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Adultery चुपके से लिखी मोहब्बत
#6
ऑफिस से निकलने के बाद किमाया पास की एक छोटी-सी चाय की दुकान पर रुकी। वहाँ पहले से एक युवक उसका इंतज़ार कर रहा था। दोनों ने एक-दूसरे को देखकर हल्की मुस्कान दी।
“आज फिर लेट हो गई?” उसने मज़ाक में पूछा।
किमाया हँसते हुए बोली—
“आज बॉस के साथ लंबी मीटिंग थी। अगले महीने का पूरा प्रोजेक्ट मेरे जिम्मे डाल दिया।”
“तो फिर प्रमोशन दूर नहीं,” उसने चाय का कप उठाते हुए कहा।
“इतना आसान नहीं है,” किमाया बोली, “पर मुझे काम अच्छा लगता है। जब घर से इतनी पॉजिटिव शुरुआत होती है, तो ऑफिस का तनाव भी हल्का लगता है।”
“तुम्हारे घर की सुबह कैसी होती है?” उसने उत्सुकता से पूछा।
किमाया ने मुस्कुराकर कहा—
“बहुत शांत। माँ और मैं मिलकर नाश्ता बनाते हैं। आज डोसा और अप्पम बनाए थे। पापा कोर्ट जाते हैं, दादी पूजा करती हैं… और मेरा भाई तो बस क्रिकेट में ही जीता है।”
वह हँस पड़ा—
“क्रिकेट वाला भाई हर घर में होता है।”
किमाया ने चाय की चुस्की लेते हुए कहा—
“और तुम? ऑफिस के बाद रोज़ इतनी शांति से चाय पीते हो?”
“सच कहूँ तो… आजकल सिर्फ तुम्हारे साथ ही पीता हूँ,” उसने थोड़ा संकोच के साथ कहा।
किमाया ने उसकी ओर देखा और हल्की मुस्कान दबा ली।
“अच्छा, तो अब समझ में आया,” उसने छेड़ते हुए कहा।
वह बोला—
“तुम्हारे साथ बात करना आसान लगता है। ऐसा लगता है जैसे हम बहुत पहले से एक-दूसरे को जानते हों।”
कुछ पल दोनों चुप रहे, फिर उसने पूछा—
“वीकेंड का कोई प्लान?”
किमाया बोली—
“घर वाले झरने पर पिकनिक की योजना बना रहे हैं।”
“भाग्यशाली हो तुम… इतना प्यारा परिवार है।”
किमाया ने धीरे से कहा—
“हाँ… और शायद कुछ दोस्त भी।”
उधर कॉलेज के मैदान में रोहन का मैच शुरू हो चुका था। यह दस ओवर का छोटा लेकिन रोमांचक मुकाबला था।
रोहन ओपनिंग के लिए मैदान में उतरा। सामने वाली टीम की बॉलिंग काफ़ी तेज़ थी। उसने शुरुआत में संभलकर खेला।
पहली कुछ गेंदों पर उसने सिंगल और डबल लेकर स्ट्राइक घुमाई। फिर चौथे ओवर में उसे एक ढीली गेंद मिली—
धड़ाम! शानदार कवर ड्राइव… गेंद सीधे बाउंड्री के पार।
दर्शकों में बैठे दोस्त चिल्ला उठे—
“शाबाश रोहन!”
धीरे-धीरे उसने लय पकड़ ली। कुल 17 गेंदों में 24 रन बनाए। जब वह आउट हुआ तो टीम का स्कोर स्थिर हो चुका था।
लेकिन असली रोमांच बाद में आया।
फील्डिंग के दौरान विरोधी टीम को जीत के लिए आखिरी दो ओवर में 18 रन चाहिए थे।
सातवें ओवर में रोहन ने मिड-विकेट पर एक शानदार कैच पकड़ा। गेंद हवा में ऊँची गई थी, और उसने दौड़ते हुए उसे पकड़ लिया।
“वाह!” पूरी टीम चिल्ला उठी।
आखिरी ओवर में मैच और रोमांचक हो गया। विरोधी टीम को 6 रन चाहिए थे। बल्लेबाज़ ने गेंद को मिड-ऑन की तरफ खेला और रन लेने दौड़ा।
रोहन बिजली की तरह गेंद पर झपटा।
सीधे विकेटकीपर की ओर तेज़ थ्रो…
रन-आउट!
मैदान में शोर गूँज उठा।
रोहन की टीम एक रन से मैच जीत गई।
उसके दोस्त दौड़कर उसे गले लगाने लगे।
“आज तू हीरो है भाई!”
रोहन हँसते हुए बोला—
“अरे, टीमवर्क है यार।”
उधर “अनंत शांति निवास” में रसोई के पास दोनों बैठी थीं। सामने हरी भाजी की टोकरी रखी थी और दोनों पत्तियाँ साफ कर रही थीं।
शांति देवी बोलीं—
“कल्याणी, बाजार से सब्ज़ियाँ और फल भी मंगाने होंगे। वीकेंड की पिकनिक के लिए ज़रूरी है।”
कल्याणी ने कहा—
“हाँ माँ, मैं लिस्ट बना रही हूँ—नींबू, टमाटर, नारियल और थोड़ा गुड़।”
शांति देवी ने मुस्कुराकर कहा—
“और बच्चों के लिए मिठाई भी।”
फिर थोड़ी देर बाद उन्होंने पूछा—
“तेरी मामी का फोन आया था। अगले महीने उनके बेटे की शादी है।”
कल्याणी बोली—
“अच्छा! तो हमें जरूर जाना चाहिए। बच्चे भी खुश होंगे।”
“हाँ, रिश्ते निभाना जरूरी होता है,” शांति देवी ने धीरे से कहा।
कल्याणी ने सहमति में सिर हिलाया—
“मैं सोच रही हूँ, इस बार हम सबके लिए नए कपड़े भी ले लेते हैं। किमाया को भी अच्छा लगेगा।”
शांति देवी हँस पड़ीं—
“और रोहन को बस क्रिकेट बैट चाहिए होगा।”
दोनों हँसते हुए भाजी साफ करती रहीं।
रसोई में हल्की बातचीत, बाहर कॉफी बागानों की ठंडी हवा, और दूर कहीं से आती पक्षियों की आवाज़—सब मिलकर शाम को शांत और सुकूनभरी बना रहे थे।
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RE: चुपके से लिखी मोहब्बत - by rajeshpawar2749 - 09-03-2026, 10:26 PM



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