17-03-2026, 10:30 PM
शांति देवी पहले ही उठकर देवघर में पूजा की तैयारी कर रही थीं। पीतल के दीये में घी डालकर बाती सुलगा रही थीं। अगरबत्ती की हल्की सुगंध पूरे घर में फैल रही थी।
तभी उनकी नज़र दरवाज़े पर खड़ी कल्याणी पर पड़ी।
भीगे बाल, हल्की थकान, और चेहरे पर एक अलग-सी चमक…
शांति देवी के होंठों पर एक नटखट-सी मुस्कान आ गई।
उनकी आँखों में जैसे एक हल्की शरारत थी—
जैसे उन्हें सब समझ में आ गया हो कि बहू आज थोड़ी देर से क्यों आई है।
आ गई बहू? आज तो पूजा की थाली तैयार करने में मुझे भी थोड़ा ज़्यादा समय लग गया... और लगता है तुझे भी कुछ 'ज़रुरी कामों' ने रोक लिया था।" और एक हल्की मुस्कान दी।
कल्याणी ने तुरंत नज़रें झुका लीं।
उसके चेहरे पर हल्की-सी लाज उतर आई।
“माँजी…” बस इतना ही कह पाई और जल्दी से रसोई की ओर बढ़ गई।
पीछे से शांति देवी मन ही मन मुस्कुराईं—
“शांति देवी उसे जाते देख मन ही मन खुश हो रही थीं कि उनके बेटे और बहू के बीच आज भी वही पहले जैसा प्रेम बना हुआ है।…”
रसोई में किमाया पहले से ही काम में लगी हुई थी।
तवे पर कुछ हल्का-सा सेंक रही थी और चाय भी चढ़ा रखी थी।
कल्याणी अंदर दाखिल हुई, जैसे ही उसने कल्याणी को देखा, किमाया ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा और अपनी हंसी को दबाने की नाकाम कोशिश की। उसके चेहरे पर भी एक शरारती मुस्कान आ गई।
वह अपनी हँसी रोकने की कोशिश कर रही थी, पर आँखें सब बयां कर रही थीं।
“मम्मी…” उसने धीरे से कहा,
“आप जाओ, मैं संभाल लूँगी ब्रेकफास्ट।” आप बस जाकर आराम कीजिए।"
कल्याणी ने थोड़ा सख्त, पर प्यार भरे अंदाज़ में कहा—
“(हड़बड़ाते हुए) "अरे नहीं-नहीं, तू हट! तुझे अभी ऑफिस जाना है। इतनी सुबह-सुबह रसोई में मेहनत करेगी, तो ऑफिस में जाकर नींद आएगी। ला, मुझे दे।”
किमाया ने मुस्कुराकर जवाब दिया—
फिर वह थोड़ा पास आई, कल्याणी के चेहरे को ध्यान से देखते हुए बोली—
“(मम्मी के गले में हाथ डालते हुए)उसने हल्के से छेड़ते हुए कहा— "मम्मी, एक दिन से कुछ नहीं होता। और सच कहूँ... तो आप आज कुछ ज़्यादा ही थकी हुई लग रही हैं। चेहरे पर तो थकान है, पर आँखों में बहुत चमक है। क्या बात है?”
“और वैसे भी… आप ही तो रोज़ इतना काम करती हो।”
और फिर एक नॉटी स्माइल दे दी।
कल्याणी तुरंत समझ गई कि बेटी क्या इशारा कर रही है।
“किमाया!” उसने हल्के से डाँटते हुए कहा,
“ज़्यादा स्मार्ट मत बनो।” जा जाकर तैयार हो जा।
किमाया हँस पड़ी— (चुटकी लेते हुए) "मैं तो जा रही हूँ मम्मा, पर अगली बार 'अपॉइंटमेंट' थोड़ा जल्दी फिक्स किया कीजिए, ताकि ब्रेकफास्ट लेट न हो!" मैं तो बस आपकी चिंता कर रही हूँ।”
फिर धीरे से बोली—
“मम्मी, मज़ाक अपनी जगह है, पर मैं सच कह रही हूँ। आप इस घर के लिए, पापा के लिए और हम सबके लिए इतनी मेहनत करती हैं कि कभी-कभी अपना ख्याल रखना ही भूल जाती हैं। पापा लकी हैं कि उन्हें आप मिलीं, और मैं लकी हूँ कि आप मेरी माँ के साथ-साथ मेरी बेस्ट फ्रेंड भी हैं।"”
उसकी आवाज़ में मज़ाक भी था और सच्चा प्यार भी।
कल्याणी की आँखों में ममता भर आई। उसने किमाया का माथा चूमा और बोली, "यही प्यार तो मेरी सारी थकान मिटा देता है बेटा। जब परिवार में इतना सुकून हो, तो मेहनत, मेहनत नहीं लगती।"
उसने किमाया के सिर पर हल्के से हाथ फेरा—
“पगली… माँ का ख्याल बच्चे नहीं रखते, माँ ही बच्चों का ख्याल रखती है।”
किमाया ने तुरंत जवाब दिया—
“तो आज रोल रिवर्स हो गया है।”
दोनों हँस पड़ीं।
तभी उनकी नज़र दरवाज़े पर खड़ी कल्याणी पर पड़ी।
भीगे बाल, हल्की थकान, और चेहरे पर एक अलग-सी चमक…
शांति देवी के होंठों पर एक नटखट-सी मुस्कान आ गई।
उनकी आँखों में जैसे एक हल्की शरारत थी—
जैसे उन्हें सब समझ में आ गया हो कि बहू आज थोड़ी देर से क्यों आई है।
आ गई बहू? आज तो पूजा की थाली तैयार करने में मुझे भी थोड़ा ज़्यादा समय लग गया... और लगता है तुझे भी कुछ 'ज़रुरी कामों' ने रोक लिया था।" और एक हल्की मुस्कान दी।
कल्याणी ने तुरंत नज़रें झुका लीं।
उसके चेहरे पर हल्की-सी लाज उतर आई।
“माँजी…” बस इतना ही कह पाई और जल्दी से रसोई की ओर बढ़ गई।
पीछे से शांति देवी मन ही मन मुस्कुराईं—
“शांति देवी उसे जाते देख मन ही मन खुश हो रही थीं कि उनके बेटे और बहू के बीच आज भी वही पहले जैसा प्रेम बना हुआ है।…”
रसोई में किमाया पहले से ही काम में लगी हुई थी।
तवे पर कुछ हल्का-सा सेंक रही थी और चाय भी चढ़ा रखी थी।
कल्याणी अंदर दाखिल हुई, जैसे ही उसने कल्याणी को देखा, किमाया ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा और अपनी हंसी को दबाने की नाकाम कोशिश की। उसके चेहरे पर भी एक शरारती मुस्कान आ गई।
वह अपनी हँसी रोकने की कोशिश कर रही थी, पर आँखें सब बयां कर रही थीं।
“मम्मी…” उसने धीरे से कहा,
“आप जाओ, मैं संभाल लूँगी ब्रेकफास्ट।” आप बस जाकर आराम कीजिए।"
कल्याणी ने थोड़ा सख्त, पर प्यार भरे अंदाज़ में कहा—
“(हड़बड़ाते हुए) "अरे नहीं-नहीं, तू हट! तुझे अभी ऑफिस जाना है। इतनी सुबह-सुबह रसोई में मेहनत करेगी, तो ऑफिस में जाकर नींद आएगी। ला, मुझे दे।”
किमाया ने मुस्कुराकर जवाब दिया—
फिर वह थोड़ा पास आई, कल्याणी के चेहरे को ध्यान से देखते हुए बोली—
“(मम्मी के गले में हाथ डालते हुए)उसने हल्के से छेड़ते हुए कहा— "मम्मी, एक दिन से कुछ नहीं होता। और सच कहूँ... तो आप आज कुछ ज़्यादा ही थकी हुई लग रही हैं। चेहरे पर तो थकान है, पर आँखों में बहुत चमक है। क्या बात है?”
“और वैसे भी… आप ही तो रोज़ इतना काम करती हो।”
और फिर एक नॉटी स्माइल दे दी।
कल्याणी तुरंत समझ गई कि बेटी क्या इशारा कर रही है।
“किमाया!” उसने हल्के से डाँटते हुए कहा,
“ज़्यादा स्मार्ट मत बनो।” जा जाकर तैयार हो जा।
किमाया हँस पड़ी— (चुटकी लेते हुए) "मैं तो जा रही हूँ मम्मा, पर अगली बार 'अपॉइंटमेंट' थोड़ा जल्दी फिक्स किया कीजिए, ताकि ब्रेकफास्ट लेट न हो!" मैं तो बस आपकी चिंता कर रही हूँ।”
फिर धीरे से बोली—
“मम्मी, मज़ाक अपनी जगह है, पर मैं सच कह रही हूँ। आप इस घर के लिए, पापा के लिए और हम सबके लिए इतनी मेहनत करती हैं कि कभी-कभी अपना ख्याल रखना ही भूल जाती हैं। पापा लकी हैं कि उन्हें आप मिलीं, और मैं लकी हूँ कि आप मेरी माँ के साथ-साथ मेरी बेस्ट फ्रेंड भी हैं।"”
उसकी आवाज़ में मज़ाक भी था और सच्चा प्यार भी।
कल्याणी की आँखों में ममता भर आई। उसने किमाया का माथा चूमा और बोली, "यही प्यार तो मेरी सारी थकान मिटा देता है बेटा। जब परिवार में इतना सुकून हो, तो मेहनत, मेहनत नहीं लगती।"
उसने किमाया के सिर पर हल्के से हाथ फेरा—
“पगली… माँ का ख्याल बच्चे नहीं रखते, माँ ही बच्चों का ख्याल रखती है।”
किमाया ने तुरंत जवाब दिया—
“तो आज रोल रिवर्स हो गया है।”
दोनों हँस पड़ीं।


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