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Incest खेल ससुर बहु का
मेनका ने हाथ सर से उपर ले जाते हुए एक कातिल अंगड़ाई ली। उसने अपनी चूत पे  हाथ फिराया तो उसके हाथों मे वहा का पानी लग गया। उसने डेस्क पर से नॅपकिन उठा कर उसे साफ़ किया। तभी राजासाहब वापस आ गये।

"आओ," उन्होने उसका हाथ पकड़ कर उठाया तो मेनका लड़खड़ा गयी। चुदाई ने तो उसे पस्त कर दिया था। राजासाहब ने हाथ बढ़ा कर उसे थाम कर अपने कंधे से लगा लिया और चलने लगे। बाहर आकर स्टडी को लॉक किया और उसे ले अपने वॉक-इन क्लॉज़ेट मे आ गये।


क्लॉज़ेट क्या, छोटा-मोटा कमरा ही था। अंदर राजासाहब के कपड़े जूते और बाकी सामान करीने से लगा था। क्लॉज़ेट के एक तरफ एक ड्रेसिंग टेबल रखा था जिसके बगल मे उसी के साइज़ की एक पैंटिंग लगी थी। पैंटिंग मे एक लड़की अपना शृंगार कर रही थी। राजासाहब ने आगे बढ़ कर उस पैंटिंग को उतार दिया तो पीछे एक दरवाज़ा नज़र आया। उन्होने मेनका को लिया और उस दरवाज़े को खोल अंदर दाखिल हो गये।

मेनका को एक लगभग 6 फीट लंबा गलियारा नज़र आया जिसके आख़िर मे भी एक दरवाज़ा खुला था और वाहा से रोशनी आ रही थी। दोनो गलियारा पार कर उस दरवाज़े को भी पार कर गये।

"अरे!!", मेनका की सारी थकान काफूर हो गयी। वो अपने बेडरूम के वॉक-इन क्लॉज़ेट मे खड़ी थी, उसने देखा की उसके क्लॉज़ेट की वो पैंटिंग उतार कर एक तरफ रखी थी।

"ये क्या है?",राजासाहब के साथ वो अपने कमरे मे आ गयी।


राजासाहब उसके बिस्तर पर लेट गये और अपनी बाँहे खोल दी। मेनका थोड़ी हैरान सी उनमे समा गयी। राजासाहब ने उसे बाँहों मे भर अपने से चिपका लिया और एक लंबी किस दी।
"हमारे पुरखों की बगल के राज्य वाले राजाओं से हमेशा जंग होती रहती थी। राजपरिवार की सुरक्षा के लिए उपरी मंज़िल के राजपरिवार के कमरों को इस तरह से जोड़ा गया ताकि मुसीबत के वक़्त दुश्मन से बच कर भागा जा सके। इस महल मे ऐसे और भी रास्ते हैं।"

"पर हम इस रास्ते का इस्तेमाल केवल आपको प्यार करने के लिए करेंगे।"

"मेरा तो सर घूम रहा है, पहले वो तिजोरी और अब ये रास्ते।", उसने अपने सर पर हाथ रखा,"पर एक बात बताओ क्या नौकरों को भी पता है इन रास्तों के बारे मे?"

"2-3 पुराने खास नौकरों को जो कि इसका ज़िकरा किसी से भी नही करते।", राजासाहब उसकी एक बोबले के निपल को मसलने लगे

"उउंम...म्‍म्मह...अच्छा, और जब आप अपने कमरे मे चले जाएँगे तो हम ये भारी-भरकम पैंटिंग कैसे लगाएँगे?"

"वो केवल देखने मे भारी है। उठा कर देखना बिल्कुल हल्की है।", और अपने मुँह मे वो पूरी निपल के साथ स्तन भर ली।

"एयेए...आहह...इयश...!",उसने अपनी एक  टाँग अपने ससुर की टाँग पर चढ़ा दी और दोनो फिर से प्यार के समुंदर मे गोते लगाने लगे।

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ठीक उसी वक़्त शहर मे उनका दुश्मन भी अपनी रखैल की चूत चोदने के बाद उसकी गांड मार रहा था।

"...एक बात बता साली....ऊओवव्व!",जब्बार ने मलिका की गांड मे ज़ोर का धक्का मारा, वो घोड़ी बनी थी और जब्बार पीछे से उसकी गांड मार रहा था।

"बोल,छिनाल।"

"जब उस दिन की एंट्री फाइल मे है ही नही तो तुझे कैसे यकीन है कि वही पाइलट उस दिन राजा को ले गया होगा?"

"यकीन नही है,बस अंदाज़ा है। यकीन तो तू दिलाएगी जब उसे शीशे मे उतारेगी।",जब्बार ने अपनी उंगली उसली चूत मे डाल दी और दूसरे हाथ से उसकी स्तनों को मसलने लगा।

"कल रात वो "बिज़्ज़रे" डिस्को मे जाएगा। वही तू उसे अपने जाल मे फँसाएगी। वैसे भी तेरे ये छेद किस काम में आयेगे डार्लिंग। मई चाहता हु की ये छेद मेरे लंड औए काम आये और दुसरे सिर्फ देख के अपने लंड का माल गिरा दे।" उसके धक्कों की स्पीड बढ़ गयी थी।

"आ....अनन्न...वाहह....,ठीक है कुत्ते....आ....इयैयियैआइयीययी....ऐसे ही मार...फा...आड दे मेरी गा....आँड....ऊऊओ....ऊओह....! पता नहीं कुत्ते तू मेरी गांड क्यों मार रहा है ज्यादातर आगे का रास्ता भूल गया है क्या.....वैसे मेरी ये गांड भी मेरे काबू में नहीं, सब से ज्यादा मजा वही दे रही है ...... कब तक तू मेरे छेदों से जंग जीतेगा पता नहीं!",और वो झड़ गयी। जब्बार ने भी 3-4 बेरहम धक्के और लगाए और उसकी गांड मे पानी छोड़ दिया।


थोड़ी ही देर मे वो खर्राटे भर रहा था, पर मलिका की आँखों मे अभी भी नींद नही थी। उसे कल्लन का लंबा लंड याद आ रहा था। उसने जब्बार की तरफ देखा,जब उसे यकीन हो गया कि वो सो रहा है तो वो उठी और दबे पाँव कल्लन के कमरे मे चली गयी।

कल्लन चादर ओढ़ सो रहा था। मलिका उसकी चादर मे घुस गयी तो पाया कि वो नंगा है। उसने झट से उसके लंड को पकड़ लिया और हिलाने लगी। कल्लन की नींद खुल गयी,उसने मलिका को चित किया और टांगे फैला कर अपना लंड उसकी चूत मे पेल दिया। मलिका ने उसके कंधे मे दाँत गढ़ा अपने हलक से निकलती हुई चीख ज़ब्त की और अपनी टांगे उसकी कमर मे लपेट उस से चुदने लगी।

बने रहिये..................
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RE: खेल ससुर बहु का - by maitripatel - 10-03-2026, 03:10 PM



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