09-03-2026, 05:46 PM
भाग 7
दोनों मर्द एक-दूसरे की बीवी के साथ मस्ती कर रहे थे, वो भी एक-दूसरे के सामने। फिर थोड़ी देर बाद सब थक गए और बैठ के बातें करने लगे। अंकिता को काफी नशा हो गया था शायद। वो दीपक के पास बैठ गई, वो बोलने लगी-
अंकिता: तो मेरे टेम्पररी पति, कैसा लगा अपनी टेम्पररी पत्नी के साथ डांस करके?
दीपक: मजा ही आ गया, मेरी टेम्पररी पत्नी।
अंकिता: मजा तो मुझे भी बहुत आया यार।
मुझे लगा कहीं अंकिता नशे में कुछ ऐसा-वैसा न बोल दे। हमारे प्लान के बारे में कहीं इसने अभी बक दिया तो सब गड़बड़ हो जाएगी और सबके सामने मैं शर्मिंदा हो जाऊंगी।
आकाश जीजू: तुम दोनों तो पति-पत्नि के जैसे ही लग रहे थे डांस करते हुए।
दीपक: अगर ये मेरी असली पत्नी होती तो मजा ही आ जाता।
अंकिता: दीपक जीजू, आप भी तो इतने गठीले हो। आप जैसा पति कौन नहीं चाहेगी? मनीषा यार, तुम बहुत लकी हो।
मैं: हां, वो तो हूं मैं। पर आकाश जीजू भी कुछ कम नहीं हैं। लेकिन ये सिर्फ मेरे टेम्पररी पति हैं।
आकाश: थैंक यू डीयर साली जी, मैं तो इतने में ही खुश हूं।
ये सब बातें ऐसे ही हो रही थीं जैसे सब नशे में टल्ली होकर बोल रहे थे। अंकिता दीपक से चिपक रही थी। दीपक भी उसकी तारीफ पे तारीफ कर रहा था। आकाश जीजू भी बीच-बीच में कुछ भी बोल रहे थे। तभी आकाश जीजू ने दीपक से पूछा-
आकाश जीजू: दीपक, तुम कब से अपनी टेम्पररी पत्नी की तारीफ कर रहे हो। कहीं तुम्हारा उससे आगे बढ़ने का इरादा तो नहीं है?
दीपक: मेरी ऐसी किस्मत कहाँ है? पर अंकिता है ही इतनी हॉट कि तारीफ तो बनती है।
आकाश जीजू: अगर अंकिता तुम्हारी बीवी होती तो अभी तुम क्या करते?
दीपक: तो अभी मैं यहाँ नहीं अंदर बेडरूम में होता उसके साथ।
आकाश जीजू: और मनीषा को यहाँ अकेले छोड़ देते।
दीपक: अगर अंकिता मेरी बीवी होती तो मनीषा तुम्हारी बीवी होती ना। उसे तुम संभालते।
आकाश जीजू: ये बात भी सही है। तो बनना है तुम्हें अंकिता का पति?
अंकिता: हाँ बोलो जीजू, जीजू से पति बनोगे मेरे?
दीपक: क्या सच में ऐसा हो सकता है?
आकाश जीजू: हाँ, एक दिन के लिए तो हो ही सकता है। अंकिता तुम्हारी बीवी और मनीषा मेरी।
दीपक: क्यूं मनीषा, तुम क्या बोलती हो?
मैं: अब मैं क्या बोलूं? अगर तुम्हें अंकिता पसंद है और इन दोनों को कुछ दिक्कत नहीं है, तो बन जाओ एक दिन के लिए अंकिता के पति।
अंकिता: मुझे कोई दिक्कत नहीं है।
आकाश जीजू: मुझे भी नहीं है।
दीपक: मनीषा, फिर तो तुम्हें भी एक दिन के लिए आकाश की बीवी बनना पड़ेगा, और पत्नी की तरह उसकी सेवा करनी पड़ेगी।
मैं: सेवा करने में तो कोई हर्ज़ नहीं है, खास करके तुम्हारी खुशी के लिए।
दीपक: लव यू डार्लिंग। तो फिर कैसे करना है बताओ?
आकाश जीजु: कैसे क्या? ये रही अंकिता और वो रहा बेडरूम। ले जाओ अपनी नई नवेली दुल्हन को और पति का फ़र्ज़ पूरा करो।
दीपक: तो तुम भी अपनी दुल्हन को अपने सुहाग कक्ष में ले जाओ। मनीषा, तुम अपने नए दूल्हे का ख्याल रखना।
मैं: जी, ठीक है। मैं पूरे मन से पति-सेवा करूंगी।
अंकिता ने दीपक का हाथ पकड़ा और वो उसे बेडरूम में ले जाने लगी। जाते-जाते उसने मुड़ के देखा और मुझे आंख मार दी। दीपक ने भी मुझे सहमति का इशारा किया। अब वहां मैं और जीजु ही थे। मैंने उन्हें बोला-
मैं: आप इतनी पीते क्यों हो कि फिर संभलती नहीं। अभी क्या हुआ कुछ पता भी है?
अब जीजु एकदम नॉर्मल होकर बोले-
आकाश जीजु: अरे, मैं बिल्कुल होश में हूँ।
मैं तो दंग रह गई कि अभी तो ये नशे में झूम रहे थे और अभी एकदम नॉर्मल कैसे हो गए।
मैं: फिर ये सब क्या था?
आकाश जीजु: वो सब नाटक था, यार। हमारे प्लान का हिस्सा।
मैं: फिर दीपक भी नाटक कर रहा था क्या?
आकाश जीजु: हाँ, ये सारा प्लान हम दोनों ने मिलके बनाया था। अंकिता को शायद सच में चढ़ गई थी, तो वो भी हमसे जुड़ गई।
मैं: ये प्लान बनाया कब?
आकाश जीजु: उसी दिन जिस दिन हमने मेरे घर पे मिलने का प्लान बनाया था। जब मैंने और दीपक ने बात की तो जैसा तुमने कहा था, मैंने बात-बात में उससे पूछ लिया कि क्या वो अंकिता को चाहता है, और उसे ये भी बोल दिया कि मैं भी तुम्हे चाहता हूँ। बस फिर क्या था, दीपक तो आगे बढ़ने को उतावला था। हमने ये प्लान बनाया कि हम दोनों नशे में होने का नाटक करेंगे और एक रात के लिए एक-दूसरे को अपनी-अपनी बीवी का पति बनने का ऑफर देंगे। अगर तुमने या अंकिता ने एतराज किया तो हम नशे में होने का बहाना बना कर माफी मांग लेंगे। और किसी को एतराज नहीं हुआ तो मैं दीपक को उसकी नयी पत्नी के साथ बेडरूम में जाने के लिए कहूंगा।
मैं: वाह जीजु, आप तो बड़े उस्ताद निकले।
आकाश: तुम्हारे साथ के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ।
मैं: पर आपको पता है न कि वो दोनों अभी अंदर क्या कर रहे होंगे? मेरा और आपका उतना आगे जाना शायद संभव न हो।
वैसे मेरी भी जीजु के साथ करने की इच्छा तो थी पर मैं ऐसा जता रही कि मुझे इसमें इतनी दिलचस्पी नहीं है ताकि सब कुछ मेरे कंट्रोल में रहे।
जीजु: हाँ डीयर, मैं तुम्हें मजबूर नहीं करूंगा। जो तुम चाहोगी वही होगा।
मैं: थैंक यू जीजु। वैसे अंकिता तो आसानी से मान गई?
जीजू: हाँ, वो तो कब से यह करना चाहती थी। उसकी तो जैसे एक बहुत बड़ी इच्छा पूरी हो गई।
मैं: और आपकी इच्छा?
जीजू: मेरी इच्छा तो तुम्हारे साथ रहना था, और आज की पूरी रात मैं और तुम साथ होंगे। सुहागरात की रस्म न हो तब भी सुबह तक तुम मेरी पत्नी तो हो।
मैं: आप बहुत दिलदार हैं।
आकाश: वैसे कुछ वादा किया था तुमने।
मैं: कौन सा वादा?
जीजू: अच्छा, अब वो भी याद नहीं?
मैं: नहीं, बताओ ना कौन सा वादा?
जीजू: छोड़ो फिर, इस बात को भूल जाओ।
मैं: अरे, आप तो उदास हो गए। मैं तो मजाक कर रही थी। मुझे सब याद है।
जीजू: सच? तो अब वक्त आ गया ना अपना वादा निभाने का।
मैं: हाँ, पर यहाँ नहीं। बेडरूम में चलो । वहाँ मेरा वादा और आपकी इच्छा दोनों पूरी हो जाएंगी।
जीजू: सच में? तो चलो जल्दी, अब मुझसे इंतज़ार नहीं हो रहा।
क्रमश:
दोनों मर्द एक-दूसरे की बीवी के साथ मस्ती कर रहे थे, वो भी एक-दूसरे के सामने। फिर थोड़ी देर बाद सब थक गए और बैठ के बातें करने लगे। अंकिता को काफी नशा हो गया था शायद। वो दीपक के पास बैठ गई, वो बोलने लगी-
अंकिता: तो मेरे टेम्पररी पति, कैसा लगा अपनी टेम्पररी पत्नी के साथ डांस करके?
दीपक: मजा ही आ गया, मेरी टेम्पररी पत्नी।
अंकिता: मजा तो मुझे भी बहुत आया यार।
मुझे लगा कहीं अंकिता नशे में कुछ ऐसा-वैसा न बोल दे। हमारे प्लान के बारे में कहीं इसने अभी बक दिया तो सब गड़बड़ हो जाएगी और सबके सामने मैं शर्मिंदा हो जाऊंगी।
आकाश जीजू: तुम दोनों तो पति-पत्नि के जैसे ही लग रहे थे डांस करते हुए।
दीपक: अगर ये मेरी असली पत्नी होती तो मजा ही आ जाता।
अंकिता: दीपक जीजू, आप भी तो इतने गठीले हो। आप जैसा पति कौन नहीं चाहेगी? मनीषा यार, तुम बहुत लकी हो।
मैं: हां, वो तो हूं मैं। पर आकाश जीजू भी कुछ कम नहीं हैं। लेकिन ये सिर्फ मेरे टेम्पररी पति हैं।
आकाश: थैंक यू डीयर साली जी, मैं तो इतने में ही खुश हूं।
ये सब बातें ऐसे ही हो रही थीं जैसे सब नशे में टल्ली होकर बोल रहे थे। अंकिता दीपक से चिपक रही थी। दीपक भी उसकी तारीफ पे तारीफ कर रहा था। आकाश जीजू भी बीच-बीच में कुछ भी बोल रहे थे। तभी आकाश जीजू ने दीपक से पूछा-
आकाश जीजू: दीपक, तुम कब से अपनी टेम्पररी पत्नी की तारीफ कर रहे हो। कहीं तुम्हारा उससे आगे बढ़ने का इरादा तो नहीं है?
दीपक: मेरी ऐसी किस्मत कहाँ है? पर अंकिता है ही इतनी हॉट कि तारीफ तो बनती है।
आकाश जीजू: अगर अंकिता तुम्हारी बीवी होती तो अभी तुम क्या करते?
दीपक: तो अभी मैं यहाँ नहीं अंदर बेडरूम में होता उसके साथ।
आकाश जीजू: और मनीषा को यहाँ अकेले छोड़ देते।
दीपक: अगर अंकिता मेरी बीवी होती तो मनीषा तुम्हारी बीवी होती ना। उसे तुम संभालते।
आकाश जीजू: ये बात भी सही है। तो बनना है तुम्हें अंकिता का पति?
अंकिता: हाँ बोलो जीजू, जीजू से पति बनोगे मेरे?
दीपक: क्या सच में ऐसा हो सकता है?
आकाश जीजू: हाँ, एक दिन के लिए तो हो ही सकता है। अंकिता तुम्हारी बीवी और मनीषा मेरी।
दीपक: क्यूं मनीषा, तुम क्या बोलती हो?
मैं: अब मैं क्या बोलूं? अगर तुम्हें अंकिता पसंद है और इन दोनों को कुछ दिक्कत नहीं है, तो बन जाओ एक दिन के लिए अंकिता के पति।
अंकिता: मुझे कोई दिक्कत नहीं है।
आकाश जीजू: मुझे भी नहीं है।
दीपक: मनीषा, फिर तो तुम्हें भी एक दिन के लिए आकाश की बीवी बनना पड़ेगा, और पत्नी की तरह उसकी सेवा करनी पड़ेगी।
मैं: सेवा करने में तो कोई हर्ज़ नहीं है, खास करके तुम्हारी खुशी के लिए।
दीपक: लव यू डार्लिंग। तो फिर कैसे करना है बताओ?
आकाश जीजु: कैसे क्या? ये रही अंकिता और वो रहा बेडरूम। ले जाओ अपनी नई नवेली दुल्हन को और पति का फ़र्ज़ पूरा करो।
दीपक: तो तुम भी अपनी दुल्हन को अपने सुहाग कक्ष में ले जाओ। मनीषा, तुम अपने नए दूल्हे का ख्याल रखना।
मैं: जी, ठीक है। मैं पूरे मन से पति-सेवा करूंगी।
अंकिता ने दीपक का हाथ पकड़ा और वो उसे बेडरूम में ले जाने लगी। जाते-जाते उसने मुड़ के देखा और मुझे आंख मार दी। दीपक ने भी मुझे सहमति का इशारा किया। अब वहां मैं और जीजु ही थे। मैंने उन्हें बोला-
मैं: आप इतनी पीते क्यों हो कि फिर संभलती नहीं। अभी क्या हुआ कुछ पता भी है?
अब जीजु एकदम नॉर्मल होकर बोले-
आकाश जीजु: अरे, मैं बिल्कुल होश में हूँ।
मैं तो दंग रह गई कि अभी तो ये नशे में झूम रहे थे और अभी एकदम नॉर्मल कैसे हो गए।
मैं: फिर ये सब क्या था?
आकाश जीजु: वो सब नाटक था, यार। हमारे प्लान का हिस्सा।
मैं: फिर दीपक भी नाटक कर रहा था क्या?
आकाश जीजु: हाँ, ये सारा प्लान हम दोनों ने मिलके बनाया था। अंकिता को शायद सच में चढ़ गई थी, तो वो भी हमसे जुड़ गई।
मैं: ये प्लान बनाया कब?
आकाश जीजु: उसी दिन जिस दिन हमने मेरे घर पे मिलने का प्लान बनाया था। जब मैंने और दीपक ने बात की तो जैसा तुमने कहा था, मैंने बात-बात में उससे पूछ लिया कि क्या वो अंकिता को चाहता है, और उसे ये भी बोल दिया कि मैं भी तुम्हे चाहता हूँ। बस फिर क्या था, दीपक तो आगे बढ़ने को उतावला था। हमने ये प्लान बनाया कि हम दोनों नशे में होने का नाटक करेंगे और एक रात के लिए एक-दूसरे को अपनी-अपनी बीवी का पति बनने का ऑफर देंगे। अगर तुमने या अंकिता ने एतराज किया तो हम नशे में होने का बहाना बना कर माफी मांग लेंगे। और किसी को एतराज नहीं हुआ तो मैं दीपक को उसकी नयी पत्नी के साथ बेडरूम में जाने के लिए कहूंगा।
मैं: वाह जीजु, आप तो बड़े उस्ताद निकले।
आकाश: तुम्हारे साथ के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ।
मैं: पर आपको पता है न कि वो दोनों अभी अंदर क्या कर रहे होंगे? मेरा और आपका उतना आगे जाना शायद संभव न हो।
वैसे मेरी भी जीजु के साथ करने की इच्छा तो थी पर मैं ऐसा जता रही कि मुझे इसमें इतनी दिलचस्पी नहीं है ताकि सब कुछ मेरे कंट्रोल में रहे।
जीजु: हाँ डीयर, मैं तुम्हें मजबूर नहीं करूंगा। जो तुम चाहोगी वही होगा।
मैं: थैंक यू जीजु। वैसे अंकिता तो आसानी से मान गई?
जीजू: हाँ, वो तो कब से यह करना चाहती थी। उसकी तो जैसे एक बहुत बड़ी इच्छा पूरी हो गई।
मैं: और आपकी इच्छा?
जीजू: मेरी इच्छा तो तुम्हारे साथ रहना था, और आज की पूरी रात मैं और तुम साथ होंगे। सुहागरात की रस्म न हो तब भी सुबह तक तुम मेरी पत्नी तो हो।
मैं: आप बहुत दिलदार हैं।
आकाश: वैसे कुछ वादा किया था तुमने।
मैं: कौन सा वादा?
जीजू: अच्छा, अब वो भी याद नहीं?
मैं: नहीं, बताओ ना कौन सा वादा?
जीजू: छोड़ो फिर, इस बात को भूल जाओ।
मैं: अरे, आप तो उदास हो गए। मैं तो मजाक कर रही थी। मुझे सब याद है।
जीजू: सच? तो अब वक्त आ गया ना अपना वादा निभाने का।
मैं: हाँ, पर यहाँ नहीं। बेडरूम में चलो । वहाँ मेरा वादा और आपकी इच्छा दोनों पूरी हो जाएंगी।
जीजू: सच में? तो चलो जल्दी, अब मुझसे इंतज़ार नहीं हो रहा।
क्रमश:


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