभी भी खुला था।
नेहा की पीठ दरवाज़े की तरफ थी—उसकी टाइट जींस में उसकी गांड साफ़ नज़र आ रही थी।
और मैं... लगभग नंगा... सिर्फ़ वो छोटा अंडरवियर... जो मेरे सख्त लुंड की वजह से तन गया था।
अगर कोई बाहर से देख ले... तो सीधा 60 डिग्री एंगल से... सब कुछ दिख जाएगा।
तभी... बाहर से एक आवाज़ आई।
पैरों की आहट।
हमारे फ्लोर पर 8 फ्लैट हैं।
ज्यादातर लोग लिफ्ट यूज़ करते हैं... लेकिन वही फ्लोर वाले कभी-कभी गलियारे में घूमते हैं।
मैंने सिर थोड़ा उठाया।
और... गुप्ता जी।
हमारे बगल वाले फ्लैट वाले।
50 - 55 साल के... हमेशा हेलो-हाय करने वाले।
उनकी नज़र मुझ पर पड़ी।
फिर... नेहा की पीठ पर... उसकी टाइट जींस में उभरी गांड पर।
हमारी आँखें मिलीं—एक सेकंड के लिए।
उनकी आँखें थोड़ी चौड़ी हो गईं।
मैं... घुटनों पर... लगभग नंगा... नेहा के सामने।
और नेहा... दरवाज़े की तरफ पीठ करके... मालकिन बनकर खड़ी।
गुप्ता जी ने कुछ नहीं कहा।
बस... गुज़र गए।
3 - 4 सेकंड का वक्त था।
पता नहीं... उन्होंने कितना समझा।
पता नहीं... कितना देखा।
लेकिन... शुक्र है... वो रुके नहीं।
"हाय" कहने भी नहीं रुके।
बस... चले गए।
मेरा चेहरा जल रहा था।
गाल पर नेहा का थप्पड़ का निशान अभी भी दर्द कर रहा था।
मेरा लुंड... फिर भी सख्त था।
सुबह से ही वो मेरे कंधे मसाज कर रही थी, मेरे लिए कॉफी बना रही थी, और बीच-बीच में फोन पर आर्टिकल्स शेयर कर रही थी।
"ये देखो... सेफ वर्ड का क्या मतलब होता है।"
"ये पढ़ो... डोमिनेशन में कैसे सेफ्टी रखनी है।"
लेकिन आज... वो मालकिन बनने वाली थी।
मुझे डर था... और एक्साइटमेंट भी था।)
रात हुई।
नेहा ने पहले ही ऑर्डर दे दिया था—
"तुम सिर्फ़ अंडरवियर में रहना... दरवाज़ा खोलने के लिए तैयार रहना।
और... सॉरी इन एडवांस।"
"हमारा सेफ वर्ड... नेगी जी।"
(हमने साथ में पढ़ा था—अगर कुछ एक्सट्रीम हो जाए, या कोई चीज़ हमें असहज लगे, तो बस सेफ वर्ड बोलना।
प्ले रुक जाएगा।
पहले जब मैं मास्टर होता था... हमने ये शब्द कभी यूज़ नहीं किया।
मैं अंडरवियर में ही था—वही काला, टाइट वाला जो उसने चुना था।
दरवाज़े के पास खड़ा था।
दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।
मुझे डर था—कहीं पड़ोसी ने देख लिया तो?
कहीं कोई आ गया तो?
मैं जल्दी-जल्दी दरवाज़ा खोलकर बंद करना चाहता था।
फिर... नॉक हुई।
मैंने दरवाज़ा खोला।
नेहा अंदर आई।
उसने लंबी हाई हील्स पहनी थीं—काली, चमकती हुईं।
जींस टाइट थी—उसकी जांघें और गांड उभरी हुईं।
टी-शर्ट साधारण लेकिन टाइट—उसके स्तन साफ़ नज़र आ रहे थे।
बाल खुले, होंठों पर डार्क लिपस्टिक।
वो मुझे देखकर मुस्कुराई।
फिर... धीरे से, फुसफुसाहट में कहा—
"गुड बॉय..."
मैं दरवाज़ा बंद करने के लिए मुड़ा।
तभी उसकी आवाज़ आई—एकदम सख्त, तेज़, जैसे कोई असली मालकिन डाँट रही हो।
"क्या मैंने तुम्हें दरवाज़ा बंद करने को कहा था, भेनचोद?"
शब्द मेरे कानों में बिजली की तरह गिरे।
"भेनचोद"।
वो शब्द... इतना कड़वा, इतना अपमानजनक।
मैं स्तब्ध रह गया।
मेरा शरीर फ्रीज हो गया।
दरवाज़ा अभी भी खुला था।
मैं सिर्फ़ अंडरवियर में खड़ा था—लगभग नंगा।
अगर कोई बाहर से देख लेता... पड़ोसी... कोई भी...
मैंने सोचा था—नेहा मालकिन बनेगी... लेकिन इतना हार्श?
इतना गंदा?
ये... मेरी उम्मीद से कहीं ज़्यादा था।
मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।
शर्म से चेहरा जल रहा था।
लेकिन... साथ ही... मेरा लुंड... पहले से ज़्यादा सख्त हो गया।
दर्द करने लगा।
नेहा मेरी तरफ मुड़ी।
उसकी आँखों में अब वो मासूमियत नहीं थी।
बस... एक ठंडी, क्रूर कमांडिंग लुक।
वो बोली—आवाज़ में कोई दया नहीं।
"घुटनों पर बैठ...
और पैर फैला... अच्छे से।"
मैं घुटनों पर बैठ गया।
दरवाज़ा अभी भी खुला था।
मेरा शरीर काँप रहा था—शर्म से, डर से, और उत्तेजना से।
मैं लगभग नंगा था—सिर्फ़ वो छोटा अंडरवियर, जो अब मेरे सख्त लुंड की वजह से तन गया था।
अगर कोई बाहर से देख ले... पड़ोसी... कोई भी...
मैंने हल्के से कहा—आवाज़ काँप रही थी—
"बेबी... दरवाज़ा खुला है... कोई देख लेगा..."
चटाक!
एक जोरदार थप्पड़ मेरे गाल पर पड़ा।
दर्द इतना तेज़ था कि मेरी आँखों में पानी आ गया।
मेरा गाल जलने लगा।
उसकी उँगलियों का निशान साफ़ महसूस हो रहा था।
नेहा ने मेरे बाल पकड़े।
मेरा सिर ऊपर खींचा।
उसकी आँखों में अब कोई मासूमियत नहीं थी।
बस... गुस्सा, कमांड, और एक गहरी भूख।
"कौन बेबी???
मुझे मास्टर बोलो, भेनचोद!"
उसकी आवाज़ इतनी तेज़ थी कि मेरे कानों में गूंज गई।
मैं डर गया।
सच में डर गया।
मैंने पहले नेहा को स्लेव बनाया था।
वो अक्सर कहती थी—"मुझे गाल पर थप्पड़ मारो..."
मैं मारता था... लेकिन कभी इतना जोर से नहीं।
हमेशा सोचता था—कहीं उसे चोट न लग जाए।
कहीं दर्द न हो।
लेकिन आज... नेहा ने नहीं सोचा।
उसने जोर से मारा।
मेरा गाल लाल हो गया।
उसकी उँगलियों का निशान साफ़।
और दरवाज़ा खुला था।
अगर कोई बाहर से देख ले... मेरे लाल गाल को... उसकी उँगलियों का निशान...
और मैं... सिर्फ़ अंडरवियर में... घुटनों पर...
मैंने सोचा—उसकी हथेली को भी दर्द हुआ होगा।
लेकिन वो... बिल्कुल नहीं रुकी।
वो मेरे बाल और कसकर पकड़कर बोली—
"अब... फिर से... मास्टर बोलो।
और घुटनों पर... पैर फैलाओ।
अगर कोई देख लेगा... तो देख लेगा।
मैं घुटनों पर बैठा था... पैर फैले हुए... नेहा के सामने।
मेरा पूरा शरीर काँप रहा था—शर्म से, डर से, और एक अजीब सी उत्तेजना से।
दरवाज़ा अभी भी खुला था।
नेहा की पीठ दरवाज़े की तरफ थी—उसकी टाइट जींस में उसकी गांड साफ़ नज़र आ रही थी।
और मैं... लगभग नंगा... सिर्फ़ वो छोटा अंडरवियर... जो मेरे सख्त लुंड की वजह से तन गया था।
अगर कोई बाहर से देख ले... तो सीधा 60 डिग्री एंगल से... सब कुछ दिख जाएगा।
तभी... बाहर से एक आवाज़ आई।
पैरों की आहट।
हमारे फ्लोर पर 8 फ्लैट हैं।
ज्यादातर लोग लिफ्ट यूज़ करते हैं... लेकिन वही फ्लोर वाले कभी-कभी गलियारे में घूमते हैं।
मैंने सिर थोड़ा उठाया।
और... गुप्ता जी।
हमारे बगल वाले फ्लैट वाले।
50 - 55 साल के... हमेशा हेलो-हाय करने वाले।
उनकी नज़र मुझ पर पड़ी।
फिर... नेहा की पीठ पर... उसकी टाइट जींस में उभरी गांड पर।
हमारी आँखें मिलीं—एक सेकंड के लिए।
उनकी आँखें थोड़ी चौड़ी हो गईं।
मैं... घुटनों पर... लगभग नंगा... नेहा के सामने।
और नेहा... दरवाज़े की तरफ पीठ करके... मालकिन बनकर खड़ी।
गुप्ता जी ने कुछ नहीं कहा।
बस... गुज़र गए।
3 - 4 सेकंड का वक्त था।
पता नहीं... उन्होंने कितना समझा।
पता नहीं... कितना देखा।
लेकिन... शुक्र है... वो रुके नहीं।
"हाय" कहने भी नहीं रुके।
बस... चले गए।
मेरा चेहरा जल रहा था।
गाल पर नेहा का थप्पड़ का निशान अभी भी दर्द कर रहा था।
मेरा लुंड... फिर भी सख्त था।


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