12-03-2026, 07:05 PM
"मनीष, आपने कमाल का काम किया है। हम चाहते हैं कि इस इंसान को ढूँढने मे आप हमारी मदद करें।" राजासाहब ने उस से हाथ मिलाया।
"सर,ये भी कोई कहने की बात है। जब तक पता ना चल जाए मैं भी चैन से नही बैठूँगा।" मैत्री की पेशकश
"..पर यश ये डोफा कौन हो सकता है? वही जाबर का साथी?"
"पता नही, दुष्यंत समझ नही आ रहा। जब्बार का कहने को तो धंधा प्रॉपर्टी डीलिंग का है पर असल मे डिस्प्यूटेड प्रॉपर्टीस को बिकवाना,किसी की प्रॉपर्टी पर ज़बरदस्ती क़ब्ज़ा कर उस से पैसे ऐंठना ये उसका असल काम है, मशहूर है कि उसकी जेब मे एक चाबियों का गुच्छा है जिस से कि दुनिया का कोई भी ताला खुल सकता है।" राजासाहब ने ग्लास उठा कर पानी पिया।"
..पर भेन्चोद ये ड्रग्स....ये मेरी भी समझ मे नही आ रहा। इस तस्वीर वाले आदमी को भी पहली बार देखा है। पर मेरा मन कहता है कि इस के तार जब्बार से ही जुड़े हैं। पर कैसे?"
"ये मनीष पता लगा ही लेगा। तुम चिंता छोडो। चलो कुछ खाते हैं।"
रात के 1:30 बज रहे थे पर राजासाहब अभी तक नही आए थे। शाम 7 बजे फोन आया था कि वो खाना खा कर आएँगे पर किसी भी हाल मे एक बजे तक आ जाएँगे। मेनका एक छ्होटा-सा वाइट केमिसोल जो कि बस उसकी पेंटी को ढके हुए थे, पहने बेचैनी से अपने कमरे मे चहलकदमी कर रही थी। अपने मोबाइल से वो लगातार अपने ससुर का मोबाइल ट्राइ कर रही थी पर बार- बार स्विच्ड ऑफ का मेसेज आ रहा था। क्लॉज़ेट का रास्ता उसने खोल दिया था और उसकी नज़रे बार-बार वहा जा रही थी।
तभी कार की आवाज़ आई,राजासाहब लौट आए थे। नीचे से नौकरों को बाहर कर दरवाज़ा बंद करने की आवाज़ आई तो मेनका अपने बिस्तर पर चादर ओढ़ कर लेट गयी। अपनी पीठ उसने क्लॉज़ेट की तरफ कर ली। वो गुस्से मे पागल हो रही थी।
थोड़ी देर बाद राजासाहब क्लॉज़ेट के रास्ते उसके कमरे मे दाखिल हुए, वो पूरे नंगे थे। राजासाहब ने चादर उठाई और लेट कर मेनका को पीछे से अपनी बाहों मे जाकड़ लिए।,
"जाओ,मुझे सोने दो।"मेनका ने उनका हाथ हटा दिया।
"क्या हो गया?"
"कुछ नही। हमे नींद आ रही है।"
"नही तुम नाराज़ हो। क्या ग़लती हो गयी भाई?"उन्होने फिर उसे जाकड़ लिया और पीछे से अपना नंगा बदन उसकी पीठ और गांड से चिपका दिया।
"एक तो इतनी देर कर दी,उपर से फोन भी नही उठा रहे थे और पूछते हो क्या ग़लती की!"
"फोन डिसचार्ज हो गया था और कहा था ना कि ज़रूरी काम था,उसी मे देर हो गयी। अब गुस्सा छोडो और प्यार करो।" उनका दाया हाथ उसकी पेंटी मे घुस गया और बाया उसकी गर्दन के नीचे आ गया और वही से उसकी चूचिया दबाने लगा।
अपनी गांड पे अपने ससुर का लंड महसूस करते ही मेनका ने अपना हाथ पीछे ले जा कर उसे पकड़ लिया और हिलाने लगी। "क्या प्रीकम था......आन्न....न्न्न्ह्ह्ह्ह्ह?" राजासाहब की उंगलिया उसके चूत के दाने को रगड़ रही थी।
बने रहिये...................
"सर,ये भी कोई कहने की बात है। जब तक पता ना चल जाए मैं भी चैन से नही बैठूँगा।" मैत्री की पेशकश
"..पर यश ये डोफा कौन हो सकता है? वही जाबर का साथी?"
"पता नही, दुष्यंत समझ नही आ रहा। जब्बार का कहने को तो धंधा प्रॉपर्टी डीलिंग का है पर असल मे डिस्प्यूटेड प्रॉपर्टीस को बिकवाना,किसी की प्रॉपर्टी पर ज़बरदस्ती क़ब्ज़ा कर उस से पैसे ऐंठना ये उसका असल काम है, मशहूर है कि उसकी जेब मे एक चाबियों का गुच्छा है जिस से कि दुनिया का कोई भी ताला खुल सकता है।" राजासाहब ने ग्लास उठा कर पानी पिया।"
..पर भेन्चोद ये ड्रग्स....ये मेरी भी समझ मे नही आ रहा। इस तस्वीर वाले आदमी को भी पहली बार देखा है। पर मेरा मन कहता है कि इस के तार जब्बार से ही जुड़े हैं। पर कैसे?"
"ये मनीष पता लगा ही लेगा। तुम चिंता छोडो। चलो कुछ खाते हैं।"
रात के 1:30 बज रहे थे पर राजासाहब अभी तक नही आए थे। शाम 7 बजे फोन आया था कि वो खाना खा कर आएँगे पर किसी भी हाल मे एक बजे तक आ जाएँगे। मेनका एक छ्होटा-सा वाइट केमिसोल जो कि बस उसकी पेंटी को ढके हुए थे, पहने बेचैनी से अपने कमरे मे चहलकदमी कर रही थी। अपने मोबाइल से वो लगातार अपने ससुर का मोबाइल ट्राइ कर रही थी पर बार- बार स्विच्ड ऑफ का मेसेज आ रहा था। क्लॉज़ेट का रास्ता उसने खोल दिया था और उसकी नज़रे बार-बार वहा जा रही थी।
तभी कार की आवाज़ आई,राजासाहब लौट आए थे। नीचे से नौकरों को बाहर कर दरवाज़ा बंद करने की आवाज़ आई तो मेनका अपने बिस्तर पर चादर ओढ़ कर लेट गयी। अपनी पीठ उसने क्लॉज़ेट की तरफ कर ली। वो गुस्से मे पागल हो रही थी।
थोड़ी देर बाद राजासाहब क्लॉज़ेट के रास्ते उसके कमरे मे दाखिल हुए, वो पूरे नंगे थे। राजासाहब ने चादर उठाई और लेट कर मेनका को पीछे से अपनी बाहों मे जाकड़ लिए।,
"जाओ,मुझे सोने दो।"मेनका ने उनका हाथ हटा दिया।
"क्या हो गया?"
"कुछ नही। हमे नींद आ रही है।"
"नही तुम नाराज़ हो। क्या ग़लती हो गयी भाई?"उन्होने फिर उसे जाकड़ लिया और पीछे से अपना नंगा बदन उसकी पीठ और गांड से चिपका दिया।
"एक तो इतनी देर कर दी,उपर से फोन भी नही उठा रहे थे और पूछते हो क्या ग़लती की!"
"फोन डिसचार्ज हो गया था और कहा था ना कि ज़रूरी काम था,उसी मे देर हो गयी। अब गुस्सा छोडो और प्यार करो।" उनका दाया हाथ उसकी पेंटी मे घुस गया और बाया उसकी गर्दन के नीचे आ गया और वही से उसकी चूचिया दबाने लगा।
अपनी गांड पे अपने ससुर का लंड महसूस करते ही मेनका ने अपना हाथ पीछे ले जा कर उसे पकड़ लिया और हिलाने लगी। "क्या प्रीकम था......आन्न....न्न्न्ह्ह्ह्ह्ह?" राजासाहब की उंगलिया उसके चूत के दाने को रगड़ रही थी।
बने रहिये...................


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