11-03-2026, 05:17 PM
भाग 9
जीजू का लंड छोटा हो गया था पर उनका जोश कम नहीं हुआ था। वो मेरे मम्मों के साथ खेल रहे थे, कभी निप्पल को मसलते तो कभी पूरी चूची को दबाते। फिर हम बातें करने लगे -
मे: जीजू, आपको मजा आया?
जीजू: हां रानी, मजा तो इतना आया कि पूछो मत। तुम्हारी चूत इतनी चुस्त है कि लग रहा था जैसे मैं अपनी कुँवारी दुल्हन को चोद रहा हूँ।
मे: आपका लंड बहुत मोटा है, इसलिए आपको मेरी चूत चुस्त लग रही थी। मुझे भी लग रहा था कि मैं आज पहली बार अपने दूल्हे से चुद रही हूँ।
जिजू: शुरू में मुझे लग रहा था कि तुम मुझे हाथ भी नहीं लगाने दोगी।
मैं: दीपक ने आज रात के लिए मुझे आपकी दुल्हन बनाया है, और अपने दूल्हे को खुश करना तो दुल्हन का फर्ज है।
जिजू: लेकिन मेरी प्यारी दुल्हन को मजा आया या नहीं?
मैं: मेरे प्यारे पतिदेव, मुझे भी बहुत मजा आया।
जीजु: वैसे दीपक और अंकिता क्या कर रहे होंगे?
मैं: ये भी कोई पूछने की बात है। अब तक तो दीपक अपनी नई दुल्हन को चोद चुका होगा।
जीजु: चलो न, चल कर देखते हैं।
मैं: ख्याल तो अच्छा है। ऐसे दूसरों को यह काम करते देखने में मजा आता है।
जिजू: है ना? तो चलो फिर।
मैं: कपड़े तो पहनने दो, ऐसे नंगे ही जाएंगे क्या?
आकाश जिजू: मेरी दुल्हन, हम छुपके देखने वाले हैं। उन्हें थोड़े ही पता चलेगा।
मैं: फिर भी दीपक के सामने ऐसे नंगी कैसे जाऊं?
आकाश जिजू: अरे डार्लिंग, वो कहाँ तुम्हे देखेगा? और फिर वो दोनों भी तो नंगे ही होंगे।
मैं: अच्छा ठीक है। पर वहाँ एकदम चुपचाप रहना। उन्हें पता नहीं चलना चाहिए कि हम उन्हें देख रहे हैं।आकाश जीजु: हाँ, अब चलो।
फिर हम दोनों नंगे ही दबे पाँव बाहर आए और दूसरे बेडरूम के बाहर खड़े हो गए जिसमें अंकिता और दीपक थे। जीजू ने धीरे से किवाड़ थोड़ा सा खोला। फिर वो मेरे पीछे आके खड़े हो गए। जब मैंने अंदर देखा तो अंकिता बिस्तर पर घुटनों के बल झुकी हुई थी, और दीपक उसे पीछे से चोद रहा था।
मैं: हम यहाँ नीचे बैठ के देखते हैं। खड़े रहे तो उनकी नजरों में आ सकते हैं।
फिर हम वहीं बैठ गए। मैं आगे थी और जीजू मेरे पीछे बैठे थे। दीपक मज़े से अंकिता को चोद रहा था। हमें दीपक के सिर्फ चूतड़ दिख रहे थे। अंकिता के भी नितंब साइड से दिख रहे थे। उसके नितंब बहुत सुडौल और लुभावने थे। उसके मम्मे भी अर्ध-गोलाकार थे और झूलते हुए बड़े मनमोहक दिख रहे थे। जब दीपक धक्के मारता था, तो अंकिता के मम्मे हिलते थे। क्या नज़ारा था! किसी को ऐसे चुदते हुए देखने का मेरा पहला मौका था। मैंने पीछे देखा तो जीजू अपनी बीवी को चुदते हुए देखकर बिलकुल भी दुखी नहीं लग रहे थे बल्कि वे मुग्ध होकर उन्हें देख रहे थे और उनका लंड फिर खड़ा हो गया था।
सामने का नज़ारा अब बदल गया था। मतलब उन्होंने आसन बदल लिया था। अब दीपक बेड से नीचे उतर गया था और अंकिता बेड के किनारे पर अपने पैर नीचे लटका के बैठ गई थी।
अब मेरी नज़र अंकिता की चूत पर पड़ी। उसकी चूत भी मेरी तरह एकदम चिकनी और साफ़ थी। पर उसकी चूत थोड़ी उभरी हुई थी। दीपक ने अंकिता के पैर अपनी कमर के गिर्द रखे और अपना लंड उसकी चूत पर रखा। फिर एक ही धक्के में उसने पूरा लंड अंदर डाल दिया। अंकिता ने आसानी से उसका लंड अंदर ले लिया था क्योंकि दीपक का लंड लंबा तो था पर आकाश जीजू जितना मोटा नहीं था।
जीजु ने मेरे कान में धीरे से बोला: दीपक का लंड तो मुझसे भी लंबा है।
मैंने उन्हें चुप रहने का इशारा किया। उधर दीपक का लंड अंकिता की चूत में धमाचौकड़ी मचा रहा था और हर धक्के के साथ अंकिता के मम्मे उछल रहे थे।
अंकिता बोल रही थी: राजा, बहुत मजा आ रहा है, और जोर से धक्के मारो। आपका लंड बहुत लंबा है। ये बहुत अंदर तक जा रहा है।
नीचे बैठे होने के कारण हमें दीपक का लंड अंकिता की चूत में अंदर-बाहर होते साफ दिख रहा था। अंकिता की चूत लंड को जकड़े थी। क्योंकि चूत लचीली होती है, वो लंड की मोटाई के अनुसार अपने आप को एडजस्ट कर लेती है।
यहाँ जीजू ने मुझे अपनी गोद में बैठा लिया। उनका लंड मुझे अपने नितम्बों के बीच महसूस हो रहा था। जीजू पीछे से मेरी चूचियाँ सहला रहे थे, और कभी-कभी मेरी चूत भी सहला देते थे। उधर दीपक ने चुदाई की स्पीड बढ़ा दी थी। अंकिता आहें भर रही थी और बोल रही थी - और जोर से… और अंदर तक… मजा आ रहा है।
हमारे सामने ज़िंदा ब्लू फिल्म चल रही थी। ऐसे चुदाई देखने का अलग ही मज़ा है, वो भी अपनी बहन को अपने पति से चुदता देखने का। आकाश जीजू भी पहली बार अपनी बीवी को चुदते देख रहे थे। सामने दीपक-अंकिता की चुदाई और इधर जीजू का मुझे उत्तेजित करना, मेरी चूत फिर से पनिया गई थी। अब मैं चुदने के लिए बेकरार हो गई थी। मैंने जीजू को वहाँ से चलने का इशारा किया। मैंने किवाड़ को धीरे से बंद किया और हम हमारे बेडरूम में आ गए।
जैसे ही हम कमरे में आए, एक-दूसरे से लिपट के किस करने लगे, एक-दूसरे की जीभ चूसते और होंठ चूसते हुए। जीजा का एक हाथ मेरे मम्मे पर था और दूसरा मेरी कमर पर। मैं भी उनका लंड पकड़ कर मसलने लगी। फिर मैं नीचे बैठ गई और लंड मुँह में लेकर चूसने लगी। जीजा आँखें बंद करके मजा ले रहे थे और मेरे सिर को अपने लंड पर आगे-पीछे कर रहे थे। मुझे उनका तगड़ा लंड चूसने में बहुत मजा आ रहा था। अब मेरा मुँह उनके लंड की मोटाई का अभ्यस्त हो गया था।
फिर जीजू ने मुझे ऊपर उठाया और हम बिस्तर पर आ गए। जीजू मेरी चूचियां चूसने लगे। वे एक निप्पल चूस रहे थे और दूसरा मसल रहे थे। फिर वे मेरे पूरे शरीर को किस करने लगे, गालों पर, होंठों पर, गर्दन पर, चूचियों पर, पेट पर, और नाभि पर। फिर वे नाभि में जीभ घुसाने लगे।
इस सब से मेरी चूत तो पूरी तरह गीली हो गई थी। फिर जीजू ने नीचे से मेरे पैरों को किस करना शुरू किया और धीरे-धीरे ऊपर आने लगे, टांगों से जांघों तक। जांघों पे आके वे थोड़ा रुके और मेरी चूत का नज़ारा देखने लगे। फिर उन्होंने मेरी चूत का चुम्मा लिया और उसे चाटने लगे। उनकी जीभ के जादू के आगे मैं ज़्यादा नहीं टिक पाई और बिना चुदे ही झड़ गई।
फिर जिजू ने मुझे पेट के बल लिटाया और वे मेरी पीठ पर किस करने लगे। पूरी पीठ पर किस करते हुए वो नीचे की ओर जा रहे थे। वे नितंबों पर आकर रुक गए और उन्हें हाथ से सहलाने लगे, कभी हल्के से सहलाते तो कभी ज़ोर से मसल देते। फिर जिजू मेरे नितंबों को फैलाकर मेरी गांड के छेद को चाटने लगे। मुझे इस गुदा-चुम्बन में बड़ा मज़ा आ रहा था। तभी जिजू ने मेरे नितंब पर एक थपकी दी और बोले-
जिजू: मनीषा, तुम्हारे चूतड़ बड़े मस्त हैं। इनके साथ खेलने में बड़ा मजा आ रहा है।
मैं: अंकिता के तो मुझसे भी सुडौल हैं।
जिजू: हाँ हैं, पर तुम्हारे जितने नरम और गद्देदार नहीं हैं।
मैं: अच्छा जी?
जिजू: हाँ, मुझे तुम्हारे नितंब बहुत मनमोहक लग रहे हैं।
मैं: थैंक यू।
जिजू: डार्लिंग, एक बार गांड मारने दो ना।
मैं: पति जी, मैंने कहा था ना कि आज के लिए आप मेरे पति हो। आपको मेरे साथ जो करना है, आप कर सकते हो।
जिजू: सच, डार्लिंग?
मैं: हां जी।
फिर जिजू मेरे ऊपर आके मेरी गांड पे अपना लंड रगड़ने लगे। उसके बाद पूछने लगे-
जिजू: कभी गांड मरवायी है तुमने?
मैं: हाँ, दीपक को भी गांड मारने का शौक है।
जीजू: फिर तो कोई दिक्कत नहीं होगी, आराम से चला जाएगा अंदर।
मैं: अपना लंड देखा है आपने... कितना मोटा है और सुपाड़ा तो बाप रे बाप। डालने से पहले तेल लगा लेना।
जीजू: तुम फिक्र मत करो, सब इंतज़ाम है।
मैं: अच्छा जी, तो आपने सुहागरात में अपनी दुल्हन की गांड मारने का भी इंतज़ाम कर रखा है।
जीजू: तुम्हारी गांड है ही ऐसी। उसे देख कर दूल्हा लिए बिना कैसे रह सकता है?
मैं: जी, लेकिन धीरे-धीरे आराम से लेना।
जीजु: मेरी जान, तुम चिंता मत करो। मैं इतनी प्यारी गांड को नुक्सान नहीं होने दूंगा.
फिर जीजु बाथरूम से तेल लेकर आए और उसे मेरी गांड के अंदर तक लगाया और अपने लंड पे भी। उन्होंने अपने लंड को मेरी गांड पे रखा और धीरे-धीरे दबाव बढ़ाया। उनके लंड का सुपाड़ा मेरी गांड में घुसा तो मेरी चीख निकल गई।
मैंने दीपक से कई बार गांड मरवाई थी, पर जीजू का लंड मोटा था इसलिए मुझे दर्द हो रहा था। मैंने जीजू को रुकने के लिए कहा। वो थोड़ी देर तक ऐसे ही रहे, मुझे लगा कि मेरी गांड धीरे-धीरे लंड को जगह दे रही है। थोड़ी देर हम दोनों ऐसे ही पड़े रहे।
फिर जब मेरा दर्द कम हुआ तो मैंने जीजू को बाकी लंड भी डालने को कहा। जीजू ने एक जोर का धक्का मारा और पूरा लंड मेरी गांड में घुसा दिया। मैं बिदक कर उछल गई। ऐसा लगा जैसे मेरी गांड में मूसल की चोट पड़ी हो। मैंने हिम्मत करके यह चोट सहन की।
जीजू धीरे-धीरे मेरे मम्मे सहला रहे थे और मेरे गाल पर किस कर रहे थे। फिर थोड़ी देर बाद जीजू हलके-हलके धक्के लगाने लगे। उनका मोटा लंड मेरी गांड के अंदर-बाहर हो रहा था। मुझे दर्द कम हो रहा था और मज़ा ज्यादा आ रहा था। मुझे अब पता चला कि मोटे लंड से चुदने में तो मजा आता ही है, पर गांड मरवाने में भी मजा आता है। मैं सिसकते हुए उनके लंड के धक्कों का मजा ले रही थी।
थोड़ी देर बाद जीजू जोर से आहें भरते हुए मेरी गांड में झड़ गए। उनके साथ मेरा भी पानी निकल गया। फिर जीजू ने मेरी गांड से अपना लंड निकाला और हम दोनों ने वॉशरूम जाकर अपने को साफ किया। वापस आकर हम दोनों साथ में लेट गए।
जीजू मेरी चूचियों से खेलते हुए मुझे किस करने लगे। मैं भी उनका पूरा साथ दे रही थी। मैं नीचे खिसकी और मैंने जीजू का लंड अपने मुंह में ले लिया। मैं पूरा लंड मुंह में लेकर चूसने लगी। थोड़ी ही देर में लंड फिर से सख्त होने लगा। जी भर के लंड चूसने के बाद मैं जीजू के ऊपर आ गई और मैंने लंड अपनी चूत पर सेट कर लिया। मैंने धीरे-धीरे दबाव बढ़ाया और लंड मेरी चूत में समाता चला गया। थोड़ी देर में पूरा लंड मेरी चूत में अंदर तक घुस गया। तभी अचानक मेरी नज़र दरवाजे पर पड़ी। दीपक और अंकिता चुपचाप हमें देख रहे थे, वो भी पूरे नंगे। शायद वो दोनों मेरी चीख सुन के आए थे और फिर उन्हें जिन्दा फिल्म देखने को मिल गई। दीपक अंकिता के पीछे खड़ा होकर उसके मम्मों से खेल रहा था और अंकिता उसका लंड सहला रही थी। उन दोनों को सामने देख कर मुझे शर्म आ रही थी पर उन्हें एक-दूसरे के साथ खेलता देख कर मैंने हिम्मत की.
मैं जीजू के लंड पर उछलती हुई चुदवाने लगी। मुझे इस आसन में चुदवाना बहुत पसंद है। जीजू भी नीचे से धक्के मार रहे थे। जीजू ने मेरे मम्मे पकड़ लिए और उन्हें मसलने लगे। मुझे ऐसे चुदने में बड़ा मजा आ रहा था। उधर दीपक का हाथ अंकिता की चूत पर चला गया था और अंकिता तो पहले से ही दीपक का लंड मसल रही थी। उन्हें देखकर मुझे और जोश आ गया और मैं और जोर से लंड पर उछलने लगी। थोड़ी देर में मेरी चूत ने जवाब दे दिया। मेरी चूत का पानी जीजु के लंड को भिगोते हुए बाहर आ रहा था। मैं निढाल होकर जीजु के ऊपर लेट गई।
जीजू का काम अभी तक नहीं हुआ था। उन्होंने मुझे नीचे लिटाया और खुद मेरे ऊपर आ गए। उन्होंने मेरे चूतड़ों के नीचे तकिया रखा जिससे मेरी चूत ऊपर उठ गई। फिर जीजू ने अपना लंड मेरी चूत पर रखा और एक ही धक्के में पूरा लंड मेरी चूत में उतार दिया। फिर वो मुझे सटासट चोदने लगे।
मेरी नजर दरवाजे पर गई तो अंकिता और दीपक वहां नहीं थे। हमें चुदाई में लिप्त देखकर शायद उनका भी मन एक बार और चुदाई करने का हो गया होगा। जीजू पूरी ताकत लगा के मुझे चोद रहे थे और मैं पूरा मजा लेती हुई उनसे चुद रही थी। थोड़ी ही देर में मेरी चू्त में सनसनी होने लगी। जीजू का भी होने वाला था पर इस बार उन्होंने कंडोम नहीं पहना था। इसलिए उन्होंने लंड बाहर निकाला और वे मेरे मम्मों पर झड़ गए। यह बिलकुल ब्लू फिल्मों जैसा सीन था। जब मेरे मम्मों पर उनके पानी की बौछार पड़ी तो मैं भी झड़ गई।
क्रमश:
जीजू का लंड छोटा हो गया था पर उनका जोश कम नहीं हुआ था। वो मेरे मम्मों के साथ खेल रहे थे, कभी निप्पल को मसलते तो कभी पूरी चूची को दबाते। फिर हम बातें करने लगे -
मे: जीजू, आपको मजा आया?
जीजू: हां रानी, मजा तो इतना आया कि पूछो मत। तुम्हारी चूत इतनी चुस्त है कि लग रहा था जैसे मैं अपनी कुँवारी दुल्हन को चोद रहा हूँ।
मे: आपका लंड बहुत मोटा है, इसलिए आपको मेरी चूत चुस्त लग रही थी। मुझे भी लग रहा था कि मैं आज पहली बार अपने दूल्हे से चुद रही हूँ।
जिजू: शुरू में मुझे लग रहा था कि तुम मुझे हाथ भी नहीं लगाने दोगी।
मैं: दीपक ने आज रात के लिए मुझे आपकी दुल्हन बनाया है, और अपने दूल्हे को खुश करना तो दुल्हन का फर्ज है।
जिजू: लेकिन मेरी प्यारी दुल्हन को मजा आया या नहीं?
मैं: मेरे प्यारे पतिदेव, मुझे भी बहुत मजा आया।
जीजु: वैसे दीपक और अंकिता क्या कर रहे होंगे?
मैं: ये भी कोई पूछने की बात है। अब तक तो दीपक अपनी नई दुल्हन को चोद चुका होगा।
जीजु: चलो न, चल कर देखते हैं।
मैं: ख्याल तो अच्छा है। ऐसे दूसरों को यह काम करते देखने में मजा आता है।
जिजू: है ना? तो चलो फिर।
मैं: कपड़े तो पहनने दो, ऐसे नंगे ही जाएंगे क्या?
आकाश जिजू: मेरी दुल्हन, हम छुपके देखने वाले हैं। उन्हें थोड़े ही पता चलेगा।
मैं: फिर भी दीपक के सामने ऐसे नंगी कैसे जाऊं?
आकाश जिजू: अरे डार्लिंग, वो कहाँ तुम्हे देखेगा? और फिर वो दोनों भी तो नंगे ही होंगे।
मैं: अच्छा ठीक है। पर वहाँ एकदम चुपचाप रहना। उन्हें पता नहीं चलना चाहिए कि हम उन्हें देख रहे हैं।आकाश जीजु: हाँ, अब चलो।
फिर हम दोनों नंगे ही दबे पाँव बाहर आए और दूसरे बेडरूम के बाहर खड़े हो गए जिसमें अंकिता और दीपक थे। जीजू ने धीरे से किवाड़ थोड़ा सा खोला। फिर वो मेरे पीछे आके खड़े हो गए। जब मैंने अंदर देखा तो अंकिता बिस्तर पर घुटनों के बल झुकी हुई थी, और दीपक उसे पीछे से चोद रहा था।
मैं: हम यहाँ नीचे बैठ के देखते हैं। खड़े रहे तो उनकी नजरों में आ सकते हैं।
फिर हम वहीं बैठ गए। मैं आगे थी और जीजू मेरे पीछे बैठे थे। दीपक मज़े से अंकिता को चोद रहा था। हमें दीपक के सिर्फ चूतड़ दिख रहे थे। अंकिता के भी नितंब साइड से दिख रहे थे। उसके नितंब बहुत सुडौल और लुभावने थे। उसके मम्मे भी अर्ध-गोलाकार थे और झूलते हुए बड़े मनमोहक दिख रहे थे। जब दीपक धक्के मारता था, तो अंकिता के मम्मे हिलते थे। क्या नज़ारा था! किसी को ऐसे चुदते हुए देखने का मेरा पहला मौका था। मैंने पीछे देखा तो जीजू अपनी बीवी को चुदते हुए देखकर बिलकुल भी दुखी नहीं लग रहे थे बल्कि वे मुग्ध होकर उन्हें देख रहे थे और उनका लंड फिर खड़ा हो गया था।
सामने का नज़ारा अब बदल गया था। मतलब उन्होंने आसन बदल लिया था। अब दीपक बेड से नीचे उतर गया था और अंकिता बेड के किनारे पर अपने पैर नीचे लटका के बैठ गई थी।
अब मेरी नज़र अंकिता की चूत पर पड़ी। उसकी चूत भी मेरी तरह एकदम चिकनी और साफ़ थी। पर उसकी चूत थोड़ी उभरी हुई थी। दीपक ने अंकिता के पैर अपनी कमर के गिर्द रखे और अपना लंड उसकी चूत पर रखा। फिर एक ही धक्के में उसने पूरा लंड अंदर डाल दिया। अंकिता ने आसानी से उसका लंड अंदर ले लिया था क्योंकि दीपक का लंड लंबा तो था पर आकाश जीजू जितना मोटा नहीं था।
जीजु ने मेरे कान में धीरे से बोला: दीपक का लंड तो मुझसे भी लंबा है।
मैंने उन्हें चुप रहने का इशारा किया। उधर दीपक का लंड अंकिता की चूत में धमाचौकड़ी मचा रहा था और हर धक्के के साथ अंकिता के मम्मे उछल रहे थे।
अंकिता बोल रही थी: राजा, बहुत मजा आ रहा है, और जोर से धक्के मारो। आपका लंड बहुत लंबा है। ये बहुत अंदर तक जा रहा है।
नीचे बैठे होने के कारण हमें दीपक का लंड अंकिता की चूत में अंदर-बाहर होते साफ दिख रहा था। अंकिता की चूत लंड को जकड़े थी। क्योंकि चूत लचीली होती है, वो लंड की मोटाई के अनुसार अपने आप को एडजस्ट कर लेती है।
यहाँ जीजू ने मुझे अपनी गोद में बैठा लिया। उनका लंड मुझे अपने नितम्बों के बीच महसूस हो रहा था। जीजू पीछे से मेरी चूचियाँ सहला रहे थे, और कभी-कभी मेरी चूत भी सहला देते थे। उधर दीपक ने चुदाई की स्पीड बढ़ा दी थी। अंकिता आहें भर रही थी और बोल रही थी - और जोर से… और अंदर तक… मजा आ रहा है।
हमारे सामने ज़िंदा ब्लू फिल्म चल रही थी। ऐसे चुदाई देखने का अलग ही मज़ा है, वो भी अपनी बहन को अपने पति से चुदता देखने का। आकाश जीजू भी पहली बार अपनी बीवी को चुदते देख रहे थे। सामने दीपक-अंकिता की चुदाई और इधर जीजू का मुझे उत्तेजित करना, मेरी चूत फिर से पनिया गई थी। अब मैं चुदने के लिए बेकरार हो गई थी। मैंने जीजू को वहाँ से चलने का इशारा किया। मैंने किवाड़ को धीरे से बंद किया और हम हमारे बेडरूम में आ गए।
जैसे ही हम कमरे में आए, एक-दूसरे से लिपट के किस करने लगे, एक-दूसरे की जीभ चूसते और होंठ चूसते हुए। जीजा का एक हाथ मेरे मम्मे पर था और दूसरा मेरी कमर पर। मैं भी उनका लंड पकड़ कर मसलने लगी। फिर मैं नीचे बैठ गई और लंड मुँह में लेकर चूसने लगी। जीजा आँखें बंद करके मजा ले रहे थे और मेरे सिर को अपने लंड पर आगे-पीछे कर रहे थे। मुझे उनका तगड़ा लंड चूसने में बहुत मजा आ रहा था। अब मेरा मुँह उनके लंड की मोटाई का अभ्यस्त हो गया था।
फिर जीजू ने मुझे ऊपर उठाया और हम बिस्तर पर आ गए। जीजू मेरी चूचियां चूसने लगे। वे एक निप्पल चूस रहे थे और दूसरा मसल रहे थे। फिर वे मेरे पूरे शरीर को किस करने लगे, गालों पर, होंठों पर, गर्दन पर, चूचियों पर, पेट पर, और नाभि पर। फिर वे नाभि में जीभ घुसाने लगे।
इस सब से मेरी चूत तो पूरी तरह गीली हो गई थी। फिर जीजू ने नीचे से मेरे पैरों को किस करना शुरू किया और धीरे-धीरे ऊपर आने लगे, टांगों से जांघों तक। जांघों पे आके वे थोड़ा रुके और मेरी चूत का नज़ारा देखने लगे। फिर उन्होंने मेरी चूत का चुम्मा लिया और उसे चाटने लगे। उनकी जीभ के जादू के आगे मैं ज़्यादा नहीं टिक पाई और बिना चुदे ही झड़ गई।
फिर जिजू ने मुझे पेट के बल लिटाया और वे मेरी पीठ पर किस करने लगे। पूरी पीठ पर किस करते हुए वो नीचे की ओर जा रहे थे। वे नितंबों पर आकर रुक गए और उन्हें हाथ से सहलाने लगे, कभी हल्के से सहलाते तो कभी ज़ोर से मसल देते। फिर जिजू मेरे नितंबों को फैलाकर मेरी गांड के छेद को चाटने लगे। मुझे इस गुदा-चुम्बन में बड़ा मज़ा आ रहा था। तभी जिजू ने मेरे नितंब पर एक थपकी दी और बोले-
जिजू: मनीषा, तुम्हारे चूतड़ बड़े मस्त हैं। इनके साथ खेलने में बड़ा मजा आ रहा है।
मैं: अंकिता के तो मुझसे भी सुडौल हैं।
जिजू: हाँ हैं, पर तुम्हारे जितने नरम और गद्देदार नहीं हैं।
मैं: अच्छा जी?
जिजू: हाँ, मुझे तुम्हारे नितंब बहुत मनमोहक लग रहे हैं।
मैं: थैंक यू।
जिजू: डार्लिंग, एक बार गांड मारने दो ना।
मैं: पति जी, मैंने कहा था ना कि आज के लिए आप मेरे पति हो। आपको मेरे साथ जो करना है, आप कर सकते हो।
जिजू: सच, डार्लिंग?
मैं: हां जी।
फिर जिजू मेरे ऊपर आके मेरी गांड पे अपना लंड रगड़ने लगे। उसके बाद पूछने लगे-
जिजू: कभी गांड मरवायी है तुमने?
मैं: हाँ, दीपक को भी गांड मारने का शौक है।
जीजू: फिर तो कोई दिक्कत नहीं होगी, आराम से चला जाएगा अंदर।
मैं: अपना लंड देखा है आपने... कितना मोटा है और सुपाड़ा तो बाप रे बाप। डालने से पहले तेल लगा लेना।
जीजू: तुम फिक्र मत करो, सब इंतज़ाम है।
मैं: अच्छा जी, तो आपने सुहागरात में अपनी दुल्हन की गांड मारने का भी इंतज़ाम कर रखा है।
जीजू: तुम्हारी गांड है ही ऐसी। उसे देख कर दूल्हा लिए बिना कैसे रह सकता है?
मैं: जी, लेकिन धीरे-धीरे आराम से लेना।
जीजु: मेरी जान, तुम चिंता मत करो। मैं इतनी प्यारी गांड को नुक्सान नहीं होने दूंगा.
फिर जीजु बाथरूम से तेल लेकर आए और उसे मेरी गांड के अंदर तक लगाया और अपने लंड पे भी। उन्होंने अपने लंड को मेरी गांड पे रखा और धीरे-धीरे दबाव बढ़ाया। उनके लंड का सुपाड़ा मेरी गांड में घुसा तो मेरी चीख निकल गई।
मैंने दीपक से कई बार गांड मरवाई थी, पर जीजू का लंड मोटा था इसलिए मुझे दर्द हो रहा था। मैंने जीजू को रुकने के लिए कहा। वो थोड़ी देर तक ऐसे ही रहे, मुझे लगा कि मेरी गांड धीरे-धीरे लंड को जगह दे रही है। थोड़ी देर हम दोनों ऐसे ही पड़े रहे।
फिर जब मेरा दर्द कम हुआ तो मैंने जीजू को बाकी लंड भी डालने को कहा। जीजू ने एक जोर का धक्का मारा और पूरा लंड मेरी गांड में घुसा दिया। मैं बिदक कर उछल गई। ऐसा लगा जैसे मेरी गांड में मूसल की चोट पड़ी हो। मैंने हिम्मत करके यह चोट सहन की।
जीजू धीरे-धीरे मेरे मम्मे सहला रहे थे और मेरे गाल पर किस कर रहे थे। फिर थोड़ी देर बाद जीजू हलके-हलके धक्के लगाने लगे। उनका मोटा लंड मेरी गांड के अंदर-बाहर हो रहा था। मुझे दर्द कम हो रहा था और मज़ा ज्यादा आ रहा था। मुझे अब पता चला कि मोटे लंड से चुदने में तो मजा आता ही है, पर गांड मरवाने में भी मजा आता है। मैं सिसकते हुए उनके लंड के धक्कों का मजा ले रही थी।
थोड़ी देर बाद जीजू जोर से आहें भरते हुए मेरी गांड में झड़ गए। उनके साथ मेरा भी पानी निकल गया। फिर जीजू ने मेरी गांड से अपना लंड निकाला और हम दोनों ने वॉशरूम जाकर अपने को साफ किया। वापस आकर हम दोनों साथ में लेट गए।
जीजू मेरी चूचियों से खेलते हुए मुझे किस करने लगे। मैं भी उनका पूरा साथ दे रही थी। मैं नीचे खिसकी और मैंने जीजू का लंड अपने मुंह में ले लिया। मैं पूरा लंड मुंह में लेकर चूसने लगी। थोड़ी ही देर में लंड फिर से सख्त होने लगा। जी भर के लंड चूसने के बाद मैं जीजू के ऊपर आ गई और मैंने लंड अपनी चूत पर सेट कर लिया। मैंने धीरे-धीरे दबाव बढ़ाया और लंड मेरी चूत में समाता चला गया। थोड़ी देर में पूरा लंड मेरी चूत में अंदर तक घुस गया। तभी अचानक मेरी नज़र दरवाजे पर पड़ी। दीपक और अंकिता चुपचाप हमें देख रहे थे, वो भी पूरे नंगे। शायद वो दोनों मेरी चीख सुन के आए थे और फिर उन्हें जिन्दा फिल्म देखने को मिल गई। दीपक अंकिता के पीछे खड़ा होकर उसके मम्मों से खेल रहा था और अंकिता उसका लंड सहला रही थी। उन दोनों को सामने देख कर मुझे शर्म आ रही थी पर उन्हें एक-दूसरे के साथ खेलता देख कर मैंने हिम्मत की.
मैं जीजू के लंड पर उछलती हुई चुदवाने लगी। मुझे इस आसन में चुदवाना बहुत पसंद है। जीजू भी नीचे से धक्के मार रहे थे। जीजू ने मेरे मम्मे पकड़ लिए और उन्हें मसलने लगे। मुझे ऐसे चुदने में बड़ा मजा आ रहा था। उधर दीपक का हाथ अंकिता की चूत पर चला गया था और अंकिता तो पहले से ही दीपक का लंड मसल रही थी। उन्हें देखकर मुझे और जोश आ गया और मैं और जोर से लंड पर उछलने लगी। थोड़ी देर में मेरी चूत ने जवाब दे दिया। मेरी चूत का पानी जीजु के लंड को भिगोते हुए बाहर आ रहा था। मैं निढाल होकर जीजु के ऊपर लेट गई।
जीजू का काम अभी तक नहीं हुआ था। उन्होंने मुझे नीचे लिटाया और खुद मेरे ऊपर आ गए। उन्होंने मेरे चूतड़ों के नीचे तकिया रखा जिससे मेरी चूत ऊपर उठ गई। फिर जीजू ने अपना लंड मेरी चूत पर रखा और एक ही धक्के में पूरा लंड मेरी चूत में उतार दिया। फिर वो मुझे सटासट चोदने लगे।
मेरी नजर दरवाजे पर गई तो अंकिता और दीपक वहां नहीं थे। हमें चुदाई में लिप्त देखकर शायद उनका भी मन एक बार और चुदाई करने का हो गया होगा। जीजू पूरी ताकत लगा के मुझे चोद रहे थे और मैं पूरा मजा लेती हुई उनसे चुद रही थी। थोड़ी ही देर में मेरी चू्त में सनसनी होने लगी। जीजू का भी होने वाला था पर इस बार उन्होंने कंडोम नहीं पहना था। इसलिए उन्होंने लंड बाहर निकाला और वे मेरे मम्मों पर झड़ गए। यह बिलकुल ब्लू फिल्मों जैसा सीन था। जब मेरे मम्मों पर उनके पानी की बौछार पड़ी तो मैं भी झड़ गई।
क्रमश:


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