19-03-2026, 02:06 PM
सुबह देर से उठा।
शरीर पर सब कुछ सूखकर चिपक गया था—रस, पसीना, सब क्रस्टी और स्टिकी।
सोचा, पहले शावर ले लूँ।
गर्म पानी के नीचे खड़ा हो गया।
बहुत देर तक खड़ा रहा—सब धुल गया।
पुरानी शॉर्ट्स पहनी, नेहा के लिए एक आउटफिट निकाला—काला शीयर स्टॉकिंग, 5 इंच की हाई हील्स वाली सैंडल, और छोटा-सा ब्लैक टॉप जो उसके स्तनों को मुश्किल से कवर करता था।
कॉफी बनाई।
लाउंजर पर बैठ गया।
तभी नेहा किचन में आई।
उसने वो आउटफिट पहन रखा था—लंबी, शीयर ब्लैक स्टॉकिंग्स, जो उसकी जांघों तक पहुँच रही थीं।
हील्स में चलती हुई वो मेरे पास आई।
उसकी आवाज़ में वो नौकरानी वाली मीठी-मीठी टोन—
"सर... आपको कुछ और चाहिए?"
मैंने एक सेकंड में समझ लिया—वो अभी भी कैरेक्टर में है।
हमने रविवार को स्लेव-मास्टर रोल प्ले करने का फैसला किया था।
मैंने उसे ऊपर से नीचे तक देखा।
वो खड़ी थी—सीधी, आज्ञाकारी, जैसे कोई परफेक्ट सर्वेंट।
स्टॉकिंग्स उसकी जांघों को चमका रही थीं, टॉप से उसके स्तन झूल रहे थे।
मैंने कॉफी का कप उसकी तरफ इशारा किया।
"और कॉफी लाओ।"
"जी सर।"
वो झुकी—धीरे-धीरे, जानबूझकर।
उसके स्तन मेरे चेहरे के सामने झूल गए—बड़े, नरम, निप्पल्स सख्त।
मैंने देखा, महसूस किया—उसकी खुशबू, उसकी गर्मी।
वो कॉफी लेकर आई।
फिर बोली—
"सर... और कोई तरीका जिसमें मैं आपकी सेवा करूँ?"
मैंने शॉर्ट्स का इलास्टिक पकड़ा।
धीरे से नीचे सरकाया।
मेरा लुंड बाहर आया—सख्त, फड़कता हुआ।
बॉल्स नीचे लटक रहे थे।
नेहा ने देखा।
उसकी आँखें चमकीं।
"हाँ सर... ओरली... या वैजाइनली?"
मैंने थोड़ा सोचने का नाटक किया।
फिर बोला—
"मुँह से... हाँ... तुम्हारा मुँह।
बाकी बाद में।"
"बहुत अच्छा सर।"
वो मेरी जांघों के बीच घुटनों पर बैठ गई।
उसने मेरा लुंड हाथ में लिया।
धीरे से जीभ लगाई—हेड पर।
फिर मुँह में लिया।
धीरे-धीरे... गले तक।
वो चूसने लगी—वर्ल्ड क्लास ब्लोजॉब।
मैंने उसके बाल पकड़े।
धीरे से धक्का दिया।
वो गैग कर रही थी—लेकिन रुकी नहीं।
उसकी लार बह रही थी—मेरे लुंड पर, मेरी जांघों पर।
फिर उसने मुँह निकाला।
मेरी आँखों में देखा।
"सर... क्या मैं आपको टिटफक भी करूँ?"
मैंने हामी भरी।
वो मुस्कुराई।
अपने स्तन मेरे लुंड के दोनों तरफ दबाए।
उन्हें कसकर पकड़ा।
ऊपर-नीचे किया।
हर बार हेड उसके होंठों से छूता—वो चूस लेती।
मैंने झड़ दिया—उसके स्तनों पर, उसके चेहरे पर।
वो जीभ से चाटती रही।
उसकी उँगलियाँ कम उठाकर चाट रही थीं।
फिर... वो उठी।
मेरे सामने खड़ी हुई।
"सर... अब क्या सजा देंगे?"
मैंने मुस्कुराया।
"आज पूरा दिन... तुम मेरी हो।
और मैं... तुम्हारा मालिक।"
वो मुस्कुराई।
"जी सर।"
दिन भर... वो मेरी सेवा करती रही।
कभी कॉफी लाई।
कभी मसाज दी।
कभी बिस्तर पर चुदाई।
कभी किचन में।
कभी लिविंग रूम में।
और मैं... हर बार उसे झड़ाता।
हर बार... उसे सजा देता।
6 महीने हो गए थे।
हमने रोल प्ले में बहुत कुछ ट्राई किया।
मैंने कई बार मास्टर बनकर नेहा को "कुत्ती" बनाया।
उसे स्पैंक किया, बाल खींचे, आदेश दिए, चोदा।
नेहा को मज़ा आता था—वो चीखती, कराहती, झड़ती।
हर बार कैरेक्टर में रहती, लेकिन... मुझे लगता था कि मैं सच में मास्टर नहीं बन पा रहा।
मैं हमेशा अंदर से सबमिसिव फील करता था।
मेरा दिमाग... बचपन से... किसी के नीचे रहने का, आज्ञा मानने का...
डॉमिनेट करने में... वो फील नहीं आती।
मैं बस... नेहा को खुश करने के लिए करता था।
एक दिन मैंने नेहा से कहा—
"नेहा... अब तुम मास्टर बनो।
मैं... तुम्हारा स्लेव बनूँगा।
तुम... मुझे जो चाहो... वो करो।"
नेहा ने पहले मना किया।
"नहीं सैम... अगर मैं कैरेक्टर में गई... तो कहीं तुम्हें बुरा न लगे।
मैं... तुम्हें ऑफेंड नहीं करना चाहती।"
मैंने बहुत मनाया।
कई दिन बात की।
कहा—"ये सिर्फ़ खेल है।
मैं चाहता हूँ... तुम्हारी आज्ञा मानना... तुम्हारे नीचे रहना।
मुझे अच्छा लगेगा।"
आखिरकार... वो मान गई।
शरीर पर सब कुछ सूखकर चिपक गया था—रस, पसीना, सब क्रस्टी और स्टिकी।
सोचा, पहले शावर ले लूँ।
गर्म पानी के नीचे खड़ा हो गया।
बहुत देर तक खड़ा रहा—सब धुल गया।
पुरानी शॉर्ट्स पहनी, नेहा के लिए एक आउटफिट निकाला—काला शीयर स्टॉकिंग, 5 इंच की हाई हील्स वाली सैंडल, और छोटा-सा ब्लैक टॉप जो उसके स्तनों को मुश्किल से कवर करता था।
कॉफी बनाई।
लाउंजर पर बैठ गया।
तभी नेहा किचन में आई।
उसने वो आउटफिट पहन रखा था—लंबी, शीयर ब्लैक स्टॉकिंग्स, जो उसकी जांघों तक पहुँच रही थीं।
हील्स में चलती हुई वो मेरे पास आई।
उसकी आवाज़ में वो नौकरानी वाली मीठी-मीठी टोन—
"सर... आपको कुछ और चाहिए?"
मैंने एक सेकंड में समझ लिया—वो अभी भी कैरेक्टर में है।
हमने रविवार को स्लेव-मास्टर रोल प्ले करने का फैसला किया था।
मैंने उसे ऊपर से नीचे तक देखा।
वो खड़ी थी—सीधी, आज्ञाकारी, जैसे कोई परफेक्ट सर्वेंट।
स्टॉकिंग्स उसकी जांघों को चमका रही थीं, टॉप से उसके स्तन झूल रहे थे।
मैंने कॉफी का कप उसकी तरफ इशारा किया।
"और कॉफी लाओ।"
"जी सर।"
वो झुकी—धीरे-धीरे, जानबूझकर।
उसके स्तन मेरे चेहरे के सामने झूल गए—बड़े, नरम, निप्पल्स सख्त।
मैंने देखा, महसूस किया—उसकी खुशबू, उसकी गर्मी।
वो कॉफी लेकर आई।
फिर बोली—
"सर... और कोई तरीका जिसमें मैं आपकी सेवा करूँ?"
मैंने शॉर्ट्स का इलास्टिक पकड़ा।
धीरे से नीचे सरकाया।
मेरा लुंड बाहर आया—सख्त, फड़कता हुआ।
बॉल्स नीचे लटक रहे थे।
नेहा ने देखा।
उसकी आँखें चमकीं।
"हाँ सर... ओरली... या वैजाइनली?"
मैंने थोड़ा सोचने का नाटक किया।
फिर बोला—
"मुँह से... हाँ... तुम्हारा मुँह।
बाकी बाद में।"
"बहुत अच्छा सर।"
वो मेरी जांघों के बीच घुटनों पर बैठ गई।
उसने मेरा लुंड हाथ में लिया।
धीरे से जीभ लगाई—हेड पर।
फिर मुँह में लिया।
धीरे-धीरे... गले तक।
वो चूसने लगी—वर्ल्ड क्लास ब्लोजॉब।
मैंने उसके बाल पकड़े।
धीरे से धक्का दिया।
वो गैग कर रही थी—लेकिन रुकी नहीं।
उसकी लार बह रही थी—मेरे लुंड पर, मेरी जांघों पर।
फिर उसने मुँह निकाला।
मेरी आँखों में देखा।
"सर... क्या मैं आपको टिटफक भी करूँ?"
मैंने हामी भरी।
वो मुस्कुराई।
अपने स्तन मेरे लुंड के दोनों तरफ दबाए।
उन्हें कसकर पकड़ा।
ऊपर-नीचे किया।
हर बार हेड उसके होंठों से छूता—वो चूस लेती।
मैंने झड़ दिया—उसके स्तनों पर, उसके चेहरे पर।
वो जीभ से चाटती रही।
उसकी उँगलियाँ कम उठाकर चाट रही थीं।
फिर... वो उठी।
मेरे सामने खड़ी हुई।
"सर... अब क्या सजा देंगे?"
मैंने मुस्कुराया।
"आज पूरा दिन... तुम मेरी हो।
और मैं... तुम्हारा मालिक।"
वो मुस्कुराई।
"जी सर।"
दिन भर... वो मेरी सेवा करती रही।
कभी कॉफी लाई।
कभी मसाज दी।
कभी बिस्तर पर चुदाई।
कभी किचन में।
कभी लिविंग रूम में।
और मैं... हर बार उसे झड़ाता।
हर बार... उसे सजा देता।
6 महीने हो गए थे।
हमने रोल प्ले में बहुत कुछ ट्राई किया।
मैंने कई बार मास्टर बनकर नेहा को "कुत्ती" बनाया।
उसे स्पैंक किया, बाल खींचे, आदेश दिए, चोदा।
नेहा को मज़ा आता था—वो चीखती, कराहती, झड़ती।
हर बार कैरेक्टर में रहती, लेकिन... मुझे लगता था कि मैं सच में मास्टर नहीं बन पा रहा।
मैं हमेशा अंदर से सबमिसिव फील करता था।
मेरा दिमाग... बचपन से... किसी के नीचे रहने का, आज्ञा मानने का...
डॉमिनेट करने में... वो फील नहीं आती।
मैं बस... नेहा को खुश करने के लिए करता था।
एक दिन मैंने नेहा से कहा—
"नेहा... अब तुम मास्टर बनो।
मैं... तुम्हारा स्लेव बनूँगा।
तुम... मुझे जो चाहो... वो करो।"
नेहा ने पहले मना किया।
"नहीं सैम... अगर मैं कैरेक्टर में गई... तो कहीं तुम्हें बुरा न लगे।
मैं... तुम्हें ऑफेंड नहीं करना चाहती।"
मैंने बहुत मनाया।
कई दिन बात की।
कहा—"ये सिर्फ़ खेल है।
मैं चाहता हूँ... तुम्हारी आज्ञा मानना... तुम्हारे नीचे रहना।
मुझे अच्छा लगेगा।"
आखिरकार... वो मान गई।


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