12-03-2026, 04:42 PM
भाग 10
फिर हम दोनों ने बाथरूम जाकर एक-दूसरे को साफ किया। हम दोनों काफी थक गए थे, इसलिए हम एक-दूसरे से लिपटे हुए नंगे ही सो गए। जब सुबह मेरी आंख खुली तो मैं नंगी जीजू की बाहों में थी। मैं धीरे से उठी और नंगी ही अंकिता और दीपक के कमरे में गई। वो दोनों भी नंगे एक-दूसरे से चिपक के सोये हुए थे।
मेरे दिमाग में चुहल करने का ख्याल आया। मैंने आहिस्ता से अंकिता को उठाया और उसे कमरे के बाहर ले आई। मैंने उसे मेरा विचार बताया तो वो उसे भी अच्छा लगा। फिर उसने कमरे में जाकर अपने कपड़े उठाए और आकाश जीजू वाले कमरे में चली गई। मैंने भी वहां से अपने कपड़े उठाए और दीपक के पास चली आई। फिर मैंने अपने कपड़े पहने और दीपक को उठाया। उसने उठते ही मुझे अपने पास देखा तो उसने पूछा-
दीपक: डार्लिंग, तुम यहाँ कब आई?
मैं: कब आई का क्या मतलब? मैं रात को तुम्हारे साथ ही तो इस कमरे में आई थी।
दीपक: क्यों मजाक कर रही हो?
मैं: कैसा मजाक, हम दोनों इस कमरे में कल रात को आए थे।
दीपक: यहाँ तो मैं और अंकिता आए थे। और तुम और आकाश दूसरे कमरे में गए थे।
मैं: तुम इतनी ज्यादा क्यों पी लेते हो? रात का नशा अभी तक नहीं उतरा क्या जो ऐसी ऊटपटांग बातें कर रहे हो?
दीपक: ऊटपटांग तो तुम बोल रही हो। रात को अंकिता और मैं साथ में थे।
मैं: मेरे टल्ली पतिदेव, तुम रात भर मेरे साथ थे। और अंकिता अब भी अपने पतिदेव के साथ होगी।
दीपक: अरे यार, कल हमने तय किया था कि हम एक रात के लिए बीवियों की अदला-बदली करेंगे?
मैं: लगता है कि शराब ने तुम्हारा दिमाग खराब कर दिया है। पता नहीं क्या ऊलजलूल बोल रहे हो।
दीपक: क्या तुम्हें याद नहीं है कि तुम्हारे सामने ही आकाश ने मुझे बोला था कि तुम अंकिता को बेडरूम में ले जाओ और मैं मनीषा को दूसरे बेडरूम में ले जाता हूँ?
मैं: तुमने कोई सपना देखा था क्या? और तुम अंकिता के साथ कुछ ऐसा-वैसा करने का सोच रहे थे क्या?
दीपक: अरे यार, तुम ही तो इतने दिनों से मेरी और अंकिता की सेटिंग करवा रही थी और कल रात तुम्ही ने तो बोला कि जाओ, अंकिता के साथ मजे करो।
मैं: मैंने तुम दोनों की दोस्ती इसलिये करवायी थी कि तुम थोड़ी जीजा-साली वाली मस्ती कर सको। पर तुम तो उसके साथ सोने के सपने देखने लगे! मुझे तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं थी।
दीपक: अरे यार, मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है। रात सच में तुम ही मेरे साथ थी?
मैं: तुम्हें यकीन नहीं हो तो चलो, अंकिता और जीजू से पूछ लेते हैं कौन किसके साथ था। उठो, कपड़े पहनो और बाहर चलो।
फिर दीपक ने अपने कपड़े पहने और हम बाहर लिविंग रूम में आकर सोफे पर बैठ गए। दीपक के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं, और मैं उसे देखकर मुश्किल से अपनी हंसी रोक पा रही थी।
तभी अंकिता और आकाश जीजू भी वहाँ आ गए। अंकिता ने तो कपड़े पहन रखे थे, पर जीजू नंगे थे। आते ही अंकिता बोली -
अंकिता: मनीषा, जरा बता तू रात को कहाँ थी?
मैं (हंसते हुए): जीजू, आप ऐसे ही कैसे आ गए? आपको पता नहीं कि मैं यहाँ हूँ। आपका भी नशा अब तक नहीं उतरा? जाओ, कपड़े पहन कर आओ।
जीजू भी दीपक की तरह हक्के-बक्के लग रहे थे। वो वापस बेडरूम में गए। अंकिता भी उनके साथ गई और फिर जीजू कपड़े पहन के वापस आए।
अंकिता: हाँ मनीषा, अब इन्हें बता कि तू रात भर कहाँ थी?
मैं: कहाँ थी का क्या मतलब? मैं बेडरूम में थी, दीपक के साथ।
अंकिता: ये बोल रहे हैं कि तू रात भर इनके साथ थी ।
मैं: हे भगवान, ये भी ऐसा बोल रहे हैं? दीपक भी बोल रहा है कि तू रात भर इसके साथ थी।
अंकिता: दोनों ने इतनी पी है कि इनका नशा अभी तक नहीं उतरा!
मैं: अंकिता, इन दोनों की नीयत खराब है। तभी ये ऐसी बातें सोच रहे हैं।
दीपक: अरे, कल तक तो तुम दोनों तैयार थीं, आज क्या हो गया?
आकाश: मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है। मनीषा, तुम सच में मेरे साथ नहीं थी कल?
मैं: जीजू, ये आप क्या बोल रहे हो? आपके साथ थोड़ा हंसी-मजाक कर लिया तो आप सीधे बेडरूम में ले जाने की बात कर रहे हो।
अंकिता: अरे, इन दोनों ने जरूर इस तरह का कुछ प्लान बनाया होगा। वो तो अच्छा हुआ कि ये नशे में धुत्त हो गए, वरना ये हमारी अदला-बदली कर ही देते।
मैं: सही बोल रही हो तुम।
आकाश: क्या बोल रही हो तुम लोग? कल सबके सामने सब की मर्जी से तय हुआ था.
मैं: कल हम सब ने डिनर किया. फिर हम पीने के लिए बैठे और उसके बाद हम अपने-अपने कमरे में चले गए.
अंकिता: इन लोगों के दिमाग में यह सब होगा. इसीलिए यह ऐसा सोच रहे हैं.
दीपक: अरे, ऐसा कुछ नहीं है.
आकाश: हां, हम ऐसा कुछ नहीं सोच रहे हैं.
दोनों के चेहरे देखने लायक हो गए थे. दोनों एक दूसरे की तरफ देख रहे थे. दोनों आश्चर्यचकित थे और सोच रहे होंगे की रात को मेरे साथ कौन थी. फिर मैंने अंकिता को इशारा किया कि अब यह मजाक खत्म करते हैं. उसने भी इशारे से अपनी रजामंदी जाहिर की.
मैं: आप दोनों अपनी-अपनी बीवी के सिर पर हाथ रखकर कसम खाओ की अपनी बीवी के प्रति हमेशा वफादार रहोगे.
आकाश: दीपक, चलो कसम खाते हैं वरना यह हमें नहीं छोड़ेंगी.
दीपक: हां, अब और कोई चारा नहीं है.
अब दीपक मेरे पास आया और आकाश जीजु अंकिता के पास गए. दोनों जैसे ही हमारे सिर पर हाथ रखने वाले थे तब मैं बोली -
मैं: अरे, हमने बोला था कि अपनी-आप बीवी के सर पर हाथ रखना है.
दीपक: हम वही तो कर रहे हैं.
अब अंकिता ने दीपक को कहा -
अंकिता: तो आप मेरे सर पर हाथ रखो.
आकाश: अंकिता, यह तुम क्या कह रही हो? तुम तो मेरी बीवी हो.
दीपक: और मनीषा मेरी बीवी है.
मैं: आप दोनों इतनी जल्दी भूल गए कि कल हमने क्या बोला था. एक दिन के लिए अंकिता दीपक की बीवी है और मैं आकाश जीजू की.
अब दोनों के समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या चल रहा है.
आकाश: यह क्या हो रहा है? कभी कुछ और कभी कुछ!
दीपक: हां भाई, दिमाग खराब करके रख दिया है.
अंकिता हंसने लगी. उसे देखकर मुझे भी हंसी आ गई. फिर मैं जीजू के पास गई अंकिता दीपक के पास. हम दोनों उनसे लिपट गई. फिर अंकिता बोली -
अंकिता: अरे यार, हम मजाक कर रहे थे! यह मनीषा का प्लान था.
आकाश: तो रात को मेरे साथ मनीषा ही थी?
मैं: हां, मैं ही थी आपके साथ.
दीपक: तुम लोगों ने तो हमें डरा ही दिया था.
मैं: और आप दोनों इतनी आसानी से बुद्धू बन गए!
फिर हम सब हंस पड़े और बैठकर बातें करने लगे. मैं आकाश जीजू के पास बैठी थी और अंकिता दीपक के पास. जीजू ने मेरे गले में बांह डाल रखी थी और अंकिता दीपक से चिपकी हुई थी. आकाश जीजू ने नाश्ते का ऑर्डर दिया हुआ था. जब वह आया तो हम सब ने मिलकर नाश्ता किया. फिर आकाश जीजू बोले -
आकाश: अब क्या प्लान है?
दीपक: इन्होंने हमें डराया है तो अब हम इनसे बदला लेंगे, यानी रात वाला प्रोग्राम दोबारा.
अंकिता: मेरा एक सुझाव है. अगर सबको अच्छा लगे तो हम वह कर सकते हैं.
मैं: बोल, क्या सुझाव है?
अंकिता: क्यों ना हम सब यहीं मजे करें?
आकाश: यानी लिविंग रूम में सब मिलकर?
दीपक: क्यों नहीं? परमानेंट बीवी के सामने टेंपरेरी बीवी के साथ करने में कितना मजा आएगा!
मैं: पागल हो क्या तुम सब? मैं सबके सामने नहीं करने वाली.
दीपक: करते हैं ना, यार. बहुत मजा आएगा!
अंकिता: जब रात को मैं और दीपक तुम दोनों की रासलीला देख रहे थे तब सच में बहुत मजा आ रहा था.
मैं: क्या? तुम हम दोनों को करते हुए देख रहे थे?
अंकिता: अब बन मत. मुझे पता है की तूने हमें अपने कमरे के दरवाजे पर देखा था. हमें देख कर तो तेरे पर और जोश चढ़ गया था!
दीपक: और अंकिता, क्या तुम्हें यह पता है कि यह दोनों भी रात को छुपकर हमारा प्रोग्राम देख चुके हैं?
अंकिता: बाप रे, क्या सच में? मुझे तो पता ही नहीं चला.
मैं: तुमने सच में देखा था हमें?
दीपक: हां, देखा था और यह भी देखा था कि आकाश तुम्हारे पीछे बैठकर तुम्हारी चूत सहला रहा था.
अंकिता: जब सब छुप कर देख ही चुके हैं तो फिर सब साथ में करते हैं ना.
मैं: यार, छुप कर देखना अलग बात है और ऐसे आमने-सामने करना अलग बात है. मुझे दीपक के सामने शर्म आएगी.
आकाश: देखो, दीपक तुम्हारे साथ करता ही है और वह तुम्हें मेरे साथ करते हुए भी देख चुका है तो अब शर्म कैसी?
दीपक: हां डार्लिंग, अब शर्म छोड़ो और मजे करो.
अंकिता: यार, अब इतना भाव मत खा.
मैं: अच्छा ठीक है, पर पहले हम अपने असली पति के साथ शुरू करेंगे और बाद में अदला-बदली करेंगे.
आकाश: हां, यह भी ठीक है.
फिर दीपक मेरे पास आ गया और जीजू अंकिता के पास गए। हम पति-पत्नी ने किस करना शुरू किया। धीरे-धीरे चूमा-चाटी गहरी होती गई। जीजू ने अंकिता के कपड़े उतारने शुरू कर दिए और उन्हें देखकर दीपक ने भी मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए। थोड़ी ही देर में हम चारों ही एक-दूसरे के सामने नंगे थे।
क्रमश:
फिर हम दोनों ने बाथरूम जाकर एक-दूसरे को साफ किया। हम दोनों काफी थक गए थे, इसलिए हम एक-दूसरे से लिपटे हुए नंगे ही सो गए। जब सुबह मेरी आंख खुली तो मैं नंगी जीजू की बाहों में थी। मैं धीरे से उठी और नंगी ही अंकिता और दीपक के कमरे में गई। वो दोनों भी नंगे एक-दूसरे से चिपक के सोये हुए थे।
मेरे दिमाग में चुहल करने का ख्याल आया। मैंने आहिस्ता से अंकिता को उठाया और उसे कमरे के बाहर ले आई। मैंने उसे मेरा विचार बताया तो वो उसे भी अच्छा लगा। फिर उसने कमरे में जाकर अपने कपड़े उठाए और आकाश जीजू वाले कमरे में चली गई। मैंने भी वहां से अपने कपड़े उठाए और दीपक के पास चली आई। फिर मैंने अपने कपड़े पहने और दीपक को उठाया। उसने उठते ही मुझे अपने पास देखा तो उसने पूछा-
दीपक: डार्लिंग, तुम यहाँ कब आई?
मैं: कब आई का क्या मतलब? मैं रात को तुम्हारे साथ ही तो इस कमरे में आई थी।
दीपक: क्यों मजाक कर रही हो?
मैं: कैसा मजाक, हम दोनों इस कमरे में कल रात को आए थे।
दीपक: यहाँ तो मैं और अंकिता आए थे। और तुम और आकाश दूसरे कमरे में गए थे।
मैं: तुम इतनी ज्यादा क्यों पी लेते हो? रात का नशा अभी तक नहीं उतरा क्या जो ऐसी ऊटपटांग बातें कर रहे हो?
दीपक: ऊटपटांग तो तुम बोल रही हो। रात को अंकिता और मैं साथ में थे।
मैं: मेरे टल्ली पतिदेव, तुम रात भर मेरे साथ थे। और अंकिता अब भी अपने पतिदेव के साथ होगी।
दीपक: अरे यार, कल हमने तय किया था कि हम एक रात के लिए बीवियों की अदला-बदली करेंगे?
मैं: लगता है कि शराब ने तुम्हारा दिमाग खराब कर दिया है। पता नहीं क्या ऊलजलूल बोल रहे हो।
दीपक: क्या तुम्हें याद नहीं है कि तुम्हारे सामने ही आकाश ने मुझे बोला था कि तुम अंकिता को बेडरूम में ले जाओ और मैं मनीषा को दूसरे बेडरूम में ले जाता हूँ?
मैं: तुमने कोई सपना देखा था क्या? और तुम अंकिता के साथ कुछ ऐसा-वैसा करने का सोच रहे थे क्या?
दीपक: अरे यार, तुम ही तो इतने दिनों से मेरी और अंकिता की सेटिंग करवा रही थी और कल रात तुम्ही ने तो बोला कि जाओ, अंकिता के साथ मजे करो।
मैं: मैंने तुम दोनों की दोस्ती इसलिये करवायी थी कि तुम थोड़ी जीजा-साली वाली मस्ती कर सको। पर तुम तो उसके साथ सोने के सपने देखने लगे! मुझे तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं थी।
दीपक: अरे यार, मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है। रात सच में तुम ही मेरे साथ थी?
मैं: तुम्हें यकीन नहीं हो तो चलो, अंकिता और जीजू से पूछ लेते हैं कौन किसके साथ था। उठो, कपड़े पहनो और बाहर चलो।
फिर दीपक ने अपने कपड़े पहने और हम बाहर लिविंग रूम में आकर सोफे पर बैठ गए। दीपक के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं, और मैं उसे देखकर मुश्किल से अपनी हंसी रोक पा रही थी।
तभी अंकिता और आकाश जीजू भी वहाँ आ गए। अंकिता ने तो कपड़े पहन रखे थे, पर जीजू नंगे थे। आते ही अंकिता बोली -
अंकिता: मनीषा, जरा बता तू रात को कहाँ थी?
मैं (हंसते हुए): जीजू, आप ऐसे ही कैसे आ गए? आपको पता नहीं कि मैं यहाँ हूँ। आपका भी नशा अब तक नहीं उतरा? जाओ, कपड़े पहन कर आओ।
जीजू भी दीपक की तरह हक्के-बक्के लग रहे थे। वो वापस बेडरूम में गए। अंकिता भी उनके साथ गई और फिर जीजू कपड़े पहन के वापस आए।
अंकिता: हाँ मनीषा, अब इन्हें बता कि तू रात भर कहाँ थी?
मैं: कहाँ थी का क्या मतलब? मैं बेडरूम में थी, दीपक के साथ।
अंकिता: ये बोल रहे हैं कि तू रात भर इनके साथ थी ।
मैं: हे भगवान, ये भी ऐसा बोल रहे हैं? दीपक भी बोल रहा है कि तू रात भर इसके साथ थी।
अंकिता: दोनों ने इतनी पी है कि इनका नशा अभी तक नहीं उतरा!
मैं: अंकिता, इन दोनों की नीयत खराब है। तभी ये ऐसी बातें सोच रहे हैं।
दीपक: अरे, कल तक तो तुम दोनों तैयार थीं, आज क्या हो गया?
आकाश: मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है। मनीषा, तुम सच में मेरे साथ नहीं थी कल?
मैं: जीजू, ये आप क्या बोल रहे हो? आपके साथ थोड़ा हंसी-मजाक कर लिया तो आप सीधे बेडरूम में ले जाने की बात कर रहे हो।
अंकिता: अरे, इन दोनों ने जरूर इस तरह का कुछ प्लान बनाया होगा। वो तो अच्छा हुआ कि ये नशे में धुत्त हो गए, वरना ये हमारी अदला-बदली कर ही देते।
मैं: सही बोल रही हो तुम।
आकाश: क्या बोल रही हो तुम लोग? कल सबके सामने सब की मर्जी से तय हुआ था.
मैं: कल हम सब ने डिनर किया. फिर हम पीने के लिए बैठे और उसके बाद हम अपने-अपने कमरे में चले गए.
अंकिता: इन लोगों के दिमाग में यह सब होगा. इसीलिए यह ऐसा सोच रहे हैं.
दीपक: अरे, ऐसा कुछ नहीं है.
आकाश: हां, हम ऐसा कुछ नहीं सोच रहे हैं.
दोनों के चेहरे देखने लायक हो गए थे. दोनों एक दूसरे की तरफ देख रहे थे. दोनों आश्चर्यचकित थे और सोच रहे होंगे की रात को मेरे साथ कौन थी. फिर मैंने अंकिता को इशारा किया कि अब यह मजाक खत्म करते हैं. उसने भी इशारे से अपनी रजामंदी जाहिर की.
मैं: आप दोनों अपनी-अपनी बीवी के सिर पर हाथ रखकर कसम खाओ की अपनी बीवी के प्रति हमेशा वफादार रहोगे.
आकाश: दीपक, चलो कसम खाते हैं वरना यह हमें नहीं छोड़ेंगी.
दीपक: हां, अब और कोई चारा नहीं है.
अब दीपक मेरे पास आया और आकाश जीजु अंकिता के पास गए. दोनों जैसे ही हमारे सिर पर हाथ रखने वाले थे तब मैं बोली -
मैं: अरे, हमने बोला था कि अपनी-आप बीवी के सर पर हाथ रखना है.
दीपक: हम वही तो कर रहे हैं.
अब अंकिता ने दीपक को कहा -
अंकिता: तो आप मेरे सर पर हाथ रखो.
आकाश: अंकिता, यह तुम क्या कह रही हो? तुम तो मेरी बीवी हो.
दीपक: और मनीषा मेरी बीवी है.
मैं: आप दोनों इतनी जल्दी भूल गए कि कल हमने क्या बोला था. एक दिन के लिए अंकिता दीपक की बीवी है और मैं आकाश जीजू की.
अब दोनों के समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या चल रहा है.
आकाश: यह क्या हो रहा है? कभी कुछ और कभी कुछ!
दीपक: हां भाई, दिमाग खराब करके रख दिया है.
अंकिता हंसने लगी. उसे देखकर मुझे भी हंसी आ गई. फिर मैं जीजू के पास गई अंकिता दीपक के पास. हम दोनों उनसे लिपट गई. फिर अंकिता बोली -
अंकिता: अरे यार, हम मजाक कर रहे थे! यह मनीषा का प्लान था.
आकाश: तो रात को मेरे साथ मनीषा ही थी?
मैं: हां, मैं ही थी आपके साथ.
दीपक: तुम लोगों ने तो हमें डरा ही दिया था.
मैं: और आप दोनों इतनी आसानी से बुद्धू बन गए!
फिर हम सब हंस पड़े और बैठकर बातें करने लगे. मैं आकाश जीजू के पास बैठी थी और अंकिता दीपक के पास. जीजू ने मेरे गले में बांह डाल रखी थी और अंकिता दीपक से चिपकी हुई थी. आकाश जीजू ने नाश्ते का ऑर्डर दिया हुआ था. जब वह आया तो हम सब ने मिलकर नाश्ता किया. फिर आकाश जीजू बोले -
आकाश: अब क्या प्लान है?
दीपक: इन्होंने हमें डराया है तो अब हम इनसे बदला लेंगे, यानी रात वाला प्रोग्राम दोबारा.
अंकिता: मेरा एक सुझाव है. अगर सबको अच्छा लगे तो हम वह कर सकते हैं.
मैं: बोल, क्या सुझाव है?
अंकिता: क्यों ना हम सब यहीं मजे करें?
आकाश: यानी लिविंग रूम में सब मिलकर?
दीपक: क्यों नहीं? परमानेंट बीवी के सामने टेंपरेरी बीवी के साथ करने में कितना मजा आएगा!
मैं: पागल हो क्या तुम सब? मैं सबके सामने नहीं करने वाली.
दीपक: करते हैं ना, यार. बहुत मजा आएगा!
अंकिता: जब रात को मैं और दीपक तुम दोनों की रासलीला देख रहे थे तब सच में बहुत मजा आ रहा था.
मैं: क्या? तुम हम दोनों को करते हुए देख रहे थे?
अंकिता: अब बन मत. मुझे पता है की तूने हमें अपने कमरे के दरवाजे पर देखा था. हमें देख कर तो तेरे पर और जोश चढ़ गया था!
दीपक: और अंकिता, क्या तुम्हें यह पता है कि यह दोनों भी रात को छुपकर हमारा प्रोग्राम देख चुके हैं?
अंकिता: बाप रे, क्या सच में? मुझे तो पता ही नहीं चला.
मैं: तुमने सच में देखा था हमें?
दीपक: हां, देखा था और यह भी देखा था कि आकाश तुम्हारे पीछे बैठकर तुम्हारी चूत सहला रहा था.
अंकिता: जब सब छुप कर देख ही चुके हैं तो फिर सब साथ में करते हैं ना.
मैं: यार, छुप कर देखना अलग बात है और ऐसे आमने-सामने करना अलग बात है. मुझे दीपक के सामने शर्म आएगी.
आकाश: देखो, दीपक तुम्हारे साथ करता ही है और वह तुम्हें मेरे साथ करते हुए भी देख चुका है तो अब शर्म कैसी?
दीपक: हां डार्लिंग, अब शर्म छोड़ो और मजे करो.
अंकिता: यार, अब इतना भाव मत खा.
मैं: अच्छा ठीक है, पर पहले हम अपने असली पति के साथ शुरू करेंगे और बाद में अदला-बदली करेंगे.
आकाश: हां, यह भी ठीक है.
फिर दीपक मेरे पास आ गया और जीजू अंकिता के पास गए। हम पति-पत्नी ने किस करना शुरू किया। धीरे-धीरे चूमा-चाटी गहरी होती गई। जीजू ने अंकिता के कपड़े उतारने शुरू कर दिए और उन्हें देखकर दीपक ने भी मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए। थोड़ी ही देर में हम चारों ही एक-दूसरे के सामने नंगे थे।
क्रमश:


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