17-03-2026, 09:49 AM
(This post was last modified: 17-03-2026, 09:51 AM by Life_is_short. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
मेरा दिमाग तेज़ी से चलने लगा।
मैं जानता था कि मुझे नेहा से क्या चाहिए।
मैं चाहता था कि वो किसी और की तरह बने... किसी और आदमी के साथ... और मैं देखूँ।
लेकिन... मैं नहीं चाहता था कि वो मेरे गंदे दिमाग के बारे में जाने।
मुझे डर था—अगर एकदम से बहुत हेवी कर दिया तो ६ महीने में मज़ा खत्म हो जाएगा।
ये आइडिया अभी मेरे लुंड के लिए बहुत काम कर रहा है।
हर बार सोचते ही खड़ा हो जाता है।
तो मैंने सोचा—धीरे-धीरे शुरू करेंगे।
पहले कुछ लाइट... कुछ रोमांटिक... फिर धीरे-धीरे गंदा।
दिन भर नॉर्मल गुज़रा।
शाम हुई।
नेहा ऑफिस से मैसेज कर रही थी।
नेहा: बेबी... आज रात रोल प्ले ट्राई करेंगे?
मैंने तुरंत रिप्लाई किया।
मैं: हाँ... आज रात।
तुम तैयार रहना।
पहले... तुम बताओ... आज रात तुम किसके साथ होना चाहती हो?
किसका रोल प्ले करोगी?
नेहा ने थोड़ी देर में रिप्लाई किया।
एक ब्लश इमोजी के साथ।
नेहा: हृतिक रोशन
मेरा फेवरेट हीरो।
फिर एक और मैसेज—
नेहा: मैं तो ऑफिस में बैठी हूँ... और पहले से ही गीली हो गई हूँ
मेरा लुंड एकदम सख्त हो गया।
ऑफिस में बैठी नेहा... मेरे मैसेज पढ़कर... गीली हो रही है।
मैंने सोचा—ये तो शुरुआत है।
मैं: अच्छा... तो आज रात... हृतिक रोशन तुम्हें चोदेगा।
तुम तैयार रहना... मेरी जान।
नेहा: हाँ... तैयार हूँ
घर आकर बताऊँगी... क्या करना है।
मैंने फोन साइड में रखा।
दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।
लुंड पैंट में फड़क रहा था।
रात आने वाली थी।
और आज रात... नेहा हृतिक रोशन के साथ सोएगी।
मेरे सामने।
और मैं... बस... देखूँगा।
दरवाज़ा खुलते ही नेहा अंदर आई।
वो साड़ी में थी—वही लाल वाली, जो उसके कर्व्स को और हाईलाइट करती है।
पल्लू थोड़ा सरका हुआ था, कमर नंगी दिख रही थी।
उसने मुझे देखा—एक सेकंड के लिए रुकी, फिर मुस्कुराई।
उसकी आँखों में वो शरारत थी, जो मुझे पागल कर देती है।
"ओह्ह... हृतिक... आप यहाँ... कैसे?"
वो पूरी तरह कैरेक्टर में थी।
मैं भी।
मैंने दरवाज़ा बंद किया।
धीरे से उसकी तरफ बढ़ा।
गहरी, भारी आवाज़ में बोला—हृतिक वाला टोन।
"मैं यहाँ तुम्हारे हसबैंड की कंपनी के ऐड शूट के लिए आया था।
वो मुझे घर पर बुलाया... कहा कि उनकी वाइफ मेरा बहुत बड़ा फैन है।
तुम्हारी फोटोज़ भी दिखाईं... और बोले कि तुम मेरे लिए कुछ भी कर सकती हो।"
नेहा ने आँखें नीची कीं—शरमाते हुए।
फिर धीरे से मेरे करीब आई।
उसने मुझे हग कर लिया।
उसके स्तन मेरी छाती से दबे।
मैंने उसकी कमर पकड़ी—फिर धीरे से नीचे हाथ सरकाया।
उसकी गांड पर।
नरम, गोल, गरम।
वो एकदम अलग हुई।
हाथ से मेरी छाती धकेली—नाटकीय तरीके से।
"क्या कर रहे हो... मैं शादीशुदा हूँ!"
उसकी आवाज़ में वो नखरे थे—लेकिन आँखों में शरारत।
मैंने मुस्कुराया—हृतिक वाला कॉन्फिडेंट स्माइल।
उसके करीब आया।
उसकी कमर फिर से पकड़ी।
"लेकिन तुम्हारा हसबैंड ने कहा... तुम मेरे लिए कुछ भी कर सकती हो।
और मैं... तुम्हारी गांड को छूना चाहता हूँ।
अगर मैं चाहूँ तो... और भी ज़्यादा।"
नेहा ने होंठ काटे।
शरमाते हुए बोली—
"ओह्ह... आप बहुत नॉटी हैं हृतिक..."
मैंने उसके कान के पास मुँह ले जाकर फुसफुसाया—
"तुमने अभी कुछ भी नहीं देखा... मेरी जान।"
फिर... मैंने झुककर उसके होंठों पर किस किया।
धीरे से।
पहले सिर्फ़ होंठ छुए।
फिर जीभ अंदर डाली।
वो मेरे साथ बह गई—उसने मेरी गर्दन पकड़ी, मुझे और करीब खींचा।
हमारे किस में वो भूख थी—जैसे महीनों से रुकी हुई हो।
मैंने उसकी साड़ी का पल्लू खींचा।
वो सरककर गिर गया।
उसकी ब्लाउज़ में उसके स्तन उभरे हुए।
मैंने एक हाथ से उसके स्तन पकड़े—जोर से।
दूसरे हाथ से उसकी गांड दबाई।
वो कराही—"आह्ह... हृतिक... धीरे..."
मैंने उसके कान में कहा—
"धीरे नहीं... आज रात... मैं तुम्हें वैसा चोदूँगा... जैसा तुमने कभी सोचा भी नहीं।
तुम्हारा हसबैंड... बस... देखेगा।"
नेहा ने मेरी आँखों में देखा।
उसकी साँसें तेज़ थीं।
वो धीरे से बोली—
"तो... देखने दो...
आज रात... मैं सिर्फ़ तुम्हारी हूँ।"
मैंने उसे गोद में उठाया।
बेडरूम की तरफ ले गया।
बिस्तर पर पटक दिया।
वो हँसी—शरारती हँसी।
"अब... हृतिक... दिखाओ... कितने अच्छे हो तुम।"
मैंने उसकी साड़ी पूरी उतारी।
ब्लाउज़ खोला।
ब्रा उतारी।
उसके स्तन बाहर—गोरे, भरे हुए।
मैंने चूसा—एक को मुँह में लिया, दूसरे को हाथ से मसला।
वो कराही—"आह्ह... हाँ... और जोर से..."
मैंने उसकी पेटीकोट ऊपर की।
पैंटी सरकाई।
उसकी चूत—गीली, तैयार।
मैंने जीभ रखी।
चाटा।
उसकी क्लिट पर जीभ घुमाई।
वो चीखी—"आह्ह... हृतिक... हाँ... चाटो..."
मैं चाटता रहा।
उसकी चूत मेरी जीभ पर सिकुड़ रही थी।
फिर... मैंने अपना लुंड निकाला।
उसके मुँह के पास ले गया।
"चूसो... मेरी जान।"
वो मुस्कुराई।
उसने मुँह खोला।
मेरा लुंड अंदर लिया।
धीरे-धीरे... गले तक।
मैंने उसके बाल पकड़े।
जोर से धक्का दिया।
घोक... घोल... घोक...
वो चूसती रही।
उसकी लार बह रही थी।
फिर... मैंने उसे पलटा।
डॉगी स्टाइल में।
उसकी गांड ऊपर।
मैंने लुंड उसके छेद पर रखा।
एक झटके में अंदर।
वो चीखी—"आह्ह... हृतिक... हाँ... और जोर से..."
मैंने धक्के मारे—तेज़, गहरे।
उसकी चूत मेरे लुंड पर कस रही थी।
वो कराही—"हाँ... चोदो मुझे... फाड़ दो..."
मैंने उसके बाल पकड़े।
और जोर से।
वो झड़ गई—जोर से।
उसकी चूत सिकुड़ रही थी।
मैंने भी झड़ दिया—उसके अंदर।
हम दोनों थककर लेट गए।
नेहा मेरी तरफ मुड़ी।
उसने मेरे कान में फुसफुसाया—
"सैम... ये... बहुत अच्छा था।
अगली बार... में रोले करुँगी ?"
मैंने मुस्कुराया।
"हाँ... अगली बार... "
रात गहरी हो गई।
और हम... सो गए।
अगले दिन ऑफिस से लौटते ही मैंने नेहा को मैसेज किया—
मैं: आज रात... तुम प्रीति ज़िंटा बनोगी।
मेरी फेवरेट।
तुम्हें... वैसा चोदूँगा... जैसा मैंने हमेशा सोचा है।
नेहा: ओके... प्रीति ज़िंटा तैयार है
तुम... बस... अपना काम करो।
टी-शर्ट और शॉर्ट्स में थी—बिल्कुल वैसी जैसी प्रीति ज़िंटा अपनी कुछ फिल्मों में दिखती है।
टाइट टी-शर्ट से उसके स्तन उभरे हुए, शॉर्ट्स से उसकी जांघें चमक रही थीं।
वो मुस्कुराई—प्रीति वाली क्यूट, शरारती स्माइल।
"हाय फैन बॉय... प्रीति ज़िंटा को देखने आए हो?"
मैंने उसे बिस्तर पर पटका।
उसकी टी-शर्ट ऊपर की।
ब्रा नहीं थी—सीधे उसके स्तन मेरे सामने।
मैंने चूसा—जोर से।
वो कराही—"आह्ह... फैन बॉय... धीरे... प्रीति ज़िंटा को... ऐसे नहीं छूते..."
मैंने उसके शॉर्ट्स उतारे।
उसकी चूत—गीली, तैयार।
मैंने लुंड निकाला।
उसके मुँह के पास ले गया।
"प्रीति जी... चूसो ना... मेरे लिए... एक बार।"
वो मुस्कुराई।
उसने मुँह खोला।
मेरा लुंड अंदर लिया।
फिर... मैंने उसे पलटा।
डॉगी में।
वो मेरी आँखों में देख रही थी—प्रीति वाली वो इंटेंस नज़र।
"प्रीति जी... तुम्हारी चूत... कितनी टाइट है..."
वो कराही—"हाँ... चोदो... और जोर से... मैं तुम्हारी हूँ..."
मैंने उसे पलटा।
उसके चेहरे के सामने लुंड।
वो मेरी आँखों में देख रही थी—उम्मीद और भूख से।
मैंने झड़ दिया—उसके चेहरे पर।
गाढ़ा, सफेद।
उसके गालों पर, होंठों पर, नाक पर।
वो मुस्कुराई—कैरेक्टर में।
"फैन बॉय... प्रीति ज़िंटा... बहुत खुश है।"
हम दोनों थककर लेट गए।
कैरेक्टर कभी नहीं टूटा।
रात गहरी हो गई।
और हम... सो गए।
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हमने काफी कुछ ट्राई कर लिया।
पहले तो बस हल्के-फुल्के रोल प्ले थे, लेकिन अब नेहा भी उतनी ही एक्साइटेड हो गई थी जितना मैं।
हम दोनों पढ़ते थे—इंटरनेट पर "रोल प्ले आइडियाज़" सर्च करते, फोरम्स पढ़ते, और हँसते-हँसते नई-नई चीजें प्लान करते।
एक रात नेहा ने कहा—
"आज... हॉर्नी प्रीस्ट और नॉटी कॉलेज गर्ल?"
वो तैयार होकर आई—कॉलेज यूनिफॉर्म में।
छोटी स्कर्ट, टाइट शर्ट, टाई, और दो चोटियाँ।
वो मेरे सामने खड़ी हुई, होंठ काटते हुए—
"फादर... मैंने बहुत गुनाह किए हैं... मुझे सजा दो..."
मैंने प्रीस्ट वाला रोल लिया—काला कुर्ता, क्रॉस वाला चेन।
उसे घुटनों पर बिठाया।
उसकी स्कर्ट ऊपर की।
उसकी गांड पर हाथ फेरा।
फिर... जोर से थप्पड़ मारा।
चटाक!
वो चीखी—"आह्ह... फादर... और सजा दो..."
मैंने 4-5 थप्पड़ मारे—उसकी गांड लाल हो गई।
फिर... मैंने उसे बिस्तर पर पटका।
उसकी स्कर्ट ऊपर, पैंटी सरकाई।
लुंड अंदर डाला।
वो कराही—"हाँ फादर... मेरी चूत...."
हम दोनों इतने एक्साइटेड थे कि कैरेक्टर नहीं टूटा।
मैंने उसे जोर-जोर से चोदा।
वो झड़ गई—दो बार।
फिर... अगली रात।
नेहा ने कॉस्ट्यूम खरीदा था—छोटी कॉलेज गर्ल वाली।
वो बोली—
"आज... नॉटी कॉलेज गर्ल और स्ट्रिक्ट टीचर?"
मैंने टीचर रोल लिया।
उसे डेस्क पर बिठाया।
उसकी स्कर्ट ऊपर की।
पढ़ाई का बहाना बनाकर थप्पड़ मारे।
फिर... डेस्क पर ही चोदा।
अगली रात—उबर ड्राइवर और पैसेंजर।
नेहा ने शॉर्ट ड्रेस पहनी।
मैंने उबर वाला रोल लिया।
कार में ही—उसकी जांघों पर हाथ फेरा।
फिर... घर लाकर बेडरूम में चोदा।
फिर... बॉय नेक्स्ट डोर।
नेहा ने कहा—"मेरा हसबैंड कमजोर है... घर का काम नहीं करता।
तुम... मेरी मदद करोगे?"
मैंने हेल्प करने का बहाना बनाया।
फिर... उसे किचन में पटका।
उसकी साड़ी ऊपर की।
चोदा।
हर रात... नया कैरेक्टर।
हर रात... वो इंटेंस।
हम कैरेक्टर कभी नहीं तोड़ते।
कभी हँसते, कभी चीखते, कभी फुसफुसाते।
और हर बार... मेरा लुंड पहले से ज़्यादा सख्त।
नेहा की आहें पहले से ज़्यादा तेज़।
ये सब... धीरे-धीरे... और गहरा हो रहा था।
मैं जानता था कि मुझे नेहा से क्या चाहिए।
मैं चाहता था कि वो किसी और की तरह बने... किसी और आदमी के साथ... और मैं देखूँ।
लेकिन... मैं नहीं चाहता था कि वो मेरे गंदे दिमाग के बारे में जाने।
मुझे डर था—अगर एकदम से बहुत हेवी कर दिया तो ६ महीने में मज़ा खत्म हो जाएगा।
ये आइडिया अभी मेरे लुंड के लिए बहुत काम कर रहा है।
हर बार सोचते ही खड़ा हो जाता है।
तो मैंने सोचा—धीरे-धीरे शुरू करेंगे।
पहले कुछ लाइट... कुछ रोमांटिक... फिर धीरे-धीरे गंदा।
दिन भर नॉर्मल गुज़रा।
शाम हुई।
नेहा ऑफिस से मैसेज कर रही थी।
नेहा: बेबी... आज रात रोल प्ले ट्राई करेंगे?
मैंने तुरंत रिप्लाई किया।
मैं: हाँ... आज रात।
तुम तैयार रहना।
पहले... तुम बताओ... आज रात तुम किसके साथ होना चाहती हो?
किसका रोल प्ले करोगी?
नेहा ने थोड़ी देर में रिप्लाई किया।
एक ब्लश इमोजी के साथ।
नेहा: हृतिक रोशन
मेरा फेवरेट हीरो।
फिर एक और मैसेज—
नेहा: मैं तो ऑफिस में बैठी हूँ... और पहले से ही गीली हो गई हूँ
मेरा लुंड एकदम सख्त हो गया।
ऑफिस में बैठी नेहा... मेरे मैसेज पढ़कर... गीली हो रही है।
मैंने सोचा—ये तो शुरुआत है।
मैं: अच्छा... तो आज रात... हृतिक रोशन तुम्हें चोदेगा।
तुम तैयार रहना... मेरी जान।
नेहा: हाँ... तैयार हूँ
घर आकर बताऊँगी... क्या करना है।
मैंने फोन साइड में रखा।
दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।
लुंड पैंट में फड़क रहा था।
रात आने वाली थी।
और आज रात... नेहा हृतिक रोशन के साथ सोएगी।
मेरे सामने।
और मैं... बस... देखूँगा।
दरवाज़ा खुलते ही नेहा अंदर आई।
वो साड़ी में थी—वही लाल वाली, जो उसके कर्व्स को और हाईलाइट करती है।
पल्लू थोड़ा सरका हुआ था, कमर नंगी दिख रही थी।
उसने मुझे देखा—एक सेकंड के लिए रुकी, फिर मुस्कुराई।
उसकी आँखों में वो शरारत थी, जो मुझे पागल कर देती है।
"ओह्ह... हृतिक... आप यहाँ... कैसे?"
वो पूरी तरह कैरेक्टर में थी।
मैं भी।
मैंने दरवाज़ा बंद किया।
धीरे से उसकी तरफ बढ़ा।
गहरी, भारी आवाज़ में बोला—हृतिक वाला टोन।
"मैं यहाँ तुम्हारे हसबैंड की कंपनी के ऐड शूट के लिए आया था।
वो मुझे घर पर बुलाया... कहा कि उनकी वाइफ मेरा बहुत बड़ा फैन है।
तुम्हारी फोटोज़ भी दिखाईं... और बोले कि तुम मेरे लिए कुछ भी कर सकती हो।"
नेहा ने आँखें नीची कीं—शरमाते हुए।
फिर धीरे से मेरे करीब आई।
उसने मुझे हग कर लिया।
उसके स्तन मेरी छाती से दबे।
मैंने उसकी कमर पकड़ी—फिर धीरे से नीचे हाथ सरकाया।
उसकी गांड पर।
नरम, गोल, गरम।
वो एकदम अलग हुई।
हाथ से मेरी छाती धकेली—नाटकीय तरीके से।
"क्या कर रहे हो... मैं शादीशुदा हूँ!"
उसकी आवाज़ में वो नखरे थे—लेकिन आँखों में शरारत।
मैंने मुस्कुराया—हृतिक वाला कॉन्फिडेंट स्माइल।
उसके करीब आया।
उसकी कमर फिर से पकड़ी।
"लेकिन तुम्हारा हसबैंड ने कहा... तुम मेरे लिए कुछ भी कर सकती हो।
और मैं... तुम्हारी गांड को छूना चाहता हूँ।
अगर मैं चाहूँ तो... और भी ज़्यादा।"
नेहा ने होंठ काटे।
शरमाते हुए बोली—
"ओह्ह... आप बहुत नॉटी हैं हृतिक..."
मैंने उसके कान के पास मुँह ले जाकर फुसफुसाया—
"तुमने अभी कुछ भी नहीं देखा... मेरी जान।"
फिर... मैंने झुककर उसके होंठों पर किस किया।
धीरे से।
पहले सिर्फ़ होंठ छुए।
फिर जीभ अंदर डाली।
वो मेरे साथ बह गई—उसने मेरी गर्दन पकड़ी, मुझे और करीब खींचा।
हमारे किस में वो भूख थी—जैसे महीनों से रुकी हुई हो।
मैंने उसकी साड़ी का पल्लू खींचा।
वो सरककर गिर गया।
उसकी ब्लाउज़ में उसके स्तन उभरे हुए।
मैंने एक हाथ से उसके स्तन पकड़े—जोर से।
दूसरे हाथ से उसकी गांड दबाई।
वो कराही—"आह्ह... हृतिक... धीरे..."
मैंने उसके कान में कहा—
"धीरे नहीं... आज रात... मैं तुम्हें वैसा चोदूँगा... जैसा तुमने कभी सोचा भी नहीं।
तुम्हारा हसबैंड... बस... देखेगा।"
नेहा ने मेरी आँखों में देखा।
उसकी साँसें तेज़ थीं।
वो धीरे से बोली—
"तो... देखने दो...
आज रात... मैं सिर्फ़ तुम्हारी हूँ।"
मैंने उसे गोद में उठाया।
बेडरूम की तरफ ले गया।
बिस्तर पर पटक दिया।
वो हँसी—शरारती हँसी।
"अब... हृतिक... दिखाओ... कितने अच्छे हो तुम।"
मैंने उसकी साड़ी पूरी उतारी।
ब्लाउज़ खोला।
ब्रा उतारी।
उसके स्तन बाहर—गोरे, भरे हुए।
मैंने चूसा—एक को मुँह में लिया, दूसरे को हाथ से मसला।
वो कराही—"आह्ह... हाँ... और जोर से..."
मैंने उसकी पेटीकोट ऊपर की।
पैंटी सरकाई।
उसकी चूत—गीली, तैयार।
मैंने जीभ रखी।
चाटा।
उसकी क्लिट पर जीभ घुमाई।
वो चीखी—"आह्ह... हृतिक... हाँ... चाटो..."
मैं चाटता रहा।
उसकी चूत मेरी जीभ पर सिकुड़ रही थी।
फिर... मैंने अपना लुंड निकाला।
उसके मुँह के पास ले गया।
"चूसो... मेरी जान।"
वो मुस्कुराई।
उसने मुँह खोला।
मेरा लुंड अंदर लिया।
धीरे-धीरे... गले तक।
मैंने उसके बाल पकड़े।
जोर से धक्का दिया।
घोक... घोल... घोक...
वो चूसती रही।
उसकी लार बह रही थी।
फिर... मैंने उसे पलटा।
डॉगी स्टाइल में।
उसकी गांड ऊपर।
मैंने लुंड उसके छेद पर रखा।
एक झटके में अंदर।
वो चीखी—"आह्ह... हृतिक... हाँ... और जोर से..."
मैंने धक्के मारे—तेज़, गहरे।
उसकी चूत मेरे लुंड पर कस रही थी।
वो कराही—"हाँ... चोदो मुझे... फाड़ दो..."
मैंने उसके बाल पकड़े।
और जोर से।
वो झड़ गई—जोर से।
उसकी चूत सिकुड़ रही थी।
मैंने भी झड़ दिया—उसके अंदर।
हम दोनों थककर लेट गए।
नेहा मेरी तरफ मुड़ी।
उसने मेरे कान में फुसफुसाया—
"सैम... ये... बहुत अच्छा था।
अगली बार... में रोले करुँगी ?"
मैंने मुस्कुराया।
"हाँ... अगली बार... "
रात गहरी हो गई।
और हम... सो गए।
अगले दिन ऑफिस से लौटते ही मैंने नेहा को मैसेज किया—
मैं: आज रात... तुम प्रीति ज़िंटा बनोगी।
मेरी फेवरेट।
तुम्हें... वैसा चोदूँगा... जैसा मैंने हमेशा सोचा है।
नेहा: ओके... प्रीति ज़िंटा तैयार है
तुम... बस... अपना काम करो।
टी-शर्ट और शॉर्ट्स में थी—बिल्कुल वैसी जैसी प्रीति ज़िंटा अपनी कुछ फिल्मों में दिखती है।
टाइट टी-शर्ट से उसके स्तन उभरे हुए, शॉर्ट्स से उसकी जांघें चमक रही थीं।
वो मुस्कुराई—प्रीति वाली क्यूट, शरारती स्माइल।
"हाय फैन बॉय... प्रीति ज़िंटा को देखने आए हो?"
मैंने उसे बिस्तर पर पटका।
उसकी टी-शर्ट ऊपर की।
ब्रा नहीं थी—सीधे उसके स्तन मेरे सामने।
मैंने चूसा—जोर से।
वो कराही—"आह्ह... फैन बॉय... धीरे... प्रीति ज़िंटा को... ऐसे नहीं छूते..."
मैंने उसके शॉर्ट्स उतारे।
उसकी चूत—गीली, तैयार।
मैंने लुंड निकाला।
उसके मुँह के पास ले गया।
"प्रीति जी... चूसो ना... मेरे लिए... एक बार।"
वो मुस्कुराई।
उसने मुँह खोला।
मेरा लुंड अंदर लिया।
फिर... मैंने उसे पलटा।
डॉगी में।
वो मेरी आँखों में देख रही थी—प्रीति वाली वो इंटेंस नज़र।
"प्रीति जी... तुम्हारी चूत... कितनी टाइट है..."
वो कराही—"हाँ... चोदो... और जोर से... मैं तुम्हारी हूँ..."
मैंने उसे पलटा।
उसके चेहरे के सामने लुंड।
वो मेरी आँखों में देख रही थी—उम्मीद और भूख से।
मैंने झड़ दिया—उसके चेहरे पर।
गाढ़ा, सफेद।
उसके गालों पर, होंठों पर, नाक पर।
वो मुस्कुराई—कैरेक्टर में।
"फैन बॉय... प्रीति ज़िंटा... बहुत खुश है।"
हम दोनों थककर लेट गए।
कैरेक्टर कभी नहीं टूटा।
रात गहरी हो गई।
और हम... सो गए।
xxxxxxxxxxxxxxxx
हमने काफी कुछ ट्राई कर लिया।
पहले तो बस हल्के-फुल्के रोल प्ले थे, लेकिन अब नेहा भी उतनी ही एक्साइटेड हो गई थी जितना मैं।
हम दोनों पढ़ते थे—इंटरनेट पर "रोल प्ले आइडियाज़" सर्च करते, फोरम्स पढ़ते, और हँसते-हँसते नई-नई चीजें प्लान करते।
एक रात नेहा ने कहा—
"आज... हॉर्नी प्रीस्ट और नॉटी कॉलेज गर्ल?"
वो तैयार होकर आई—कॉलेज यूनिफॉर्म में।
छोटी स्कर्ट, टाइट शर्ट, टाई, और दो चोटियाँ।
वो मेरे सामने खड़ी हुई, होंठ काटते हुए—
"फादर... मैंने बहुत गुनाह किए हैं... मुझे सजा दो..."
मैंने प्रीस्ट वाला रोल लिया—काला कुर्ता, क्रॉस वाला चेन।
उसे घुटनों पर बिठाया।
उसकी स्कर्ट ऊपर की।
उसकी गांड पर हाथ फेरा।
फिर... जोर से थप्पड़ मारा।
चटाक!
वो चीखी—"आह्ह... फादर... और सजा दो..."
मैंने 4-5 थप्पड़ मारे—उसकी गांड लाल हो गई।
फिर... मैंने उसे बिस्तर पर पटका।
उसकी स्कर्ट ऊपर, पैंटी सरकाई।
लुंड अंदर डाला।
वो कराही—"हाँ फादर... मेरी चूत...."
हम दोनों इतने एक्साइटेड थे कि कैरेक्टर नहीं टूटा।
मैंने उसे जोर-जोर से चोदा।
वो झड़ गई—दो बार।
फिर... अगली रात।
नेहा ने कॉस्ट्यूम खरीदा था—छोटी कॉलेज गर्ल वाली।
वो बोली—
"आज... नॉटी कॉलेज गर्ल और स्ट्रिक्ट टीचर?"
मैंने टीचर रोल लिया।
उसे डेस्क पर बिठाया।
उसकी स्कर्ट ऊपर की।
पढ़ाई का बहाना बनाकर थप्पड़ मारे।
फिर... डेस्क पर ही चोदा।
अगली रात—उबर ड्राइवर और पैसेंजर।
नेहा ने शॉर्ट ड्रेस पहनी।
मैंने उबर वाला रोल लिया।
कार में ही—उसकी जांघों पर हाथ फेरा।
फिर... घर लाकर बेडरूम में चोदा।
फिर... बॉय नेक्स्ट डोर।
नेहा ने कहा—"मेरा हसबैंड कमजोर है... घर का काम नहीं करता।
तुम... मेरी मदद करोगे?"
मैंने हेल्प करने का बहाना बनाया।
फिर... उसे किचन में पटका।
उसकी साड़ी ऊपर की।
चोदा।
हर रात... नया कैरेक्टर।
हर रात... वो इंटेंस।
हम कैरेक्टर कभी नहीं तोड़ते।
कभी हँसते, कभी चीखते, कभी फुसफुसाते।
और हर बार... मेरा लुंड पहले से ज़्यादा सख्त।
नेहा की आहें पहले से ज़्यादा तेज़।
ये सब... धीरे-धीरे... और गहरा हो रहा था।


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