10-03-2026, 05:11 PM
भाग 8
जीजू मेरा हाथ पकड़ के मुझे दूसरे बेडरूम में ले जाने लगे। दूसरे बेडरूम में जाते हुए हम उस बेडरूम के सामने से गुज़रे जहाँ दीपक और अंकिता थे। मैंने जीजू को रोका और किवाड़ को हलका सा धक्का दिया तो किवाड़ थोड़ा खुल गया। उन्होंने किवाड़ को अन्दर से बंद नहीं किया था। शायद सबको सब पता था इसलिए।
मैंने जीजू को चुप रहने का इशारा किया और किवाड़ थोड़ा और खोला। सामने ही बेड था. अंकिता की नाइटी उतर चुकी थी और दीपक का टी-शर्ट भी। अंकिता सिर्फ ब्रा पैंटी में थी और दीपक शॉर्ट्स में। वो दोनों किस कर रहे थे। दीपक पैंटी के ऊपर से अंकिता के नितम्ब दबा रहा था। वो दोनों इतना जोर से किस कर रहे थे जैसे बरसों से प्यासे हो। मैं और जीजू उन्हें चुपके से देख रहे थे ये उन्हें पता नहीं था। फिर उनकी किस टूटी और अंकिता ने बोला-
अंकिता: हाय, मैं कब से इस पल का इंतज़ार कर रही थी।
दीपक: मैं भी तो कब से इंतज़ार कर रहा था, मेरी जान। अब और सब्र नहीं होता।
अंकिता: तो मत करो सब्र।
और वो फिर से गहरा किस करने लगे। अंकिता की आवाज़ नॉर्मल थी। मतलब वो भी नशे में होने का नाटक कर रही थी। फिर दीपक ने अपना हाथ अंकिता की ब्रा में डाल दिया, और उसकी चूचियों को दबाते हुए किस करने लगा। अंकिता भी शॉर्ट्स के ऊपर से दीपक का लंड सहला रही थी।
फिर दीपक ने अंकिता को घुमा दिया। अब अंकिता की पीठ दीपक की तरफ थी। दीपक उसके कंधों और गर्दन पे किस करने लगा। अंकिता के मुंह से सिसकारी निकलने लगी 'आह्ह' 'उफ्फ' करके। फिर किस करते-करते दीपक नीचे हुआ और अंकिता की पीठ को चूमने लगा। पीठ को किस करते-करते दीपक ने अंकिता की ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा निकाल दी। अब अंकिता ऊपर से नंगी थी, उसके मम्मे आज़ाद थे। दीपक ने हाथ आगे करके उसके दोनों मम्मे अपने दोनों हाथों में दबोच लिए और उन्हें मसलने लगा। कभी पूरी चूची मसलता तो कभी सिर्फ निपल। उसके निपल भी काफी बड़े थे, एक-दम मस्त। फिर दीपक ने अंकिता को घुमा दिया और उसके मम्मों को देखने लगा। वो एक निपल मुँह में लेकर चूसने लगा और दूसरा मम्मा अपने हाथ से मसलने लगा।
उन दोनों के एक्शन देखकर मुझे उत्तेजना होने लगी। मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था। मैंने पीछे मुड़ के देखा तो जीजू की भी हालत मेरी जैसी ही थी। उनकी पत्नी के साथ जो हो रहा था उसे देखकर न जाने उन्हें कैसा लग रहा होगा? उनका एक हाथ अपने शॉर्ट्स पर था, और वो अपना लंड सहला रहे थे। मैं वहां से हट गई और किवाड़ धीरे से बंद कर दिया। फिर जीजू को बोला, चलो अब। और हम दोनों दूसरे बेडरूम में आ गए।
जीजू थोड़ा दुखी लग रहे थे तो मैंने उनसे पूछा-
मैं: क्या हुआ जी, मैं आपके साथ हूँ फिर भी आप उदास हो। मैं आपके पास हूँ यह आपको अच्छा नहीं लग रहा क्या?
आकाश जीजू: अरे नहीं, ये तो मेरी आरज़ू थी. जब यह पूरी हो गई तो मैं क्यों उदास रहने लगा? वो तो मैं कुछ सोच रहा था बस।
मैं: अब कुछ मत सोचो और मुझे आपको खुश करने दो।
आकाश जीजू: अच्छा, वो कैसे?
मैं: अपना वादा पूरा करके।
ये बोलकर मैंने उनके सामने ही अपनी नाइटी उतार दी। अब मैं उनके सामने सिर्फ ब्रा-पैंटी में थी, जो उनकी ही पसंद की थी। उनकी आंखें फटी रह गईं। वो बस मुझे देखे ही जा रहे थे। मैंने पूछा-
मैं: क्या हुआ जी, कहाँ खो गए?
आकाश जीजू: सच में तुम बहुत सेक्सी लग रही हो इस रेड ब्रा-पैंटी में। मैंने सिर्फ कल्पना में ही तुम्हें ऐसे देखने की सोची थी और आज सच में देख रहा हूँ तो मुझे यकीन नहीं हो रहा।
मैं: मैं आपके सामने ही हूँ। आप छूकर देख लो।
फिर मैंने जीजु का हाथ मेरी कमर पे रख दिया। उनका वो टच उफ्फ... बता नहीं सकती क्या एहसास था वो। जीजु ने कमर से पकड़ के मुझे अपने पास खींच लिया। हम दोनों एक-दूसरे की आँखों में देखने लगे। कब हमारे होंठ मिल गए पता ही नहीं चला। अब हमारी आँखें बंद हो गईं और किस में खो गए दोनों। कभी वो मेरे होंठ चूस्ते तो कभी मैं उनके होंठ चूस्ती। कभी उनकी जीभ मेरे मुँह में तो कभी उनकी जीभ मेरे मुँह में।
बहुत ही गर्म किस चल रहा था हमारे बीच। और पता नहीं कब जिजू का एक हाथ मेरी चूची पर और दूसरा हाथ मेरी चूत पर चला गया। ब्रा और पैंटी के ऊपर से ही जिजू मेरी चूची और चूत दबा रहे थे। जिजू ने धीरे से मेरे कान में बोला कि मनीषा अपना प्रॉमिस तो पूरा करो।
मैं: मुझे शर्म आ रही है।
जीजू: अब क्या शर्माना? अब तो दीपक ने भी तुम्हें खुली छूट दे दी है। अब एक रात के पति से कैसी शर्म?
मैं: तो आप ही उतार लो मेरे बचे हुए कपड़े और देख लो मुझे।
आकाश: यह हुई ना बात.
फिर जीजू ने अपने हाथ पीछे करके मेरी ब्रा के हुक खोल दिए. उन्होंने धीरे-धीरे मेरी ब्रा पूरी निकाल दी. मुझे इतनी शर्म आ रही थी कि मैंने अपनी चूचियां अपने हाथों से ढक लीं. पर जीजू ने मेरे हाथ नीचे करके मेरी चूचियों को आजाद कर दिया. मैंने भी उन्हें नहीं रोका. जीजू अपने हाथों से मेरी चूचियां सहलाने लगे.
आज पहली बार दीपक के अलावा कोई दूसरा मर्द मेरी नंगी चूचियों को देख रहा था, और उन्हें छू रहा था। वो इतनी नरमी से मेरे मम्मों को सहला रहे थे, जैसे वो मुझे ज़रा भी तकलीफ नहीं देना चाहते हों। मैंने उन्हें देखा तो वो मेरे मम्मों को इतने प्यार से देख रहे थे जैसे उनकी सबसे चहेती चीज़ उनके सामने हो।
फिर वो मेरा एक निपल मुंह में लेकर चूसने लगे। मेरी सिसकी निकलनी शुरू हो गई। जीजू बारी-बारी मेरे दोनों निपल चूस रहे थे, और मैं बस ‘आह ओह उफ’ कर रही थी। मेरा हाथ उनके बालों में चला गया और मैं उनका सिर मेरे मम्मों पे दबाने लगी।
जीजू मेरा निपल ऐसे चूस रहे थे जैसे कोई बच्चा अपनी माँ का दूध पी रहा हो। उनके चेहरे पे इतनी खुशी थी, जैसे उन्हें दुनिया का सबसे बड़ा सुख मिल रहा हो। मेरी हालत तो मैं बता ही नहीं सकती। ऐसा लग रहा था कि बस जीजू मेरी चूचियों ऐसे ही चूसते रहें और मैं उनसे चुसवाती रहूँ।
फिर जीजू छाती से नीचे किस करने लगे, वे पूरे पेट पे किस कर रहे थे। उसके बाद कमर पे किस करने लगे। फिर उन्होंने मेरी नाभि पे किस किया और उसे चूसने लगे। जब जीजू ने अपनी जीभ मेरी नाभि के अंदर डाली और उसे चाटने लगे, तब मुझे परम आनंद मिल गया और मेरी चूत ने हार मान ली।
मेरी चूत ने इतना पानी छोड़ा कि मेरी चड्डी पूरी गीली हो गई। अब मैं थोड़ी ढीली पड़ गई थी और शायद जीजू भी समझ गए थे कि मेरा काम हो गया था। फिर जीजू खड़े हो गए और फिर से हम होंठों को मिलाकर किस करने लगे। जीजू ने मुझे बेड पे लेटा दिया और वो मेरे ऊपर आ गए और फिर से किस करने लगे। वो मेरे नंगे मम्मे भी सहला रहे थे।
मैं फिर से गरम होने लगी और किस में उनका साथ देने लगी। फिर जीजू मेरी गर्दन पर किस करते हुए नीचे आने लगे। दोनों निप्पल चूसे, फिर पेट, फिर कमर, फिर मेरी जांघों पर जीभ फिराने लगे। फिर वो मेरी चड्डी के ऊपर से मेरी चूत पर किस करने लगे। मेरी चूत के पानी से चड्डी पूरी गीली थी, तो वो चड्डी से पानी को चाटने लगे।
फिर उन्होंने धीरे-धीरे मेरी चड्डी भी उतार दी। अब मैं जिज्जू के सामने पूरी नंगी लेटी थी। मेरी सफाचट चूत उनके सामने थी। वो खड़े हो गए और थोड़ा पीछे होके मुझे ऊपर से नीचे तक देखने लगे। मैंने उन्हें बोला-
मैं: देखो जिज्जू, मैंने अपना वादा पूरा कर दिया। अब खुश हो ना आप?
आकाश जीजु: हाँ डार्लिंग, मैं बता नहीं सकता कि मैं कितना खुश हूँ।
में: आपने मुझे तो पूरी नंगी कर दिया और खुद का एक कपड़ा भी नहीं उतारा।
आकाश जीजु: तुम खुद ही उतार लो।
फिर मैं उनके करीब गई और उनका टी-शर्ट उतार दिया। उनकी बॉडी औसत थी और थोड़ा सा पेट निकला था पर एक आकर्षण था उनमें। मैं उनके सीने पे किस करने लगी, उनके निपल चूसने लगी। वो आँखें बंद करके बस आनंद ले रहे थे। मैं किस करते-करते नीचे गई और घुटनों पे बैठ गई। मैंने उनका शॉर्ट्स नीचे कर दिया और जीजाजी ने अपने पैरों से उसे पूरा निकाल दिया।
अब वो सिर्फ अंडरवियर में थे। उनके अंडरवियर में तंबू बना हुआ था, और लंड के सुपाड़े की जगह अंडरवियर थोड़ा गीला भी था। शायद उनका चुदाई-पूर्व का गीलापन था। मैं अंडरवियर के ऊपर से ही उनका लंड सहलाने लगी। अंडरवियर के ऊपर से ही मुझे अपने हाथों पर उनके लंड की गर्माहट महसूस हो रही थी।
फिर मैंने उनकी अंडरवियर की इलास्टिक में अपनी उंगलियाँ डाली और एक झटके में अंडरवियर नीचे खींच दी। उनका लंड उछल के मेरे मुँह के सामने आ गया। जीजु के लंड की लंबाई तो दीपक के लंड जितनी ही होगी या थोड़ी कम, पर उसकी मोटाई ज्यादा थी, खासकर के लंड का सुपाड़ा काफी मोटा था। जैसे मशरूम होता है, बिल्कुल वैसा ही शेप था।
उनका लंड देखकर मेरे मुंह में पानी आ गया। मैंने जीजु का लंड पकड़ लिया, और अपना हाथ ऊपर-नीचे करने लगी। जीजु बस आह-आह करके एंजॉय कर रहे थे। जीजु बेड पर लेटे थे, और उनका अंडरवियर अभी भी उनके पैरों में अटका हुआ था। मैंने उनका अंडरवियर निकाला, और उससे लंड का सुपाड़ा अच्छे से साफ किया।
फिर उनके सुपाड़े का एक चुम्मा लिया। उसके बाद मैंने पूरे लंड के चुम्मे लिये। फिर मैंने सुपाड़ा मुंह में लिया और उसे चूसने लगी। सुपाड़ा इतना बड़ा था कि मुझे पूरा मुंह खोलना पड़ा। मुझे जीजु का लंड जायकेदार लग रहा था। मैंने धीरे-धीरे उनका आधा लंड मुंह में ले लिया, और उसे चूसने लगी। जीजु बस आंखें बंद किए आहें भर रहे थे। फिर वे धक्के देकर मेरे मुंह को चोदने लगे। मैं भी मजे से उनका लंड चूस रही थी। फिर मैंने उनका लंड मुंह से निकाला और उनके पास लेट गई। मैंने पूछा –
मैं: जीजू, कैसा लगा आपको?
आकाश जीजू: इतना तो मैंने सोचा भी नहीं था। यह सब तो मेरे लिए बोनस जैसा था।
मैं: आप खुश हो न?
आकाश जीजू: दुनिया में सबसे ज्यादा खुश मैं ही हूँ आज।
मैं: अच्छा जी!
आकाश जीजू: हाँ जी। अच्छा, एक रिक्वेस्ट करूँ, मानोगी क्या?
मैं: बोलो न, जीजू?
आकाश जीजु: जैसे तुमने अभी मुझे खुश किया, क्या मैं भी तुम्हें वैसे खुश कर सकता हूँ?
मैं: जीजु, आज मैं आपकी साली नहीं, घरवाली हूँ। मैं आपकी खुशी के लिए जो आप चाहो, करूँगी। आपको जो भी करना है कर लो आज।
अकाश जीजु: सच में, कुछ भी कर सकता हूँ?
मैं: हाँ, जो भी आप चाहो। आज के लिए मैं पूरी आपकी हूँ।
आकाश जीजु: मतलब आज मेरी सारी इच्छाएँ पूरी हो जाएंगी?
मैं: हाँ।
फिर जीजू नीचे हुए और उन्होंने मेरी चूत का चुम्मा ले लिया। मुझे करंट सा लगा। मेरा पूरा शरीर झनझना उठा। वो मेरी चूत के दाने को चाट रहे थे, तो कभी उसे चूस रहे थे। जीजू में गज़ब का जोश आ गया था। फिर जीजू ने अपनी जीभ मेरी चूत में डाल दी और उसे अंदर-बाहर करने लगे।
वो कभी जीभ से मुझे चोद रहे थे, तो कभी मेरी चूत के आस-पास चाट रहे थे। मैं उनका सिर अपनी चूत पर दबा रही थी ताकि वो और अच्छे से चाटें। मैं बस आहें भर रही थी, और चूत-चुम्बन का मज़ा ले रही थी।
थोड़ी देर बाद वो मेरे पास आके लेट गए और हम किस करने लगे। किस करते-करते वो मेरी चूत में अपनी अंगुली अंदर-बाहर करने लगे। मैं भी उनका लंड सहलाने लगी। हम दोनों के जिस्म एक-दूसरे से चिपके हुए थे। ऊपर हमारी किस चल रही थी और बीच में मेरे मम्मे उनके सीने में दब रहे थे। नीचे वो मेरी चूत में अंगुली डाल रहे थे और मैं उनका लंड मुठिया रही थी।
हम दोनों ही अब मजे में सराबोर थे। हम दोनों एक-दूसरे में खो गए थे। फिर हम 69 पोज़ीशन में आ गए। जीजु मेरी चूत चाटने लगे और मैं उनका लंड चूसने लगी। जीजु अपनी जीभ मेरी चूत के अंदर तक डाल के चाट रहे थे, और मैं भी उनका लंड जितना हो सके उतना मुंह में लेकर चूस रही थी। फिर जीजु मेरे पास आए और झिझकते हुए बोले –
आकाश जीजू: अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है पर मैं तुम्हारी मरजी के खिलाफ कुछ भी नहीं कर सकता।
मुझे उनकी शराफत देख कर बहुत खुशी हुई। इस वक्त उनकी पत्नी शायद पास के कमरे में चुद रही थी पर वे मेरी इच्छा का सम्मान कर रहे थे। एक तो मैं पहले से ही उनसे चुदवाना चाहती थी और अब तो उनसे नहीं चुदवाना उनकी शराफत का अपमान होता।
मैं: आज आप मेरे पति हैं। मेरी मर्जी अपने पति की सेवा करने की है।
आकाश जीजू: तुम सच में तैयार हो?
मैं: हाँ, अब देर मत कीजिए।
जीजू ने दराज से कंडोम का पैकेट निकाला और मुझे दिया। मैंने पैकेट से कंडोम निकाला और उसे जीजू के लंड पर चढ़ा दिया। जीजू मेरे ऊपर आए और अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ने लगे। उनका लंड अब पूरी तरह से अकड़ा हुआ था - मेरी चूत में जाने के लिए तत्पर। जीजू ने अपना लंड पकड़कर मेरी चूत पर रखा और मेरी तरफ देखा। मैंने शर्माते हुए उन्हें मौन निमंत्रण दे दिया।
अब जिजू ने एक धक्का दिया और उनके लंड का सुपाड़ा मेरी चूत को फैलाते हुए उसके अंदर घुस गया। मेरी सिसकारी निकल गई। मैं पहली बार इतना मोटा लंड ले रही थी। जिजू रुक गए और मेरी चूची सहलाते हुए मुझे किस करने लगे।
कुछ देर बाद जब मेरी चूत थोड़ी खुल गई तो मैंने नीचे से अपने नितंब उठाए। जीजु समझ गए कि मैं अब उनका लंड झेलने के लिए तैयार हूँ। उन्होंने थोड़ा जोर का धक्का मारा और उनका आधा लंड मेरी चूत में घुस गया। अब जीजु मुझे आधे लंड से चोदने लगे । धीरे-धीरे मेरी चूत उनके लंड की अभ्यस्त हो गई।
जीजू का लंड दीपक के लंड से मोटा था पर अब मेरी चूत ने एडजस्ट कर लिया था और जीजू के धक्कों के जवाब में मेरे चूतड़ उछलने लगे। मैं आज एक नए लंड से चुद रही थी जिसका एक अलग ही अहसास हो रहा था। अब दर्द गायब हो गया था और मजेदार चुदाई हो रही थी।
जीजू को भी नई चूत मिलने की खुशी थी और वो मजे से मेरी चूत में धक्के लगा रहे थे। पांच मिनट इस आसान में चोदने के बाद जीजू ने अपना लंड निकाला और बोले कि अब तुम मेरे ऊपर आ जाओ। जीजू लेट गए और मैं उनके ऊपर चढ़ गई। यह मेरी पसंद का आसान है।
मैंने उनका लंड पकड़कर अपनी चूत से सटाया। फिर मैं धीरे-धीरे उनका लंड अपनी चूत के अंदर लेने लगी। आधा लंड अंदर लेकर मैं ऊपर-नीचे होकर चुदने लगी। मैं ऊपर से धक्का दे रही और जीजू नीचे से। ऐसे करते-करते जीजू का पूरा लंड मेरी चूत में समा गया।
फिर मैंने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी और तेजी से जम्प मारने लगी। अब पूरा लंड अंदर तक जाकर मुझे मजे दे रहा था। जीजू मेरे मम्मों को पकड़ के नीचे से मेरी चूत में धक्के मार रहे थे। ऊपर से मेरे धक्कों और नीचे से जीजू के धक्कों की वजह से मेरा काम होने वाला था।
मैंने जीजू को बोला: जीजू, बहुत मज़ा आ रहा है। मेरा काम होने वाला है। आप ज़ोर से धक्के मारो।
जीजू: यह लो, मेरी जान। मुझे भी अपनी नई पत्नी को चोदने में बहुत मज़ा आ रहा है।
और फिर कुछ ज़ोरदार धक्कों के बाद मेरा पानी निकल गया और मेरे धक्के बंद हो गए। मैं जीजू के सीने पे लुढ़क गई और मैंने उन्हें अपनी बाहों में भींच लिया।
पर अब तक जीजू का काम नहीं हुआ था। उन्होंने कहा –
जीजू: मेरी रानी, तुम्हारी इजाजत हो तो मैं तुम्हें दो मिनट और चोद लूं?
मैं: मेरे सरताज, अपनी पत्नी को जी भर के चोदो।
जीजू ने मुझे नीचे लिटाया और वो मेरी टांगों के बीच आ गए। उन्होंने मेरी टांगें अपने कंधों पर रखी और अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया। इस बार वो कस के धक्के मार रहे थे। उनकी चुदाई से मैं फिर से गरम हो गई। मैं उनका जोश बढ़ाने के लिए बोली –
मैं: जीजू, और जोर से ... अंदर तक डालो ... आज फाड़ दो मेरी चूत।
मेरी बातों से उनका जोश बढ़ गया और वो और जोरदार और गहरे धक्के मारने लगे। उनके धक्कों की ताकत इतनी बढ़ गई कि मैं फिर से झड़ने की कगार पर पहुँच गई। अब शायद जीजू का काम भी होने वाला था। कुछ ही देर में हम दोनों का पानी एक साथ निकल गया। हम आहें भरते हुए एक-दुसरे से लिपट गए. हम दोनों अपनी सांसें काबू में कर रहे थे। फिर वो उतरकर मेरे पास लेट गए। मैं करवट लेकर उनसे लिपट गई। कुछ देर बाद हम एक-एक करके वाशरुम गए और फ्रेश होकर आए। एक बार फिर हम साथ में लेट गए।
क्रमश:
जीजू मेरा हाथ पकड़ के मुझे दूसरे बेडरूम में ले जाने लगे। दूसरे बेडरूम में जाते हुए हम उस बेडरूम के सामने से गुज़रे जहाँ दीपक और अंकिता थे। मैंने जीजू को रोका और किवाड़ को हलका सा धक्का दिया तो किवाड़ थोड़ा खुल गया। उन्होंने किवाड़ को अन्दर से बंद नहीं किया था। शायद सबको सब पता था इसलिए।
मैंने जीजू को चुप रहने का इशारा किया और किवाड़ थोड़ा और खोला। सामने ही बेड था. अंकिता की नाइटी उतर चुकी थी और दीपक का टी-शर्ट भी। अंकिता सिर्फ ब्रा पैंटी में थी और दीपक शॉर्ट्स में। वो दोनों किस कर रहे थे। दीपक पैंटी के ऊपर से अंकिता के नितम्ब दबा रहा था। वो दोनों इतना जोर से किस कर रहे थे जैसे बरसों से प्यासे हो। मैं और जीजू उन्हें चुपके से देख रहे थे ये उन्हें पता नहीं था। फिर उनकी किस टूटी और अंकिता ने बोला-
अंकिता: हाय, मैं कब से इस पल का इंतज़ार कर रही थी।
दीपक: मैं भी तो कब से इंतज़ार कर रहा था, मेरी जान। अब और सब्र नहीं होता।
अंकिता: तो मत करो सब्र।
और वो फिर से गहरा किस करने लगे। अंकिता की आवाज़ नॉर्मल थी। मतलब वो भी नशे में होने का नाटक कर रही थी। फिर दीपक ने अपना हाथ अंकिता की ब्रा में डाल दिया, और उसकी चूचियों को दबाते हुए किस करने लगा। अंकिता भी शॉर्ट्स के ऊपर से दीपक का लंड सहला रही थी।
फिर दीपक ने अंकिता को घुमा दिया। अब अंकिता की पीठ दीपक की तरफ थी। दीपक उसके कंधों और गर्दन पे किस करने लगा। अंकिता के मुंह से सिसकारी निकलने लगी 'आह्ह' 'उफ्फ' करके। फिर किस करते-करते दीपक नीचे हुआ और अंकिता की पीठ को चूमने लगा। पीठ को किस करते-करते दीपक ने अंकिता की ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा निकाल दी। अब अंकिता ऊपर से नंगी थी, उसके मम्मे आज़ाद थे। दीपक ने हाथ आगे करके उसके दोनों मम्मे अपने दोनों हाथों में दबोच लिए और उन्हें मसलने लगा। कभी पूरी चूची मसलता तो कभी सिर्फ निपल। उसके निपल भी काफी बड़े थे, एक-दम मस्त। फिर दीपक ने अंकिता को घुमा दिया और उसके मम्मों को देखने लगा। वो एक निपल मुँह में लेकर चूसने लगा और दूसरा मम्मा अपने हाथ से मसलने लगा।
उन दोनों के एक्शन देखकर मुझे उत्तेजना होने लगी। मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था। मैंने पीछे मुड़ के देखा तो जीजू की भी हालत मेरी जैसी ही थी। उनकी पत्नी के साथ जो हो रहा था उसे देखकर न जाने उन्हें कैसा लग रहा होगा? उनका एक हाथ अपने शॉर्ट्स पर था, और वो अपना लंड सहला रहे थे। मैं वहां से हट गई और किवाड़ धीरे से बंद कर दिया। फिर जीजू को बोला, चलो अब। और हम दोनों दूसरे बेडरूम में आ गए।
जीजू थोड़ा दुखी लग रहे थे तो मैंने उनसे पूछा-
मैं: क्या हुआ जी, मैं आपके साथ हूँ फिर भी आप उदास हो। मैं आपके पास हूँ यह आपको अच्छा नहीं लग रहा क्या?
आकाश जीजू: अरे नहीं, ये तो मेरी आरज़ू थी. जब यह पूरी हो गई तो मैं क्यों उदास रहने लगा? वो तो मैं कुछ सोच रहा था बस।
मैं: अब कुछ मत सोचो और मुझे आपको खुश करने दो।
आकाश जीजू: अच्छा, वो कैसे?
मैं: अपना वादा पूरा करके।
ये बोलकर मैंने उनके सामने ही अपनी नाइटी उतार दी। अब मैं उनके सामने सिर्फ ब्रा-पैंटी में थी, जो उनकी ही पसंद की थी। उनकी आंखें फटी रह गईं। वो बस मुझे देखे ही जा रहे थे। मैंने पूछा-
मैं: क्या हुआ जी, कहाँ खो गए?
आकाश जीजू: सच में तुम बहुत सेक्सी लग रही हो इस रेड ब्रा-पैंटी में। मैंने सिर्फ कल्पना में ही तुम्हें ऐसे देखने की सोची थी और आज सच में देख रहा हूँ तो मुझे यकीन नहीं हो रहा।
मैं: मैं आपके सामने ही हूँ। आप छूकर देख लो।
फिर मैंने जीजु का हाथ मेरी कमर पे रख दिया। उनका वो टच उफ्फ... बता नहीं सकती क्या एहसास था वो। जीजु ने कमर से पकड़ के मुझे अपने पास खींच लिया। हम दोनों एक-दूसरे की आँखों में देखने लगे। कब हमारे होंठ मिल गए पता ही नहीं चला। अब हमारी आँखें बंद हो गईं और किस में खो गए दोनों। कभी वो मेरे होंठ चूस्ते तो कभी मैं उनके होंठ चूस्ती। कभी उनकी जीभ मेरे मुँह में तो कभी उनकी जीभ मेरे मुँह में।
बहुत ही गर्म किस चल रहा था हमारे बीच। और पता नहीं कब जिजू का एक हाथ मेरी चूची पर और दूसरा हाथ मेरी चूत पर चला गया। ब्रा और पैंटी के ऊपर से ही जिजू मेरी चूची और चूत दबा रहे थे। जिजू ने धीरे से मेरे कान में बोला कि मनीषा अपना प्रॉमिस तो पूरा करो।
मैं: मुझे शर्म आ रही है।
जीजू: अब क्या शर्माना? अब तो दीपक ने भी तुम्हें खुली छूट दे दी है। अब एक रात के पति से कैसी शर्म?
मैं: तो आप ही उतार लो मेरे बचे हुए कपड़े और देख लो मुझे।
आकाश: यह हुई ना बात.
फिर जीजू ने अपने हाथ पीछे करके मेरी ब्रा के हुक खोल दिए. उन्होंने धीरे-धीरे मेरी ब्रा पूरी निकाल दी. मुझे इतनी शर्म आ रही थी कि मैंने अपनी चूचियां अपने हाथों से ढक लीं. पर जीजू ने मेरे हाथ नीचे करके मेरी चूचियों को आजाद कर दिया. मैंने भी उन्हें नहीं रोका. जीजू अपने हाथों से मेरी चूचियां सहलाने लगे.
आज पहली बार दीपक के अलावा कोई दूसरा मर्द मेरी नंगी चूचियों को देख रहा था, और उन्हें छू रहा था। वो इतनी नरमी से मेरे मम्मों को सहला रहे थे, जैसे वो मुझे ज़रा भी तकलीफ नहीं देना चाहते हों। मैंने उन्हें देखा तो वो मेरे मम्मों को इतने प्यार से देख रहे थे जैसे उनकी सबसे चहेती चीज़ उनके सामने हो।
फिर वो मेरा एक निपल मुंह में लेकर चूसने लगे। मेरी सिसकी निकलनी शुरू हो गई। जीजू बारी-बारी मेरे दोनों निपल चूस रहे थे, और मैं बस ‘आह ओह उफ’ कर रही थी। मेरा हाथ उनके बालों में चला गया और मैं उनका सिर मेरे मम्मों पे दबाने लगी।
जीजू मेरा निपल ऐसे चूस रहे थे जैसे कोई बच्चा अपनी माँ का दूध पी रहा हो। उनके चेहरे पे इतनी खुशी थी, जैसे उन्हें दुनिया का सबसे बड़ा सुख मिल रहा हो। मेरी हालत तो मैं बता ही नहीं सकती। ऐसा लग रहा था कि बस जीजू मेरी चूचियों ऐसे ही चूसते रहें और मैं उनसे चुसवाती रहूँ।
फिर जीजू छाती से नीचे किस करने लगे, वे पूरे पेट पे किस कर रहे थे। उसके बाद कमर पे किस करने लगे। फिर उन्होंने मेरी नाभि पे किस किया और उसे चूसने लगे। जब जीजू ने अपनी जीभ मेरी नाभि के अंदर डाली और उसे चाटने लगे, तब मुझे परम आनंद मिल गया और मेरी चूत ने हार मान ली।
मेरी चूत ने इतना पानी छोड़ा कि मेरी चड्डी पूरी गीली हो गई। अब मैं थोड़ी ढीली पड़ गई थी और शायद जीजू भी समझ गए थे कि मेरा काम हो गया था। फिर जीजू खड़े हो गए और फिर से हम होंठों को मिलाकर किस करने लगे। जीजू ने मुझे बेड पे लेटा दिया और वो मेरे ऊपर आ गए और फिर से किस करने लगे। वो मेरे नंगे मम्मे भी सहला रहे थे।
मैं फिर से गरम होने लगी और किस में उनका साथ देने लगी। फिर जीजू मेरी गर्दन पर किस करते हुए नीचे आने लगे। दोनों निप्पल चूसे, फिर पेट, फिर कमर, फिर मेरी जांघों पर जीभ फिराने लगे। फिर वो मेरी चड्डी के ऊपर से मेरी चूत पर किस करने लगे। मेरी चूत के पानी से चड्डी पूरी गीली थी, तो वो चड्डी से पानी को चाटने लगे।
फिर उन्होंने धीरे-धीरे मेरी चड्डी भी उतार दी। अब मैं जिज्जू के सामने पूरी नंगी लेटी थी। मेरी सफाचट चूत उनके सामने थी। वो खड़े हो गए और थोड़ा पीछे होके मुझे ऊपर से नीचे तक देखने लगे। मैंने उन्हें बोला-
मैं: देखो जिज्जू, मैंने अपना वादा पूरा कर दिया। अब खुश हो ना आप?
आकाश जीजु: हाँ डार्लिंग, मैं बता नहीं सकता कि मैं कितना खुश हूँ।
में: आपने मुझे तो पूरी नंगी कर दिया और खुद का एक कपड़ा भी नहीं उतारा।
आकाश जीजु: तुम खुद ही उतार लो।
फिर मैं उनके करीब गई और उनका टी-शर्ट उतार दिया। उनकी बॉडी औसत थी और थोड़ा सा पेट निकला था पर एक आकर्षण था उनमें। मैं उनके सीने पे किस करने लगी, उनके निपल चूसने लगी। वो आँखें बंद करके बस आनंद ले रहे थे। मैं किस करते-करते नीचे गई और घुटनों पे बैठ गई। मैंने उनका शॉर्ट्स नीचे कर दिया और जीजाजी ने अपने पैरों से उसे पूरा निकाल दिया।
अब वो सिर्फ अंडरवियर में थे। उनके अंडरवियर में तंबू बना हुआ था, और लंड के सुपाड़े की जगह अंडरवियर थोड़ा गीला भी था। शायद उनका चुदाई-पूर्व का गीलापन था। मैं अंडरवियर के ऊपर से ही उनका लंड सहलाने लगी। अंडरवियर के ऊपर से ही मुझे अपने हाथों पर उनके लंड की गर्माहट महसूस हो रही थी।
फिर मैंने उनकी अंडरवियर की इलास्टिक में अपनी उंगलियाँ डाली और एक झटके में अंडरवियर नीचे खींच दी। उनका लंड उछल के मेरे मुँह के सामने आ गया। जीजु के लंड की लंबाई तो दीपक के लंड जितनी ही होगी या थोड़ी कम, पर उसकी मोटाई ज्यादा थी, खासकर के लंड का सुपाड़ा काफी मोटा था। जैसे मशरूम होता है, बिल्कुल वैसा ही शेप था।
उनका लंड देखकर मेरे मुंह में पानी आ गया। मैंने जीजु का लंड पकड़ लिया, और अपना हाथ ऊपर-नीचे करने लगी। जीजु बस आह-आह करके एंजॉय कर रहे थे। जीजु बेड पर लेटे थे, और उनका अंडरवियर अभी भी उनके पैरों में अटका हुआ था। मैंने उनका अंडरवियर निकाला, और उससे लंड का सुपाड़ा अच्छे से साफ किया।
फिर उनके सुपाड़े का एक चुम्मा लिया। उसके बाद मैंने पूरे लंड के चुम्मे लिये। फिर मैंने सुपाड़ा मुंह में लिया और उसे चूसने लगी। सुपाड़ा इतना बड़ा था कि मुझे पूरा मुंह खोलना पड़ा। मुझे जीजु का लंड जायकेदार लग रहा था। मैंने धीरे-धीरे उनका आधा लंड मुंह में ले लिया, और उसे चूसने लगी। जीजु बस आंखें बंद किए आहें भर रहे थे। फिर वे धक्के देकर मेरे मुंह को चोदने लगे। मैं भी मजे से उनका लंड चूस रही थी। फिर मैंने उनका लंड मुंह से निकाला और उनके पास लेट गई। मैंने पूछा –
मैं: जीजू, कैसा लगा आपको?
आकाश जीजू: इतना तो मैंने सोचा भी नहीं था। यह सब तो मेरे लिए बोनस जैसा था।
मैं: आप खुश हो न?
आकाश जीजू: दुनिया में सबसे ज्यादा खुश मैं ही हूँ आज।
मैं: अच्छा जी!
आकाश जीजू: हाँ जी। अच्छा, एक रिक्वेस्ट करूँ, मानोगी क्या?
मैं: बोलो न, जीजू?
आकाश जीजु: जैसे तुमने अभी मुझे खुश किया, क्या मैं भी तुम्हें वैसे खुश कर सकता हूँ?
मैं: जीजु, आज मैं आपकी साली नहीं, घरवाली हूँ। मैं आपकी खुशी के लिए जो आप चाहो, करूँगी। आपको जो भी करना है कर लो आज।
अकाश जीजु: सच में, कुछ भी कर सकता हूँ?
मैं: हाँ, जो भी आप चाहो। आज के लिए मैं पूरी आपकी हूँ।
आकाश जीजु: मतलब आज मेरी सारी इच्छाएँ पूरी हो जाएंगी?
मैं: हाँ।
फिर जीजू नीचे हुए और उन्होंने मेरी चूत का चुम्मा ले लिया। मुझे करंट सा लगा। मेरा पूरा शरीर झनझना उठा। वो मेरी चूत के दाने को चाट रहे थे, तो कभी उसे चूस रहे थे। जीजू में गज़ब का जोश आ गया था। फिर जीजू ने अपनी जीभ मेरी चूत में डाल दी और उसे अंदर-बाहर करने लगे।
वो कभी जीभ से मुझे चोद रहे थे, तो कभी मेरी चूत के आस-पास चाट रहे थे। मैं उनका सिर अपनी चूत पर दबा रही थी ताकि वो और अच्छे से चाटें। मैं बस आहें भर रही थी, और चूत-चुम्बन का मज़ा ले रही थी।
थोड़ी देर बाद वो मेरे पास आके लेट गए और हम किस करने लगे। किस करते-करते वो मेरी चूत में अपनी अंगुली अंदर-बाहर करने लगे। मैं भी उनका लंड सहलाने लगी। हम दोनों के जिस्म एक-दूसरे से चिपके हुए थे। ऊपर हमारी किस चल रही थी और बीच में मेरे मम्मे उनके सीने में दब रहे थे। नीचे वो मेरी चूत में अंगुली डाल रहे थे और मैं उनका लंड मुठिया रही थी।
हम दोनों ही अब मजे में सराबोर थे। हम दोनों एक-दूसरे में खो गए थे। फिर हम 69 पोज़ीशन में आ गए। जीजु मेरी चूत चाटने लगे और मैं उनका लंड चूसने लगी। जीजु अपनी जीभ मेरी चूत के अंदर तक डाल के चाट रहे थे, और मैं भी उनका लंड जितना हो सके उतना मुंह में लेकर चूस रही थी। फिर जीजु मेरे पास आए और झिझकते हुए बोले –
आकाश जीजू: अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है पर मैं तुम्हारी मरजी के खिलाफ कुछ भी नहीं कर सकता।
मुझे उनकी शराफत देख कर बहुत खुशी हुई। इस वक्त उनकी पत्नी शायद पास के कमरे में चुद रही थी पर वे मेरी इच्छा का सम्मान कर रहे थे। एक तो मैं पहले से ही उनसे चुदवाना चाहती थी और अब तो उनसे नहीं चुदवाना उनकी शराफत का अपमान होता।
मैं: आज आप मेरे पति हैं। मेरी मर्जी अपने पति की सेवा करने की है।
आकाश जीजू: तुम सच में तैयार हो?
मैं: हाँ, अब देर मत कीजिए।
जीजू ने दराज से कंडोम का पैकेट निकाला और मुझे दिया। मैंने पैकेट से कंडोम निकाला और उसे जीजू के लंड पर चढ़ा दिया। जीजू मेरे ऊपर आए और अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ने लगे। उनका लंड अब पूरी तरह से अकड़ा हुआ था - मेरी चूत में जाने के लिए तत्पर। जीजू ने अपना लंड पकड़कर मेरी चूत पर रखा और मेरी तरफ देखा। मैंने शर्माते हुए उन्हें मौन निमंत्रण दे दिया।
अब जिजू ने एक धक्का दिया और उनके लंड का सुपाड़ा मेरी चूत को फैलाते हुए उसके अंदर घुस गया। मेरी सिसकारी निकल गई। मैं पहली बार इतना मोटा लंड ले रही थी। जिजू रुक गए और मेरी चूची सहलाते हुए मुझे किस करने लगे।
कुछ देर बाद जब मेरी चूत थोड़ी खुल गई तो मैंने नीचे से अपने नितंब उठाए। जीजु समझ गए कि मैं अब उनका लंड झेलने के लिए तैयार हूँ। उन्होंने थोड़ा जोर का धक्का मारा और उनका आधा लंड मेरी चूत में घुस गया। अब जीजु मुझे आधे लंड से चोदने लगे । धीरे-धीरे मेरी चूत उनके लंड की अभ्यस्त हो गई।
जीजू का लंड दीपक के लंड से मोटा था पर अब मेरी चूत ने एडजस्ट कर लिया था और जीजू के धक्कों के जवाब में मेरे चूतड़ उछलने लगे। मैं आज एक नए लंड से चुद रही थी जिसका एक अलग ही अहसास हो रहा था। अब दर्द गायब हो गया था और मजेदार चुदाई हो रही थी।
जीजू को भी नई चूत मिलने की खुशी थी और वो मजे से मेरी चूत में धक्के लगा रहे थे। पांच मिनट इस आसान में चोदने के बाद जीजू ने अपना लंड निकाला और बोले कि अब तुम मेरे ऊपर आ जाओ। जीजू लेट गए और मैं उनके ऊपर चढ़ गई। यह मेरी पसंद का आसान है।
मैंने उनका लंड पकड़कर अपनी चूत से सटाया। फिर मैं धीरे-धीरे उनका लंड अपनी चूत के अंदर लेने लगी। आधा लंड अंदर लेकर मैं ऊपर-नीचे होकर चुदने लगी। मैं ऊपर से धक्का दे रही और जीजू नीचे से। ऐसे करते-करते जीजू का पूरा लंड मेरी चूत में समा गया।
फिर मैंने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी और तेजी से जम्प मारने लगी। अब पूरा लंड अंदर तक जाकर मुझे मजे दे रहा था। जीजू मेरे मम्मों को पकड़ के नीचे से मेरी चूत में धक्के मार रहे थे। ऊपर से मेरे धक्कों और नीचे से जीजू के धक्कों की वजह से मेरा काम होने वाला था।
मैंने जीजू को बोला: जीजू, बहुत मज़ा आ रहा है। मेरा काम होने वाला है। आप ज़ोर से धक्के मारो।
जीजू: यह लो, मेरी जान। मुझे भी अपनी नई पत्नी को चोदने में बहुत मज़ा आ रहा है।
और फिर कुछ ज़ोरदार धक्कों के बाद मेरा पानी निकल गया और मेरे धक्के बंद हो गए। मैं जीजू के सीने पे लुढ़क गई और मैंने उन्हें अपनी बाहों में भींच लिया।
पर अब तक जीजू का काम नहीं हुआ था। उन्होंने कहा –
जीजू: मेरी रानी, तुम्हारी इजाजत हो तो मैं तुम्हें दो मिनट और चोद लूं?
मैं: मेरे सरताज, अपनी पत्नी को जी भर के चोदो।
जीजू ने मुझे नीचे लिटाया और वो मेरी टांगों के बीच आ गए। उन्होंने मेरी टांगें अपने कंधों पर रखी और अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया। इस बार वो कस के धक्के मार रहे थे। उनकी चुदाई से मैं फिर से गरम हो गई। मैं उनका जोश बढ़ाने के लिए बोली –
मैं: जीजू, और जोर से ... अंदर तक डालो ... आज फाड़ दो मेरी चूत।
मेरी बातों से उनका जोश बढ़ गया और वो और जोरदार और गहरे धक्के मारने लगे। उनके धक्कों की ताकत इतनी बढ़ गई कि मैं फिर से झड़ने की कगार पर पहुँच गई। अब शायद जीजू का काम भी होने वाला था। कुछ ही देर में हम दोनों का पानी एक साथ निकल गया। हम आहें भरते हुए एक-दुसरे से लिपट गए. हम दोनों अपनी सांसें काबू में कर रहे थे। फिर वो उतरकर मेरे पास लेट गए। मैं करवट लेकर उनसे लिपट गई। कुछ देर बाद हम एक-एक करके वाशरुम गए और फ्रेश होकर आए। एक बार फिर हम साथ में लेट गए।
क्रमश:


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