12-03-2026, 07:02 PM
अब आगे..................
"हेलो।"
"दुष्यंत बोल रहा हू,यशवीर। तुम्हारे केस के बारे मे कुछ बात करनी थी।"
"हा,भाई। बोलो,क्या पता चला?" राजासाहब ने अपना लंड अपनी बहू की चूत से खीच लिया पर उनका खाली हाथ अभी भी उसका सर सहला रहा था।
"भाई तुम शहर आ जाओ तो तुम्हे अच्छी तरह सारी बात समझा दू।" मेनका ने डेस्क से उतर कर अपने ससुर की एडी पे गिरी पॅंट को उठा कर उन्हे वापस पहना दिया। मैत्री की प्रस्तुति[b]।[/b]
"ठीक है,दुष्यंत, हम बस अभी निकलते हैं।" फोन काट कर उन्होने मेनका को अपने पास खींच कर चूमा और उसकी आँखों मे उठे सवाल का जवाब दिया।
"एक बहुत ज़रूरी काम से शहर जाना पड़ रहा है। रात तक लौट आएँगे। घबराईए मत। चिंता की कोई बात नही है। और इस नाजुक पारी को तैयार रखे।" उन्होने ज़मीन पर पड़ी पेंटी उसे थमाई।
मेनका उसे ले बाथरूम चली गयी। जब बाहर आई तो राजासाहब ने उसे गुडबाइ किस दी और चले गये।
-------------------------------------------------------------------------------
शहर के 5-स्टार होटेल के उस कमरे मे राजासाहब अपने जिगरी दोस्त के साथ बैठे थे पर कमरे मे उनके अलावा एक नौजवान भी था।
"यश,ये मनीष है। तुम्हारा केस यही इन्वेस्टिगेट कर रहा है। और ये राजा यशवीरसिंग हैं,मनीष।"
मनीष ने उन्हे प्रणाम किया तो राजासाहब ने जवाब मे सर हिलाके उस नौजवान को ठीक से देखा।
"इसकी उम्र पर मत जाना,यश। मेरे सबसे काबिल बन्दो मे से है ये।",दुष्यंत वर्मा फिर मनीष से मुखातिब हुए,"मनीष अब तुम सारी रिपोर्ट हम दोनो को दो।"
"जी सर।"
मनीष ने बोलना शुरू किया,
"सर,मैने राजपुरा और शहर की उन सभी जगहो पर जाकर तहकीकात की जहा कुंवर साहब का आन-जाना था। शुरू मे मुझे कहीं कोई सुराग नही मिला कि आख़िर उन्हे ड्रग कौन देता था। शहर के अपने मुखबिरो के ज़रिए मैने पता लगाया तो पाया कि यहा का किसी डीलर ने तो कभी उनसे कोई सौदा नही किया था। फिर राजपुरा जैसी छोटी जगह ये डीलर्स तो जाने से रहे। एक आदमी के बिज़नेस के लिए यहाँ का अपना हज़ारों का नुकसान-ये कोई सेन्स नही था।" थोडा रुक कर मनीष ने पानी का एक घूँट लिया।
"...मैने अपना ध्यान राजपुरा पर लगा दिया। मुझे पता चला कि कुंवर आदिवासियों के गाव महुआ की शराब लेने जाते थे। और यही किस्मत से मेरे हाथ एक बड़ा सुराग लग गया। आदिवासियों ने बताया कि कुंवर के अलावा भी एक शहरी आदमी था जो कि उनसे महुआ ले जाता था। उन्होने एक बार उसे कार मे बैठे कुंवर से कुछ बाते करते हुए भी देखा था। जब मैने उसका हुलिया,नाम आदि पूचछा तो कुछ खास नही पता चला।"
"..फिर एक दिन मैं इसी सुराग के फॉलो-उप के लए उन आदिवासियों के पास गया। वहा एक आदिवासी जो शहर मे नौकरी करता था,बैठा हुआ था और अपने कॅमरा मोबाइल से फोटो खिच रहा था। फोन मे कुछ प्राब्लम आई तो उसने मुझे दिखाया। देखा तो पाया कि मेमोरी फुल है। मैने उसे कहा कि कुछ फोटोस डेलीट करनी पड़ेगी।"
"..उसने कहा कि वो बताता जाएगा और मैं फोटोस डेलीट करता जाऊं। फोटोस डेलीट करते हुए मेरी नज़र एक फोटो पर पड़ी। उसमे एक गोरा-चट्टा शहरी था। बाकी सारे फोटो उन आदिवासीयो के थे तो फिर ये शहरी कौन था?" राजासाहब गौर से मनीष को सुन रहे थे।
"..उस आदिवासी ने बताया कि यही वो आदमी था। और यही वो फोटो है,सर।" मनीष ने अपना लॅपटॉप ऑन कर स्क्रीन राजासाहब की तरफ कर दी। फोटो मे 3 आदिवासी बैठे हंस रहे थे और पीछे फोटो के कोने मे वो शहरी था। राजासाहब के दिमाग़ मे उस इंसान का चेहरा छप गया।
"क्या गॅरेंटी है मनीष कि यही चुतिया इंसान ड्रग डीलर है?"
"ये राजासाहब।" मनीष ने एक छोटा सा पॅकेट आगे बढ़ाया जिसमे एककॅप्सुल था।
"ये एक बार इसकी जेब से गिर गया था और महुआ बेचने वाले आदिवासी ने दवा समझ कर अपने पास रख लिया था और फिर भूल गया था। इस आदमी की बात चलने पर उसे याद आया तो मुझ से इस 'दवा' के बारे मे पूछने लगा।" मैत्री की लेखनी[b]।
[/b]
"वेल डन, मनीष। आइ एम प्राउड ऑफ यू।" दुष्यंत वर्मा ने उसकी पीठ ठनकी।
बने रहिये................आगे और भी लिख रही हूँ[b]। [/b]
"हेलो।"
"दुष्यंत बोल रहा हू,यशवीर। तुम्हारे केस के बारे मे कुछ बात करनी थी।"
"हा,भाई। बोलो,क्या पता चला?" राजासाहब ने अपना लंड अपनी बहू की चूत से खीच लिया पर उनका खाली हाथ अभी भी उसका सर सहला रहा था।
"भाई तुम शहर आ जाओ तो तुम्हे अच्छी तरह सारी बात समझा दू।" मेनका ने डेस्क से उतर कर अपने ससुर की एडी पे गिरी पॅंट को उठा कर उन्हे वापस पहना दिया। मैत्री की प्रस्तुति[b]।[/b]
"ठीक है,दुष्यंत, हम बस अभी निकलते हैं।" फोन काट कर उन्होने मेनका को अपने पास खींच कर चूमा और उसकी आँखों मे उठे सवाल का जवाब दिया।
"एक बहुत ज़रूरी काम से शहर जाना पड़ रहा है। रात तक लौट आएँगे। घबराईए मत। चिंता की कोई बात नही है। और इस नाजुक पारी को तैयार रखे।" उन्होने ज़मीन पर पड़ी पेंटी उसे थमाई।
मेनका उसे ले बाथरूम चली गयी। जब बाहर आई तो राजासाहब ने उसे गुडबाइ किस दी और चले गये।
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शहर के 5-स्टार होटेल के उस कमरे मे राजासाहब अपने जिगरी दोस्त के साथ बैठे थे पर कमरे मे उनके अलावा एक नौजवान भी था।
"यश,ये मनीष है। तुम्हारा केस यही इन्वेस्टिगेट कर रहा है। और ये राजा यशवीरसिंग हैं,मनीष।"
मनीष ने उन्हे प्रणाम किया तो राजासाहब ने जवाब मे सर हिलाके उस नौजवान को ठीक से देखा।
"इसकी उम्र पर मत जाना,यश। मेरे सबसे काबिल बन्दो मे से है ये।",दुष्यंत वर्मा फिर मनीष से मुखातिब हुए,"मनीष अब तुम सारी रिपोर्ट हम दोनो को दो।"
"जी सर।"
मनीष ने बोलना शुरू किया,
"सर,मैने राजपुरा और शहर की उन सभी जगहो पर जाकर तहकीकात की जहा कुंवर साहब का आन-जाना था। शुरू मे मुझे कहीं कोई सुराग नही मिला कि आख़िर उन्हे ड्रग कौन देता था। शहर के अपने मुखबिरो के ज़रिए मैने पता लगाया तो पाया कि यहा का किसी डीलर ने तो कभी उनसे कोई सौदा नही किया था। फिर राजपुरा जैसी छोटी जगह ये डीलर्स तो जाने से रहे। एक आदमी के बिज़नेस के लिए यहाँ का अपना हज़ारों का नुकसान-ये कोई सेन्स नही था।" थोडा रुक कर मनीष ने पानी का एक घूँट लिया।
"...मैने अपना ध्यान राजपुरा पर लगा दिया। मुझे पता चला कि कुंवर आदिवासियों के गाव महुआ की शराब लेने जाते थे। और यही किस्मत से मेरे हाथ एक बड़ा सुराग लग गया। आदिवासियों ने बताया कि कुंवर के अलावा भी एक शहरी आदमी था जो कि उनसे महुआ ले जाता था। उन्होने एक बार उसे कार मे बैठे कुंवर से कुछ बाते करते हुए भी देखा था। जब मैने उसका हुलिया,नाम आदि पूचछा तो कुछ खास नही पता चला।"
"..फिर एक दिन मैं इसी सुराग के फॉलो-उप के लए उन आदिवासियों के पास गया। वहा एक आदिवासी जो शहर मे नौकरी करता था,बैठा हुआ था और अपने कॅमरा मोबाइल से फोटो खिच रहा था। फोन मे कुछ प्राब्लम आई तो उसने मुझे दिखाया। देखा तो पाया कि मेमोरी फुल है। मैने उसे कहा कि कुछ फोटोस डेलीट करनी पड़ेगी।"
"..उसने कहा कि वो बताता जाएगा और मैं फोटोस डेलीट करता जाऊं। फोटोस डेलीट करते हुए मेरी नज़र एक फोटो पर पड़ी। उसमे एक गोरा-चट्टा शहरी था। बाकी सारे फोटो उन आदिवासीयो के थे तो फिर ये शहरी कौन था?" राजासाहब गौर से मनीष को सुन रहे थे।
"..उस आदिवासी ने बताया कि यही वो आदमी था। और यही वो फोटो है,सर।" मनीष ने अपना लॅपटॉप ऑन कर स्क्रीन राजासाहब की तरफ कर दी। फोटो मे 3 आदिवासी बैठे हंस रहे थे और पीछे फोटो के कोने मे वो शहरी था। राजासाहब के दिमाग़ मे उस इंसान का चेहरा छप गया।
"क्या गॅरेंटी है मनीष कि यही चुतिया इंसान ड्रग डीलर है?"
"ये राजासाहब।" मनीष ने एक छोटा सा पॅकेट आगे बढ़ाया जिसमे एककॅप्सुल था।
"ये एक बार इसकी जेब से गिर गया था और महुआ बेचने वाले आदिवासी ने दवा समझ कर अपने पास रख लिया था और फिर भूल गया था। इस आदमी की बात चलने पर उसे याद आया तो मुझ से इस 'दवा' के बारे मे पूछने लगा।" मैत्री की लेखनी[b]।
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"वेल डन, मनीष। आइ एम प्राउड ऑफ यू।" दुष्यंत वर्मा ने उसकी पीठ ठनकी।
बने रहिये................आगे और भी लिख रही हूँ[b]। [/b]


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