09-03-2026, 10:25 PM
नाश्ता समाप्त कर किमाया ने जल्दी से अपना बैग उठाया, माँ के पास आई—
“माँ, मैं निकलती हूँ। आज थोड़ा व्यस्त दिन है।”
कल्याणी ने उसके माथे पर हाथ रखकर कहा—
“ध्यान से जाना, और समय पर खाना खा लेना।”
“जी माँ,” मुस्कुराकर उसने स्कूटर स्टार्ट किया और ऑफिस की ओर निकल गई।
कुछ देर बाद राजेश ने अपनी फाइलें व्यवस्थित कीं, कोट पहना और कार की चाबी उठाई।
“माँ, मैं कोर्ट जा रहा हूँ,” उन्होंने शांति देवी से कहा।
“सफलता मिले बेटा,” शांति देवी ने आशीर्वाद दिया।
राजेश ने कल्याणी की ओर देखते हुए कहा—
“शाम को बागान के हिसाब पर बात करेंगे।”
कल्याणी ने सिर हिलाया—
“मैं फाइल तैयार रखूँगी।”
रोहन अपने कमरे में गया, बैग तैयार किया। एक घंटे बाद वह बाहर आया, हाथ में अपना क्रिकेट बैट लिए।
“माँ, आज आने में थोड़ा लेट होगा। मैच है, खेल के आऊँगा।”
कल्याणी ने हल्की सख्ती और प्यार के साथ कहा—
“ठीक है बेटा, पर ज़्यादा देर मत करना।”
“ओके माँ!” कहकर वह निकल गया।
रसोई में दोनों बर्तन साफ कर रही थीं। पानी की हल्की धारा और स्टील के बर्तनों की खनक के बीच बातचीत शुरू हुई।
शांति देवी बोलीं—
“कल्याणी, वीकेंड के लिए क्या तैयारी करनी है?”
कल्याणी ने सोचते हुए कहा—
“माँ, मैं सोच रही हूँ कि झरने पर जाने के लिए नींबू पानी और इडली बना लेते हैं। बच्चों को पसंद है।”
“अच्छा रहेगा। और मैं प्रसाद के लिए हलवा बना लूँगी,” शांति देवी ने मुस्कराकर कहा।
“माँ, आप ज़्यादा मेहनत मत कीजिए,” कल्याणी ने स्नेह से कहा।
शांति देवी हँस पड़ीं—
“अरे, अब तो यही सब मेरा काम है। तुम सब साथ हो, बस वही मेरी खुशी है।”
कल्याणी ने भावुक होकर कहा—
“आप हैं तभी तो घर में इतनी शांति है।”
दोनों की आँखों में अपनापन झलक रहा था।
“किमाया, अगले महीने हमें नया क्लाइंट मिल रहा है,” बॉस ने कहा।
“जी मैम, मैंने उसकी प्रोफाइल देख ली है,” किमाया ने आत्मविश्वास से उत्तर दिया।
“हमें रिपोर्टिंग सिस्टम अपडेट करना होगा। क्या तुम यह जिम्मेदारी संभाल सकती हो?”
“ज़रूर मैम। मैं एक ड्राफ्ट प्लान तैयार कर लूँगी और टीम के साथ साझा करूँगी।”
बॉस मुस्कुराईं—
“That’s why I trust you.”
किमाया ने विनम्रता से कहा—
“Thank you, ma’am. I’ll give my best.”
लंच टाइम में उसकी दोस्त ने पूछा—
“आज बहुत सीरियस लग रही हो।”
किमाया हँसी—
“बस, अगले महीने का प्रेशर है। पर घर की मॉर्निंग इतनी पॉजिटिव थी कि सब आसान लग रहा है।”
दोस्त ने छेड़ा—
“तुम्हारी माँ के हाथ का डोसा याद आ रहा है।”
“इस वीकेंड घर आ जाओ,” किमाया ने हँसते हुए कहा।
कोर्ट में एक नया ग्राहक उनसे मिलने आया।
“राजेश जी, मेरे प्रॉपर्टी विवाद का केस है,” उसने घबराए स्वर में कहा।
राजेश शांत स्वर में बोले—
“पहले आप आराम से बैठिए और पूरी बात बताइए।”
“मेरे भाई ने बिना बताए जमीन अपने नाम कर ली है।”
राजेश ने दस्तावेज़ देखते हुए कहा—
“हमें पहले रजिस्ट्रेशन पेपर और पुराना एग्रीमेंट देखना होगा। कानून में हर कदम प्रमाण के आधार पर चलता है।”
“क्या केस जीतने की संभावना है?”
“अगर दस्तावेज़ सही हैं, तो न्याय अवश्य मिलेगा। पर सच्चाई और धैर्य दोनों जरूरी हैं,” राजेश ने समझाया।
ग्राहक ने राहत की साँस ली—
“आप पर भरोसा है।”
लंच के समय कल्याणी का फोन आया।
“खाना खा लिया?” उसने प्यार से पूछा।
राजेश मुस्कुराए—
“अभी खाने बैठा हूँ। तुमने खाया?”
“हाँ, और याद है शाम को बागान का हिसाब देखना है।”
“कैसे भूल सकता हूँ? तुम्हारे साथ बैठकर काम करना ही तो सुकून देता है।”
कल्याणी ने हल्के से कहा—
“ज़्यादा काम मत कीजिए, समय पर घर आ जाइए।”
“तुम्हारी आवाज़ सुन ली, अब दिन और अच्छा लगेगा,” राजेश ने स्नेह से कहा।
लेक्चर चल रहा था, पर रोहन का ध्यान कहीं और था।
उसने धीरे से अपने दोस्त से कहा—
“आज ओपनिंग मैं करूँगा। तू नंबर तीन पर आना।”
दोस्त बोला—
“बॉलिंग स्ट्रॉन्ग है सामने वाली टीम की।”
“कोई बात नहीं, पहले दस ओवर संभलकर खेलेंगे, फिर अटैक करेंगे,” रोहन ने रणनीति बनाई।
प्रोफेसर की आवाज़ पृष्ठभूमि में थी, पर रोहन के दिमाग में केवल मैच का मैदान था।
शाम को कल्याणी और शांति देवी कॉफी के बागान में पहुँचीं।
मजदूरों से कल्याणी ने पूछा—
“इस बार की फसल कैसी लग रही है?”
एक मजदूर बोला—
“मैडम, बारिश समय पर हुई है, पैदावार अच्छी होगी।”
शांति देवी ने स्नेह से कहा—
“आप सबकी मेहनत से ही घर चलता है।”
कल्याणी ने नोट्स बनाते हुए कहा—
“कल से सूखे दानों को अलग करना शुरू कीजिए। और हिसाब की फाइल मैं ले जा रही हूँ।”
वापसी में वे अकाउंट की फाइल साथ ले आईं।
सूरज ढल रहा था, पहाड़ियों पर सुनहरी आभा फैल रही थी।
“माँ, मैं निकलती हूँ। आज थोड़ा व्यस्त दिन है।”
कल्याणी ने उसके माथे पर हाथ रखकर कहा—
“ध्यान से जाना, और समय पर खाना खा लेना।”
“जी माँ,” मुस्कुराकर उसने स्कूटर स्टार्ट किया और ऑफिस की ओर निकल गई।
कुछ देर बाद राजेश ने अपनी फाइलें व्यवस्थित कीं, कोट पहना और कार की चाबी उठाई।
“माँ, मैं कोर्ट जा रहा हूँ,” उन्होंने शांति देवी से कहा।
“सफलता मिले बेटा,” शांति देवी ने आशीर्वाद दिया।
राजेश ने कल्याणी की ओर देखते हुए कहा—
“शाम को बागान के हिसाब पर बात करेंगे।”
कल्याणी ने सिर हिलाया—
“मैं फाइल तैयार रखूँगी।”
रोहन अपने कमरे में गया, बैग तैयार किया। एक घंटे बाद वह बाहर आया, हाथ में अपना क्रिकेट बैट लिए।
“माँ, आज आने में थोड़ा लेट होगा। मैच है, खेल के आऊँगा।”
कल्याणी ने हल्की सख्ती और प्यार के साथ कहा—
“ठीक है बेटा, पर ज़्यादा देर मत करना।”
“ओके माँ!” कहकर वह निकल गया।
रसोई में दोनों बर्तन साफ कर रही थीं। पानी की हल्की धारा और स्टील के बर्तनों की खनक के बीच बातचीत शुरू हुई।
शांति देवी बोलीं—
“कल्याणी, वीकेंड के लिए क्या तैयारी करनी है?”
कल्याणी ने सोचते हुए कहा—
“माँ, मैं सोच रही हूँ कि झरने पर जाने के लिए नींबू पानी और इडली बना लेते हैं। बच्चों को पसंद है।”
“अच्छा रहेगा। और मैं प्रसाद के लिए हलवा बना लूँगी,” शांति देवी ने मुस्कराकर कहा।
“माँ, आप ज़्यादा मेहनत मत कीजिए,” कल्याणी ने स्नेह से कहा।
शांति देवी हँस पड़ीं—
“अरे, अब तो यही सब मेरा काम है। तुम सब साथ हो, बस वही मेरी खुशी है।”
कल्याणी ने भावुक होकर कहा—
“आप हैं तभी तो घर में इतनी शांति है।”
दोनों की आँखों में अपनापन झलक रहा था।
“किमाया, अगले महीने हमें नया क्लाइंट मिल रहा है,” बॉस ने कहा।
“जी मैम, मैंने उसकी प्रोफाइल देख ली है,” किमाया ने आत्मविश्वास से उत्तर दिया।
“हमें रिपोर्टिंग सिस्टम अपडेट करना होगा। क्या तुम यह जिम्मेदारी संभाल सकती हो?”
“ज़रूर मैम। मैं एक ड्राफ्ट प्लान तैयार कर लूँगी और टीम के साथ साझा करूँगी।”
बॉस मुस्कुराईं—
“That’s why I trust you.”
किमाया ने विनम्रता से कहा—
“Thank you, ma’am. I’ll give my best.”
लंच टाइम में उसकी दोस्त ने पूछा—
“आज बहुत सीरियस लग रही हो।”
किमाया हँसी—
“बस, अगले महीने का प्रेशर है। पर घर की मॉर्निंग इतनी पॉजिटिव थी कि सब आसान लग रहा है।”
दोस्त ने छेड़ा—
“तुम्हारी माँ के हाथ का डोसा याद आ रहा है।”
“इस वीकेंड घर आ जाओ,” किमाया ने हँसते हुए कहा।
कोर्ट में एक नया ग्राहक उनसे मिलने आया।
“राजेश जी, मेरे प्रॉपर्टी विवाद का केस है,” उसने घबराए स्वर में कहा।
राजेश शांत स्वर में बोले—
“पहले आप आराम से बैठिए और पूरी बात बताइए।”
“मेरे भाई ने बिना बताए जमीन अपने नाम कर ली है।”
राजेश ने दस्तावेज़ देखते हुए कहा—
“हमें पहले रजिस्ट्रेशन पेपर और पुराना एग्रीमेंट देखना होगा। कानून में हर कदम प्रमाण के आधार पर चलता है।”
“क्या केस जीतने की संभावना है?”
“अगर दस्तावेज़ सही हैं, तो न्याय अवश्य मिलेगा। पर सच्चाई और धैर्य दोनों जरूरी हैं,” राजेश ने समझाया।
ग्राहक ने राहत की साँस ली—
“आप पर भरोसा है।”
लंच के समय कल्याणी का फोन आया।
“खाना खा लिया?” उसने प्यार से पूछा।
राजेश मुस्कुराए—
“अभी खाने बैठा हूँ। तुमने खाया?”
“हाँ, और याद है शाम को बागान का हिसाब देखना है।”
“कैसे भूल सकता हूँ? तुम्हारे साथ बैठकर काम करना ही तो सुकून देता है।”
कल्याणी ने हल्के से कहा—
“ज़्यादा काम मत कीजिए, समय पर घर आ जाइए।”
“तुम्हारी आवाज़ सुन ली, अब दिन और अच्छा लगेगा,” राजेश ने स्नेह से कहा।
लेक्चर चल रहा था, पर रोहन का ध्यान कहीं और था।
उसने धीरे से अपने दोस्त से कहा—
“आज ओपनिंग मैं करूँगा। तू नंबर तीन पर आना।”
दोस्त बोला—
“बॉलिंग स्ट्रॉन्ग है सामने वाली टीम की।”
“कोई बात नहीं, पहले दस ओवर संभलकर खेलेंगे, फिर अटैक करेंगे,” रोहन ने रणनीति बनाई।
प्रोफेसर की आवाज़ पृष्ठभूमि में थी, पर रोहन के दिमाग में केवल मैच का मैदान था।
शाम को कल्याणी और शांति देवी कॉफी के बागान में पहुँचीं।
मजदूरों से कल्याणी ने पूछा—
“इस बार की फसल कैसी लग रही है?”
एक मजदूर बोला—
“मैडम, बारिश समय पर हुई है, पैदावार अच्छी होगी।”
शांति देवी ने स्नेह से कहा—
“आप सबकी मेहनत से ही घर चलता है।”
कल्याणी ने नोट्स बनाते हुए कहा—
“कल से सूखे दानों को अलग करना शुरू कीजिए। और हिसाब की फाइल मैं ले जा रही हूँ।”
वापसी में वे अकाउंट की फाइल साथ ले आईं।
सूरज ढल रहा था, पहाड़ियों पर सुनहरी आभा फैल रही थी।


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