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Incest खेल ससुर बहु का
सुनते ही दोनो खिलखिला के हन्स पड़े। थोड़ी देर पहले जो तनाव पैदा हुआ था वो सारा अब हवा हो गया। हंसते हुए मेनका झुक कर अपने ससुर के होंठ चूमने लगी। राजासाहब ने उसकी कमर कस के पकड़ ली और लगे उसका रस पीने। चूमते हुए मेनका ने अपनी जाँघ पे कुछ गरम सा महसूस किया तो नीचे देखा। उसने पाया कि राजासाहब का लंड खड़ा होकर उसकी जाँघ से रगड़ रहा था। उसने हाथ बढ़ा कर उसे थाम लिया और थोडा रगड़ दिया।


उसके दिमाग़ मे एक ख़याल आया, वो खड़ी हुई और फिर कुर्सी पे राजासाहब के दोनो तरफ अपने घुटने रख एक हाथ से उनके लंड को पकड़ा  और  उस पर बैठने लगी। जब आधा लंड अंदर चला गया तो उसने उसे छोड़ अपने ससुर के कंधों पर बाहें रख उनके सर को हाथों मे थाम लिया और  उन्हे प्यार से चूमने लगी।

राजासाहब ने उसकी कमर पकड़ कर नीचे झुकना शुरू किया  और  उसकी चूत मे अपना पूरा लंड घुसाने लगे। मेनका को थोड़ा दर्द महसूस हुआ, पर साथ ही साथ  मज़ा भी बहुत आ रहा था। थोड़ी ही देर मे लंड जड़ तक चूत मे था। राजासाहब के  हाथों ने उसकी चौड़ी गांड को थाम लिया और उसे प्यार से मसलने लगे। मेनका ने अपनी जीभ उनके मुँह मे डाल दी  और  जम के चूमने लगी। जोश मे वो अपने ससुर से चिपक गयी, "ओह्ह।।", राजासाहब को सीने मे कुछ चुबा। दोनो ने अपने होठ जुड़ा किए तो पाया कि वो हीरो का नेकलेस उनके प्यार मे अड़चन बन रहा था। मेनका हाथ पीछे ले जा कर नेकलेस खोलने लगी,ऐसा करने से उसकी चूचिया और ज़्यादा उभर कर उसके ससुर के चेहरे के सामने चमकने लगी। राजासाहब ने अपना मुँह उन काम कलशो से लगा दिया और लूगे चूसने और चूमने।

"
आ..अनन्नह...",मेनका ने नेकलेस को उतार डेस्क पर रखा, चैन उसने गले मे ही रहने दी  और  अपने हाथों मे अपने ससुर का सर जाकड़ लिया  और  अपनी कमर उचका-उचका कर उन्हे चोदने लगी। राजासाहब के हाथ उसके बालों से होते हुए उसकी  पीठ  और  गांड पे आके फिसलने लगे।


मेनका को इस पोज़िशन मे चुदाई करने मे बहुत मज़ा आ रहा था। इस मे वो पूरे कंट्रोल मे थी। आज तक जब भी वो अपने पति या ससुर से चुदी थी, तो वो उसके उपर रह कर धक्के मारते थे। पर आज उसकी मर्ज़ी थी कि वो कैसे धक्के लगती है। वो जी भरके अपने ससुर के लंड पे कभी तेज़ी से तो कभी हौले-होले तो कभी अपनी गांड घुमा-घुमा  कर, उच्छल रही थी।

राजासाहब के मज़ा का तो ठिकाना ही नही था। मेनका की कसी चूत उनके लंड पे रगड़ खा कर उन्हे जोश से भरे जा रहे थी। दोनो अब अपनी मंज़िल की ओर पहुँच रहे थे। मेनका ने उन्हे अपने आगोश मे और ज़ोर से जाकड़ लिए और अपनी गांड भी तेज़ी से उच्छलने लगी,राजासाहब ने अपने होठ उसकी छाती पे लगा के थोड़ी देर पहले बनाए निशान को और गहरा करना चालू कर दिया,उनकी कमर भी नीचे से हिलने लगी।



मेनका की चूत ने पानी छोड़ दिया और वो अपने ससुर से चिपक गयी। झड़ती हुई उसकी चूत ने राजासाहब के लंड को कस के जाकड़ लिया तो उनके लंड से भी बर्दाश्त नही हुआ और उसने भी अपनी पिचकारी से चूत को नहला दिया।



दोनो थोड़ी देर तक वैसे ही बैठे रहे,"तुम हमे कुछ देने वाली थी?",राजासाहब मेनका के कान मे फुसफुसाए।

"
हा,हमारे रूम मे है। जा कर लाते हैं।", मेनका उतरने लगी तो राजासाहब उसे लिए हुए उठ गये और घूम कर उसे चेर पे बिठा दिया और अपना लंड उसकी चूत से निकाल लिया। मेनका टांगे फैलाए कुर्सी पर बैठी थी, राजासाहब के लंड का पानी उसकी चूत से टपक रहा था।

"थोड़ी देर यही बैठो।", राजासाहब ने सारे कागज़ात उठा कर वापस तिजोरी मे डाल कर शेल्फ मे वापस किताबें लगा दी।

"
हम अभी आते हैं।",
वो स्टडी से बाहर चले गये।




आज के लिए बस यही तक परसों फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ, तब तक के लिए मैत्री की ओर से जय भारत[b] [/b]
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RE: खेल ससुर बहु का - by maitripatel - 07-03-2026, 04:36 PM



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